NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीरी जनता नहीं, कश्मीर चाहिए!
नागरिकों की हिफ़ाज़त करना सरकार की प्राथमिक ड्यूटी है। उसे यह याद दिलाने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की क्या ज़रूरत है?
अजय सिंह
26 Feb 2019
dehradun

पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफ़िले पर घातक हमले के नौ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीरी जनता के लिए पहली बार ‘कुछ’ बोलते हुए सुनायी-दिखायी दिये हैं। टोंक (राजस्थान) में 23 फ़रवरी 2019 को एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘हमारी लड़ाई कश्मीर के लिए है, कश्मीर के ख़िलाफ़ नहीं है, कश्मीरियों के ख़िलाफ़ नहीं है’। लेकिन तब तक जो सुनियोजित चोट पहुंचानी थी, वह पहुंचायी जा चुकी थी। दूर-दूर तक यह संदेश फैलाया जा चुका था कि भारत को कश्मीर तो चाहिए लेकिन भारत के अन्य राज्यों में रह रहे कश्मीरी लोग पूरी तरह अवांछित हैं, और उन्हें खदेड़ दिया जाना चाहिए।

पुलवामा की घटना (14 फ़रवरी 2019) के बाद पूरे देश में—खासकर हिंदी-उर्दू पट्टी के राज्यों में—कश्मीरी छात्र-छात्राओं, अध्यापकों, व्यापारियों, दुकानदारों व मज़दूरों पर—जो सब-के-सब मुसलमान हैं—जिस तरह हिंदुत्व फ़ासीवादियों की तरफ़ से हिंसक हमले हुए, वह स्तब्धकारी और शर्मनाक है। यह इसलिए भी शर्मनाक और चिंताजनक है कि इस हमले को राजनीतिक सत्ता संरचना और सरकार का समर्थन मिला हुआ है।

गहरी विडंबना यह है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ-भाजपा द्वारा संचालित और सत्ता-समर्थित इस कश्मीरी जनता-विरोधी हिंसक मुहिम को विपक्ष का भी मौन समर्थन मिला हुआ है। इस मसले पर राहुल गांधी ख़ामोश हैं, सीताराम येचुरी और डी राजा ख़ामोश हैं, कमलनाथ व अशोक गहलोत ख़ामोश हैं, अरविंद केजरीवाल ख़ामोश हैं, मायावती व अखिलेश यादव ख़ामोश हैं, तेजस्वी यादव व ममता बनर्जी ख़ामोश हैं।

जिस तरह से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व अन्य राज्यों से कश्मीरियों को खदेड़ा गया, उस पर तो विपक्ष को नरेंद्र मोदी सरकार और राज्यों की भाजपा सरकारों को घेर लेना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और इससे हिंदुत्व फ़ासीवादी लंपट गिरोहों का हौसला और बढ़ा। इन लंपट गिरोहों को न तो रोका गया है,न उनके खिलाफ़ कारगर कार्रवाई की गयी है। राज्यों में रह रहे कश्मीरियों को किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी गयी। बात-बात पर बात करने वाले नरेंद्र मोदी पूरे नौ दिन इस मसले पर जानबूझकर ख़ामोश रहे, और राष्ट्रपति को तो जुंबिश तक नहीं हुई।

नागरिकों की हिफ़ाज़त करना सरकार की प्राथमिक ड्यूटी है। उसे यह याद दिलाने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की क्या ज़रूरत है? लेकिन यहां भी सुप्रीम कोर्ट को, एक याचिका पर सुनवाई के दौरान, दिल्ली-समेत 11 राज्यों की सरकारों से कहना पड़ा कि वे कश्मीरियों व अन्य अल्पसंख्यकों के जान-माल की हिफ़ाज़त की गारंटी करें। उसने यह भी कहा कि कश्मीरियों का सामाजिक बहिष्कार करने की जो अपीलें जारी की जा रही हैं,उनके ख़िलाफ़ राज्य सरकारों को तुरंत कारगर क़दम उठाना चाहिए।

लेकिन जब एक राज्य (मेघालय) का राज्यपाल (तथागत राय) खुलेआम कश्मीरियों का और कश्मीरी सामान व व्यापार का देशव्यापी बहिष्कार करने की अपील जारी करे, तब क्या किया जाये! उसे कौन रोकेगा या दंडित करेगा? न नरेंद्र मोदी ने इस राज्यपाल की भर्त्सना की, न राष्ट्रपति ने उसे बर्ख़ास्त किया। याद कीजिये,दूसरे विश्व युद्ध के कुछ पहले यूरोप में नाज़ियों और फ़ासिस्टों ने यहूदियों का बहिष्कार करने की इसी तरह की अपीलें जारी की थीं। तथागत राय जो बोल रहे हैं,उसे सत्ता के सबसे ऊंचे पायदान की मंजूरी मिली हुई है। दूसरी ओर, कश्मीर और कश्मीरी जनता के मुद्दे पर विपक्ष की ख़ामोशी भारत से कश्मीरी जनता के अलगाव को और बढ़ा रही है। यह भारत के लिए ख़तरे की घंटी है।

(लेखक वरिष्ठ कवि और राजनीतिक विश्लेषक हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

Jammu and Kashmir
pulwama attack
CRPF Jawan Killed
Kashmir crises
Kashmiri Students
hate campaign
Hindutva
Narendra modi
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा


बाकी खबरें

  • BIRBHUMI
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है
    30 Mar 2022
    शायद पहली बार टीएमसी नेताओं ने निजी चर्चा में स्वीकार किया कि बोगटुई की घटना से पार्टी की छवि को झटका लगा है और नरसंहार पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री के लिए बेहद शर्मनाक साबित हो रहा है।
  • Bharat Bandh
    न्यूज़क्लिक टीम
    देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के द्वारा आवाह्न पर किए गए दो दिवसीय आम हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और…
  • IPTA
    रवि शंकर दुबे
    देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'
    29 Mar 2022
    किसानों और मज़दूरों के संगठनों ने पूरे देश में दो दिवसीय हड़ताल की। जिसका मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गूंजा। वहीं हड़ताल के समर्थन में कई नाटक मंडलियों ने नुक्कड़ नाटक खेलकर जनता को जागरुक किया।
  • विजय विनीत
    सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी
    29 Mar 2022
    "मोदी सरकार एलआईसी का बंटाधार करने पर उतारू है। वह इस वित्तीय संस्था को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। कारपोरेट घरानों को मुनाफा पहुंचाने के लिए अब एलआईसी में आईपीओ लाया जा रहा है, ताकि आसानी से…
  • एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई
    29 Mar 2022
    इज़रायली विदेश मंत्री याइर लापिड द्वारा दक्षिणी नेगेव के रेगिस्तान में आयोजित अरब राजनयिकों का शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक परिघटना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License