NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
कश्मीरी अवाम के हक़ में खड़े हुए वाम दल और नागरिक समाज
जम्मू-कश्मीर पर सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ वाम दलों के आह्वान पर दिल्ली समेत देशभर में प्रदर्शन। जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता और अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग।

 
मुकुंद झा
07 Aug 2019
वाम दलों के आह्वान पर दिल्ली समेत देशभर में प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के फ़ैसले के खिलाफ बुधवार, सात अगस्त को राजधानी दिल्ली समेत देश भर में वाम दलों के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन किया गया और जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता और अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग की गई।

दिल्ली में सीपीआई (एम), सीपीआई, सीपीआई (एम-एल), आरएसपी, फारवर्ड ब्लॉक व कम्युनिस्ट गदर पार्टी ने मंडी हाउस से संसद मार्ग तक मार्च किया। मार्च के अंत में जंतर मंतर पहुँचकर सभा की गई।
मार्च का नेतृत्व सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई महासचिव डी. राजा, सीपीआई (एमएल)- लिबरेशन महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, आरएसपी के नेता आर एस डागर, सीजीपीआई के बिरजू नायक समेत वामपंथी दलों के अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने किया। इसके अलावा नागरिक समाज और कई जन संगठनों ने भी इस प्रतिरोध मार्च में हिस्सा लिया। 
सभी ने एक स्वर में कहा कि सरकार के इस कदम ने लोकतंत्र और संविधान को एक बड़ा आघात पहुंचाया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) का मानना है कि पाकिस्तानी हमलावरों का मुकाबला करते हुए कश्मीर का अवाम भारत सरकार के इस पवित्र और स्पष्ट वचन के साथ भारत मे शामिल हुआ था कि उसे विशेष दर्जा और स्वायत्तता दी जाएगी। इसका ही बाद में आर्टिकल 370 के रूप में संविधान में प्रावधान किया गया। मोदी सरकार ने इस वचन से हटकर जम्मू और कश्मीर की जनता के साथ विश्वासघात किया है।

सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार ने आज जम्मू कश्मीर की हैसियत को ही खत्म कर दिया है। जम्मू कश्मीर के लोगों और बाकी भारत के बीच रिश्तों को, जैसा कि सरकार ने तीन साल पहले वादा किया था,  सभी संबंधितों के बीच पारस्परिक राजनीतिक संवाद के जरिये मजबूत किया जाना चाहिए। बजाय ऐसा करने के इस तरह का एकतरफा कदम उठाया। हम सब मानते हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। इस कदम से केवल जमीन का जुड़ाव हुआ है लेकिन क्या इससे दिलो का जुड़ाव हो सकेगा। सत्ताधारी दल कश्मीर को तो अभिन्न हिस्सा मानता है लेकिन कश्मीरियों को नहीं। 

68382467_1250789241759420_6111767534841626624_n.jpg
सीपीएम की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की 1947 में कई कुर्बानी के बाद कश्मीर भारत का हिस्सा बना था। कश्मीरियों ने अपने आपको भारत के साथ जोड़ा था लेकिन बीते चार दिनों से उन्हें बंद कर रखा है। उनका संपर्क भारत के अन्य हिस्सों से खत्म कर दिया है। ये सरकार कह रही है उसने कश्मीर को देश से जोड़ दिया है लेकिन सच्ची यह है की संघ और भाजपा देश के टुकड़े करने में लगी है।

