NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कर्नाटक में मोदी: नदी जल, एमएसपी और प्रशादम
राज्य में होने वाले चुनाव के दौरान गहरे कृषि संकट को झेलने के लिए बीजेपी को विरोध का समाना करना पड़ रहा है, हालांकि वह राज्य की सत्ता में नहीं है।
सुबोध वर्मा
01 Mar 2018
Translated by महेश कुमार
karnataka

27 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के देवान्गेरे में किसानों की एक रैली को संबोधित किया। इस अवसर का इस्तेमाल भाजपा नेता बी.एस.यदयुयुरप्पा के 75 वें जन्मदिवस को चिह्नित करने के लिए भी किया गया था। दरअसल, यह कार्यक्रम कर्नाटक में भाजपा द्वारा तैयार की जा रही उस चुनाव रणनीति का एक और हिस्सा था जिसे जीतने के लिए वह हताश है, यह चुनाव अप्रैल-मई में नई विधानसभा का चुनाव करेगा। पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, इस बार भी पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं।

कर्नाटक के किसानों के बीच मोदी एक हरे रंग की ओढ़नी पहने हुए थे जोकि किसानों की लोकप्रिय है। रैली को आधिकारिक तौर पर 'रायथा बंधु येदियुरप्पा' या 'किसानों के मित्र येदियुरप्पा' को बधाई देने के लिए आयिजित किया गया था। और मोदी का भाषण किसानों के बारे में था। जबकि अमित शाह तटीय कर्नाटक में सांप्रदायिक प्रचार फैला रहे है, मोदी ने भाजपा की रणनीति का दूसरा पहलु का खुलाशा किया – जिसका मकसद किसानों को लुभाना है।

किसानों को लुभाने के लिए यह हताशा क्यों? किसी अन्य राज्य की तरह, कर्नाटक में भी लगभग 56 प्रतिशत लोग मुख्य रूप से जीवित रहने के लिए कृषि पर निर्भर हैं। इसलिए, भाजपा के लिए कोशिश करना और उन्हें जीतने की हताशा स्वाभाविक है। लेकिन इसमें और भी बहुत कुछ है जिस पर नज़र डालने की जरूरत है।

पिछले 16 सालों में कर्नाटक में 13 साल का सूखा पड़ा है। इनमें से कुछ गंभीर सूखे 2011-12 से 2013-14 और 2015-16 में पड़े जिसकी वजह से 70 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तालुक  प्रभावित हुए जबकि अन्य वर्षों में 2008-09 और 2009-10 में 50 प्रतिशत तालुक प्रभावित हुए जिसका असर थोडा कम था। सूखे के लिए सदाबहार राज्य में सूखे ने खेती की रीढ़ को ही तोड़ दिया है, क्योंकि खासकर कर्नाटक में खेती बारिश पर निर्भर है।

यह बहुत आश्चर्यचकित है कि राजस्थान के बाद कर्नाटक सबसे सुखा राज्य है। राज्य के सकल खेती क्षेत्र का 58 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिना सिंचाई के है, जो कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की दया पर निर्भर है। आश्चर्य की बात यह है कि राज्य में किसानों को बहुत बुरी तरह से मार पडी है, और वे विभिन्न मुद्दों पर वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं। राज्य में 2013-2017 और 2017 के बीच राज्य में 3515 किसानों की आत्महत्याएं हुईं, जिनमें से 2525 किसान सीधे सूखे और फसल की विफलता की वजह से आत्महत्या की जैसा कि राज्य कृषि विभाग द्वारा बताया  गया है।

इन गंभीर परिस्थितियों ने उत्तरी कर्नाटक में गोवा के साथ महादै/मंडवी नदी के जल को साझा करने के मुद्दे पर किसानों का आंदोलन भी हुआ है। उत्तर कर्नाटक में किसानों के एक समूह ने 900 दिन तक धरना किया और माहादेयी नदी से जादा पानी की मांग की।

कोई भी यह सोच सकता है कि यह स्थिति भाजपा को आगे बढ़ने और किसानों के समर्थन को हासिल करने के लिए उपजाऊ आधार देगी। लेकिन यह भाजपा के लिए मुश्किल हो रहा है इसलिए यहाँ मोदी की रैली की गयी।

हुआ क्या कि पिछले साल दिसंबर में येदियुरप्पा ने दावा किया था कि गोवा के भाजपा के मुख्यमंत्री पर्रीकर ने आश्वासन दिया है कि वह कर्नाटक को नदी का आवश्यक पानी दे देंगे। किसानों को एक आशा दिखाई दे रही थी और उन्होंने धरने को बेंगलुरु में भाजपा कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया। यद्यपि, येदियुरप्पा का दावा गोवा सरकार के रूप में शून्य आया। और उन्होंने ऐसे किसी भी सौदे से इनकार कर दिया। धरने पर बैठे किसानों ने येदियुरप्पा को अपना शत्रु मान लिया और उन्होंने भाजपा को हराने की कसम खाई।

