NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या चुनाव में मोदी, अमित शाह, नोटबंदी, रफ़ाल जैसे शब्द प्रतिबंधित हैं?
उत्तराखंड में एम.सी.एम.सी यानी मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी ने विपक्ष को चुनावी पर्चे में मोदी या मोदी सरकार जैसे शब्द इस्तेमाल करने से मना कर दिया है। फिर ‘मोदी सरकार’ की जगह क्या? हमने ये सवाल योगेश मिश्रा से पूछा तो उन्होंने कहा कि आप नाम नहीं ले सकते।
मुकुल सरल
25 Mar 2019
क्या चुनाव में मोदी, अमित शाह जैसे शब्द प्रतिबंधित हैं?

क्या चुनाव में नरेंद्र मोदी का नाम लेने की मनाही है। क्या विपक्ष को मोदी सरकार की जगह भारत सरकार की आलोचना करनी होगी। और मोदी ही नहीं अमित शाह का नाम लेकर भी आप कुछ कह या लिख नहीं सकते? ऐसा कहना या सोचना है उत्तराखंड में एम.सी.एम.सी यानी मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी का। इस कमेटी को तो नोटबंदी, रफ़ाल जैसे शब्दों पर भी आपत्ति है। और क्रांतिकारी अभिवादन भी गवारा नहीं।

आपको ये सब बातें कहानी लग रही होगी, लेकिन ये सच है। ये सब हुआ है उत्तराखंड के नैनीताल-उधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र में। इस सीट पर पर्चा पोस्टर आदि छापने की अनुमति देने वाली एम.सी.एम.सी ने इसी आधार पर भाकपा माले के प्रत्याशी का चुनावी पर्चा ख़ारिज कर दिया और दूसरा लिखने को कहा। आप ये रद्द पर्चा नीचे देख सकते हैं। पूरा पर्चा ही लाल रंग से रंगा है।

54524611_10213301263021803_5679291498097541120_o.jpg

एम.सी.एम.सी के प्रभारी अधिकारी और सूचना विभाग के उपनिदेशक योगेश मिश्रा की अगुवाई वाली इस कमेटी ने हर शब्द को लाल घेरे से घेर दिया है। अगर आप आपत्तिजनक शब्दों पर नज़र डालें तो आपको हैरत के साथ सिर्फ हँसी ही आएगी कि ऐसा भी हो सकता है! कोई अधिकारी या कमेटी इस तरह भी शब्दों को प्रतिबंधित कर सकती है!!? इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी जैसे नामों को लिखने की मनाही कर दी गई। नोटबंदी, रफ़ाल, जीएसटी जैसे तमाम शब्दों और इनके जिक्र वाले वाक्य प्रतिबंधित कर दिये गए। 

55465009_10213301263301810_8580102930823118848_o.jpg

भाकपा माले के नेता इंद्रेश मैखुरी कहते हैं कि क्या गजब किस्म की आपत्तियाँ हैं, इस कमेटी की। पर्चे में लिखे “क्रांतिकारी अभिवादन” में क्रांतिकारी से उन्हें आपत्ति हो गयी। शायद मिश्रा साहब और उनकी कमेटी को प्रतिक्रांतिकारी ज्यादा सूट करता है। “सांप्रदायिक फासीवाद के विरुद्ध” को भी कमेटी ने आपत्तिजनक करार दिया। तो क्या इस सरकारी कमेटी की किसी भी राजनीतिक पार्टी से सांप्रदायिक फासीवाद के विरुद्ध होने के बजाय सांप्रदायिकता के साथ होने की अपेक्षा होगी?

इंद्रेश कहते हैं, “गौ रक्षा ने नाम पर भीड़ हत्याओं का जिक्र भी उक्त कमेटी को आपत्तिजनक लगा। लिखे हुए पर आपत्ति क्यूँ करते हैं, जनाब! जब उन्मादी भीड़ ऐसी नृशंस वारदातों को अंजाम दे रही थी, तब यह तंत्र आपत्ति करता तो शायद ऐसी बात लिखने की नौबत ही नहीं आती।”
न्यूज़क्लिक से बातचीत में इंद्रेश मैखुरी कहते हैं कि आज सरकार की नीतियों पर टिप्पणी करने पर रोक लगाई जा रही है, कल को मिश्रा साहब जैसा ही कोई अफसर कह देगा कि विपक्षी पार्टियां चुनाव भी लड़ कर क्या करेंगी? मोदी जी लड़ तो रहे हैं चुनाव,कितना अच्छा लड़ रहे हैं,पूरे पाँच साल चुनाव प्रचार के ही मोड में रहे!”

