NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीर में 50 दिनों में 13 हजार बच्चों को सुरक्षाकर्मियों ने हिरासत में लिया: फैक्ट फाइंडिंग
महिला संगठनों की एक पांच सदस्यीय टीम ने पांच दिनों तक कश्मीर का दौरा करने के बाद वहां के हालात पर मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर जांच रिपोर्ट जारी की।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Sep 2019
kashmir issue

'कश्मीर में अभी कानून का शासन नहीं है', 'गला दबाया गया है और कहा जा रहा है खुश रहो', '8 बजे के बाद किसी के घर में लाइट जलने पर सेना द्वारा प्रताड़ित किया जाता है',

'हमने जो अपने महीने दो महीने के लिए चावल खरीद के रखा हुआ था उस पर सेना ने आकर केरोसिन डाल दिया', 'पिछले 50 दिनों में 13 हज़ार 10 से 22 साल के बीच के उम्र के बच्चों को पुलिस और सेना द्वारा उठाया गया है।'

ये बातें 17 से 21 सितंबर तक कश्मीर का दौरा करके आई महिला संगठनों की टीम ने बताया। उन्होंने दावा किया कि ये बातें स्थानीय लोगों ने बताई। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर सरकार द्वारा कई दावे किए जा रहे हैं। लेकिन महिला संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा जारी की गई रिपोर्ट उन सरकारी दावों को खरिज करती है।  

इस जांच दल में नेशनल फेडरेशन इंडियन वूमेन की ऐनी राजा, पंखुरी ज़हीर और कवलजीत कौर, प्रगतिशील महिला संगठन की पूनम कौशिक और मुस्लिम फोरम की सैयद हमीद शामिल थीं। इन पांच महिलाओं ने कश्मीर का पांच दिनों का दौरा किया और वहां की स्थिति रिपोर्ट मंगलवार को दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता को बताई।  

रिपोर्ट जारी करते हुए एनी राजा ने कहा कि कश्मीर के बच्चों को उठाकर ले जाया जा रहा है,  लेकिन उनकी जानकारी उनके परिवार को नहीं दी जा रही है। अपने बच्चों के बारे में पता करने के लिए लोगों को केंद्रीय जेलों के बाहर लगी लिस्ट में जाकर देखने से पता चलता है।

वहीं, पूनम कौशिक ने कहा कि कश्मीर के वकीलों ने बताया की वहां के बार काउन्सिल के दफ्तर बंद है, वकीलों को पब्लिक सिक्योरटी एक्ट (पीएसए) तहत जेलों में डाल दिया गया है।  अस्पतालों में सुविधा नहीं है।

जांच टीम ने बताया कि उनसे जम्मू कश्मीर की एक मां ने बताया कि वो अपने 4 साल के बच्चे को रात में आठ बजे के बाद अगर उसे पेशाब करना हो तो भी लाइट नहीं जलाती क्योंकि अगर वो ऐसा करेगीं तो सेना आ जाएगी और उन्हें इसका सज़ा देगी।

इस जांच दल की सदस्य पंखुरी ने कहा अगर इन सब के बावजूद कोई कहता है सब कुछ सामान्य है तो उससे बड़ा झूठ कुछ नहीं है। सच्चाई यह है कि लोग भय और खौफ में है।

वहीं, कवलजीत कहती हैं कि पंजाब में भी अलगाववाद और सेना का दमन देखा है लेकिन कश्मीर में जो हालत है वो उससे कई गुना अधिक खराब है। कश्मीर की जनता अनिश्चितता में जी रही है कल क्या होगा किसी को नहीं पता।

मुस्लिम वुमेन फोरम की सईदा हमीद ने कहा कि कश्मीर अभी लोहे के पर्दों से ढका हुआ है। दिल्ली में क्या हो रहा है ये कश्मीर को नहीं पता और कश्मीर में क्या हो रहा है ये हमे नहीं पता चल पा रहा है।

जांच दल की प्रमुख मांगें:

