NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोलोजियम चिंतित है
न्यायमूर्ति गोगोई और न्यायमूर्ति लोकुर ने सीजेआई से सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पूर्ण न्यायालय आयोजित करने का आग्रह किया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Apr 2018
Translated by मुकुंद झा
Justice Gogoi and Justice Lokur

रविवार को सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को दो-वाक्य का पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें संस्थागत मुद्दों और सुप्रीम कोर्ट के भविष्य पर पूरी अदालत बुलाकर चर्चा की माँग की गई। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ, दोनों न्यायाधीश कोलोजियम का हिस्सा हैं। कोलोजियम में विवाद का पता  है और कई अवसरों पर इसकी सूचना मिली है। वर्तमान उदाहरण में, पत्र देने के बाद, मामला सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की पारंपरिक सोमवार की बैठक में लाया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने इस पर एक गैर-निर्णायक प्रतिक्रिया दी।

इस साल जनवरी में अभूतपूर्व तरीके से न्यायाधीशों के प्रेस कॉन्फ्रेंस की वजह से पहली बार कोलोजियम में विवाद के बारे में पता चला। कॉन्फ्रेंस में  'रोस्टर के मास्टर' के रूप में सीजेआई की भूमिका के मुद्दों को सामने लाया और जिन न्यायाधीशों ने भाग लिया, उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासन में शामिल परंपरागत प्रक्रियाओं पर ध्यान देने के लिए आग्रह किया। मार्च में, न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने सीजेआई को एक पत्र लिखा, न्यायिक प्रशासन में कार्यपालिका के हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया। पत्र का मुख्य मुद्दा कर्नाटक उच्च न्यायालय के सीजे को कानून मंत्री का लिखा गया पात्र था जो एक न्यायाधीश की जाँच के लिए लिखा गया था जिसकी उन्नति सरकार द्वारा अनुमोदित की गई थी। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर द्वारा उठाया गया मुद्दा यह था कि कार्यकारी पुनर्विचार के लिए नाम वापस कर सकता था। इसके बजाए, सरकार ने सिफारिश स्वीकार करने का फैसला किया और फिर जाँच के लिए बुलाया। जस्टिस जोसेफ ने सीजेआई को अगले महीने भी लिखा, न्यायिक नियुक्तियों पर सरकार की निष्क्रियता पर एक सुओ मोटो सुनवाई की माँग की। न्यायमूर्ति चेलेश्वर की तरह, उन्होंने न्यायपालिका के प्रशासनिक मामलों में दखल देने के लिए कार्यपालिका पर आरोप लगाया।

न्यायमूर्ति जोसेफ के पत्र से कुछ दिन पहले वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की माँग करने से पहले याचिका दायर की थी कि सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में सीजेआई के फैसले को एक कोलोजियम द्वारा लिया जाए। लखनऊ स्थित वकील ने इसी तरह की राहत माँगने के लिए एक और याचिका दायर की थी। याचिकाओं ने सर्वोच्च न्यायालय से मिश्रित प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने भूषण की याचिका को सुनने से इंकार कर दिया - यह बताते हुए कि वह 24 घंटे के भीतर अपने आदेश को एक और बार पलटना नहीं चाहते थे। दूसरी याचिका को सीजेआई की अध्यक्षता में एक खंडपीठ ने खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि मुख्य न्यायाधीश द्वारा संचालित शक्ति पर अविश्वास की कोई धारणा नहीं हो सकती है।

