NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीर : 370 हटने के बाद से पर्यटन क्षेत्र संकट में
राज्य के पर्यटन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पिछले तीन महीनों में विदेशी पर्यटकों सहित कुल 20,000 से कुछ अधिक सैलानी कश्मीर की यात्रा पर आए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह संख्या 2,28,905 थी।
अनीस ज़रगर
06 Nov 2019
कश्मीर

कश्मीर में आज पर्यटन क्षेत्र अपने निम्नतम बिंदु पर है क्योंकि धारा 370 के निरस्त होने और अक्टूबर माह से ग़ैर-स्थानीय लोगों पर बढ़ते हिंसक हमलों के बाद से यह जोखिम और अनिश्चितता का सामना कर रहा है।

सरकार द्वारा घोषित बंदी और नागरिकों की बंदी के बीच घाटी में पर्यटकों की आवक प्रतिदिन जारी है, लेकिन पिछले वर्षों के मुक़ाबले यह संख्या काफ़ी कम है। राज्य के पर्यटन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पिछले अगस्त में सरकार द्वारा घोषित बंदी की शुरुआत के बाद से पिछले तीन महीनों में विदेशी सैलानियों सहित 20,000 से कुछ अधिक पर्यटक कश्मीर का दौरा कर चुके हैं। हालांकि, पिछले वर्ष कश्मीर में आने वाले पर्यटकों की यह संख्या 2,28,905 थी, और यह संख्या दर्शाती है कि अस्थिरता के चलते पर्यटन क्षेत्र किस क़दर प्रभावित हुआ है।

इससे पहले 2 अगस्त को, सरकार की ओर से कश्मीर की यात्रा पर गए सभी पर्यटकों को एडवाइज़री जारी की गई थी, जिसमें उन्हें अपनी यात्रा को तत्काल समाप्त कर घाटी छोड़ने का निर्देश दिया गया था, और यह निर्देश 5 अगस्त को होने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के एकतरफ़ा फ़ैसले को ध्यान में रखकर दिया गया था। भारी संख्या में पर्यटक घाटी छोड़ने लगे और कुछ ही दिनों में घाटी पर्यटकों से ख़ाली हो गई, जिसके चलते पर्यटन क्षेत्र से जुड़े होटल व्यवसाय, हाउसबोट और परिवहन सेवाओं सहित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक तगड़ा झटका लगा।

kashmir01.jpg

इसके बाद 9 अक्टूबर को फिर से सरकार ने कश्मीर यात्रा पर से प्रतिबंध को हटा लिया है, और एक दूसरी एडवाइज़री में लोगों से कश्मीर की यात्रा को फिर से शुरू करने की अपील की है। पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि यात्रा पर लगे इस प्रतिबंध के दौरान 1,373 विदेशियों सहित कुल 8,404 पर्यटकों की आमद दर्ज हुई है।

और यात्रा पर लगे इस प्रतिबंध के हटने के बाद से अक्टूबर के महीने में, कुल 9,327 पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है जिसमें 824 विदेशी सैलानी शामिल थे।

सरकार की कथित तौर यह समझ कि अब घाटी की स्थिति में सुधार हो चुका है और यात्रा पर प्रतिबंध समाप्त करने के बाद से, कश्मीर में ग़ैर-स्थानीय लोगों के लिए हालात और बदतर हो गए हैं, और सेब व्यापारियों और मज़दूरों सहित कई आगंतुकों को संदिग्ध आतंकवादियों ने इस बीच अपना निशाना बनाया है, जिसमें अभी तक हुए कुल सात हमलों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। पर्यटन विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने न्यूजक्लिक को बताया है, "इन हमलों के चलते स्थिति और ख़राब हुई है, और कई लोगों ने अपनी कश्मीर यात्रा की योजना को रद्द कर दिया है।"

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम इलाक़े में पांच बंगाली पर्यटकों की हत्या ने भी इस सीज़न में पर्यटकों के आगमन को प्रभावित किया है क्योंकि इस समय सबसे अधिक घरेलू पर्यटक पश्चिम बंगाल से आते हैं और उसके बाद गुजरात राज्य से।

पर्यटक अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर और नवंबर माह वैसे तो पर्यटन के लिहाज से हल्का सीज़न माना जाता है लेकिन पश्चिम बंगाल से बहुत सारे लोग इन्हीं महीनों के दौरान घुमने-फिरने के लिए आते हैं।

हालांकि, विभाग की नज़र अब सर्दियों की आवक पर है। अधिकारी के अनुसार, "दिसम्बर से विंटर सीज़न का पर्यटन अपनी रफ़्तार पकड़ लेता है और सर्दियों का मौसम भी यहाँ का पीक सीज़न माना जाता है, जिसके दौरान ढेर सारे विदेशी पर्यटक गुलमर्ग के प्रसिद्ध स्की-रिसोर्ट जैसी जगहों पर जाना पसंद करते हैं।"

जहाँ एक ओर पर्यटन क्षेत्र पर बंदी के चलते लगातार संकट जारी है वहाँ घाटी में आने वाले यात्रियों को लगातार कई दूसरी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है।

