NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीर प्रेस क्लब ने पत्रकार कामरान यूसुफ के घर छापेमारी की निंदा की
कामरान के खिलाफ छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब एक सप्ताह पहले ही कश्मीर प्रेस क्लब ने घाटी में मीडिया पेशेवरों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा शारीरिक हमले, उत्पीड़न और समन जारी करने के कई मामलों को उजागर किया था।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Feb 2020
jammu and kashmir
Image Courtesy: Greater Kashmir

श्रीनगर: कश्मीर में पत्रकारों के सामने आने वाले खतरों के बारे में बोलते हुए मीडिया पेशेवरों की एक निर्वाचित संस्था कश्मीर प्रेस क्लब ने सोमवार 17 फरवरी को रात के समय पत्रकार कामरान यूसुफ के घर पर जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा छापेमारी की निंदा की।

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा ज़िले के रहने वाले और न्यूज़क्लिक से जुड़े कामरान को उनके घर से पुलिस अधीक्षक और एसएचओ पुलवामा के नेतृत्व में पुलिस दस्ते द्वारा उठाया गया। पुलिस कामरान के घर में रात लगभग 11 बजे दाखिल हुई थी।

ये छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब एक सप्ताह पहले ही कश्मीर प्रेस क्लब ने घाटी में मीडिया पेशेवरों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा शारीरिक हमले, उत्पीड़न और समन जारी करने के कई मामलों को उजागर किया था। 5 अगस्त के बाद ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं।

ज्ञात हो कि 5 अगस्त को केंद्र सरकार द्वारा धारा 370 हटाने और इस राज्य को दो हिस्सों में बांटकर संघशासित प्रदेश बनाने को लेकर सरकार ने बड़े पैमाने पर पाबंदी लगा दी थी। विशेष राज्य का दर्जा हटाने और राज्यों में बंटवारा को लेकर कश्मीरियों ने विरोध किया था।

कामरान ने कहा, “मैंने अपने परिसर के आसपास पुलिसकर्मियों को देखा। पुलिस अधिकारी ने मुझे अपने साथ चलने को कहा और मेरे फोन छीन लिए।” उन्हें पुलिस वाहन में डीएसपी के कार्यालय ले जाया गया और कामरान मंज़ूर नाम के कुछ ट्विटर अकाउंट यूज़र के बारे में पूछताछ की गई।

कामरान ने आगे बताया, 'उन्होंने मेरे फोन की जांच की और उसमें मौजूद हर चीज की जांच की। उन्होंने मुझसे कामरान मंजूर नाम के व्यक्ति के बारे में पूछा और मुझे उसका ट्विटर अकाउंट दिखाया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्हें संदेह था कि मैं ये अकाउंट चला रहा हूं। वे जो चीज तलाश रहे थे उसे खोज पाने में असफल होने के बाद पुलिस अधिकारी ने कुछ अधिकारी को फोन कर के बुलाया और मुझे लगभग 1 बजे जाने दिया। उ

न्होंने कहा, "परेशान मेरे परिवार के लोग बाहर इंतजार कर रहे थे और मुझे घर ले आए।"

प्रेस क्लब के प्रवक्ता ने कहा कि "घाटी में पत्रकारों के लगातार उत्पीड़न पर गंभीर रुख अपनाया है।" आगे उन्होंने कहा कि "एक पत्रकार के घर पर रात के समय पुलिस की छापेमारी ने घाटी में पत्रकारों के सामने आने वाले खतरों को एक बार फिर से उजागर किया है।"

कश्मीर प्रेस क्लब ने कहा कि "पत्रकारों को डराने-धमकाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पत्रकारों पर शारीरिक हमले किए जा रहे हैं, धमकी दी जा रही है और समन जारी किए जा रहे हैं। दरअसल, श्रीनगर में पुलिस के आतंकवाद रोधी केंद्र का पत्रकारों को समन और परेशान करना एक नियमित कार्य बन गया है। जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा उनके काम के लिए जम्मू और कश्मीर में पत्रकारों को परेशान करना और उन पर सवाल उठाना वास्तव में एक भयावह स्थिति है।"

अपने बयान में, क्लब ने 5 अगस्त के बाद से पुलिस सम्मन, उत्पीड़न और धमकी के प्रमुख मामलों को विस्तार से बताया और सरकार से "सम्मन और हमलों" की प्रवृत्ति को रोकने का आग्रह किया।

