NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कुर्दों पर सुलतान एरदोगन का युद्ध
प्रबीर पुरुकायास्थ
06 Aug 2015

पश्चिमी एशिया में नए किस्म के बदलाव आ रहे हैं, यह बदलाव तुर्की द्वारा तुर्की के भीतर और उत्तरी इराक में कुर्दों पर किये जा रहे हमले के रूप में सामने आया है. तुर्की के अव्रिष्ठ अधिकारी भी उत्तर-पूर्व सीरिया में "मध्यवर्ती क्षेत्र" की बात कर रहे हैं. क्या तुर्की सीरियन सेना से सीधे युद्ध में जाएगा? क्या वे उस कुरदीश वाय.पी.जी. से लड़ेंगे जो इस क्षेत्र को नियंत्रित करती है, और तुर्की में जिसका गठजोड़ पी.के.के. के साथ है? इसका मतलब साफ़ है कि तुर्की का गठजोड़ फिर इस्लामिक स्टेट के साथ है? यद्दपि तुर्की ने अपने इन्सिर्लिक के एयरबेस को अमरिका को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया है ताकि वे आई.एस. पर इराक में वहां से बम्ब दाग सके, लेकिन तुर्की का स्पष्ट टारगेट पी.के.के. है न कि आई.एस.; हालांकि तुर्की यह झूठा दावा करता है कि उसने अमरिका के साथ गठजोड़ आई.एस. से निबटने के लिए किया है. 

                                                                                                                          

क्षेत्र में अमेरिका की नीति पहले की तुलना में और भी अधिक बेतुकी लग रही है। एक तरफ वे चाहते हैं कि इरान इराक में आई.एस. के खतरे के खिलाफ सरकार को स्थिर करने के लिए सहयोग करे, वह यह भी चाहता है कि उसके सभी क्षेत्रीय सहयोगी इजराइल, सऊदी अरबिया, तुर्की सुरिया व यमन की सरकार के खिलाफ आई.एस. या अल-कायदा का साथ दे. अमरिका के लिए यह सप्ताह खराब रहा क्योंकि हाल ही में सीरिया में "पुनरीक्षित" और "प्रशिक्षित" डिविजन 30 को जब उतारा गया तो उसका सफाया हो गया. उनके ज्यादातर सिपाहियों और कमांडरों को जबाहत अल नुसरा (जोकि सीरिया का अल-कायदा गठजोड़ है) ने या तो मार दिया या फिर अपनी गिरफत में ले लिया है. हालांकि इजराइल और तुर्की दोनों ही जबाहत अल नुसरा को सीरिया में समर्थन कर रहे हैं, लेकिन वे नहीं चाहते कि अमरिका के पिट्ठू उनके घर के पिछवाड़े में खेले. अल नुसरा ने अमरिका की डिविजन 30 से जब्त नए और उच्च तकनीक हथियारों पर हाथ रख दिया है. इसमें सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि यहाँ जो अमरिका की डिविजन 30 के साथ घटा उस पर अमरिकी प्रशासन को आश्चर्यचकित हो जाना चाहिए था.

अमरिका की बशर अस्साद के प्रति नीति स्पष्ट नहीं है. वे अब इसके लिए अनुदान के लिए तैयार हो रहे हैं क्योंकि वे मानते हैं कि आई.एस. और अल कायदा के विरुद्ध लड़ाई केवल सीरियन सेना और हिज़बोलाह ही लड़ सकते हैं, वे इजराइल की इस बात को भी मानते हैं कि इरान, हिज़ोब्लाह और सीरिया के गठजोड़ को इस क्षेत्र में तोडना जरूरी है और इसके लिए उन्हें बशरत अल अस्साद सबसे कमज़ोर कड़ी लगती है. इस समझ के हिसाब से अल कायदा और आई.एस. उनके मुख्य प्रतिद्वंदी नहीं हैं, उसके मुकाबले बशर अल अस्साद उनके बड़े दुश्मन है. आई.एस. का इराक और सीरिया में अचानक विस्तार अमरिका के लिए इस संतुलन को बदल सकता है, लेकिन इस पल इस खेत्र में उनकी निति जैसे कि इरान के साथ परमाणु समझौता होना कुछ हद तक भ्रामक लगता है.

कुर्द संघर्ष विराम को तोड़ना

पिछले हफ्ते तुर्की के कदम ने पिछले तीन वर्षों से जारी पी.के.के. (जोकि स्वायत्ता के लिए संघर्षरत है) के साथ युद्ध विराम के समझौते को तोड़ दिया. यह शांति समझौता तुर्की में 65 लाख कुर्दों के साथ तीस साल के गृह युद्ध को रोकने के लिए किया गया था, इस युद्ध में 40,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे. हालांकि तुर्क यह दावा करते हैं कि वे अब आई.एस. के खिलाफ लड़ाई में उतर रहे हैं, लेकिन इन्होने आई.एस. और पी.के.के. दोनों को ही आतंकवादी घोषित कर दिया है. ज्यादातर इसके हवाई हमले और गिरफ्तारियां पी.के.के. को निशाने पर रख कर की गयी है.