यही कारण है कि मोदी एक हरे रंग लबादा पहने हुए थे और अपने भाषण में किसानों की आय को दोहरी करने के बारे में बात कर रहे थे, उन्हें फसल बीमा और न्यूनतम समर्थन कीमतों में वृद्धि के बारे में बताया गया। हालांकि, इन वादों से किसानों को बहलाने में वे असफल रहे हैं। जैसा कि हर कोई जानता है, एमएसपी + 50 प्रतिशत भाजपा का वादा केंद्र सरकार द्वारा हाथ की सफाई में बदल गया है। जिसने कि एमएसपी की गणना के लिए कम मूल्य अनुमान लगाया है, इस प्रकार एमएसपी में कोई भी वास्तविक वृद्धि नहीं हुई हैं। फसल बीमा भी देरी, उच्च प्रीमियम और गैर-कवरेज से विफल हो गया है, जिसमें बीमा कंपनियों को ही बड़ा लाभ होता है किसानों को नहीं।

इस बीच मोदी सरकार के पिछले साढ़े तीन साल का रिकॉर्ड देश भर में किसानों की तंगी से निपटने में निराशाजनक रहा है। जबकि किसान राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और एक दर्जन से अधिक राज्यों में केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। कर्ज़ माफ़ी और एमएसपी + 50 प्रतिशत के लिए किसानों की मांगों को अस्वीकार कर दिया गया है, गुजरात में हाल के चुनावों में किसानों ने भ्य्जापा के विरुद्ध अपने मतों के जरिए  असंतोष दर्शाया है।

कर्नाटक में चुनाव होने से अभी कुछ समय बाकी है। भाजपा को हरा लबादा पहनने से आगे जा कर और बहुत कुछ करना होगा और जो वादा किया उसे निभाना होगा। इसका दिवालिएपन "मुस्तिय घनया अभियान" (मुट्ठीभर चावल अभियान) से दिखाई देता है, जो मोदी की रैली के बाद घोषित हुआ। इस अभियान में भाजपा कार्यकर्ता सभी किसानों के घरों से चावल की मुट्ठी इकट्ठा करेंगे और ग्राम सभाओं में वितरित होने के लिए प्रसादम (देवताओं और भक्तों को भेंट) करने के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे। यह देवताओं का इस्तेमाल कर वास्तविक दुनिया से दूर वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए एक शर्मनाक कोशिश है, लेकिन यह मुश्किल है कि किसान इस मार्ग पर चल भाजपा को वोट देंगे।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018
बीजेपी
कांग्रेस

Related Stories

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

असमः नागरिकता छीन जाने के डर लोग कर रहे आत्महत्या, एनआरसी की सूची 30 जुलाई तक होगी जारी

एमरजेंसी काल: लामबंदी की जगह हथियार डाल दिये आरएसएस ने

अहमदाबाद के एक बैंक और अमित शाह का दिलचस्प मामला

आरएसएस के लिए यह "सत्य का दर्पण” नहीं हो सकता है

उत्तरपूर्व में हिंदुत्वा का दोगुला खेल

अशोक धावले : मोदी सरकार आज़ाद भारत के इतिहास में सबसे किसान विरोधी सरकार है


बाकी खबरें

  • channi sidhu
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: ‘अनिवार्य’ वैक्सीन से सिद्धू-चन्नी के ‘विकल्प’ तक…
    23 Jan 2022
    देश के 5 राज्यों में चुनावों का मौसम है, इसलिए खबरें भी इन्हीं राज्यों से अधिक आ रही हैं। ऐसी तमाम खबरें जो प्रमुखता से सामने नहीं आ पातीं  “खबरों के आगे-पीछे” नाम के इस लेख में उन्हीं पर चर्चा होगी।
  • Marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं
    23 Jan 2022
    भारतीय कानून की नज़र में मैरिटल रेप कोई अपराध नहीं है। यानी विवाह के बाद औरत सिर्फ पुरुष की संपत्ति के रूप में ही देखी जाती है, उसकी सहमति- असहमति कोई मायने नहीं रखती।
  • Hum Bharat Ke Log
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    महज़ मतदाता रह गए हैं हम भारत के लोग
    23 Jan 2022
    लोगों के दिमाग में लोकतंत्र और गणतंत्र का यही अर्थ समा पाया है कि एक समय के अंतराल पर राजा का चयन वोटों से होना चाहिए और उन्हें अपना वोट देने की कुछ क़ीमत मिलनी चाहिए।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    नये चुनाव-नियमों से भाजपा फायदे में और प्रियंका के बयान से विवाद
    22 Jan 2022
    कोरोना दौर में चुनाव के नये नियमों से क्या सत्ताधारी पार्टी-भाजपा को फ़ायदा हो रहा है? कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने प्रशांत किशोर पर जो बयान दिया; उससे कांग्रेस का वैचारिक-राजनीतिक दिवालियापन…
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: यूपी की योगी सरकार का फ़ैक्ट चेक, क्या हैं दावे, क्या है सच्चाई
    22 Jan 2022
    एनसीआरबी की रिपोर्ट है कि 2019 की अपेक्षा 2020 में ‘फ़ेक न्यूज़’ के मामलों में 214 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फ़ेक न्यूज़ के जरिए एक युद्ध सा छेड़ दिया गया है, जिसके चलते हम सच्चाई से कोसो दूर होते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License