एमनेस्टी सहित मानवाधिकार संस्थाओं ने इस कठिन परिस्थितियों की ओर इशारा किया है जिसमें कश्मीर में मीडिया काम कर रहा है। कहा कि ये पाबंदी "सच को दबा" रही है।

अगस्त महीने के बाद की स्थिति पर एमनेस्टी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कश्मीर में पत्रकारों द्वारा सामना किए जाने वाले सुरक्षा बलों के हमले और धमकियों ने 5 अगस्त 2019 से कश्मीर में होने वाली घटनाओं की रिपोर्टिंग और जांच करने में उनकी स्वतंत्रता को बुरी तरह प्रभावित करता है

Kashmir Journalists
attack on journalists
Detention
Kashmir Press Club
Press Freedom in Kashmir
Harassment of Journalists
Abrogation of Article 370

Related Stories

यूपी: अब झांसी में अवैध खनन की रिपोर्टिंग करने गए पत्रकार पर हमला, कहां है कानून व्यवस्था? 

बीजेपी शासित एमपी और उत्तर प्रदेश में पत्रकारों पर ज़ुल्म क्यों ?

कार्टून क्लिक: भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ...

जम्मू-कश्मीर में मीडिया का गला घोंट रही सरकार : प्रेस काउंसिल

यूपी में मीडिया का दमन: 5 साल में पत्रकारों के उत्पीड़न के 138 मामले

यूपी चुनाव: पांच साल पत्रकारों ने झेले फ़र्ज़ी मुक़दमे और धमकियां, हालत हुई और बदतर! 

खोज ख़बर ; कश्मीर से UP: सियासत की बिछी बिसात, फ़रेब का खेल

एक पत्रकार समूह द्वारा कब्ज़े के बाद, कश्मीर प्रेस क्लब को सरकार ने खुद के सुपुर्द किया

कश्मीर प्रेस क्लब पर जबरन क़ब्ज़े पर पत्रकारों की संस्थाओं ने जताई नाराज़गी और हैरानी

बिहारः एक महीने के भीतर एक और पत्रकार पर जानलेवा हमला, स्थिति नाज़ुक 


बाकी खबरें

  • कुशाल चौधरी, गोविंद शर्मा
    बिहार: रोटी-कपड़ा और ‘मिट्टी’ के लिए संघर्ष करते गया के कुम्हार-मज़दूर
    21 May 2022
    गर्मी के मौसम में मिट्टी के कुल्हड़ और मिट्टी के घड़ों/बर्तनों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इससे ज्यादा रोज़गार पैदा नहीं होता है। सामान्य तौर पर, अधिकांश कुम्हार इस कला को छोड़ रहे हैं और सदियों पुरानी…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन के स्ट्रेन BA.4 का पहला मामला सामने आया 
    21 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटो में कोरोना के 2,323 नए मामले सामने आए हैं | देश में अब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 31 लाख 34 हज़ार 145 हो गयी है। 
  • विनीत तिवारी
    प्रेम, सद्भाव और इंसानियत के साथ लोगों में ग़लत के ख़िलाफ़ ग़ुस्से की चेतना भरना भी ज़रूरी 
    21 May 2022
    "ढाई आखर प्रेम के"—आज़ादी के 75वें वर्ष में इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा के बहाने कुछ ज़रूरी बातें   
  • लाल बहादुर सिंह
    किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है
    21 May 2022
    इस पूरे दौर में मोदी सरकार के नीतिगत बचकानेपन तथा शेखचिल्ली रवैये के कारण जहाँ दुनिया में जग हंसाई हुई और एक जिम्मेदार राष्ट्र व नेता की छवि पर बट्टा लगा, वहीं गरीबों की मुश्किलें भी बढ़ गईं तथा…
  • अजय गुदावर्ती
    कांग्रेस का संकट लोगों से जुड़ाव का नुक़सान भर नहीं, संगठनात्मक भी है
    21 May 2022
    कांग्रेस पार्टी ख़ुद को भाजपा के वास्तविक विकल्प के तौर पर देखती है, लेकिन ज़्यादातर मोर्चे के नीतिगत स्तर पर यह सत्तासीन पार्टी की तरह ही है। यही वजह है कि इसका आधार सिकुड़ता जा रहा है या उसमें…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License