NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
क्या आपको मालूम है श्रम क़ानूनों में बदलाव का क्यों हो रहा है विरोध?
ट्रेड यूनियनों के मुताबिक नया कानून मजदूर-मालिक संबंध के संतुलन को निर्णायक रूप से मालिक के पक्ष में स्थानांतरित कर देगा। इस नए कानून में ऐसे कई प्रावधान हैं जो श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के कई छोटे अधिकारों को खत्म कर देंगे। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Aug 2019
Labour law

श्रम कानूनों में संशोधन के ख़िलाफ़ शुक्रवार को पूरे देश में ट्रेड यूनियन प्रतिरोध दिवस मना रही हैं। सरकार ने 44 कानूनों को चार कानून में बदलने का फैसला लिया है। ये कानून मजदूरी और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े हैं। 

क्या है मजदूरी संहिता 2019 संबंधी विधेयक

लोकसभा ने मंगलवार को मजदूरी संहिता 2019 संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी। विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि न्यूनतम मजदूरी में हर पांच साल में संशोधन किया जाएगा। वेतन संहिता विधेयक सरकार की ओर से परिकल्पित चार संहिताओं (कानून) में से एक है। ये चार संहिताएं पुराने 44श्रम कानूनों की जगह लेंगी।

विधेयक के उद्देश्यों में बताया गया है कि ये निवेशकों की सहूलियत और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए निवेश को आकर्षित करने में मदद करेंगी। ये चार संहिताएं वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा एवं कल्याण और औद्योगिक संबंध से जुड़ी हैं।

इसे पढ़ें : मोदी बनाम मज़दूर: मज़दूरों की सुरक्षा वाले श्रम क़ानूनों का सत्यानाश

वर्तमान में न्‍यूनतम वेतन अधिनियम और वेतन का भुगतान अधिनियम दोनों को एक विशेष वेतन सीमा से कम और अनुसूचित रोजगारों में नियोजित कामगारों पर ही लागू करने के प्रावधान है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक से हर कामगार के लिए भरण-पोषण का अधिकार सुनिश्चित होगा और मौजूदा लगभग 40 से 100 प्रतिशत कार्यबल को न्‍यूनतम मजदूरी के विधायी संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर कामगार को न्‍यूनतम वेतन मिले, जिससे कामगार की क्रय शक्ति बढ़ेगी और अर्थव्‍यवस्‍था में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

इस विधेयक में राज्‍यों द्वारा कामगारों को डिजिटल मोड से वेतन के भुगतान को अधिसूचित करने की परिकल्‍पना की गई है। इसमें कहा गया है कि विभिन्‍न श्रम कानूनों में वेतन की 12 परिभाषाएं हैं, जिन्‍हें लागू करने में कठिनाइयों के अलावा मुकदमेबाजी को भी बढ़ावा मिलता है। इस परिभाषा को सरल बनाया गया है, जिससे मुकदमेबाजी कम होने और एक नियोक्‍ता के लिए इसका अनुपालन सरल करने की उम्‍मीद है। इससे प्रतिष्‍ठान भी लाभान्वित होंगे, क्‍योंकि रजिस्‍टरों की संख्‍या, रिटर्न और फॉर्म आदि न केवल इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से भरे जा सकेंगे और उनका रख-रखाव किया जा सकेगा, बल्कि यह भी कल्‍पना की गई है कि कानूनों के माध्‍यम से एक से अधिक नमूना निर्धारित नहीं किया जाएगा।

वर्तमान में अधिकांश राज्‍यों में विविध न्‍यूनतम वेतन हैं। वेतन पर कोड के माध्‍यम से न्‍यूनतम वेतन निर्धारण की प्रणाली को सरल और युक्तिसंगत बनाया गया है। रोजगार के विभिन्‍न प्रकारों को अलग करके न्‍यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड बनाया गया है। न्‍यूनतम वेतन निर्धारण मुख्‍य रूप से स्‍थान और कौशल पर आधारित होगा। इसके तहत निरीक्षण व्यवस्था में अनेक परिवर्तन किए गए हैं। इनमें वेब आधारित बिना बारी के कम्‍प्‍यूटरीकृत निरीक्षण योजना, अधिकार क्षेत्र मुक्‍त निरीक्षण, निरीक्षण के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से जानकारी मांगना और जुर्मानों का संयोजन आदि शामिल हैं। इन सभी परिवर्तनों से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ श्रम कानूनों को लागू करने में सहायता मिलेगी।