उनके मुताबिक यह हैरतअंगेज है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का जिम्मा चुनाव आयोग ने ऐसे अफसरों के हाथ सौंपा है, जिनकी प्रतिबद्धता नियम और कायदों से ज्यादा सत्ता में बैठे लोगों के प्रति नजर आती है। आदर्श आचार संहिता का बिन्दु संख्या 4.3.1 तो कहता है कि व्यक्तिगत जीवन की आलोचना नहीं होनी चाहिए। हिंसा, घृणा को बढ़ावा देने वाली बात नहीं होनी चाहिए, तो नैनीताल जिले की एम.सी.एम.सी. के पास चुनाव संचालित करने के लिए कोई अन्य संहिता है,जिसके दम पर वे पूरा पर्चा ही बदलने को कह रहे हैं? 

54520519_10213301266021878_5502944989941858304_o.jpg
माले प्रत्याशी कैलाश पांडेय बताते हैं कि ये सरकार के अफसर हैं, जो सुझाव दे रहे हैं कि सरकार की आलोचना करनी हो तो भारत सरकार लिखिए, मोदी सरकार मत लिखिए। अब कोई इन्हें बताए कि किसी राजनीतिक पार्टी को क्या भारत सरकार की आलोचना करनी चाहिए।

कैलाश पांडेय ने कहा, “ और जब मोदी जी खुद ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ कहकर अपना प्रचार कर रही है तो फिर अफसरों को मोदी सरकार लिखने या बोलने में क्या आपत्तिजनक लग रहा है।”

माले प्रत्याशी ने बताया कि उन्होंने इस कमेटी के सामने अपने सभी तर्क रखे और पर्चा दोबारा लिखकर दिया।

प्रत्याशी कैलाश पांडेय ने बताया कि उन्होंने बस कुछ आपत्तियों को स्वीकार किया है, जैसे मोदी की जगह प्रधानमंत्री लिख दिया है और मोदी सरकार की जगह केंद्र सरकार। डोभाल की जगह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार। बाकी पर्चा वही रहा है। ये बदलाव भी इसलिए किए गए ताकि जल्द पर्चा छप सके क्योंकि यहां चुनाव में बहुत कम समय बचा है।

उन्होंने बताया कि 15 मार्च को पर्चा देकर छापने की अनुमति मांगी गई थी। और इस कमेटी ने 19 मार्च को जवाब दिया और पूरा पर्चा खारिज कर दिया। और संशोधित पर्चा होली के बाद 22 मार्च को प्रस्तुत करने का आदेश दिया। उत्तराखंड में पहले ही चरण में 11 अप्रैल को चुनाव हैं।

55802369_10213301265541866_6991136933074173952_o.jpg

संशोधित पर्चे के साथ माले प्रत्याशी ने कमेटी को ये भी चेता दिया है कि अगर कोई अन्य दल नाम लेकर पर्चा छापती है तो फिर हिसाब मांगा जाएगा।

कैलाश पांडेय से सहमति जताते हुए इंद्रेश मैखुरी कहते हैं, “मिश्रा जी जैसे अफसरों को कोई बताए कि वे जिस कमेटी के प्रभारी बनाए गए हैं, उस एम.सी.एम.सी का अर्थ -मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी है, मोदी सर्टिफिकेशन एंड मैनिजिंग कमेटी नहीं है!” 