न्यायमूर्ति गोगोई और न्यायमूर्ति लोकुर के पत्र से पहले सबसे हाल ही में महभियोग प्रस्ताव का खारिज होना है। यह नोटिस 64 राज्यसभा सांसदों ने राज्य सभा के अध्यक्ष वेंकैया नायडू को प्रस्तुत किया था। हालांकि, उपराष्ट्रपति नायडू ने मूलतः अर्थ विज्ञान (शब्द के प्रयोग) पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनके आदेश में कहा गया है कि छेड़छाड़ के संबंध में संवैधानिक प्रावधान के  आधार को 'गलत व्यवहार' या 'अक्षमता' के साबित होने पर ही महभियोग लागू होता है | इस आधार पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था, क्योंकि दुर्व्यवहार 'सिद्ध' नहीं था। इसके अलावा उठाए गए कुछ आधार विशुद्ध रूप से प्रशासनिक मामले थे। यह आश्चर्यचकित होना चाहिए क्योंकि असंतुष्ट न्यायाधीशों में से दो अपने प्रशासनिक मामलों में दखल देने के कार्यकारी पर आरोप लगा रहे हैं । अपील के संबंध में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर का मानना ​​था कि महाभियोग सर्वोच्च न्यायालय में मुद्दों का समाधान नहीं है। हालांकि, कांग्रेस सांसदों ने नायडू के नोटिस को अस्वीकार करने के बारे में सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला किया है |

फैज़ान मुस्तफ़ा, उप-कुलपति, NALSAR कानून विश्वविद्यालय, हैदराबाद, ने इस संबंध में कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए एक संस्था के रूप में अपनी निष्पक्षता का प्रदर्शन करने का अवसर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब न्यायिक कार्य अनुच्छेद 12 में निहित 'राज्य' के दायरे में नहीं आते हैं, तो प्रशासनिक कार्यों को विशेष रूप से अनुच्छेद 14 के तहत मौलिक अधिकारों के तहत लाया जाना चाहिए। हालांकि, वर्तमान उलझनों के खत्म होने की संभावना नहीं है। इस साल अक्टूबर से न्यायमूर्ति रंजन गोगोई अगले सीजेआई बनेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह परिदृश्य कैसा होगा। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा है कि अगर न्यायमूर्ति गोगोई को नकारा जाता है, तो यह इस साल की शुरुआत में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान न्यायाधीशों द्वारा उठाए गए डर की पुष्टि करेगा।

जनवरी में न्यायाधीशों की संवाददाता सम्मेलन किया था |

Justice Gogoi
Justice Lokur
Dipak Misra
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • brooklyn
    एपी
    ब्रुकलिन में हुई गोलीबारी से जुड़ी वैन मिली : सूत्र
    13 Apr 2022
    गौरतलब है कि गैस मास्क पहने एक बंदूकधारी ने मंगलवार को ब्रुकलिन में एक सबवे ट्रेन में धुआं छोड़ने के बाद कम से कम 10 लोगों को गोली मार दी थी। पुलिस हमलावर और किराये की एक वैन की तलाश में शहर का चप्पा…
  • non veg
    अजय कुमार
    क्या सच में हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ है मांसाहार?
    13 Apr 2022
    इतिहास कहता है कि इंसानों के भोजन की शुरुआत मांसाहार से हुई। किसी भी दौर का कोई भी ऐसा होमो सेपियंस नही है, जिसने बिना मांस के खुद को जीवित रखा हो। जब इंसानों ने अनाज, सब्जी और फलों को अपने खाने में…
  • चमन लाल
    'द इम्मोर्टल': भगत सिंह के जीवन और रूढ़ियों से परे उनके विचारों को सामने लाती कला
    13 Apr 2022
    कई कलाकृतियों में भगत सिंह को एक घिसे-पिटे रूप में पेश किया जाता रहा है। लेकिन, एक नयी पेंटिंग इस मशहूर क्रांतिकारी के कई दुर्लभ पहलुओं पर अनूठी रोशनी डालती है।
  • एम.के. भद्रकुमार
    रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं
    13 Apr 2022
    यह दोष रेखाएं, कज़ाकिस्तान से म्यांमार तक, सोलोमन द्वीप से कुरील द्वीप समूह तक, उत्तर कोरिया से कंबोडिया तक, चीन से भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान तक नज़र आ रही हैं।
  • ज़ाहिद खान
    बलराज साहनी: 'एक अपरिभाषित किस्म के कम्युनिस्ट'
    13 Apr 2022
    ‘‘अगर भारत में कोई ऐसा कलाकार हुआ है, जो ‘जन कलाकार’ का ख़िताब का हक़दार है, तो वह बलराज साहनी ही हैं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी के बेहतरीन साल, भारतीय रंगमंच तथा सिनेमा को घनघोर व्यापारिकता के दमघोंटू…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License