NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कर्नाटक सीज़न 2 : जनादेश को उलट सत्ता हथियाने की कला  
भाजपा देश के सामने सत्ता के बदल और सत्ता को हथियाने का एक नया मॉडल पेश कर रही है, खासकर उस स्थिति में जब उसे लोगों से जनादेश नहीं मिलता है।
सुबोध वर्मा
29 Jul 2019
Translated by महेश कुमार
KARNTAKA

अभी एक साल पहले ही, यानी मई 2018 में, कर्नाटक की जनता ने विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निर्णायक रूप से खारिज़ कर दिया था। चुनाव आयोग के रिकार्ड के अनुसार, भाजपा को 36 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 38 प्रतिशत और जनता दल (सेक्युलर) को 18प्रतिशत वोट मिले। यह बात सही है कि कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव अलग-अलग लड़ा था, लेकिन चुनाव के बाद वे एक साथ आ गए थे। बीजेपी को सबसे पहले सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था क्योंकि राज्यपाल, गुजरात से भाजपा के निष्ठावान, स्पष्ट रूप से भाजपा के पक्ष में पक्षपाती थे। यह इस तथ्य से भी स्पष्ट था कि नई सरकार को अपना बहुमत साबित करने के लिए लंबा समय दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया, सदन के पटल पर तुरंत मतदान का आदेश दिया और भाजपा इस मतदान में हार गई। यह इस नाटक का सीजन 1 था।

सीज़न 2 में, भाजपा ने देश के सामने सत्ता हथियाने का एक अनोखा तरीका पेश किया है। यह थोक में दलबदल नहीं करा रहे है, न ही कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों को खरीद रहे हैं, वे छोटे दलों को विभाजित या निगल भी नहीं रहे हैं, न ही यह क्षेत्रीय पार्टी के साथ कोई नया गठबंधन है। इन तरीकों को अन्य राज्यों में लागू किया गया था (विवरण के लिए नीचे देखें) मुख्य रूप से दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए। लेकिन, कर्नाटक में, एक अलग ही स्थिति थी। यहां दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए आवश्यक संख्या बहुत बड़ी थी और इसलिए भाजपा कांग्रेस और जेडीएस में विभाजन या कानूनी तोड़फोड़ का इंतज़ाम नहीं कर सकती थी।

लेकिन, कहते हैं जहां चाह, वहां राह। खासकर अगर आपके अपार धन है।

सत्ता परिवर्तन का नया मॉडल

इसलिए, भाजपा ने सत्ता परिवर्तन का एक नया चमत्कार पेश किया। इसे विधानसभा सत्र से अनुपस्थित रहने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के 17 विधायक मिले। जिससे सदन की कुल ताकत में कमी आ गई। जहां तक विश्वास मत का संबंध है, उपस्थिति के बारे में कोई कानून नहीं है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘विद्रोही’विधायकों को सदन में अनुपस्थित रहने की अनुमति दे दी। यदि सदन की ताकत कम है, तो स्वाभाविक रूप से बहुमत पाने के लिए आवश्यक संख्या भी कम हो जाती है। और इस तरह, गठबंधन की ताकत ‘विद्रोहियों’ के वोट के बिना कम होनी ही है।

इसलिए, बीजेपी को – सरकार बनाने के लिए उसी गवर्नर ने आमंत्रित कर लिया। बेशक, इनके नेता वही बीएस येदियुरप्पा (Yediyuruppa) हैं, जिन्होंनेअपने नाम की वर्तनी में बदलाव किया है। 2007 से, वह इसे येद्दयुरप्पा (Yeddyurappa) के रूप में लिख रहे थे। यह कोई तकनीकी आवश्यकता नहीं है, यह सिर्फ इतना है कि न्यूमेरोलॉजिस्टों (अंक ज्योतिषी) ने उन्हें इसकी सलाह दी है कि पहले की वर्तनी उनके लिए दुःख का कारण बन रही थी, जो 2008 और2013 में मुख्यमंत्री पद से हटने और 2018 में फिर से उनके लिए रुकावट बनी थी।

हालाँकि मीडिया “दूर रहकर” भाजपा के दुष्ट चाल (devilish skills) की प्रशंसा कर रहा है, यहाँ तक कि कांग्रेस और जेडीएस का नैतिक गठबंधन खुद ब खुद ही मर गया, जो सच्चाई से बहुत दूर है। बीजेपी और येदियुरप्पा पिछले साल से ही गठबंधन सरकार को बर्बाद करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। विधायकों के बार-बार लालच दिए जाने की कई खबरें आ रही थी। एक जेडीएस विधायक ने यहां तक कहा कि बीजेपी उन्हें उनके साथ आने के लिए 40 करोड़ रुपये की पेशकश कर रही है जिसका एक वीडियो भी जारी किया गया। इस साल मई में लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद, इन प्रयासों को एक नई उर्ज़ा मिली। इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी 17 विधायकों को लुभाने और 2018 के जनादेश को पलटने में कामयाब रही।

अन्य राज्यों में बीजेपी द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा

2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से, उसने खुलेआम विधायकों/सांसदो की खरीद्फरोख्त शुरू कर दी और लोगों के जनादेश के खिलाफ जाकर भाजपा ने कई राज्यों में सत्ता गंदी चालों के जरिये हड़प ली। यहाँ कुछ उदाहरण पेश हैं:

• अरुणाचल प्रदेश में 2014 के विधानसभा चुनावों में, बीजेपी ने 11 सीटें जीतीं थी, कांग्रेस ने 42, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल ने 5 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2 सीटें जीती थी। दो वर्षों के दौरान, यह संख्या बदल गई: बीजेपी 48; कांग्रेस 1; पीपीए 9; स्वतंत्र 2 हो गए! यानी थोक में दलबदल, फिर राष्ट्रपति शासन का मंत्र, पूर्व सीएम की मृत्यु, सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, एक अनिच्छुक राज्यपाल को वापस बुलाना और उसके बाद चार मुख्यमंत्री और भाजपा ने आखिरकार सत्ता हथिया ली!

