NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या बीजेपी को अमित शाह का विकल्प नहीं मिल रहा है?
आप इसे पहेली के रूप में ऐसे पेश कर सकते हैं कि बीजेपी के अध्यक्ष गृहमंत्री बन गए और फिर उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष को रिप्लेस करते हुए बीजेपी अध्यक्ष पद पर बने रहने का फैसला किया है। अब गंगाधर ही शक्तिमान है!
अमित सिंह
15 Jun 2019
फाइल फोटो
(फोटो साभार: डीएनए)

यह बात तो दशकों से मशहूर है कि कांग्रेस को परिवार का विकल्प नहीं मिलता इसलिए कोई हैरानी की बात नहीं है कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ना चाह रहे हैं, लेकिन विकल्प नहीं मिल रहा है। मगर सत्ता का रोग हर पार्टी को देर सबेर लगता है और यह लगभग एक समान होता है। राहुल गांधी के समान ही अब बीजेपी को भी अमित शाह का विकल्प नहीं मिल रहा है। 

कांग्रेस ने अध्यक्ष पद से राहुल का इस्तीफा अस्वीकार करके उन्हें बने रहने के लिए कहा है। वहीं भाजपा अध्यक्ष बदलने की तमाम अटकलें लगने के बाद अब खबर है कि भाजपा ने भी अध्यक्ष पद का चुनाव टाल दिया है। भाजपा में पार्टी के नाम पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह के अलावा पॉवर सेंटर कहां है यह तो किसी को नहीं मालूम, लेकिन खबरें हैं कि बीजेपी ने अध्यक्ष पद पर कोई नियुक्ति न लेने का फैसला किया है। पार्टी को अभी पूरे देश में फैलाना है, चार राज्यों में चुनाव आने वाले हैं, ऐसे में अमित शाह ही भारत के गृहमंत्री के साथ साथ बीजेपी के अध्यक्ष भी बने रहेंगे।

आप इसे पहेली के रूप में ऐसे पेश कर सकते हैं कि बीजेपी के अध्यक्ष गृहमंत्री बन गए और फिर उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष को रिप्लेस करते हुए बीजेपी अध्यक्ष पद पर बने रहने का फैसला किया है। अब गंगाधर ही शक्तिमान है!

बीजेपी वह पार्टी है जो कभी राजनीति में शुचिता की घोर हिमायती कही जाती थी। कभी कहा जाता था कि भाजपा 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत पर चलती है, लेकिन सितंबर, 2012 में पार्टी के संविधान में संशोधन हुआ और अब इसमें अध्यक्ष पद के लिए किसी व्यक्ति को तीन तीन साल के दो कार्यकाल का प्रावधान किया गया। अब पार्टी के संविधान में अध्यक्ष पद पर बैठे व्यक्ति के लिए 'एक व्यक्ति, एक पद' का सिद्धांत लागू होता है या नहीं, इसका कोई जिक्र नहीं है। हालांकि, 2014 में गृहमंत्री बनने के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और अमित शाह को बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था।

भारत के गृहमंत्री का पद संभालने के बाद यह मामला उलझता दिख रहा है। अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद यह चर्चा खूब हुई कि अमित शाह थोड़ा कड़क छवि के हैं, वे देश के मुश्किल मसले सुलझा देंगे।

लेकिन गृहमंत्री बनते ही उन्होंने पहला काम पार्टी के लिए शुरू किया। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी के सदस्यता अभियान की कमान सौंप कर पार्टी प्रसार का नया कार्यक्रम लॉन्च किया है। 

गृहमंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने गृहमंत्री के रूप में जनता को कोई संदेश देने की जगह बीजेपी नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। इन बैठकों में बीजेपी के विस्तार, आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव, पार्टी के सदस्यता अभियान और राज्य कार्यकारिणी के गठन पर चर्चाएं हो रही हैं।

गृहमंत्री बनने के बाद उन्होंने बंगाल में हो रही हिंसा को लेकर राज्यपाल से मुलाकात जरूर की, लेकिन वह भी शायद बीजेपी अध्यक्ष की हैसियत से ही रही हो। क्योंकि पिछले कुछ सालों से बीजेपी का मुख्य फोकस बंगाल की सत्ता पर कब्जा करना है, और लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने यह फोकस और सघन कर दिया है। राज्यपाल से अमित शाह की मुलाकात के दौरान बंगाल में राष्ट्रपति शासन पर चर्चाएं होती रहीं। बीजेपी के तमाम नेता चाहते हैं कि बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। गृहमंत्री ने राज्यपाल के अलावा इस संबंध में एनएसए, आईबी और रॉ चीफ के साथ भी मीटिंग की। 

यह पूरा हफ्ता अमित शाह पार्टी की बैठकों, बीजेपी के विस्तार, सदस्यता अभियान, राज्य कार्यकारिणी के गठन, चुनावी तैयारियों और बीजेपी संगठन को दुरुस्त करने के लिए सुर्खियों में रहे। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड बीजेपी के कोर ग्रुप की मीटिंग लेकर तीनों राज्यों की सरकारों और पार्टी के नेताओं को निर्देश दिए कि नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं को एक महीने में मनाया जाए।

कोई पार्टी अपना लगातार विस्तार करने का प्रयास करे, यह तो बेहद तारीफ की बात है। लेकिन किसी पार्टी का अध्यक्ष ही अगर देश का गृहमंत्री हो, तो क्या वह अपने इस देश के दूसरे सबसे बड़े पद का पार्टी के हित में दुरुपयोग नहीं करेगा? 