—सेना और अर्धसैनिक बलों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।

— सभी मामलों में एफआईआर तुरंत रद्द हो और उन सभी को विशेषकर उन युवाओं को रिहा कर दें, जिन्हें अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जेल में बंद किया गया है।

— व्यापक हिंसा और यातनाओं पर सेना और अन्य सुरक्षाकर्मियों के रैवये की जांच की जाए। इन यातनाओं और हिंसा के सभी पीड़ितों को मुफ्त इलाज हो।

— इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सहित कश्मीर में सभी संचार लाइनों को तुरंत बहाल किया जाए।

—अनुच्छेद 370 और 35 ए को दोबारा लागू किया जाय। कश्मीर के राजनीतिक भविष्य के बारे में भविष्य के सभी निर्णय जम्मू और कश्मीर के लोगों के साथ बातचीत की प्रक्रिया के माध्यम से लिए जाने चाहिए।

—एक समयबद्ध जांच समिति का गठन सेना द्वारा की गई ज्यादतियों को देखने के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही किसानों को उनके नुकसान का मुआवजा दिया जाए।


आपको बात दें कि इससे पहले भी सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक जांच दल कश्मीर गया था। उसने भी अपनी रिपोर्ट में लगभग यही बातें कही थी। इस जांच दल में में अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमन एसोसिएशन (ऐपवा) की कविता कृष्णन, आल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमन्स एसोसिएशन (एडवा) की मैमूना मोल्ला, नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट के विमल भाई शामिल थे।

इसे भी पढ़े:जम्मू-कश्मीर : "हमारे साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है, हम लोग क़ैद हैं”

Jammu and Kashmir
kashmiri awaam
press conference after kashmir tour
Article 370
Muslim Women's Forum

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

कैसे जम्मू-कश्मीर का परिसीमन जम्मू क्षेत्र के लिए फ़ायदे का सौदा है


बाकी खबरें

  • Women Hold Up More Than Half the Sky
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    महिलाएँ आधे से ज़्यादा आसमान की मालिक हैं
    19 Oct 2021
    हाल ही में जारी हुए श्रम बल सर्वेक्षण पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 73.2% महिला श्रमिक कृषि क्षेत्र में काम करती हैं; वे किसान हैं, खेत मज़दूर हैं और कारीगर हैं।
  • Vinayak Damodar Savarkar
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बहस: क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?
    19 Oct 2021
    बार-बार यह संकेत मिलता है कि क्षमादान हेतु लिखी गई याचिकाओं में जो कुछ सावरकर ने लिखा था वह शायद किसी रणनीति का हिस्सा नहीं था अपितु इन माफ़ीनामों में लिखी बातों पर उन्होंने लगभग अक्षरशः अमल भी किया।
  • Pulses
    शंभूनाथ शुक्ल
    ‘अच्छे दिन’ की तलाश में, थाली से लापता हुई ‘दाल’
    19 Oct 2021
    बारिश के चलते अचानक सब्ज़ियों के दाम बढ़ गए हैं। हर वर्ष जाड़ा शुरू होते ही सब्ज़ियों के दाम गिरने लगते थे किंतु इस वर्ष प्याज़ और टमाटर अस्सी रुपए पार कर गए हैं। खाने के तेल और दालें पहले से ही…
  • migrant worker
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ 20 अक्टूबर को बिहार में विरोध प्रदर्शन
    19 Oct 2021
    "अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है, इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है।”
  • Non local laborers waiting for train inside railwaysation Nowgam
    अनीस ज़रगर
    कश्मीर में हुई हत्याओं की वजह से दहशत का माहौल, प्रवासी श्रमिक कर रहे हैं पलायन
    19 Oct 2021
    30 से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट के चलते अक्टूबर का महीना सबसे ख़राब गुज़रा है, जिसमें 12 नागरिकों की हत्या शामिल हैं, जिनमें से कम से कम 11 को आतंकवादियों ने क़रीबी टारगेट के तौर पर मारा है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License