NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
'क्या बाहुबल वाले राष्ट्रवाद से दुनिया में किसी मुद्दे का हल निकला है?'
पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को अप्रभावी करने के केंद्र के फैसले का विरोध किया है तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद-370 संबंधी आदेश के खिलाफ यचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Aug 2019
jammu and kashmir

जम्मू-कश्मीर पर सरकार के कदम पर पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल के एक बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को सवाल किया कि क्या दुनिया में कहीं भी 'बलपूर्वक राष्ट्रवाद' से किसी समस्या का समाधान निकला है।

पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम ने ट्वीट किया, 'शाह फैसल सिविल सेवा परीक्षा में पहले स्थान पर आए और भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर सरकार के कदम को सबसे बड़ा विश्वासघात बताया है।'

उन्होंने कहा, 'अगर शाह फैसल ऐसा सोचते हैं तो कल्पना कीजिये जम्मू-कश्मीर के लाखों आम लोग क्या सोचते होंगे।'

चिदंबरम ने सवाल किया, 'क्या बाहुबल वाले राष्ट्रवाद से दुनिया में किसी मुद्दे का हल निकला है?'

गौरतलब है कि संसद ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा संबंधी अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव संबंधी संकल्प और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने की बुधवार को घोषणा की। 

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने संबंधी राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख उसे तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए किया गया।

याचिका दायर करने वाले वकील एम एल शर्मा ने न्यायालय से अपील की कि उनकी याचिका को 12 या 13 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। पीठ ने शर्मा से कहा कि इस याचिका पर सुनवाई उचित समय पर होगी।

जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के फ़ैसले के खिलाफ दिल्ली समेत देश भर में वाम दलों सहित नागरिक समाज इसकी आलोचना कर रहा है। इसके खिलाफ जगह जगह  पर विरोध प्रदर्शन किया  जा रहे और जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता और अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग की जा रही है ।
 
सभी कह रहे हैं कि सरकार के इस कदम ने लोकतंत्र और संविधान को एक बड़ा आघात पहुंचाया है। इनका मानना है कि पाकिस्तानी हमलावरों का मुकाबला करते हुए कश्मीर का अवाम भारत सरकार के इस पवित्र और स्पष्ट वचन के साथ भारत मे शामिल हुआ था कि उसे विशेष दर्जा और स्वायत्तता दी जाएगी। 

इसका ही बाद में आर्टिकल 370 के रूप में संविधान में प्रावधान किया गया। मोदी सरकार ने इस वचन से हटकर जम्मू और कश्मीर की जनता के साथ विश्वासघात किया है।

कश्मीर में डोभाल की तस्वीर पर बोले आजाद, 'पैसे देकर आप किसी को साथ ले सकते हो'

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के कई प्रावधान हटाए जाने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की घाटी के कुछ लोगों के साथ बातचीत करते हुए तस्वीर सामने आने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने बृहस्पतिवार को कहा 'पैसे देकर आप किसी को भी साथ ले सकते हो।'

डोभाल की इस तस्वीर के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने संवाददाताओं से कहा, 'पैसे देकर आप किसी को भी साथ ले सकते हो।'

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के कई प्रावधान खत्म किये जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने का कदम उठाए जाने के बाद डोभाल की कश्मीर घाटी के शोपियां में कुछ लोगों के साथ बातचीत करते हुए तस्वीर सामने आई है।
  
          (भाषा इनपुट के साथ )

Jammu and Kashmir
Article 370
Indian constitution
Narendra modi
Amit Shah
P. Chidambaram
president ramnath kovind

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License