67608280_2300008346918402_9077694270957158400_n.jpg

आगे उन्होंने कहा की आज कश्मीरियो की आवाज और उनके प्रतिरोध को सरकार ने हज़ारो की संख्या सैनिको को तैनात करके कुचल रही है। ये मुद्दा कश्मीर का नहीं देश का है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके लिए बोलें और संघर्ष करें। 
सीपीआई के महासचिव डी राजा ने कहा देश में एक तरफ दलित, अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर हमले हो रहे हैं। दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था गड्ढे में जा रही है, उसके सभी क्षेत्रो में लगातर गिरावट आ रही लेकिन सरकार उन सभी पर चर्चा नहीं कर रही है, कश्मीर का मुद्दा सरकार ने लोग के बंटवारे के लिए उठाया है। लेकिन वो भूल गए हम पहले अंग्रेजों से लड़े थे अब इन बीजेपी वाले से भी लड़ेंगे।  
सीपीआई-एमएल के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि ये केवल जम्मू कश्मीर के लिए नहीं पूरे देश के लिए खतरनाक है। अनुच्छेद 370 जो कश्मीर और भारत के बीच पुल था उसे जला दिया है। उद्योगपति जो इस सरकार के सहयोगी है वो वहां केवल जमीन देख रहे हैं, लेकिन आज भी वहां ज़िन्दा कौम है और वो इसका प्रतिरोध करेगी। 
सभा में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी मोदी सरकार के इस कदम की भर्त्सना की। कहा कि यह पूरी तरह अवैधानिक और असंवैधानिक है। यह सिर्फ़ जम्मू और कश्मीर तक सीमित मुद्दा नहीं है। यह लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और खुद संविधान पर आक्रमण है। यह समय संविधान और संघीय ढांचे पर हमलों के विरुध्द जनता को लामबंद करने का समय है। 
कश्मीरी छात्रों का दर्द

नेताओं के साथ-साथ, कई कश्मीरी छात्रों ने राज्य के हालत पर अपनी चिंता व्यक्त की,  दिल्ली में काम कर रहे तबिंदा ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "हम तीन दिनों से नहीं सोए हैं, हम अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।" हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें क्या बताया जा रहा है और अगर उन्हें यह भी पता है कि हमारे संवैधानिक अधिकार और जम्मू-कश्मीर राज्य को भाजपा सरकार द्वारा कुछ ही मिनटों में राज्य से हितधारकों के परामर्श के बिना हटा दिया गया है।”

c13fe544-a349-47b5-89a1-8d0666cdcf49.jpg
प्रदर्शन में शामिल कश्मीरी छात्रों ने कहा कि इस तानाशाहीपूर्ण कदम को उठाने के पहले जम्मू कश्मीर में हज़ारों की तादाद में सैना भेजने, मुख्य राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को गिरफ़्तार करने, जनता की आवाजाही प्रतिबंधित करने जैसे काम किये गए। यही इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार बिना जनता की सहमति के जबरदस्ती अपना हुकुम थोप रही है। आज हम और हमारा परिवार पूरी तरह से भयभीत है। 
देश के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन

दिल्ली के आलावा देश कई अन्य राज्यों में भी विरोध प्रदर्शन किया गया।

मध्य प्रदेश में हुए विरोध प्रदर्शन में सीपीएम राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि एक सार्वभौमिक सच्चाई है कि भारत का वास उसकी विविधताओं में है। भाजपा-आरएसएस के शासक नेता किसी भी तरह की विविधता और संविधान के संघीय ढांचे को बर्दाश्त नही करते। वे जम्मू कश्मीर के साथ अधिकृत इलाके जैसा बर्ताव कर रहे हैं। संविधान के साथ खिलवाड़ करते हुए वे जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख को दो अलग अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बदल रहे हैं। यह राष्ट्रीय एकता और भारत के राज्यों के संघीय गणराज्य होने की धारणा पर सबसे बड़ा हमला है।
जसविंदर सिंह ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के विखण्डन को रोका जाए। संविधान की धारा 370 की हिफाजत की जाए 
 
बिहार में भी सभी वामपंथी दलो ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। कश्मीर और संविधान को बचने की बात कही
 

