NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कर्नाटक में संघ की साम्प्रदायिक रणनीति
“मोदी कालबुर्गी और गौरी लंकेश के मामले में चुप क्यों है”?
योगेश एस.
11 May 2018
Translated by महेश कुमार
lankesh

कर्णाटक के वरिष्ट राजनेता ए. के. सुबैया आम जनता से अपील की कि वे प्रधानमंत्री मोदी के  बयानों के प्रति बेहद जागरूक रहें। वे एक संविधान बचाओ सभा के समापन समारोह में बोर रहे थे ।

गौरी लंकेश और एम एम कालबुर्गी कलबर्गि की हत्याओं पर चुप साधने के लिए सुब्बाया ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पीएम लताड़ लगाई।

मोदी, जो चुनाव अभियान के लिए कर्नाटक की यात्रा कर रहे हैं, राज्य में बीजेपी के 24 हिंदू कार्यकर्ताओं की मौत के समबन्ध में आम जनता को उकसा रहे थे । बीजेपी द्वारा इस रणनीति से कुछ हिंदू सहानुभूति मतों को जीतने के प्रयास के रूप में माना जा रहा है।

सुब्बाया से पूछा, "ये 24 हिंदू कौन हैं जिनके बारे में  प्रधान मंत्री दुखी हैं?" मोदी और उनकी पार्टी हिंदुओं के बारे में परेशान हैं जो हिंदुत्व के समर्थक हैं और इसकी सांप्रदायिक राजनीति के बारे में लेकिन न कि दूसरों के बारे में।

डॉ पी. लक्ष्मीनारायण, पूर्व पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के अध्यक्ष और वर्तमान में सीपीआई (एमएल) के एक सदस्य ने कहा, "ऐसा लगता है कि राज्य में बीजेपी ने हिंदूओं की ऊँची जातियों को छोड़ दिया है (...) दक्षिणी कन्नड़ क्षेत्र में आरएसएस का  गढ़ है। इस क्षेत्र में ऊंची जाति और पिछड़ी जाति के हिंदुओं को सांप्रदायिक बनाना बहुत आसान रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में मुस्लिम राज्य में अन्य क्षेत्रों के विपरीत आर्थिक रूप से शक्तिशाली वर्ग से आते हैं। इसे एक हथियार  के रूप में उपयोग करते हुए, आरएसएस मुस्लिमों के खिलाफ दक्षिणी कन्नड़ क्षेत्र में हिंदुओं का इस्तेमाल कर रही है। "उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस और बीजेपी के बीच अंतर करने की कोई जरूरत नहीं है। "वह एक जैसे है।"

वी. नागराज, आरएसएस के क्षेत्रीय संघचालक, और कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के प्रभारी, ने कहा था, कि "स्वयंसेवक संघ (स्वयंसेवक) अगर वे चाहते हैं तो काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। आरएसएस उन्हें कोई निर्देश जारी नहीं करेगा। चूंकि वे स्वयंसेवक हैं, स्वाभाविक रूप से वे राजनीतिक दलों का विरोध करते हैं जो राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, हिंदू समाज और संघ विचारधारा के खिलाफ हैं। यह बीजेपी का समर्थन करने के लिए एक प्राकृतिक अनुशासनित काम  है और कोई भी पार्टी जो उनकी मूल हिंदुत्व विचारधारा का विरोध करती है उसके खिलाफ काम करना संघ का दायित्व है। यदि कोई अन्य पार्टी उनके यानी आर.एस.एस. के मूल्यों का समर्थन  करती है, तो वे आने वाले दिनों में  उनका समर्थन कर सकते हैं। ''

पीयूसीएल, मैसूर से रती राव ने उन तरीकों के बारे में बात की जिसमें आरएसएस राज्य को सांप्रदायिक बना रहा है। उन्होंने कहा, "बागलकोट जिले के मुधोल में एक दंगा की तथ्य-खोजी रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। मुधोल में, आरएसएस ने इस छोटे से शहर की संकीर्ण सड़कों में एक त्यौहार के दौरान गणेश मूर्ति का जुलूस निकाला था। इससे मुस्लिम और हिंदू समुदायों के बीच कुछ संघर्ष हुए थे। पीयूसीएल की तथ्य खोज-रिपोर्ट में पता चला था कि आरएसएस ने मुस्लिम संपत्तियों को जला दिया और नष्ट कर दिया था और इसके बदले में, इस क्षेत्र में मुसलमानों को यह जगह छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। "

राव ने बताया कि कोई भी यह हर जगह और मैसूर जैसे शहर में भी देख सकता है। "यह आरएसएस की रणनीति है; कुछ भी हो, पहली चीज वे मुस्लिम संपत्तियों को नष्ट कर देते हैं, "उसने कहा मुधोल तथ्य-खोज रपट में  राज्य में सांप्रदायिक हिंसा के उदाहरणों में एक पैटर्न पाया है। "अब, हनुमान जयंती एक गर्म विषय है। वे सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करके और निर्दोषों को गिरफ्तार करके एक खतरा पैदा करने के लिए नए सार्वजनिक त्योहारों का सितेमाल करते हैं। आज हमारे पास जिस तरह की पुलिस है, वह मुस्लिम युवाओं पर हमला करती है। मुधोल तथ्यों की खोज के बाद, हम उन जगहों पर भी गए जहां लोग हिंसा से प्रभावित हुए थे और हमने पाया कि वहां  (आरएसएस) ने गणेश त्योहार का इस्तेमाल हिंसा के ;लिए किया था "

यह राज्य में कोई नई प्रवृत्ति नहीं है। वैकल्पिक कानून फोरम द्वारा एक रिपोर्ट के मुताबिक, भटकल में 1978 में इसकी शुरुआत हुयी थी; कोलार में 1984, 1990; 2003 में बेंगलुरू के अदुगोडी में। मोदी और बीजेपी इस चुनाव में राज्य के मतदाताओं का साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने के लिए दंगों के लिए लोगों को उकसा रही  हैं।

गौरी लंकेश
एम एम कलबुर्गी
BJP-RSS
नरेंद्र मोदी
कर्नाटका चुनाव

Related Stories

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

भारत में सामाजिक सुधार और महिलाओं का बौद्धिक विद्रोह

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी में अतिक्रमण रोधी अभियान पर रोक लगाई, कोर्ट के आदेश के साथ बृंदा करात ने बुल्डोज़र रोके

अब राज ठाकरे के जरिये ‘लाउडस्पीकर’ की राजनीति

जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान

सियासत: दानिश अंसारी के बहाने...


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License