फिर सवाल यह उठता है कि तुर्की ने तीन साल पुरानी शान्ति समझौते को तोड़कर कुर्दों के खिलाफ युद्ध क्यों छेड़ा?

पी.के.के और एरदोगन की तुर्की सरकार और ए.के.पी. (शांति और न्याय पार्टी) के बीच शुरू हुयी इस लड़ाई का मुख्य कारण था कि वह बम्ब विस्फोट जिसके तहत कुरदीश सोशलिस्ट यूथ मूवमेंट सुरुक स्थित कैंप में दागा गया था और जिसमें उनके ३२ कार्यकर्ता मारे गए और करीब 100 घायल हो गए. सुरुक वह क़स्बा था जहाँ से कोबाने में आई.एस. से लड़ने के लिए वाय.पी.डी. को सप्लाई दी जाती थी. वाय.पी.डी. हालांकि सीरिया की तरफ है लेकिन वह पी.के.के के व्यापक आन्दोलन का हिस्सा है. तुर्किश सरकार ने वाय.पी.जी. और आई.एस. दोनों को ही आतंकी करार दिया है. लम्बे समय से, तुर्की कोबने में लड़ रही वाय.पी.डी. सेना को मिलिट्री मदद देने से मना कर रहा है. यह वाय.पी.डी. की बहादुरी पूर्ण लड़ाई है, और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते अंतत: एरदोगन वाय.पी.डी. को सहायता देने के लिए तैयार हो गया है.

पी.के.के. विश्वास करती है उनके इस विश्वास के पीछे कई वजह मौजूद है – वह यह कि तुर्की की सरकार का गठबंधन आई.एस. और अल कायदा के साथ है. आई.एस. सीरिया की अल बशर अस्साद सरकार के खिलाफ है और उनकी कुरदीश सेना के साथ भी लड़ाई जारी है, वह केवल सीरिया में ही बल्कि इराक में भी. इसलिए पी.के.के. सोचता है की सुरुक का हत्याकांड आई.एस. ने तुर्की की सरकार के षड्यंत्र रच के किया. पी.के.के. ने इस हत्याकांड के विरुद्ध अपना गुस्सा दिखाते हुए एक पुलिस चौकी पर हमला किया जिसमें कुछ सिपाही मारे गए. इससे खिन्न होकर एरदोगन की ए.के.पी. सरकार ने पी.के.के के उत्तरी इराक स्थित और तुर्की के भीतर के बहुमत ठिकानों पर हवाई हमले किये. अब चूँकि दोनों तरफ लड़ाई की नयी तैयारियां चल रही है तो ऐसा लगता है कि दोनों के बीच युद्ध विराम ख़त्म हो गया है.

तुर्की पी.के.के. के साथ युद्ध विराम क्यों समाप्त कर रहा है उसके भीतरी और बहरी दोनों कारन मौजूद हैं. तुर्की बशर अल अस्साद सरकार को हारने और क्षेत्र में इरान के प्रभुत्व को कम करने की दृष्टि के साथ काम कर रहा है, और इसके लिए सबसे बड़ा खतरा उत्तरी इराक और उत्तरी-पूर्वी सीरिया में कुरदीश राज्य के गठित होने से है. पी.वाय.डी. जोकि राजनैतिक पार्टी है और वाय.पी.जी. उसकी सैनिक इकाई है, और उसका रोजाया (उत्तरी-पूर्व सीरिया और तुर्की का दक्षिण) में अपने आप सरकार बना ली है और उसे उसे इराक अन्य कुरदीश प्रभाव वाले क्षेत्रों से जोड़ दिया है, और यह क्षेत्र पी.के.के. को रणनीतिक मौक़ा प्रदान करता है. इसलिए आई.एस.से लड़ने के नाम पर असल में तुर्की के सेना इस क्षेत्र पर नियंतरण करना चाहती है.

एरदोगन और ए.के.पी के लिए भीतरी परिपेक्ष्य उनके अपने लिए ख़ास है. एरदोगन का पिछले चुनाव में यह विश्वास था कि ए.के.पी. को इतनी सीटें मिल जायेगी जिससे वह संविधान में बदलाव ला सके और मौजूदा संसदीय प्रणाली की जगह देश में सीधे राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली को लाया जा सके. लेकिन चुनाव में उसके लिए दुर्भाग्यपूर्ण यह हुआ कि एच.डी.पी. जिसे अल्पसंख्यक कुर्दों और तुर्की के अन्य वामपंथी ताकतों का समर्थन प्राप्त है ने 10 प्रतिशत वोटों की सीमा को पार कर लिया है, संसदीय प्रतिनिधित्व के लिए न्यूनतम इतना मत मिलना जरूर्री है, इसकी वजह से ए.के.पी. संसद के भीतर अल्पमत में आ गयी है. यद्दपि ए.के.पी. सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, अब या तो उसे गठबंधन की राजनीती में जाना पड़ेगा या फिर दोबारा से कुछ महीनों बाद चुनावों की घोषणा करनी पड़ेगी.

