NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीरियों का दर्दः ‘हमें पाषाण युग में धकेल दिया गया है’
घाटी में संचार पाबंदियों के बीच कुछ लोग शादी की दावत न देने को मजबूर हैं वहीं राज्य भर में लोग अपने पुराने लैंडलाइन का कनेक्शन फिर से चालू करवाने या नया कनेक्शन लेने के लिए टेलीफोन एक्सचेंज के चक्कर काट रहे हैं।
सुहैल भट्ट
27 Aug 2019
jammu and kashmir
Image Courtesy: Indian Express

फिरदौस को उसकी होने वाली पत्नी से मिले एक ख़त ने उसके परेशान चेहरे पर मुस्कान ला दिया। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी बातचीत ख़त लिखने तक महदूद हो जाएगी। 5 अगस्त से पहले तक वे फोन पर हमेशा बातचीत करते थे और कभी-कभी एक दिन में कई बार बात कर लेते थे। जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किए जाने के बाद से कश्मीर में संचार पाबंदिया लागू है जो पहले कभी नहीं हुआ था।

5 अगस्त की सुबह घाटी के लोगों ने ऐसी जगह पर अपनी आंखें खोली जो "अब उनका नहीं था"। टेलीफोन लाइनें बंद हो गई थीं, मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवाएं समाप्त कर दी गई। राज्य में सरकार "कुछ बड़ा" करने की योजना बना रही थी जबकि लोगों को ख़बर नहीं थी। दोपहर तक उनका डरावना सपना सच हो गया क्योंकि सरकार ने विशेष राज्य का दर्जा हटा लिया और राज्य का विभाजन कर दिया।

हर दिन हज़ारों लोग अपने परिवार के लोगों को फोन करने के लिए संबंधित उपायुक्त कार्यालय और पुलिस स्टेशन जाते हैं। उनके परिवार के लोग या तो काम या पढ़ाई के लिए अपने घरों से दूर रहते हैं। संचार पाबंदियों में ढील देने के लिए प्रशासन ने कई जगहों पर कई अस्थायी टेलीफोन बूथ खोले हैं। हालांकि, लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ये प्रयास कम पड़ते हैं।

दक्षिण कश्मीर के पंपोर निवासी उमर फैमबू ने न्यूज़़क्लिक को बताया कि उन्होंने मलेशिया में काम कर रहे अपने पिता से एक बार भी बात नहीं की है। उन्होंने कहा, '' मैं कई बार संबंधित पुलिस स्टेशन गया लेकिन हमें अंतरराष्ट्रीय कॉल करने के लिए मना कर दिया गया। देश के भीतर ही कॉल करने की अनुमति दी गई थी।” उन्होंने संचार को बंद करने के सरकार के फैसले को ग़ैरक़ानूनी और क्रूर क़रार दिया।

संचार पाबंदी ने न केवल राज्य में लोगों के जीवन को प्रभावित किया है बल्कि घाटी में काम करने वाले बाहरी लोग भी उतना ही परेशान हैं।

बिहार के रहने वाले सचिन श्रीनगर के एक रेस्तरां में शेफ है। सचिन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि कई बार पुलिस स्टेशन जाने के बावजूद वह अपने माता-पिता से बात नहीं कर पा रहे है। सचिन कहते है, "मैं कई बार नेहरू पार्क पुलिस स्टेशन गया लेकिन एक बार भी फोन नहीं कर पाया क्योंकि हर दिन बहुत सारे लोग पुलिस स्टेशन आते हैं।" आगे कहा कि पुलिस अधिकारियों ने उसे थाने से कई बार जाने को कहा।

उन्होंने कहा कि घाटी में ऐसी परेशानी पहले कभी नहीं हुई है। आगे कहा कि “मैंने यहां बुरा समय भी देखा है। मैं 2014 में यहां था जब घाटी में बाढ़ आई थी और 2016 के अशांत समय में भी मैं यहीं था लेकिन कभी भी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था। मैं जाने से पहले अपने बकाया वेतन का इंतज़ार कर रहा हूं। मैं अपनी वापसी को लेकर आश्वस्त नहीं हूं।"

पत्रकार बिरादरी कनेक्टिविटी के अभाव में काम कर रही है। प्रेस एन्क्लेव में एक घंटे से भी कम समय में लैंडलाइन चालू किया गया लेकिन फिर ख़राब हो गया। श्रीनगर के एक पत्रकार इरफान अहमद ने न्यूज़क्लिक को बताया कि 'ऐसी पाबंदियां पहले कभी नहीं लगाई गई थी जिसको लेकर अधिकार समूहों को ध्यान देना चाहिए। विडंबना यह है कि मुझे एक दोस्त से मिलना था और ऐसा करने के लिए कि मुझे एक विशेष स्थान पर मिलने के लिए उसके कार्यालय में एक नोट छोड़ना पड़ा।“

सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की बहाली पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार ने 93,000 में से 73,000 से अधिक लैंडलाइन कनेक्शन को चालू कर दिया है और शेष कनेक्शन को धीरे-धीरे चालू कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रेस एन्क्लेव और अन्य क्षेत्रों में लैंडलाइन तकनीकी कारणों से चालू नहीं हो सका। उन्होंने 20 अगस्त को श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संवाददाताओं से कहा, "तकनीकी गड़बड़ी को दुरुस्त करने में कुछ दिन लगेंगे।"

संचार का एकमात्र साधन होने के चलते लोग कश्मीर में नए लैंडलाइन कनेक्शन के लिए या पुराने लैंडलाइन को फिर से चालू कराने के लिए टेलीफोन एक्सचेंज के चक्कर काट रहे हैं। कश्मीर निवासी मेहराज अहमद कहते हैं, “इस हाई-टेक युग में हम पुरानी तकनीक का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। मुझे ऐसा करना पड़ रहा है क्योंकि हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। मेरा बेटा बैंगलोर में पढ़ाई करता है और मेरी पत्नी सुकून से तब तक नहीं रह सकती जब तक कि वह उससे सप्ताह में एक बार बात नहीं करती।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने इस प्रदेश को पाषाण युग में फिर से धकेल दिया है।

ख़त पढ़ने के बाद फ़िरदौस की मुस्कान फीकी पड़ गई क्योंकि उन्होंने आने वाले दिनों में बढ़ने वाली परेशानी को भाप लिया है। उनकी शादी 1 सितंबर को होनी है लेकिन वह चिंतित हैं कि इसका आयोजन किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा, "मैंने सभी निमंत्रण रद्द कर दिए हैं और कोई आयोजन नहीं होगा।"

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।

Kashmir Lockdown
Curfew in Kashmir
Jammu and Kashmir
Abrogation of Article 370
Communication Lockdown in Kashmir
Internet Ban in Kashmir

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

जम्मू-कश्मीर परिसीमन से नाराज़गी, प्रशांत की राजनीतिक आकांक्षा, चंदौली मे दमन


बाकी खबरें

  • Yeti Narasimhanand
    न्यूज़क्लिक टीम
    यति नरसिंहानंद : सुप्रीम कोर्ट और संविधान को गाली देने वाला 'महंत'
    23 Apr 2022
    यति नरसिंहानंद और अ(संतों) का गैंग हिंदुत्व नेता यति नरसिंहानंद गिरी ने दूसरी बार अपने ज़मानत आदेश का उल्लंघन करते हुए ऊना धर्म संसद में मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रती बयान दिए हैं। क्या है यति नरसिंहानंद…
  • विजय विनीत
    BHU : बनारस का शिवकुमार अब नहीं लौट पाएगा, लंका पुलिस ने कबूला कि वह तलाब में डूबकर मर गया
    22 Apr 2022
    आरोप है कि उनके बेटे की मौत तालाब में डूबने से नहीं, बल्कि थाने में बेरहमी से की गई मारपीट और शोषण से हुई थी। हत्या के बाद लंका थाना पुलिस शव ठिकाने लगा दिया। कहानी गढ़ दी कि वह थाने से भाग गया और…
  • कारलिन वान हाउवेलिंगन
    कांच की खिड़कियों से हर साल मरते हैं अरबों पक्षी, वैज्ञानिक इस समस्या से निजात पाने के लिए कर रहे हैं काम
    22 Apr 2022
    पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने वाले लोग, सरकारों और इमारतों के मालिकों को इमारतों में उन बदलावों को करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके ज़रिए पक्षियों को इन इमारतों में टकराने से…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    छत्तीसगढ़ :दो सूत्रीय मांगों को लेकर 17 दिनों से हड़ताल पर मनरेगा कर्मी
    22 Apr 2022
    मनरेगा महासंघ के बैनर तले वे 4 अप्रैल से हड़ताल कर रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ के 15 हज़ार कर्मचारी हड़ताल पर हैं फिर भी सरकार कोई सुध नहीं ले रही है।
  • ईशिता मुखोपाध्याय
    भारत में छात्र और युवा गंभीर राजकीय दमन का सामना कर रहे हैं 
    22 Apr 2022
    राज्य के पास छात्रों और युवाओं के लिए शिक्षा और नौकरियों के संबंध में देने के लिए कुछ भी नहीं हैं। ऊपर से, अगर छात्र इसका विरोध करने के लिए लामबंद होते हैं, तो उन्हें आक्रामक राजनीतिक बदले की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License