NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
कृषि निर्यात नीति से छोटे किसान और खाद्य सुरक्षा को ख़तरा
निर्यात-उन्मुख कृषि बनाने का मतलब है देश की खाद्य सुरक्षा से बड़े पैमाने पर समझौता करना होगा जो भारत में खाद्य संकट की शुरुआत को बल दे सकता है।
सुमेधा पाल
29 Oct 2018
Farm export policy

गहरे कृषि संकट के बीच मोदी सरकार अपनी उदार कृषि निर्यात नीति तैयार कर भारतीय किसानों को आख़िरी झटका देने जा रही है।

वर्तमान में ये सरकार साल 2022 तक किसानों की आय को बढ़ाने को लेकर किसान-विरोधी क़दम उठाने के अपने प्रयासों को तेज़ कर रही है। बड़ी कंपनियों को कृषि उत्पाद बेचने में बेहद गोपनीयता के प्रयास किए जा रहे हैं। नई कृषि नीति जो पिछले एक साल से चर्चा में है, वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय से आगे बढ़ाने के आदेश के बाद अंतर-मंत्रालयी विमर्श जारी है और संभवतः जल्द ही मंज़ूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जा सकता है।

जल्द से जल्द इस नीति के लागू होने को लेकर चर्चा करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को कहा, "सरकार जल्द ही देश में बंदरगाहों और हवाई अड्डों के पास विशिष्ट कृषि निर्यात क्षेत्र स्थापित करेगी जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है।"

यदि ग्राउंड पर भावना की कोई पड़ताल करे तो सरकार के झूठे अनुमान साफ तौर पर स्पष्ट हो जाते हैं। अखिल भारतीय किसान सभा(एआईकेएस) के जसविंदर सिंह क्रोधित होकर कहते हैं, "सरकार किसानों को ही खेती से बहार निकलने की बात कर रही है। ये नीति किसानों को सड़कों पे ले आएगी।" वे कहते हैं, कॉर्पोरेट समर्थित इस निर्यात नीति के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए धरातल पर काम कर रहे हैं।

सिंह ने कहा, "यदि कोई भारतीय कृषि की संरचना को समझ जाता, तो यह स्पष्ट हो जाता कि बड़े हिस्से पर छोटे, हासिए पर मौजूद किसान हैं। इस संदर्भ में निर्यात क्षेत्र से उन्हें पूरी तरह से विस्थापित होने का ख़तरा है।"

ये नीति कृषि मंत्रालय और कृषि तथा संसाधित खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा पहचाने गए 50 से अधिक निर्यात-उन्मुख कृषि समूहों के लिए नियमों को आसान कर देगी। इस प्रक्रिया की जल्दबाजी में शुरूआत को सरकार द्वारा बड़े निगमों के प्रति निर्यात क्षेत्र को सुलभ बनाने के लिए एक दोषपूर्ण विचार के रूप में देखा जा रहा है, जो कृषक वर्ग को पूरी तरह कुचल रहा है जो कि भारतीय कृषि की रीढ़ की हड्डी हैं।

किसान निर्यात नीति के रूप में मोदी सरकार के आक्रामक हमले का मतलब खाद्य सुरक्षा की असुरक्षा भी है। इस उदार नीति को सरकार से कृषि वस्तुओं की स्थायी सीमा क्षमता को तय करने की आवश्यकता होगी जो किसी भी प्रकार के व्यापारिक प्रतिबंध से मुक्त होंगे। यदि लागू किया गया, तो यह पिछली नीतियों से अलग एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा क्योंकि सूखे के दौरान भी आपूर्ति कम होने पर भी देश को कृषि निर्यात का एक निश्चित स्तर रखना होगा। अतीत में भारत ने कृषि निर्यात को रोक दिया था ताकि घरेलू कीमतें नियंत्रण में रहे। नई नीति इस दृष्टिकोण से दूर हो जाएगी। निर्यात उन्मुख कृषि बनाने से देश की खाद्य सुरक्षा से समझौता करना होगा जो भारत में खाद्य संकट की शुरुआत को ताक़त दे सकता है। साल 2014 के बाद देश के कृषि निर्यात में 22 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसे परिदृश्य में घरेलू बाज़ारों को बचाने के लिए व्यापार प्रतिबंधों को अनिवार्य माना गया है। बड़े पैमाने पर कृषि पर निर्भर भारत की वैश्विक कृषि में हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत ही है जो नाकाफी है। इसलिए निर्यात प्रतिबंधों को हटाना केवल कॉर्पोरेट के हित में है न कि किसानों के हित में, क्योंकि जब कृषि उपज से बाजार भर जाता है तो घरेलू किसानों को उनके उपज का उचित मूल्य न मिलने से उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ जाता है। किसानों की आमदनी को दोगुना करने के नाम पर ये सरकार उसे कम कर देगी, जो जारी कृषि संकट के प्रभाव को ज़्यादा कर देगा।