योगेश मिश्रा की सफाई

न्यूज़क्लिक ने इस पूरे मामले में मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी के प्रभारी योगेश मिश्रा से फोन पर बात की। उनका कहना है कि आप अपने पर्चे में मोदी या मोदी सरकार का उल्लेख नहीं कर सकते। मिश्रा जी इसे व्यक्तिगत आरोप बताते हैं जिसकी उनके अनुसार चुनाव में इजाज़त नहीं है।

फिर मोदी सरकार की जगह क्या? हमने ये सवाल योगेश मिश्रा से पूछा तो उन्होंने कहा कि प्रत्याशी ने अब केंद्र सरकार लिखकर दिया है। उनके मुताबिक आप नाम नहीं ले सकते। अमित शाह की जगह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लिखिए।

लेकिन भाषण में तो नाम लेकर वार-पलटवार होते रहे हैं? इस सवाल पर योगेश मिश्रा ने कहा कि भाषण में आप नाम ले सकते हैं लेकिन लिखित पर्चे में नहीं।

आपने पर्चे में ‘भाजपा हराओ’ शब्द पर भी लाल घेरा बनाया है? ऐसा क्यों? इसके जवाब में एम.सी.एम.सी प्रभारी योगेश मिश्रा कहते हैं कि “नहीं... हमने अब एलाऊ कर दिया है। ऐसा वो लिख सकते हैं।”

क्या ऐसी गाइड लाइन ऊपर से मतलब मुख्य निर्वाचन आयोग की तरफ़ से हैं? तो उन्होंने कहा- “हां”

हमने कुछ और सवाल पूछने चाहे तो योगेश मिश्रा जी ने बताया कि वे मीटिंग में से समय निकालकर हमसे बात कर रहे हैं और इससे ज़्यादा बात नहीं कर सकते। उनके मुताबिक कुछ संशोधनों के बाद माले प्रत्याशी का पर्चा एप्रूव्ड (स्वीकृत) कर दिया गया है।

बात ख़त्म करते से पहले हमने उनसे ‘क्रांतिकारी अभिवादन’ पर उनकी आपत्ति की वजह पूछनी चाही तो उन्होंने कहा, “अरे कोई बात नहीं, क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस जी थे, हमने ओके कर दिया है। रिवाइज़ वाला ओके कर दिया है। कमेटी और कैंडिडेट दोनों सेटिस्फाई हैं।”

General elections2019
2019 आम चुनाव
UTTARAKHAND
mcmc
CPI(ML)
Narendra modi
Amit Shah
Ajit Doval
BJP
election commission of India

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • बिहारः कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाकर चिकित्सा पदाधिकारी को बनाया बंधक
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाकर चिकित्सा पदाधिकारी को बनाया बंधक
    15 Dec 2021
    कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाते हुए कटिहार में वैक्सीनेशन महाअभियान के तहत टीकाकरण के लिए मनसाही के छोटी बथना गांव गए चिकित्सा पदाधिकारी को ग्रामीणों ने दो घंटे तक बंधक बनाए रखा।
  • kisan@378
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन : पूरे 378 दिनों का ब्यौरा
    15 Dec 2021
    ‘378’... ये महज़ एक संख्या नहीं है, बल्कि वो दिन और राते हैं, जो हमारे देश के अन्नदाताओं ने दिल्ली की सड़कों पर गुज़ारी हैं, उसके बाद उन्हें एक ऐतिहासिक जीत मिली है।
  • Asha
    सरोजिनी बिष्ट
    एक बड़े आंदोलन की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशा बहनें, लखनऊ में हुआ हजारों का जुटान
    15 Dec 2021
    13 दिसंबर को "उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन" (सम्बद्ध एक्टू) के बैनर तले विभिन्न जिलों से आईं हजारों आशा बहनों ने लखनऊ के इको गार्डेन में हुंकार भरी।
  • Uttrakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: गढ़वाल मंडल विकास निगम को राज्य सरकार से मदद की आस
    15 Dec 2021
    “गढ़वाल मंडल विकास निगम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड राज्य में पर्यटन की सम्भावनाएँ तलाशना, रोजगार के अवसर तलाशना और पलायन को रोकना है ना कि मुनाफा कमाना”
  • अमेरिका में नागरिक शिक्षा क़ानूनों से जुड़े सुधार को हम भारतीय कैसे देखें?
    शिरीष खरे
    अमेरिका में नागरिक शिक्षा क़ानूनों से जुड़े सुधार को हम भारतीय कैसे देखें?
    15 Dec 2021
    "यह सुनिश्चित करना अति महत्त्वपूर्ण है कि हम अपने बच्चों को पढ़ाएं कि वे कैसे ज़िम्मेदार नागरिक बन सकें।" अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने पिछले दिनों वहां के एक मिडिल स्कूल में यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License