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कश्मीर: रैनावारी महिलाओं का आरोप, पुलिस प्रशासन ने स्थापित किया “आतंक का साम्राज्य”
जोगी लान्कर इलाके की दर्जनों महिलाओं ने SHO के इशारे पर स्थानीय पुलिस द्वारा “आतंक, दुर्व्यवहार और दमन” के अनुभवों की आपबीती सुनाई।
अनीस ज़रगर
01 Oct 2019
Kashmir Women in Rainawari

श्रीनगर: रैनावारी के जोगी लांकर इलाके में महिलाएं खौफजदा हैं और आरोप लगा रही हैं कि स्थानीय स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) राशिद खान के नेतृत्व में पुलिस ने इलाके में 'आतंक का राज' स्थापित कर रखा है।

शहर के पड़ोस में रहने वाले रैनावारी के स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिस प्रशासन विशेष रूप से एसएचओ खान ने इलाके के निवासियों के घरों में लूट-पाट, सामानों की तोड़-फोड़ और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार कर लोगों को 'आतंकित' कर रखा है।

एक बुजुर्ग पीड़िता ने न्यूज़क्लिक को बताया, “वो (एसएचओ खान) आधी रात को आकर हमारे घरों में छापा मारता है और नशे की हालत में खासकर महिलाओं को निशाना बनाता है और हमारे साथ मारपीट करता है”।

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एक महिला अपनी दो बेटियों के साथ इस इलाके में अकेले रहती हैं। उनके पति की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी। महिला ने आरोप लगाते हुए कहा, 'मेरी एक बेटी विकलांग है, लेकिन उसने (एसएचओ खान) उसे भी प्रताड़ित किया। वो हमारे गेट को जोर-जोर से बजाता है, अंदर घुसकर हम पर भद्दी टिप्पणियां करके हमें धमकी देता है।'

इस इलाके के चारों तरफ पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गए हैं, अंदर और बाहर जाने के सभी रास्तों पर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। प्रवेश-द्वारों पर कंटीले तार और रेजर तारों के जाल बिछाए गए हैं और कुछ क्षेत्रों को तो आवागमन के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और सुरक्षा बल ज्यादातर पुरुषों की आवाजाही को प्रतिबंधित करते हैं, लेकिन वे महिलाओं से कंसर्टिना (कंटीले घुमावदार तारों की बाड) के तारों को छलांग लगाकर पार करने को कहते हैं।

कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि, “वे जानबूझकर महिलाओं को कॉन्सर्टिना के तारों को पार कर जाने के लिए कहते हैं, इससे कई महिलाओं के कपड़े फट जाते हैं। जिसका पुलिस और सुरक्षा अधिकारी फायदा उठाते हैं।”

एक महिला का कहना है, 'इस मुद्दे पर जब इलाके के अध्यक्ष नज़ीर अहमद हकक और उनके बेटे ने आवाज उठाई तो, “पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया, और अब बिना हमारे अध्यक्ष के हमारी आवाज को उठाने वाला कोई नहीं रह गया है।”

इलाके के लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसी पुलिस ज्यादती और बर्बरता दशकों से नहीं देखी। उनके अनुसार एसएचओ रशीद खान ने इलाके में “बदतरीन किस्म की जोर जबर्दस्ती से कानून के पालन” का खौफ खड़ा कर दिया है।

स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि इस हफ्ते की शुरुआत में, एसएचओ ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल जाने की इजाजत नहीं दी। मरीज की रिश्तेदार ने न्यूज़क्लिक को बताया, ‘एसएचओ ने कहा कि सड़क पर ही बच्चे को जनो, लेकिन उसे अस्पताल जाने की इजाज़त नहीं दी। मैं पूछता हूं कि यह पुलिस अधिकारी किस कानून का पालन कर रहा है।'

न्यूज़क्लिक ने इलाके की दर्जनों महिलाओं से बात की और सभी के पास खौफ, आतंक, दुर्व्यवहार और दमन के अनेकों अनुभव थे। इन सब के आरोपी खान की अगुआई में स्थानीय पुलिस वाले हैं जिन्होंने यह जुल्म उनके साथ जारी रखा है।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए एसएचओ खान के वरिष्ठ अधिकारी एसपी श्रीनगर (उत्तर) सज्जाद शाह ने सभी आरोपों को नकार दिया। उनका कहना था, “पुलिस सभी काम प्रक्रिया के तहत कर रही है और इलाके में पत्थर बाजों की गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है। अगर एसएचओ से कोई समस्या है तो लोगों को वरिष्ठ पुलिस अधिकारिओं से सम्पर्क करना चाहिए और अपनी शिकायत दर्ज करवानी चाहिए, अन्यथा मैं इन आरोपों की पुष्टि नहीं कर सकता।'

हालाँकि स्थानीय लोगों का मानना है कि पुलिस खासतौर पर महिलाओं को निशाना बना रही है। एक 18 वर्षीय छात्रा मंशा को काफी नजदीक से गुलेल से मारा गया। मंशा के पिता बताते हैं, “हमारे घर से बाहर ही उसे माथे पर गुलेल मारा गया। वह वहीँ पर बेहोश होकर जमीन पर गिर गई थ डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह आराम करने और कई टेस्ट कराने की सलाह दी है।'

स्थानीय लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि खान के नेत्रत्व में, सीआरपीएफ (केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल) के जवान और पुलिस ने जोगी लान्कर इलाके के 3 परिवारों को निर्देश दिया कि सुरक्षा बल के जवानों के कैंप के लिए जगह मुहैया कराएं।

सुरक्षा बलों ने पिछले हफ्ते तीन बार फ़याज़ अहमद के घर जाकर कहा है कि या तो वह घर खाली कर दें या अपने मकान की पहली मंजिल CRPF जवानों के लिए खाली कर दें।

रात में हुई छापेमारी के बाद स्थानीय लोगों ने इलाके और गलियों में रात की चौकसी शुरू कर दी है ताकि पुलिस द्वारा किसी भी तरह की गिरफ्तारी के प्रयासों को विफल किया जा सके। “हम कुछ करें, चाहे न करें लेकिन दूसरी तरफ से उकसावेबाजी जारी है। पुलिस रात में आती है। इसलिए सतर्क रहना बेहतर है। वे वैसे भी निर्दोषों को हिरासत में लेते हैं," यह कहना है एक स्थानीय निवासी का जिसने रात्रि निगरानी के लिए खुद को वालंटियर किया है।

प्रतिबंध और संचार नाकेबंदी के कारण कश्मीर में जनजीवन प्रभावित हुआ है। सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को एकतरफा रूप से समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर को दो संघ राज्य क्षेत्रों में विभाजन के फैसले को 50 दिन से अधिक समय बीत चुका है। सरकार ने इस कदम का विरोध रोकने के लिए "निवारक उपाय" के रूप में घाटी के शीर्ष नेताओं, कार्यकर्ताओं, वकीलों और व्यापारियों सहित सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है।

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