68776070_2450975698522867_3656571899812511744_n.jpg
जयपुर केंद्र के फैसले के खिलाफ सीपीएम ने सीकर, जयपुर सहित कई  अन्य जिलों में रैली निकाली। कलेक्ट्रेट पर प्रधानमंत्री का पुतला जला कर किया विरोध जताया। सीकर में लोगों को सम्बोधित करते हुए सीपीएम जिला सचिव किशन पारीक ने कहा कि मोदी सरकार ने तानाशाही तरीके से फैसला लेते हुए भारत के संघीय ढांचे पर गम्भीर चोट पहुंचाने का काम किया है।
वक्ताओं ने आर्टिकल 370 बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि कश्मीरियों का दिल जीतने की जरूरत है। ताकत का गलत इस्तेमाल समस्या को सुलझाने के बजाय ओर ज्यादा उलझाने का करेगा सभा को सीपीएम के पूर्व विधायक पेमाराम, मंगल सिंह, भगवान सिंह बगड़िया व अब्दुल कयूम कुरैशी के अलावा अन्य वक्ताओं ने सम्बोधित किया। 

rajsthan.jpg
 तेलंगाना : वाम दलों ने जम्मू-कश्मीर पर लिए गए फैसले के  विरोध में प्रदर्शन किया। वाम कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के फ़ैसले को अवैध और असंवैधानिक  बताया।

 telngan.jpg
उत्तर प्रदेश में भी वाम दलों ने विरोध प्रदर्शन किया।  कानपुर में सीपीएम की पोलित ब्यूरो सदस्य और कानपूर से पूर्व सांसद सुभाषनी अली ने भी भाग लिया और सभा को संबोधित किया। 

1dcb2312-bbb6-4eb9-9478-93fd71f359b5.jpg

केरल में भी वाम दलों ने प्रदर्शन कर जम्मू-कश्मीर के अवाम की आवाज़ बुलंद की।

3fadd3c4-d72d-4709-89eb-bf77c0c118cd.jpg

सभी ने जम्मू कश्मीर की स्वायत्ता बहाल करने और कश्मीरी अवाम की आवाज़ सुने जाने की मांग की। 

Jammu and Kashmir
Article 370
BJP
RSS
Narendra modi
Amit Shah
CPIM
CPI
CPIML
Brinda Karat
d Raja
Protests
Left Parties Protest.
bhiar
UP
Kerala

Related Stories

हापुड़ अग्निकांड: कम से कम 13 लोगों की मौत, किसान-मजदूर संघ ने किया प्रदर्शन

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 
    26 Mar 2022
    कारपोरेटपरस्त कृषि-सुधार की जारी सरकारी मुहिम का आईना है उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इसके सदस्य घनवट ने स्वयं ही रिपोर्ट को…
  • भरत डोगरा
    जब तक भारत समावेशी रास्ता नहीं अपनाएगा तब तक आर्थिक रिकवरी एक मिथक बनी रहेगी
    26 Mar 2022
    यदि सरकार गरीब समर्थक आर्थिक एजेंड़े को लागू करने में विफल रहती है, तो विपक्ष को गरीब समर्थक एजेंडे के प्रस्ताव को तैयार करने में एकजुट हो जाना चाहिए। क्योंकि असमानता भारत की अर्थव्यवस्था की तरक्की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,660 नए मामले, संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,100 मरीज़ों की मौत
    26 Mar 2022
    बीते दिन कोरोना से 4,100 मरीज़ों की मौत के मामले सामने आए हैं | जिनमें से महाराष्ट्र में 4,005 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा गया है, और केरल में 79 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा…
  • अफ़ज़ल इमाम
    सामाजिक न्याय का नारा तैयार करेगा नया विकल्प !
    26 Mar 2022
    सामाजिक न्याय के मुद्दे को नए सिरे से और पूरी शिद्दत के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए विपक्षी पार्टियों के भीतर चिंतन भी शुरू हो गया है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीर फाइल्स हेट प्रोजेक्ट: लोगों को कट्टरपंथी बनाने वाला शो?
    26 Mar 2022
    फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से पहले और बाद में मुस्लिम विरोधी नफरत पूरे देश में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है और उनके बहिष्कार, हेट स्पीच, नारे के रूप में सबसे अधिक दिखाई देती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License