NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कर्नाटक के उत्तरा कन्नड़ में सांप्रदायिक हिंसा क्यों हुई?
आने वाले मई 2018 के महीने में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव हैं, और भाजपा नेताओं ने शायद अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हाशिल करने के लिए राज्य में साम्प्रदायिक तनावपूर्ण स्थिति को बढ़ा दिया है.
पृथ्वीराज रूपावत
20 Dec 2017
Translated by महेश कुमार
karnataka

कर्नाटक के उत्तरा कन्नड़ जिले के होनवानावार शहर में परेश मेस्ता की रहस्यमय मौत की पृष्ठभूमि में, हिंदुत्व संगठनों के सदस्यों ने जिले में सांप्रदायिक हिंसा को जिन्दा रखा हुआ है. मेस्टा की मौत के इर्द-गिर्द झूठ और अफवाहों का बाज़ार गर्म और यह फैलाया गया कि उनकी मृत्यु काफी क्रूरता के साथ की गयी, लेकिन जांच करने के बाद इस कथन में कोई सत्य नहीं पाया गया जिसकी वजह से हिंसा के वातावरण में इजाफा हो रहा था. आने वाली मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के चुनाव होने वाले हैं, और राज्य में बीजेपी नेताओं ने तनावपूर्ण स्थिति को बढ़ा दिया है, वह भी अपने तुच्छ राजनीतिक उद्देश्यों के लिए. यद्दपि स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश जा रही है, लेकिन  मेस्टा को 'हिंदू टाइगर' के रूप में उल्लेखित करते हुए, और उन्हें 'हिंदू शहीद' बताते हुए उत्तर कन्नड़ के गांवों में विभिन्न समूहों द्वारा पोस्टर लगाए जा रहे हैं.

यह सब 1 दिसंबर को होन्नावर के बंदरगाह शहर से शुरू हुआ था. ईद-उल-मिलाद के अवसर पर, कुछ मुस्लिम युवाओं ने शहर में चंदवार सर्कल पर एक हरा झंडा फहराया दिया. जिसके बाद कई हिंदू युवकों ने उस जगह पर पहुंच कर भगवा ध्वज स्थापित किया जिसकी वजह से दो समूहों के बीच संघर्ष हुआ और कम से कम पांच व्यक्ति घायल हो गए. 6 दिसंबर को, शहर में दुर्घटना के दौरान सांप्रदायिक हिंसा की एक और घटना देखी गई जिसमें परेश मेस्ता कथित तौर शामिल था. मेस्ता तब ही से गायब हो गया और उसका मृत शरीर शहर की शेट्टी केरे झील में 8 दिसंबर को तैरता पाया गया. मेस्टा की मौत के बारे में सभी तरह की अफवाह सोशल मीडिया के विभिन्न समूहों में घूमने लगीं और राज्य के बीजेपी नेता इसे अफवाह को फैलाने में सबसे आगे थे. मेस्टा के शरीर के साथ किसी भी क्रूरता बरतने की अफवाहों को प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इनकार किया है, हालांकि, क्रूरता की अफवाह के सहारे हिंदुत्व संगठनों ने जिले में सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दिया. मुस्लिम समुदाय भय के वातावरण में जी रहे हैं, अपने ही घरों में वे खुद को ताला मार कर रहते हैं. जिले में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए, कर्नाटक पुलिस ने दंगों में भाग लेने के लिए हिंदुत्व समूहों के कथित रूप से करीब 160 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. हाल में हुए दंगों में कम से कम 50 लोग घायल हो गए और मुसलमानों की संपत्तियों के साथ तोड़-फोड़ की गयी.