कुबेर जो मुंबई निवासी हैं, और पहली बार अपने परिवार और दो अन्य परिवारों के साथ कश्मीर की यात्रा पर निकले हैं, लेकिन यात्रा पर लगी रोक हटने के बाद से बढती हिंसा से पैदा हुए हालात के बावजूद उन्होंने अपनी कश्मीर यात्रा की योजना पर डटे रहे। उनका कहना है, “हम भयभीत नहीं हैं और तमाम राजनीति के बावजूद यहाँ के लोगों का व्यवहार गर्मजोशी भरा है। लेकिन, यहाँ पर सारी दुकानें बंद हैं, जबकि मुझे यहाँ से ढेर सारी ख़रीदारी करनी थी और मैं चाहता था कि यहाँ के स्थानीय रेस्तरां में भोजन का आनंद लिया जाए।“

दूसरी ओर, सोमवार (4 नवंबर) को शहर के मुख्य व्यावसायिक केंद्र लाल चौक पर ग्रेनेड विस्फ़ोट में एक अन्य ग़ैर-स्थानीय रिंकू कुमार की मौत हो गई है, और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं।

श्रीनगर, पहलगाम और गुलमर्ग सहित घाटी के कई हिस्सों में होटल धीरे-धीरे खुलने शुरू हो गए हैं। गुलमर्ग के एक होटल मैनेजर ने बताया, "पर्यटकों की आमद अभी भी बेहद कम है, और अनिश्चितता के चलते उनके व्यापार की संभावनाओं पर संकट के बादल छाए हुए हैं। अभी फ़िलहाल अधिकतम तीन से चार बुकिंग ही प्राप्त हो रही हैं।" 

अनुच्छेद 370 के निरस्त करने से भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के चलते गुलमर्ग भी अगस्त और सितंबर की शुरुआत में कई दिनों तक नो-गो क्षेत्र बना रहा। तब से केबल-कार सेवा फिर से शुरू हो गई है और अक्टूबर के महीने में, गुलमर्ग के मैदानों में पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र गोंडोला की 1,600 लोगों ने सवारी की है।

अधिकारियों के अनुसार, इस समय आने वाले पर्यटकों की कोई ख़ास पसंदीदा जगह नहीं है, लेकिन वे दक्षिण कश्मीर के श्रीनगर और पहलगाम के साथ-साथ उत्तरी कश्मीर के गुलमर्ग और सोनमर्ग का दौरा कर रहे हैं। हालांकि, पर्यटन विभाग ने ट्रैवल प्लानर्स और टूर ऑपरेटरों को निर्देशित किया है कि शोपियां और कुलगाम ज़िलों जैसे कुछ पर्यटक स्थलों पर तनाव अधिक है, वहाँ यात्रियों के लिए प्लान बनाने से बचें।

Kashmir
Shutdown in Kashmir
Abrogation of Article 370
Militancy in Kashmir
Attacks on Non Locals in Kashmir
Grenade Attacks Kashmir
Tourists in Kashmir
Tourist Destinations in Kashmir
Travel Ban in Kashmir

Related Stories

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया

कश्मीर में एक आर्मी-संचालित स्कूल की ओर से कर्मचारियों को हिजाब न पहनने के निर्देश

4 साल से जेल में बंद पत्रकार आसिफ़ सुल्तान पर ज़मानत के बाद लगाया गया पीएसए

क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?


बाकी खबरें

  • समीना खान
    हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी
    12 Apr 2022
    यहां मसला ये है कि आंचल, घूंघट, हिजाब, नक़ाब हो या बिकनी, हमेशा से पगड़ी के फ़ैसले इन सब पर भारी रहे हैं। इसलिए अब हमें आपके नज़रिए में ज़रा सा बदलाव चाहिए। जी! इस बार हमें आंचल भी चाहिए और आज़ादी भी…
  • ज़ाहिद खान
    सफ़दर भविष्य में भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे
    12 Apr 2022
    12 अप्रैल, सफ़दर हाशमी जयंती और ‘राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस’ पर विशेष।
  • jnu
    न्यूज़क्लिक टीम
    ‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र
    11 Apr 2022
    जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा के बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र अपना विरोध जताने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुँचे जहाँ उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया. छात्रों की बड़ी माँग थी कि पुलिस…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU में अब नॉन वेज को लेकर विवाद? ऐसे बनोगे विश्वगुरु ?
    11 Apr 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा JNU में हुए ABVP द्वारा राम नवमी के दिन मांसाहारी खाना खाने पर छात्रों की पिटाई की खबर पर चर्चा कर रहे हैं और वह भारत में तेज़ी से बढ़ रहे…
  • मुकुंद झा
    जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए
    11 Apr 2022
    घटना के विरोध में दिल्ली भर के छात्र सड़क पर उतरे। छात्र, पुलिस मुख्यालय पर विरोध जताने के लिए एकत्रित हुए परन्तु पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को अस्थायी हिरासत में ले लिया और चाणक्यपुरी, संसद मार्ग…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License