NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कर्नाटक: येदियुरप्पा ने आसानी से हासिल किया विश्वासमत, स्पीकर ने दिया इस्तीफा
कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने येदियुरप्पा के विश्वासमत जीतने के तुरंत बाद अपने इस्तीफे की घोषणा की।
भाषा
29 Jul 2019
b.s yeddyurappa
Image Courtesy: Hindustan Times

बेंगलुरु: कर्नाटक में बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली तीन दिन पुरानी सरकार ने ध्वनि मत से आसानी से विश्वास प्रस्ताव जीत कर राज्य विधानसभा में सोमवार को बहुमत साबित कर दिया।विधानसभा के अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने येदियुरप्पा के विश्वासमत जीतने के तुरंत बाद अपने इस्तीफे की घोषणा की। विश्वासमत की प्रक्रिया सदन की कार्यवाही शुरू होने के एक घंटे के भीतर ही निपट गई। 

विधानसभा के 17 बागी विधायकों को अयोग्य साबित किए जाने से सदन की संख्या घटने के बाद भाजपा को आसान जीत मिलने की पूरी संभावना के चलते विपक्षी कांग्रेस और जद (एस) ने मत विभाजन के लिए दबाव नहीं बनाया। 

अध्यक्ष ने घोषणा की कि येदियुरप्पा की तरफ से उनके नेतृत्व वाली सरकार में सदन का विश्वास जताने वाले एक पंक्ति के प्रस्ताव को सदन ने स्वीकार कर लिया है। 

विश्वासमत से पहले रविवार शाम कुमार ने कांग्रेस के 11 विधायकों और जद (एस) के तीन विधायकों को सदन के मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति यानि 2023 तक अयोग्य करार दे दिया था। इससे पहले भी तीन को अयोग्य करार दिया गया था जिससे बहुमत के लिए महज 105 विधायकों के समर्थन की जरूरत रह गई थी। यह संख्या सदन में भाजपा के मौजूदा सदस्यों के बराबर है जिसे एक निर्दलीय का भी समर्थन प्राप्त है। 

विधानसभा में कांग्रेस के 66, जद (एस) के 34 सदस्य हैं और एक अध्यक्ष (बराबरी की सूरत में जिनका वोट अहम होगा) और बसपा के एक बर्खास्त सदस्य हैं। रविवार को की गई अध्यक्ष की यह कार्रवाई भाजपा के लिए बड़ी राहत लेकर आई जो उम्मीदों के मुताबिक ही विजेता साबित हुई। 

साथ ही अनुमान के ही अनुरूप, अध्यक्ष ने भी 14 माह के कार्यकाल के बाद इस्तीफा दे दिया। यह उन खबरों के बीच हुआ कि भाजपा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है। 

अध्यक्ष ने कहा, 'मैंने इस पद से खुद को अलग करने का फैसला किया है...मैंने इस्तीफा देने का फैसला लिया है।' उन्होंने उपाध्यक्ष कृष्ण रेड्डी को अपना त्यागपत्र सौंपा।

कुमार ने कहा कि अध्यक्ष के तौर पर अपने 14 माह के कार्यकाल में उन्होंने अपने “विवेक” के अनुरूप और संविधान के मुताबिक काम किया।  उन्होंने कहा, “मैंने अपनी क्षमता के अनुरूप अपने पद की गरिमा बरकरार रखने का प्रयास किया।”

इससे पहले प्रस्ताव पेश करते हुए येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस- जद (एस) शासन के दौरान प्रशासनिक तंत्र पटरी से उतर गया है और कहा कि उनकी प्राथमिकता इसे वापस पटरी पर लाना है। उन्होंने कहा कि वह “प्रतिशोध की राजनीति” में लिप्त नहीं होंगे क्योंकि वह “भूल जाने और माफ करने के सिद्धांत” में विश्वास करते हैं। 