न्यूजक्लिक से बात करते हुए, नागरिक अधिकार कार्यकर्ता एच.एस. अनुपमा, जो जलजा में जनरल और मातृत्व क्लिनिक, होनवाना में डॉक्टर है ने बताया कि हिंसा के कारण मुस्लिम समुदायों के बीच परेशानी का माहौल बन गया है."पिछले दस दिनों से, मेरे मुस्लिम रोगियों ने मेरे क्लिनिक का दौरा तक नहीं किया है. यहाँ आने के बजाय, मेरे कुछ रोगियों ने फोन के माध्यम से मुझसे संपर्क किया है और बताया है कि उनके घरों पर पत्थरों से हमला हो रहा हैं". उन्होंने कहा, "कम से कम पिछले दो दशकों में, हालांकि, राज्य के अन्य हिस्सों में ऐसी स्थिति देखी गयी है लेकिन उत्तर कन्नड़ में आज तक ऐसी कोई सांप्रदायिक हिंसा नहीं देखी गई थी,."

राज्य में भाजपा सांसदों, अनंत कुमार हेगड़े और शोभा करंदलाज ने सांप्रदायिक तनाव के बावजूद नफरत भरे बयान  दिए हैं. शोभा करंडलाजे ने कहा कि मेस्टा भाजपा कार्यकर्ता था और मेस्टा की मौत के लिए जिम्मेदार होने के लिए "जिहादियों" पर आरोप लगाया, हालांकि, यह पता चला है कि मेस्ता के पिता ने अपने बेटे की किसी भी पार्टी की संबद्धता से इनकार कर दिया. दूसरी ओर, हेगड़े ने 19 दिसंबर को दंगों के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग को लेकर पहले 'जेल भरो' का आह्वान किया था. गिरफ्तार लोगों में से जब कुछ लोग 15 दिसंबर को जेल से छूटे तो, हेगड़े ने एक फेसबुक पोस्ट लिखी जिसमें उन्होंने अधिक हिंसा की धमकी दी. उसने कहा कि, "मुख्यमंत्री को एक बड़े मारिकम्बा होब्बा के लिए तैयार हो जाना चाहिए", (मारिकम्बा हाब्बैस एक वार्षिक कार्यक्रम है जहां जानवरों का मंदिर के पास बलिदान किया जाता है).

कर्नाटक में सांप्रदायिक हिंसा का संक्षिप्त इतिहास

यह सोचने की बात है कि राज्य में धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए जाना जाने वाला क्षेत्र कैसे सांप्रदायिक राजनीति का केंद्र बन गया? गौरी लंकेष पत्रीके के लंबे समय से रहे सहयोगी शिवसुंदर ने कर्नाटक राज्य में सांप्रदायिक हिंसा के इतिहास का पता लगाया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ परिवार के योजनाबद्ध प्रयास के बाद, उत्तरा कन्नड़ जिला को धीरे-धीरे साम्रदायिक वातावरण में बदल दिया गया.

1985 में कोलार में बीजेपी और आरएसएस द्वारा बड़े पैमाने पर गणेश उत्सव मनाने के निर्णय के बाद जनता में सांप्रदायिक तनाव देखा गया; 1990 में कोलार के ईद-उल-मिलाद समारोह की तैयारी के दौरान दंगा हो गया. आरएसएस के साथ भाजपा ने घर-घर अभियान चला कर कोलार में ईद के जुलूस का विरोध करने के लिए स्थानीय लोगों को इकट्ठा किया.

भाजपा और आरएसएस समर्थकों ने 10 नवंबर 1989 को अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखी थी. इसके परिणामस्वरूप अर्शिकेरे, हुबली और धरवाड़ में दंगे हुए. 1990 में भाजपा की रथ यात्रा जहाँ से भी गुजारी वहां सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ; बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद यह तनाव 1992 तक जारी रहा.

1994 में, उर्दू समाचार चैनल के इर्द-गिर्द एक विवाद खडा हो गया. कन्नड़ पैरा संघ (कन्नड़ संगठन) ने राज्य में हिंदू कट्टरपंथी समूहों के साथ हाथ मिला लिया और इस पहल का विरोध किया. इसने फिर से राज्य में सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न किया.

