NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
कोल इंडिया की हड़ताल के समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
कोयला क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश के विरोध में कोल इंडिया की कर्मचारी यूनियनों द्वारा बुलाई गई हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर श्रमिकों ने प्रदर्शन किया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Sep 2019
protest

दिल्ली : कोल इंडिया की कर्मचारी यूनियनों के हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए श्रमिकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मोदी सरकार द्वारा विदेशी निवेश के फैसले को वापस लेने की मांग की गई।

आपको बता दें कि कोयला खनन क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति के सरकार के फैसले के खिलाफ कोल इंडिया लि. और सिंगरेनी कोलियरीज की पांच फेडरेशनों ने 24 सितंबर को हड़ताल बुलाई थी। ये यूनियनें करीब पांच लाख कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

श्रम संगठन कोयला निकासी क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को अपने पूर्ण स्वामित्व में कारोबार की अनुमति देने की नीति का विरोध कर रहे हैं। यूनियनों की मांग है कि सरकार कोयला खनन में एफडीआई की अनुमति के फैसले को वापस ले। कोयला क्षेत्र के श्रम संघों के हड़ताल के सर्मथन में जंतर मंतर पर आयोजित प्रदर्शन का आह्वान आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) ने किया था।
IMG-20190924-WA0005_0.jpg
इस दौरान प्रदर्शन को संबोधित करते हुए एक्टू दिल्ली के अध्यक्ष संतोष रॉय ने कहा, 'राष्ट्रवाद के नाम पर चुन कर आई इस सरकार ने सरकारी कोयले को विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया है। ये सिर्फ देश के संसाधनों के दुरुपयोग का ही मसला नहीं है बल्कि इससे मजदूरों और आम आदमी का हित भी प्रभावित होगा। विदेशी कंपनियां हमारे सस्ते कोयले को विदेशों में महंगे दामों पर बेचने के लिए आज़ाद होंगी। इससे देश की जनता का भी भला नहीं होगा। मोदी सरकार द्वारा देश के खनिज संपदाओं समेत दूसरे संसाधनों की लूट बंद होनी चाहिए।'

उन्होंने आगे कहा कि लाखों सालों तक धरती के गर्भ में तैयार होने वाला कोयला, इस देश की जनता की संपत्ति है, पर अब मोदी सरकार इसे मुनाफाखोरों के हाथ दे रही है। नीति आयोग द्वारा पूर्व में कोल इंडिया लिमिटेड को छोटी कम्पनियों में तोड़ने का प्रस्ताव आया था, पर इसे ट्रेड यूनियनों के दबाव के चलते नही माना गया था। अब जब साम्प्रदायिक उन्माद की फसल काटकर मोदी सरकार दोबारा आई है, तो वो रेलवे, बैंक, बीमा, डिफेंस, कोयला, इत्यादि के निजीकरण और तमाम जन विरोधी फैसलों को जल्द से जल्द लागू करना चाहती है। निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए ये साफ कहा था कि सरकारी कम्पनियों को बेचकर सरकार 1.05 ट्रिलियन रुपयों की उगाही करना चाहती है।

वहीं, एक्टू दिल्ली की सेक्रेटरी श्वेता राज ने कहा, 'सरकार जनता के पैसे को हाउडी मोदी जैसे प्रचार कार्यक्रमों पर खर्च कर रही है। प्रधानमंत्री देश की गिरती अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी, दिनोंदिन आग की तरह देश को जलाते साम्प्रदायिक उन्माद और लिंचिंग पर खामोश हैं, वो देश की खनिज संपदा व जल-जंगल-जमीन को बेचना चाहते हैं। यह सरकार कारॅपोरेट की है और कॉरपोरेट के लिए ही काम कर रही है। यह आम लोगों के की कीमत पर निजी कंपनियों को बहुमूल्य संसाधन बेच रही है। कोल इंडिया और अन्य सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां लाखों लोगों को रोजगार देती हैं, इन कंपनियों के निजीकरण के बाद ये अवसर खो जाएंगे।'