न्यूज़़क्लिक ने पहले प्रकाशित किया था कि किस तरह ये निर्यात नीति किसानों को सरकार के उदारीकरण परियोजना में केवल मोहरा से ज्यादा कुछ नहीं बनाएगा। किसानों को लाभ नहीं दिए जाएंगे, क्योंकि इस निर्यात नीति से निर्यात प्रतिबंधों से मुख्य उपज के अलावा अन्य वस्तुओं को मुक्त करने की संभावना है जिससे प्रोसेस्ड और ऑर्गेनिक फूड के विनियमन में ढ़ील होगा।

बायोफैच इंडिया (एपीईडीए और इंडो-जर्मन चेम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित कार्बनिक उद्योग पर विश्व के सबसे बड़े कार्यक्रम) के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए प्रभु ने जैविक खाद्य बाजार के उपयोग के एजेंडा को स्पष्ट किया, जिसके लाभ उद्योग द्वारा उठाया जाएगा, क्योंकि भविष्य में होने वाले भीषण परिवर्तनों को लेकर किसानों को अंधेरे में रखा गया है।

इस नीति का दीर्घकालिक प्रभाव न केवल देश की खाद्य सुरक्षा बल्कि पर्यावरण के लिए भी ख़तरा पैदा करता है। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कार्यकर्ता और समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने कहा, "प्रकृति और मिट्टी की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जो कि किसानों पर और अधिक बोझ बढ़ाएगा।"

इस नीति के लिए इस सरकार के कमज़ोर करने वाले दृष्टिकोण ने कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों के हितों को नज़रअंदाज़ करने की स्पष्ट सीमा का खुलासा किया। मोदी सरकार का ग़लत अनुमान एमएसपी मूल्यांकन के साथ मौलिक समस्याओं और उत्पादन के लिए घरेलू कीमतों के गिरने को लेकर विचार करने में असफल हुई है। इसके अलावा, कई प्रतिद्वंद्वी वैश्विक उत्पादकों ने शिकायत की है कि भारत की सरकारी सहायता और वैश्विक कृषि उत्पाद की गिरती कीमतें निर्यात संभावनाओं को कमजोर करती हैं।

Farmers crisis
Narendra modi
Modi government
food security
food security bill
suresh prabhu
PMO

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • nonaligned movement
    एन.डी.जयप्रकाश
    गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कैसे बदला? : भाग 1
    20 Nov 2021
    उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का संगठित विरोध 1920 के दशक के अंत में शुरू हुआ था। जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के ज़रिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
  • Farmers Protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों की जीत: “यह आज़ादी का दूसरा आंदोलन रहा है”
    20 Nov 2021
    शुक्रवार, 19 नवंबर को गुरु नानक जी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की और कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इन तीनों कानूनों को निरस्त करने की…
  • Srinagar Encounter
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लिंचिंग के दिन आने वाले हैं
    20 Nov 2021
    पिछले दिनों चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सेना, नौसेना व वायुसेना के मुखिया) जनरल बिपिन रावत ने जो सार्वजनिक बयान दिया, वह बहुत चिंताजनक है।
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    MSP और लखीमपुर खीरी के किसानों के न्याय तक जारी रहेगा आंदोलन, लखनऊ में महापंचायत की तैयारी तेज़
    20 Nov 2021
    विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की घोषणा के बावजूद, किसानों के द्वारा उत्तर प्रदेश में आगामी महापंचायतों के मद्देनजर लामबंदी और तैयारी जारी है।
  • farmers celebrating
    विक्रम सिंह
    किसान जानता है कि फसल पकना तो शुरुआत है, मंडी में दाम मिलने तक उसका काम पूरा नहीं होता
    20 Nov 2021
    मोदी जी ने तो अपने चिरपरिचित अंदाज़ में किसानों से घर वापस जाने के लिए कहा परन्तु किसान जानता है कि खेत में फसल पकना तो शुरुआत है लेकिन जब तक फसल का मंडी में उचित मूल्य नहीं मिल जाता तब तक काम पूरा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License