NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या भारत में सबसे बड़े फेक न्यूज़ नेटवर्क के मुखिया अमित शाह ही हैं ?
हफ पोस्ट न्यूज़ वेबसाइट के संपादक अमन सेठी ने महीनों सैंकड़ों पन्नों के दस्तावेज़ की खाक छानने और कई लोगों से मिलने के बाद पाया है कि 166 लोगों की यह टीम देश के 12 जगहों पर अपना दफ्तर रखती है। इसका काम है व्हाट्स एप के लिए मीम तैयार करना, चुनावों के समय न्यूज़ वेबसाइट की शक्ल में प्रोपेगैंडा वेबसाइट लांच करना, बदनाम करने और अफवाह फैलाने का अभियान चलाना, अपने नेता के समर्थन में फेसबुक पेज चलाना, राजनीतिक अभियान चलाना
रवीश कुमार
05 Apr 2019
amit shah
image courtesy - huff post

एसोसिशएन ऑफ बिलियन माइंड्स यानी एबीएम, यह वो संगठन और नेटवर्क है जो बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह की पर्सनल टीम की तरह काम करती है। बीजेपी अपने आप में एक विशाल संगठन है। निष्ठावान कार्यकार्ताओं की फौज है। इसके बाद भी एबीएम पार्टी के समानांतर सिर्फ अध्यक्ष की मर्ज़ी से काम करने वाला ऐसा नेटवर्क है जिसके बारे में ज़्यादातर कार्यकर्ताओं को पता भी नहीं होगा। सांसदों को भी पता नहीं होगा। जिन्हें पता होगा उन्हें बस इतना कि यह अमित शाह की पर्सनल टीम है।

हफ पोस्ट न्यूज़ वेबसाइट के संपादक अमन सेठी ने महीनों सैंकड़ों पन्नों के दस्तावेज़ की खाक छानने और कई लोगों से मिलने के बाद पाया है कि 166 लोगों की यह टीम देश के 12 जगहों पर अपना दफ्तर रखती है। इसका काम है व्हाट्स एप के लिए मीम तैयार करना, चुनावों के समय न्यूज़ वेबसाइट की शक्ल में प्रोपेगैंडा वेबसाइट लांच करना, बदनाम करने और अफवाह फैलाने का अभियान चलाना, अपने नेता के समर्थन में फेसबुक पेज चलाना, राजनीतिक अभियान चलाना जैसे भारत के मन की बात और मैं भी चौकीदार। यहां यह सवाल उठता है कि क्या भारत में सबसे बड़े फेक न्यूज़ नेटवर्क के मुखिया अमित शाह ही हैं ?

इस लंबी रिपोर्ट को इसलिए भी पढ़ें ताकि आप यह देख सकें कि हमारे राजनीतिक दल किस तरह से बदल रहे हैं। वे दिनों दिन रहस्य होते जा रहे हैं। आपके सामने बीजेपी का एक कार्यकर्ता खड़ा है। जिसे आप जानते हैं, पहचानते हैं। गले लगाते हैं और नाराज़गी ज़ाहिर करते हैं। मगर अब वो सिर्फ एक इंसानी रोबोट है। बल्कि वो कुछ भी नहीं है। प्लास्टिक के खिलौने की तरह उसका काम है चौराहे पर लगाए गए शामियाने या किसी धरना-प्रदर्शन में जाकर खड़े हो जाना ताकि लगे कि वहां कोई पार्टी है। दरअसल अब पार्टी वहां नहीं हैं। पार्टी वहां है जहां ABM जैसे नेटवर्क हैं।

दुनिया भर में ऐसे गुप्त संगठन जिनके पास डेटा को समझने और हासिल करने की ताकत होती है, अब चुनावों को प्रभावित कर रहे हैं। अभी ही ये नेटवर्क जीवंत कार्यकर्ताओं से लैस पार्टी को विस्थापित कर चुके हैं। पार्टी इनके ही बनाए प्लान के हिसाब से काम करती है। काम में आप यह शामिल करें कि कार्यकर्ता सिर्फ इनके बनाए व्हाट्एस एप मीम को फार्वर्ड करने और फेसुबक पेज को लाइक करने का एजेंट बनकर रह जाता है।

यह बदलाव सभी दलों में धीरे-धीरे आ रहा है मगर बीजेपी के पास संसाधन बहुत है इसलिए उसका नेटवर्क कहीं ज़्यादा परिपक्व हो चुका है। पार्टी के भीतर भी कुछ नेता छोटे स्तर पर ऐसे नेटवर्क बना रहे हैं। अगली बार जब वर्चस्व की लड़ाई होगी तो इन नेताओं के बीच इन नेटवर्क की भूमिका ख़तरनाक हो जाएगी। हफिंगटन पोस्ट  की इस रिपोर्ट को ज़रूर पढ़िए कि कैसे 2014 से पहले एक एनजीओ बनाया जाता है। तीन साल वह बेकार रहता है फिर उसका नाम बदल कर Assocation of Billion Minds, ABM कर दिया गया। इसका कुछ भी पब्लिक में नहीं है। कानून के नियम ऐसे हैं जिसका लाभ उठाकर इस तरह का संगठन बनाया गया है। आप नहीं जान सकेंगे कि इसे चलाने के लिए कौन पैसा दे रहा है। बीजेपी पैसा दे रही है तो वह भी जान सकेंगे जिससे कि इस ख़र्च को आप चुनावी ख़र्च में जोड़ा जा सके।