एरदोगन और ए.के.पी. लगता है एक नए गृह युद्ध के जुएँ की तरफ बढ़ रहे हैं, ताकि वह एच.डी.पी. के विरुद्ध कदम उठाये और इसे पी.के.के. से साथ जोड़कर इस पर चुनाव में खड़ा होने पर प्रतिबन्ध लगवा दे. तुर्की के चुनावी नियम के मुताबिक़, अगर एच.डी.पी. को प्रतिबंधित कर दिया जाता है तो कुरदीश इलाकों में ए.के.पी. को दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में घोषित कर दिया जाएगा, और उसे एच.डी.पी. की सभी सीटें मिल जायेगी और वह संसद में सबसे प्रभुत्व वाली पार्टी बन जायेगी. इसलिए एर्दोँ और ए.के.पी. गृह युद्ध की शुरुवात करने के लिए उंचा खेल खेल रहे हैं, वह इसलिए कि आने वाले चुनावों में उन्हें बहुमत मिल सके. संसद में बहुमत पाने के लिए गृहयुद्ध एरदोगन का पागलपन से भरी चाल है, वह यह कर तुर्की को एक निरंकुश सल्तनत बनाना चाहता है.  

यद्दपि एरदोगन तुर्की के बाहर और भीतर के लक्ष्य को लेकर काफी स्पष्ट है, लेकिन अमरिका को शायद अभी तक पता नहीं है कि इस लड़ाई में उसके सहयोगी और दुश्मन कौन होंगे. यह पहले से ही आई.एस. के खिलाफ कुर्दों के तुर्की के साथ गठबंधन में है, जबकि तुर्की के सेना कुर्द की सेना को अपना दुश्मन मानती है. क्या अमरिका की सेना आई.एस. के खिलाफ लड़ेंगी? या फिर अमरिका कुर्द पर हमला करने के लिए तुर्की की सहायता करेगा? क्या इसने इर्सिलिक एयर बेस को इस्तेमाक करने के एवज़ में कुर्दों को बलिदान कर दिया है? आखिर इसका मकसद क्या है?

पश्चिमी शक्तियों: बुरी हैं या सिर्फ बेवकूफ

तुर्की जोकि धमकी दे रहा है कि वह सीरिया सरकार के लिए नो फ्लाई ज़ोन को बढ़ा देगा और आई.एस. और सीरिया विरोधी ताकतों को अपनी यहाँ सुरक्षित जगह देगा तो फिर अमरिका क्या करेगा? जबाहत अल नुसरा द्वारा डिविजन 30 को तबाह कर देने के बाद अब तो यह ख्वाब ही बन चूका है कि कोई “मर्यादित” सेना हो जो बशर अल अस्साद और आई.एस. दोनों से लड़ सके. क्या अमरिका आई.एस. के विरुद्ध खड़ी फौलादी तिकड़ी ईरान-सीरिया-हेज़ोबोलाह के साथ खड़ा होगा, या फिर वह अपने सहयोगी इजराइल, सऊदी अरबिया और तुर्की के साथ जाएगा जो आई.एस. को रणनीतिक संपत्ति मानते हैं? या फिर वह वही करेगा जो आज कर रहा कि मध्य के विरुद्ध दोनों तरफ खेलने का खेल?

2012 से अमरिका को यह न केवल पता था कि ईराक और सीरिया में आई.एस. जैसी ताकत पनप रही है बल्कि वह खुद इसमें शामिल था. या तो पश्चिमी ताकतें यह मानती हैं कि टुकड़ों में बटा पश्चिमी एशिया उनके हक के लिए वाजिब है या फिर वे मुर्ख हैं. यह फैसला तय है. कोई भी रास्ता हो, उसकी कीमत तो पूरी दुनिया को चुकानी होगी, और ख़ासतौर पर इस तेल से भरपूर संसाधन वाले क्षेत्र में रहने वाली जनता को, जो शापित संसाधन, दुर्भाग्यपूर्ण क्षेत्र है।

 

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।

 

 

 

 

बशर अल अस्साद
आई.एस
ईरान
सीरिया
हेज़ोबोलाह
कुर्द
एरदोगन
इराक

Related Stories

अयोध्या विवाद पर श्री श्री रविशंकर के बयान के निहितार्थ

शरणार्थी संकट और उन्नत पश्चिमी दुनिया

इरान अमेरिका परमाणु समझौता : सफलता या ईरान का समर्पण?


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License