गौरतलब है कि 1972-73 में कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के पश्चात, कोयला उत्पादन 7.9 करोड़ टन से बढ़कर 60 करोड़ टन से भी ज़्यादा हो चुका है। देश मे 92 प्रतिशत से ज़्यादा कोयला उत्पादन सरकारी कंपनियां द्वारा किया जाता है। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) जो कि देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है, मोदी सरकार के निशाने पर लगातार बनी हुई है। पिछले एक दशक में कोयला क्षेत्र की सरकारी कंपनियों ने भारत सरकार को 1.2 लाख करोड़ से ज़्यादा लाभांश व राजस्व प्रदान किया है।
IMG-20190924-WA0006.jpg
इसके बावजूद मोदी सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को निजीकरण और विनाश की राह पर धकेल रही है। विदेशी निवेश और कोल इंडिया को छोटी कंपनियों में बांटने जैसे फैसलों से न सिर्फ लाखों मज़दूर आहत होंगे बल्कि सरकार का राजस्व भी घटेगा। अपने पिछले कार्यकाल में मोदी सरकार ने 'कोल माइंस प्रोविज़न एक्ट, 2015' लाकर निजी कंपनियों को कोयला उत्खनन व बेचने की छूट दे दी थी। इस जन-विरोधी कदम से कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण को जबरदस्त चोट पहुंची।

आपको बता दें कि हड़ताल के कारण एक दिन में 15 लाख टन कोयला उत्पादन का नुकसान होने का अनुमान है। हड़ताल का आयोजन सरकारी क्षेत्र की इन दोनों कोयला कंपनियों में सक्रिय श्रम संघों के पांच महासंघों ने किया है। ये श्रम संगठन इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन (इंटक), हिंद खदान मजदूर फेडरेशन (एमएमएस), इंडियन माइनवर्कर्स फेडरेशन (एटक), आल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन (सीटू) और आल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एआईसीसीटीयू) हैं।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से सम्बद्ध श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) इन संगठनों की हड़ताल से बाहर है। उसका दावा है कि वह इसी मुद्दे पर सोमवार, 23 सितंबर से 27 सितंबर तक पांच दिन तक कोयला क्षेत्र काम बंद हड़ताल पर है। 

Coal workers
Coal India
protest on jantar mantar
Coal India Employees Unions
modi sarkar
RSS
Labor union of india

Related Stories

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

‘(अ)धर्म’ संसद को लेकर गुस्सा, प्रदर्शन, 76 वकीलों ने CJI को लिखी चिट्ठी

दिल्ली: एसएससी जीडी भर्ती 2018 के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन

कोलकाता: बाबरी मस्जिद विध्वंस की 29वीं बरसी पर वाम का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 16 सीटों का हुआ नुक़सान
    एम.ओबैद
    यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान
    11 Mar 2022
    वर्ष 2017 के चुनाव नतीजों की तुलना में इस बार भाजपा को पहले दो चरणों में 18 सीटों का नुकसान हुआ है। पिछली बार उसने 91 सीट हासिल की थीं जबकि इस बार उसे 73 सीटें ही मिल पाई हैं।
  • election results
    न्यूज़क्लिक टीम
    BJP से हार के बाद बढ़ी Akhilesh और Priyanka की चुनौती !
    11 Mar 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में आज Abhisar Sharma चर्चा कर रहे हैं Uttar Pradesh में फिर से BJP की सरकार बनने और साथ ही बात कर रहे हैं अखिलेश यादव और प्रियंका गाँधी वाड्रा की। 2024 के चुनाव…
  • mayawati
    कृष्ण सिंह
    यूपी के नए राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की बहुजन राजनीति का हाशिये पर चले जाना
    11 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक दल के पराजित होने या फिर उसके वोट प्रतिशत में बड़ी गिरावट आने का अर्थ यह नहीं होता है कि हम तुरंत उसकी राजनीतिक मृत्यु की घोषणा कर दें। लेकिन इसके साथ यह प्रश्न भी उतनी ही मज़बूती के…
  • pakistan
    जस्टिन पॉडुर  
    पाकिस्तान किस प्रकार से बलूचिस्तान में शांति के लिए पहले-विकास की राह को तलाश सकता है
    11 Mar 2022
    राष्ट्र को एकजुट रखने के लिए पाकिस्तान की कोशिश के संघर्ष के केंद्र में अपनाई जा रही आतंकवाद विरोधी मॉडल की विफलता है।
  • zelsenky
    एम के भद्रकुमार
    ज़ेलेंस्की ने बाइडेन के रूस पर युद्ध को बकवास बताया
    11 Mar 2022
    वाशिंगटन को जो रणनीतिक हार का सामना करना पड़ा है, वह दुनिया भर में अमेरिकी प्रतिष्ठा को कम करेगा, उसके ट्रान्साटलांटिक-नेतृत्व को कमजोर करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License