• 2014 में झारखंड के विधानसभा चुनावों में, 81 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 35 सीटें और उसके सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन ने 5 सीटें जीतीं थी। वे बहुमत से थोड़े ही दूर थे। इसलिए, फिर से उन्होंने कुछ निर्दलीय सदस्यों पर जीत हासिल की और झारखंड विकास मोर्चा के 8 में से 6 विधायकों को लालच देकर अपनी तरफ मिला लिया।

• 2015 में बिहार विधानसभा में 243 सीटों के लिए चुनाव हुए थे, भाजपा को सिर्फ 53 सीटें मिलीं और उसके सहयोगियों को 2 सीटें मिलीं थी। राष्ट्रीय जनता दल-जनता दल (युनाइटेड)-कांग्रेस के गठबंधन जिसे चुनाव पूर्व गठबंधन के रूप में चुनाव लड़ने के लिए बनाया गया था को 178 सीटों का भारी जनादेश मिला। फिर भी, बीजेपी ने इस गठबंधन को तोड़ दिया। जेडी (यू) और उसके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लालच दिया गया और जुलाई 2017 में गठबंधन सरकार बनाई गई।

• गोवा विधानसभा में, 2017 के चुनावों में भाजपा को कुल 40 में से 13 सीटें मिली थी। परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने छोटे स्थानीय दलों के साथ गठबंधन बनाया और सरकार बना ली जबकि सदन में सबसे बड़ा दल, कांग्रेस, 17 सीटों के साथ विपक्ष में बैठा।

• मणिपुर में, भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनावों में 60 में से 21 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 28 सीटें मिलीं थी। लेकिन भाजपा ने दो स्थानीय पार्टियों नेशनल पीपुल्स पार्टी और नागा पीपुल्स फ्रंट तथा लोक जनशक्ति पार्टी के अकेले विधायक को अपनी तरफ मिला लिया और सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। भाजपा की पूर्व सांसद राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने सरकार बनाने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को पहले आमंत्रित कर मदद की।

• मेघालय में, भाजपा ने 2018 के चुनाव में 60 सदस्यीय विधानसभा में दो सीटें जीतीं थी। लेकिन इसने सरकार का हिस्सा बनने के लिए एनपीपी के साथ चुनाव बाद गठबंधन किया। फिर, एक सहायक राज्यपाल, गंगा प्रसाद, जो बिहार के एक पूर्व भाजपा एमएलसी थे, ने सरकार बनाने में मदद की।

• और, 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनावों में, 224 सदस्यीय विधानसभा में केवल 104 विधायक होने के बावजूद (जबकि 2 सीटों पर चुनाव नहीं हुए),भाजपा ने 55 घंटे के लिए, भाजपा के गुजरात के पूर्व विधायक वजुभाई वाला की मदद से जो अब राज्य के राज्यपाल हैं सरकार बनाई। अगर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया होता और अगले दिन ही फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ होता, तो भाजपा खुशी से सत्ता में बनी रहती।

इन उदाहरणों, और कर्नाटक में नवीनतम सीज़न 2, फिर से यह साबित करता हैं कि भाजपा हर स्तर पर सत्ता के लालच में बेशर्म और बेईमान है। उनकी नजरों में आम लोगों या उनके जनादेशों का सम्मान नहीं हैं और खुले तौर पर लोकतांत्रिक मानदंडों और संघीय सिद्धांतों को पलटने के कुटिल तरीके अपनाए है, जो संविधान का मूल है। उनके लिए, अंत भला तो सब भला का सिद्धांत सही है।

 

 

 

 

BJP
karnataka
B S Yeddyurappa
kumarswami
Amit Shah
Narendra modi
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Sustainable Development
    सोनिया यादव
    सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत काफी पीछे: रिपोर्ट
    03 Mar 2022
    एनुअल स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2022 रिपोर्ट के मुताबिक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत फिलहाल काफी पीछे है। ऐसे कम से कम 17 प्रमुख सरकारी लक्ष्य हैं, जिनकी समय-सीमा 2022 है और धीमी गति…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पूर्वांचल की जंग: 10 जिलों की 57 सीटों पर सामान्य मतदान, योगी के गोरखपुर में भी नहीं दिखा उत्साह
    03 Mar 2022
    इस छठे चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 53.31 फ़ीसद मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है। आज के बाद यूपी का फ़ैसला बस एक क़दम दूर रह गया है। अब सात मार्च को सातवें और आख़िरी चरण के लिए…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: बस्ती के इस गांव में लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
    03 Mar 2022
    बस्ती जिले के हर्रैया विधानसभा में आधा दर्ज़न गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का एलान किया है। ग्रामीणों ने बाकायदा गांव के बाहर इसका बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी…
  • gehariyaa
    एजाज़ अशरफ़
    गहराइयां में एक किरदार का मुस्लिम नाम क्यों?
    03 Mar 2022
    हो सकता है कि इस फ़िल्म का मुख्य पुरुष किरदार का अरबी नाम नये चलन के हिसाब से दिया गया हो। लेकिन, उस किरदार की नकारात्मक भूमिका इस नाम, नामकरण और अलग नाम की सियासत की याद दिला देती है।
  • Haryana
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
    03 Mar 2022
    यूनियन नेताओं ने गुरुवार को कहा पंचकुला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवाला टोल प्लाजा पर हड़ताली कार्यकर्ताओं और सहायकों पर  हरियाणा पुलिस ने लाठीचार्ज  किया।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License