आप कह सकते हैं कि अमित शाह बीजेपी पदाधिकारियों के साथ जो बैठकें कर रहे हैं, वह पार्टी अध्यक्ष की हैसियत से कर रहे हैं लेकिन क्या जब वे अधिकारियों को आदेश देंगे तो उन्हें यह बताया करेंगे कि अमुक आदेश पार्टी अध्यक्ष की हैसियत से है और अमुक आदेश गृहमंत्री की हैसियत से? 

ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है या पहली पार्टी ऐसा कर रही है आप ऐसे बहुत सारे उदाहरण पेश करेंगे कि फलां नेता मुख्यमंत्री, गृहमंत्री या प्रधानमंत्री के साथ-साथ अपनी पार्टी का भी अध्यक्ष रहा है लेकिन इस पर जवाब यही है कि 'पार्टी विद डिफरेंट' का नारा देने वाली बीजेपी भी बाकी दलों जैसी हो गई। बीजेपी के वादों और दावों से उसके क्रियाकलापों का कोई मेल होता नहीं दिख रहा है। 

भारत के गृहमंत्री बनने से पहले वे भाजपा कार्यकर्ताओं से कह चुके हैं कि 'पार्टी का चरमोत्कर्ष अभी बाकी है...हमारी कल्पना है कि हर प्रदेश में हमारी सरकार हो। पंचायत से पार्लियामेंट तक 'भाजपाराज' होना चाहिए।' वे गृहमंत्री बनने से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं से यह भी कह चुके हैं कि 'अगले 50 साल तक भाजपा राज करेगी।' 

अब भारत के गृहमंत्री के रूप में वे बीजेपी को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। यह सब देखकर अमित शाह की यह मंशा स्पष्ट होती है कि भाजपा अगले 50 सालों तक देश पर किस तरह राज करेगी!

लेकिन सबसे हैरानी तो इस बात की है कि देश की विपक्षी पार्टियां इस मसले पर मौन हैं। वह कांग्रेस भी मौन है जिसे ऐसे आरोपों का बार-बार सामना करना पड़ा है।

BJP
Amit Shah
Narendra modi
Congress
Rahul Gandhi
rajnath singh

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Economic Survey
    वी श्रीधर
    आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22: क्या महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था के संकटों पर नज़र डालता है  
    01 Feb 2022
    हाल के वर्षों में यदि आर्थिक सर्वेक्षण की प्रवृत्ति को ध्यान में रखा जाए तो यह अर्थव्यवस्था की एक उज्ज्वल तस्वीर पेश करता है, जबकि उन अधिकांश भारतीयों की चिंता को दरकिनार कर देता है जो अभी भी महामारी…
  • muslim
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: मुसलमानों के नाम पर राजनीति फुल, टिकट और प्रतिनिधित्व- नाममात्र का
    01 Feb 2022
    देश की आज़ादी के लिए जितना योगदान हिंदुओं ने दिया उतना ही मुसलमानों ने भी, इसके बावजूद आज राजनीति में मुसलमान प्रतिनिधियों की संख्या न के बराबर है।
  • farmers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान
    31 Jan 2022
    एक साल से अधिक तक 3 विवादित कृषि कानूनों की वापसी के लिए आंदोलन करने के बाद, किसान एक बार फिर सड़को पर उतरे और 'विश्वासघात दिवस' मनाया। 
  • Qurban Ali
    भाषा सिंह
    प्रयागराज सम्मेलन: ये लोग देश के ख़िलाफ़ हैं और संविधान के ख़ात्मे के लिए काम कर रहे हैं
    31 Jan 2022
    जिस तरह से ये तमाम लोग खुलेआम देश के संविधान के खिलाफ जंग छेड़ रहे हैं और कहीं से भी कोई कार्ऱवाई इनके खिलाफ नहीं हो रही, उससे इस बात की आशंका बलवती होती है कि देश को मुसलमानों के कत्लेआम, गृह युद्ध…
  • Rakesh Tikait
    न्यूज़क्लिक टीम
    ख़ास इंटरव्यू : लोगों में बहुत गुस्सा है, नहीं फंसेंगे हिंदू-मुसलमान के नफ़रती एजेंडे में
    31 Jan 2022
    ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को ज़मीनी चुनौती देने वाले बेबाक किसान नेता राकेश टिकैत से लंबी बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि इन चुनावों में किसान…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License