NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कृष्णा सागर बांध परियोजना से किसानों की आजीविका और पर्यावरण को ख़तरा
इस क्षेत्र में जारी अवैध खनन के ख़िलाफ़ विरोध तेज़ करते हुए किसानों और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से मुलाक़ात के लिए 150 किलोमीटर तक मार्च किया।
सुमेधा पाल
24 Nov 2018
ksr dam

अपने हाथों में पत्थर लिए कर्नाटक के मंड्या इलाक़े के किसान 150 किलोमीटर चलकर बेंगलुरु पहुंचे। 17 नवंबर को आयोजित किसानों के इस मार्च का मकसद मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से मुलाक़ात कर कृष्णा राजा सागर (केआरएस) बांध पर मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी विकास परियोजना के तहत इलाक़े में जारी अवैध कार्यों की जानकारी देना था।

न्यूज़क्लिक के साथ बात करते हुए कार्यकर्ता डॉ. वासु ने कहा, "प्रतिबंध के बावजूद इस क्षेत्र में अवैध खनन लोगों के लिए ख़तरे की घंटी है, जो भूकंपीय गतिविधि वाले इस क्षेत्र को ख़तरनाक बना रहा है।" उन्होंने कहा, "एक बार इसके नुकसान हो जाने के बाद भरपाई नहीं हो सकती है।"

इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने और विशाल प्रतिमा के निर्माण की प्रवृत्ति को जारी रखने के क्रम में राज्य सरकार संयुक्त राज्य अमेरिका में डिज़नीलैंड पार्क की तर्ज पर राज्य में कृष्णा राजा सागर बांध पार्क विकसित करने की योजना बना रही है। प्रस्तावित परियोजना में मंड्या जिले के जलाशय के पास 360 फीट ऊंचा संग्रहालय परिसर और "मां कावेरी" की 125 फीट की प्रतिमा शामिल है।

विरोध प्रदर्शन करने वाले किसान और कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि इस क्षेत्र में अवैध खनन फौरन रोक दिया जाना चाहिए। इस क्षेत्र के विकास का वादा करने वाली इस परियोजना से उस भूमि के शक्तिहीन होने की संभावना है जिसके जीर्णोद्धार की तत्काल आवश्यकता है। ज़मीनी स्थिति के बारे में बताते हुए डॉ. वासु ने कहा, "यह क्षेत्र राज्य में सबसे ज़्यादा किसानों की आत्महत्या का साक्षी है और यहां पानी का संकट जारी है, लेकिन इन मुद्दों को नज़रअंदाज़ करते हुए राज्य सरकार एक और प्रतिमा निर्माण करना चाहती है।"

प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन जारी रहा

हाल ही में मंड्या के डिप्टी कमिश्नर ने केआरएस बांध के चारों ओर 20 किलोमीटर की क्षेत्र में खनन, पत्थर उत्खनन और इसी तरह की अन्य सभी कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया था। कर्नाटक स्टेट नेचुरल डिजास्टर मॉनिटरिंग कमेटी (केएसएनडीएमसी) की सिफारिशों के बाद ये प्रतिबंध लगाया गया था। कमेटी ने ज़िला प्रशासन को बांध के आसपास खनन क्षेत्रों में तेज़ विस्फोटों के चलते बांध की संरचना के नुकसान और फ्रैक्चर की जांच करने का निर्देश दिया था। सितंबर के आखिरी सप्ताह में मैसूर, श्रीरंगपट्टन, पांडवपुरा और मंड्या के कुछ हिस्सों में उच्च तीव्रता की आवाज़ सुनी गई थी। इस रिपोर्ट में बताया गया कि ये आवाज़ इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों की हो सकती है।

जल संसाधन विभाग ने पहले यह भी कहा था कि खनन क्षेत्रों में उच्च तीव्रता वाले विस्फोटों के परिणामस्वरूप वायु प्रदूषण के अलावा आसपास के इलाकों की इमारतों और घरों में दरार आ रही है।

किसी भी प्रमुख बांध के स्थान से 2 किलोमीटर की परिधि के भीतर खनन विस्फोटक गतिविधि पर प्रतिबंध लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए केएसएनडीएमसी के अधिकारियों ने मंड्या ज़िला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से केआरएस बांध के रखरखाव, फ्रैक्चर और अन्य सिविल संबंधित नुकसान की नियमित रूप से जांच करने के लिए कहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन आदेशों के बावजूद इस क्षेत्र में खनन गतिविधि अभी भी चल रही है जिससे किसान बेंगलुरू के फ्रीडम पार्क की तरफ मार्च करने को मजबूर हुए।

इस विरोध प्रदर्शन के बाद जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार और पर्यटन मंत्री एसआर महेश ने बुधवार को 1,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित परियोजना के बारे में चर्चा करने के लिए बुधवार को बैठक की जिसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। केआरएस बांध पार्क को विकसित करने की परियोजना को पहली बार मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बजट में इस साल की शुरुआत में पेश किया गया था। हालांकि, किसानों और कार्यकर्ताओं ने इस परियोजना की मंज़ूरी के लिए रास्ता निकाला है जो सरकार के लिए काफी मुश्किल है।

ksr dam
krishna sagar dam
karnataka
cuvrery river project
Illegal mining
farmers protest
kumarswami

Related Stories

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

नफ़रती Tool-Kit : ज्ञानवापी विवाद से लेकर कर्नाटक में बजरंगी हथियार ट्रेनिंग तक

लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

कर्नाटक में बदनाम हुई भाजपा की बोम्मई सरकार, क्या दक्षिण भारत होगा- “भाजपा मुक्त”


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License