येदियुरप्पा ने कहा, “मेरा मुख्यमंत्री बनना लोगों की उम्मीदों के अनुरूप है।” उन्होंने एच डी कुमारस्वामी की जगह ली है जिनकी 14 माह पुरानी सरकार बागी विधायकों के विरोध के चलते गिर गई।

कांग्रेस के 14 और जद (एस) के तीन बागी विधायक 23 जुलाई को विश्वासमत की कार्यवाही के दौरान विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हुए थे जिससे कुमारस्वामी सरकार गिर गई जो विश्वासमत नहीं हासिल कर पाई क्योंकि 99 सदस्यों ने पक्ष में मत किया वहीं 105 ने उसके खिलाफ मत डाला। 

येदियुरप्पा ने कहा कि उन्होंने ऐसी कठिन स्थिति में पद संभाला है जब राज्य सूखे से ग्रस्त है। उन्होंने कहा, “प्रशासनिक तंत्र ढह गया है..मेरी प्राथमिकता इसे वापस पटरी पर लाने की है।”

साथ ही उन्होंने इसमें विपक्ष के सहयोग की भी मांग की। हालांकि कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धरमैया ने कहा कि येदियुरप्पा सरकार ‘असंवैधानिक एवं अनैतिक' है और उन्होंने इसके ज्यादा समय तक चल पाने पर संदेह जताया। सदन ने विनियोग विधेयक भी पारित किया।

 

karnataka
B S Yeddyurappa
BJP
Congress-Jds Coalition
Karnataka Government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • क्या है गौ संरक्षण विधेयक, किस पर पड़ेगा असर?
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या है गौ संरक्षण विधेयक, किस पर पड़ेगा असर?
    01 Aug 2021
    हाल ही में असम के मुख्यमंत्री ने Assam Cattle Preservation Bill 2021 प्रस्तावित किया है। इस बिल के मायने क्या हैं और किस पर पड़ेगा इसका असर, आइये जानते हैं वरष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय के साथ "…
  • यूपी में हाशिये पर मुसहर: न शौचालय है, न डॉक्टर हैं और न ही रोज़गार
    विजय विनीत
    यूपी में हाशिये पर मुसहर: न शौचालय है, न डॉक्टर हैं और न ही रोज़गार
    01 Aug 2021
    सत्ता के कई रंग लखनऊ की सियासत पर चढ़े और उतरे। कभी पंजे का जलवा रहा तो कभी कमल खिला। कभी हाथी जमकर खड़ा हुआ तो कभी साइकिल सरपट दौड़ी। लेकिन किसी भी सरकार ने मुसहर समुदाय के लिए कुछ नहीं किया।
  • Taliban
    अजय कुमार
    क्या है तालिबान, क्या वास्तव में उसकी छवि बदली है?
    01 Aug 2021
    तालिबान इस्लामिक कानून से हटने वाला नहीं है। वह दुनिया के सामने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं करने वाला है जिससे उसकी जिम्मेदारी तय हो। तालिबान जो कुछ भी कर रहा है, वह दुनिया के समक्ष उसका बाहरी दिखावा…
  • बसों में जानवरों की तरह ठुस कर जोखिम भरा लंबा सफ़र करने को मजबूर बिहार के मज़दूर?
    पुष्यमित्र
    बसों में जानवरों की तरह ठुस कर जोखिम भरा लंबा सफ़र करने को मजबूर बिहार के मज़दूर?
    01 Aug 2021
    बाराबंकी की घटना हमें बताती है कि मेहनत मज़दूरी करने वाले बिहार के मज़दूरों की जान कितनी सस्ती है। 12 से 15 सौ किमी लंबी यात्रा बस से करने के लिए मजबूर इन मज़दूरों को सीट से तीन गुना से भी अधिक…
  • सागर विश्वविद्यालय
    सत्यम श्रीवास्तव
    सागर विश्वविद्यालय: राष्ट्रवाद की बलि चढ़ा एक और अकादमिक परिसर
    01 Aug 2021
    हमारा एक प्रसिद्ध विश्वविद्यालय एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में महज़ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की आपत्ति की वजह से शामिल नहीं हो पाया!
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License