शिवसुंदर ने कहा कि 2004 के बाद से भाजपा मजबूत हो गई है और आरएसएस के सहयोग से राज्य में ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है. बैंगलोर में वैकल्पिक कानून फोरम (ए.एल.एफ.) द्वारा एकत्रित राज्य में सांप्रदायिक हिंसा के आंकड़े (डेटाबेस) के अनुसार, त्योहारों और सार्वजनिक समारोह की जगहों पर सांप्रदायिक हिंसा मुख्य रूप से देखने को मिली हैं. 2008 में, येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के तहत चौबीस गिरजाघरों को तोड़ दिया गया था.

शिवसुंदर का कहना है कि  "2017 में भाजपा ने अपने विकास के एजेंडा को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के एजेंडे में तब्दील कर दिया है. दिसंबर 2017 में बाबा बुंदांगिरी मंदिर पर हुए हालिया हमले से यह साबित होता है."

शिवसुंदर ने यह भी बताया कि बीजेपी और आरएसएस ने हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में सांप्रदायिकता को फैलाने के लिए कड़ी मेहनत की है लेकिन अभी तक वे असफल रहे हैं. इस क्षेत्र की सामजस्यपूर्ण प्रकृति ने क्षेत्र में सांप्रदायिक वातावरण को फैलाने के प्रयासों को गंभीर चुनौती पेश की है; जब यहाँ बात नहीं बनी तो इसके बाद, उन्होंने मुंबई कर्नाटक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है. दक्षिण कन्नड़ भी उन क्षेत्रों में से एक है जो अब भाजपा और आरएसएस के सांप्रदायिक एजेंडे के लिए सबसे नाजुक लक्ष्य पर हैं.

karnataka
Paresh mesta
communal violence
BJP
Hinduvta
CBI

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • NAND KISHOR GURJER
    रवि शंकर दुबे
    चुनाव आते ही बीजेपी वालों को लोगों के खाने से क्या दिक्कत हो जाती है?
    28 Dec 2021
    ग़ाज़ियाबाद के लोनी से विधायक नंदकिशोर गुर्जर का तानाशाही रवैया एक बार फिर देखने को मिला, जब उन्होंने अपने इलाके की सभी मीट की दुकानें बंद करवा दीं।
  • Azadi Ka Amrit Mahotsav
    डॉ. अमिताभ शुक्ल
    विकास की वर्तमान स्थिति, स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव और आम आदमी की पीड़ा
    28 Dec 2021
    आय की असमानता, भ्रष्टाचार, भीषण ग़रीबी, भुखमरी, कुपोषण के मामले में निरंतर वृद्धि हो रही है ऐसे में दुर्दशा की स्थिति में पहुंचे करोड़ों बदक़िस्मत लोगों के लिए स्वतंत्रता और आज़ादी के अमृत महोत्सव के…
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : नागरिक समाज ने उठाई  ‘मॉबलिंचिंग विरोधी क़ानून’ की नियमावली जल्द बनाने की मांग
    28 Dec 2021
    26 दिसंबर को रांची के डोरंडा के रिसालदार बाबा सभागार में सर्वधर्म संगठनों, नागरिक समाज, एआईपीएफ़ और अवामी इंसाफ़ मंच समेत कई सामाजिक संगठनों ने ‘मॉबलिंचिंग क़ानून और हमारा नज़रिया’ विषय पर नागरिक विमर्श-…
  • west up
    असद शेख़
    विधानसभा चुनाव 2022: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता के अहम मुद्दे
    28 Dec 2021
    7 करोड़ की आबादी के आंकड़े को पार कर चुका उत्तर प्रदेश का ये पश्चिमी क्षेत्र देश, राज्य की राजनीति से हट कर अपने अलग मुद्दों और समस्याओं को समझता और जानता है जिसमें महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों…
  • Doctors’ Protest
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर पुलिस का बल प्रयोग, नाराज़ डॉक्टरों ने काम बंद का किया ऐलान
    28 Dec 2021
    फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बर्बरता का दावा करते हुए इसे चिकित्सा बिरादरी के इतिहास में काला दिन कहा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License