ट्रेड यूनियन की क्या है आपत्ति 

देश भर की ट्रेड यूनियन का कहना है कि ये बदलाव मजदूर विरोधी हैं और इससे सिर्फ चुनिंदा कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचेगा। विधेयक में विपक्ष की तरफ से उठाये गये सभी मुद्दों और आपत्तियों की अनदेखी की गई। इसमें कर्मचारियों के अधिकारों की कटौती की गयी है।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इस विधेयक में वेतन की तीन जरूरी विशेषताओं को बदला जा रहा है। इस विधेयक में यह साफ नहीं न्यूनतम मजदूरी की गणना कैसे की जाएगी, कार्य दिवस क्या होगा और वे कौन से तरीके होंगे जिनसे कानून को इन पर लागू किया जाएगा।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि पहले इन कानूनों के पीछे भावना यह होती थी कि श्रमिक एक वंचित तबके से हैं और जो सामाजिक और आर्थिक रूप से मालिकों के शोषण के दबाव का मुकाबला करने में असमर्थ हैं और इसलिए उन्हें सुरक्षात्मक कानून की आवश्यकता है। इस विधेयक से लगता है कि सरकार की सोच यह है कि इस तरह के संरक्षण की कोई जरूरत ही नहीं है और इससे मालिकों को कम से कम मुआवजा या वेतन देकर असहाय श्रमिकों से अधिक से अधिक काम लेने में खुली छूट मिलेगी।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि कोड ऑन वेजेज बिल में न्यूनतम मजदूरी का ठोस फॉर्मूला (2700 कैलोरीज प्रतिदिन इनटेक पर आधारित) शामिल नहीं है। इस फॉर्मूले को 15वीं भारतीय श्रम कॉन्फ्रेंस में सर्वसम्मति से अपनाया गया था। नए बिल ने व्यावहारिक तौर पर न्यूनतम मजदूरी तय करने का फैसला पूरी तरह सरकार और नौकरशाही पर छोड़ दिया है। हालांकि त्रिपक्षीय न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का प्रावधान बिल में रखा गया है लेकिन इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि बोर्ड की सिफारिशें सरकार पर बाध्य नहीं होंगी।

ट्रेड यूनियनों के मुताबिक यह विधेयक मजदूर-मालिक संबंध के संतुलन को निर्णायक रूप से मालिक के पक्ष में स्थानांतरित कर देगा। उनके मुताबिक नई संहिता में ऐसे कई प्रावधान हैं जो श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के कई छोटे अधिकारों को खत्म कर देगा। साथ ही उनका कहना है कि इसे न्यूनतम मजूदरी जैसे प्रावधान ठीक तो हैं लेकिन क्या सरकार इसे लागू करा पाएगी?

Labour Laws
Labour Right
trade unions
loksabha
Modi government
BJP
minimum wages
Indian Labor Conference
AICCTU
UTUC
CITU

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई


बाकी खबरें

  • privatization
    अजय कुमार
    प्राइवेटाइजेशन की नीति से भारत को फ़ायदा या नुक़सान? चीन ने कैसे पछाड़ा अमेरिका को!
    26 Sep 2021
    फॉर्चून मैगजीन ने दुनिया की 500 सबसे बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की लिस्ट दी है। इस लिस्ट के मुताबिक चीन की बड़ी कंपनियों ने अमेरिका की कई कंपनियों को अधिग्रहित कर लिया है। 500 कंपनियों की इस लिस्ट में …
  • Kamla Bhasin
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    हवाओं सी बन रही हैं लड़कियां… उन्हें मंज़ूर नहीं बेवजह रोका जाना
    26 Sep 2021
    इतवार की कविता: अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस...कमला भसीन और उमड़ती लड़कियां।
  • Hafte ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    जनगणना-विवाद, बेहाल असम और पीएम मोदी का यूएस दौरा
    25 Sep 2021
    हफ़्ते की तीन बड़ी खबरों की व्याख्या सहित चर्चा: 1. सन् 2011 से पहले कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने संसद और संसद के बाहर वादा किया था कि 2011 की जनगणना में SC/ST की तरह OBC की भी गणना कराई…
  • germany election polls
    उपेंद्र स्वामी
    दुनियाभर की: संसदीय चुनावों में वामपंथी धड़े की जीत की संभावना से जर्मनी के धनकुबेर परेशान
    25 Sep 2021
    जर्मनी के ये चुनाव महत्वपूर्ण हैं क्योंकि 16 साल बाद चांसलर एंजेला मर्केल अपने पद से हट रही हैं।
  • CAA
    असद रिज़वी
    CAA विरोधी आंंदोलन: कोर्ट का योगी सरकार को झटका, प्रदर्शनकारियों की ज़मानत रद्द करने से किया इंकार
    25 Sep 2021
    यूपी सरकार ने ज़िला अदालत में अर्ज़ी देकर कहा था कि तीन प्रदर्शनकारियों (कांग्रेस नेता सदफ़ जाफ़र, रंगकर्मी दीपक मिश्रा “कबीर” और अधिवक्ता मोहम्मद शोएब ) द्वारा ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License