अमन सेठी की यह रिपोर्ट मौजूदा समय में राजनीतिक दलों के भीतर फाइनैंस की तस्वीर को भी सामने लाती है। इनका एक ही काम है। मुद्दों को गढ़ना, हवा बनाना और पार्टी या व्यक्ति के हाथ में सत्ता सौंप देना ताकि वह फिर सत्ता में आकर बिजनेस घरानों पर सरकारी खज़ाना लुटा सके। सोचिए अमित शाह से संबंधित एक ऐसी टीम है जो फेक न्यूज़ फैलाती है। फर्ज़ी वेबसाइट लांच करती है। यह नए दौर की अनैतिकता है। जिसके बारे में सामान्य पाठकों को पता नहीं है। अंग्रेज़ी में इस रिपोर्ट को आप ध्यान से पढ़ें। हो सके तो दो बार पढ़ें।

हिन्दी के एक पाठक ने सवाल किया कि हिन्दी में ऐसी रिपोर्ट क्यों नहीं होती। जवाब में कई कारण बता सकता हूं लेकिन हिन्दी में ऐसी रिपोर्ट नहीं हो सकती है। हिन्दी पत्रकारिता का मानव संसाधन औसत से 99 अंक नीचे है। शून्य से एक पायदान ऊपर मगर अहंकार में सबसे ऊपर। आप पिछले पांच साल के दौरान एक खबर नहीं बता सकते हैं जो इस तरह की हो और उसे किसी हिन्दी पत्रकार ने की हो।

भविष्य के हिन्दी पत्रकारों के लिए यह सवाल बहुत शानदार है कि हिन्दी में ऐसी रिपोर्ट क्यों नहीं होती है। जवाब के लिए ज़रूरी है कि जो छात्र हिन्दी पत्रकारिता पढ़ रहे हैं, उन्हें ऐसी रिपोर्ट को बार बार पढ़नी चाहिए और इस पर नोट्स बनाने चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि कोई न कोई बंदा निकलेगा जो अमन सेठी के स्तर की पत्रकारिता करेगा। आने वाले समय में वही अच्छा पत्रकार बनेगा जो कानून, डेटा और अकाउंट की बारीक समझ रखता हो। मुझे कोई कंपनी के पेपर्स दे जाता है तो हाथ-पांव फूल जाते हैं। समझ ही नहीं आता है कि कहां क्या हो रहा है। कैसे उन कागज़ात से चोरी पकड़नी है।

अगर आप पाठक हैं तो हफ पोस्ट की इस लंबी रिपोर्ट को पढ़िए। अंग्रेज़ी नहीं आती है तब भी पढ़िए। जानने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि हमारे राजनीतिक दल किस तरह रहस्यमयी और निजी संगठनों की जेब में चले गए हैं। उस जेब में हाथ सिर्फ एक या दो ही नेता डाल सकते हैं। लाखों कार्यकर्ताओं को अंधेरे में रखा जा रहा है ताकि वे सिर्फ नारे लगाने की मशीन बने रहें। एक मतदाता को यह जानने के लिए पढ़ना चाहिए कि वह जिन मुद्दों को देश के भविष्य के लिए समझता है क्या वे मुद्दे वास्तिवक हैं या उसके अपने मुद्दों को गोबर से ढंक देने के लिए गढ़े गए हैं। अच्छी रिपोर्ट वही होती है जिसे पढ़ने में सबका भला हो। आमीन।

(ये लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फेसबुक से साभार लिया गया है।)

Amit Shah
amit shah IT CELL
association of billion minds
abm
fake news
head of fake news
bjp fake news

Related Stories

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

क्या हिंदी को लेकर हठ देश की विविधता के विपरीत है ?

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बिहार: नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध

लाल क़िले पर गुरु परब मनाने की मोदी नीति के पीछे की राजनीति क्या है? 

बिहार : हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक कुंवर सिंह के परिवार को क़िले में किया नज़रबंद

अमित शाह का शाही दौरा और आदिवासी मुद्दे

खोज ख़बर : VHP की दिल्ली पुलिस को धमकी, गृह मंत्री रहे चुप, प्रतिरोध में हुईं आवाज़ें तेज़


बाकी खबरें

  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    यूपी: योगी 2.0 में उच्च-जाति के मंत्रियों का दबदबा, दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की जगह ख़ानापूर्ति..
    02 Apr 2022
    52 मंत्रियों में से 21 सवर्ण मंत्री हैं, जिनमें से 13 ब्राह्मण या राजपूत हैं।
  • अजय तोमर
    कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह
    02 Apr 2022
    भारी संख्या में दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन देश भर में श्रम के अवसरों की स्थिति को दर्शाता है।
  • प्रेम कुमार
    सीबीआई पर खड़े होते सवालों के लिए कौन ज़िम्मेदार? कैसे बचेगी CBI की साख? 
    02 Apr 2022
    सवाल यह है कि क्या खुद सीबीआई अपनी साख बचा सकती है? क्या सीबीआई की गिरती साख के लिए केवल सीबीआई ही जिम्मेदार है? संवैधानिक संस्था का कवच नहीं होने की वजह से सीबीआई काम नहीं कर पाती।
  • पीपल्स डिस्पैच
    लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया
    02 Apr 2022
    इज़रायल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में और विदेशों में रिफ़्यूजियों की तरह रहने वाले फ़िलिस्तीनी लोग लैंड डे मनाते हैं। यह दिन इज़रायली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ साझे संघर्ष और वापसी के अधिकार की ओर प्रतिबद्धता का…
  • मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद ज़ीशान अहमद
    भारत को अपने पहले मुस्लिम न्यायविद को क्यों याद करना चाहिए 
    02 Apr 2022
    औपनिवेशिक काल में एक उच्च न्यायालय के पहले मुस्लिम न्यायाधीश, सैयद महमूद का पेशेवराना सलूक आज की भारतीय न्यायपालिका में गिरते मानकों के लिए एक काउंटरपॉइंट देता है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License