NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या देश के अंदर एक अवैध सेना का निर्माण किया जा चुका है ?
देश में आधिकारिक फौज से बड़ी कोई निजी फौज कैसे हो सकती है? यदि है, तो क्यों है? क्या RSS को भारतीय सेना की 'क्षमता' पर भरोसा नहीं है?...
अभिषेक श्रीवास्तव
13 Feb 2018
mohan bhagwat
हस्तक्षेप

मोहनजी भागवत के ताज़ा बयान से कुछ बातें साफ़ हैं जिन्हें अब तक कुछ लोग हलके में लेते आये थे.

1- RSS के पास भारत सरकार की आधिकारिक सेना के समानांतर एक हथियारबंद सेना मौजूद है.

2- भारतीय सेना के जैसा अनुशासन संघ की सेना में है, जैसा उन्होंने कहा.

3- भारत सरकार की सेना जंग की तैयारी करने में छह महीने लेगी जबकि RSS के स्वयंसेवकों को ऐसा करने में महज तीन दिन लगेंगे.

देश में आधिकारिक फौज से बड़ी कोई निजी फौज कैसे हो सकती है? यदि है, तो क्यों है? क्या RSS को भारतीय सेना की 'क्षमता' पर भरोसा नहीं है? चूंकि अब तक सत्तर साल में RSS की फौज का इस्तेमाल सरहद पर नहीं हुआ क्योंकि ''संविधान'' इसकी इजाज़त नहीं देता, तो सवाल उठता है कि इतनी ताकतवर फौज देश में अब तक कर क्या रही थी? यह दावा कि आरएसएस की सेना भारतीय सेना से ज्यादा क्षमतावान है, क्या इस संदेह को नहीं पैदा करता कि इस देश में कभी भी गृहयुद्ध करवाया जा सकता है या तख्तापलट किया जा सकता है? उत्तर-पूर्व के हथियारबंद संगठनों से लेकर लिट्टे या माओवादियों तक किसी ने भी आज तक भारतीय सेना को ऐसी सार्वजनिक चुनौती नहीं दी है, बावजूद इसके वे सब भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन करार दिए गए हैं. भागवत जी खुले आम दावा कर रहे हैं अपनी सैन्य ताकत का और सरकार चुप है. इससे क्या समझा जा सकता है?

पहली बात, ये सरकार अनिवार्यतः RSS की सरकार है, जैसा कि हम कहते आए हैं. दूसरी बात, इस चुनी हुई बहुमत की सरकार के पास दो सेनाएँ हैं यानी सरकारी सेना से किसी भी टकराव की सूरत में इसकी अपनी ज्यादा ताकतवर सेना एक्शन में आ सकती है. तीसरी बात, RSS चूंकि सैद्धांतिक रूप से संविधान को नहीं मानता और मोहन भागवत के बयान से भी ऐसा लगता है कि RSS की सेना के इस्तेमाल में संविधान ही आड़े आ रहा है, लिहाजा यह सरकार जब भी संविधान बदलेगी उसमें RSS की फौज के लिए एक गुंजाइश ज़रूर बनाएगी. एक बार ऐसा हो गया तो भारत की संप्रभु सेना का मतलब ख़तम हो जाएगा. अब सोचने वाली सिर्फ एक बात है- ऐसा कब तक होगा?

RSS की सरकार का बहुमत में बने रहना इस सब के साकार होने की अनिवार्य शर्त है. अगर बचा-खुचा लोकतंत्र, चुनावी प्रणाली और जन-असंतोष इस सरकार के दुहराव में बाधक बनता है, तो आरएसएस की फौज सबसे पहले समाज के भीतर बहुमत सुनिश्चित करवाने की नाना प्रकार से कार्रवाइयां करेगी. यह पूरी तरह अनधिकारिक होगा. इसके लिए संविधान की मंजूरी नहीं चाहिए. एक बार ऐसा हो गया तो दुबारा चुनी गई सरकार कोई अगला रिस्क नहीं लेगी और सबसे पहला काम संविधान बदलने का करेगी जिसके माध्यम से भारत की संप्रभु सेना को अप्रासंगिक करार दिया जाएगा और RSS की सेना के पास वैधानिक अधिकार दे दिए जाएंगे. फिर क्या होगा? भारत की संप्रभु सेना में बग़ावत! इसमें अभी वक़्त है. फिलहाल गृहयुद्ध जैसी चीज़ों के लिए तो न्यूनतम दिमाग बना ही लीजिए.

मोहन भागवत के बयान में RSS का असली चेहरा उसकी स्थापना के 93 साल में अब जाकर ज़ाहिर हुआ है. समाज सेवा और एकात्म मानववाद आदि लिफाफा है. असल मजमून संघ की सैन्य ताकत है. सारा खेल 2025 तक का है जब संघ 100 साल का होगा. वहां तक पहुँचने के लिए 2019 का चुनाव निर्णायक है.

RSS के प्रोजेक्ट की यह कहानी मैंने 2013 में लिखी थी और फिर लिख रहा हूँ. भरोसा न हो तो फरवरी में भागवत जी की प्रस्तावित जनसभाओं की सूची कहीं से मंगवा लें. फिलहाल अपने इधर यानी मेरठ में वे 25 फरवरी को आ रहे हैं और बनारस में शायद 18 को. ताज़ा सूचना कहती है कि मेरठ रैली में पांच लाख लोग हिस्सा लेंगे. पंजीकरण हो चुका है सबका.

अब तक ट्रेलर चल रहा था मित्रो... सरसंघचालक जी के बयान से पिक्चर शुरू होती है अब...! मारधाड़, रोमांस, डर और आतंक के रोजाना चार शो... वो भी मुफ्त, मुफ्त, मुफ्त...!

Courtesy: हस्तक्षेप
मोहन भागवत
आरएसएस
RSS
Indian army
Army

Related Stories

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कांग्रेस का संकट लोगों से जुड़ाव का नुक़सान भर नहीं, संगठनात्मक भी है

कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...

पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद


बाकी खबरें

  • डॉ. राजू पाण्डेय
    बढ़ती लैंगिक असमानता के बीच एक और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
    08 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1975 में मान्यता दिए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर नियमित रूप से आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की 2022 की थीम 'जेंडर इक्वालिटी टुडे फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो' चुनी गई है…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश का चुनाव कौन जीत रहा है? एक अहम पड़ताल!
    07 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा उत्तर प्रदेश में आखिरी चरण के मतदान पर बात कर रहे हैं। साथ ही चर्चा कर रहे हैं एक वायरल वीडियो पर जिसके बाद सभी दल द्वारा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाये जा रहे…
  • varanasi
    विजय विनीत
    यूपी चुनावः सत्ता की आखिरी जंग में बीजेपी पर भारी पड़ी समाजवादी पार्टी
    07 Mar 2022
    बनारस में इस बार पीएम मोदी ने दो बार रोड शो किया और लगातार तीन दिनों तक कैंप किया, फिर भी जिले की आठ में से चार सीटें भाजपा जीत ले तो यह वोटरों की बक्शीश मानी जाएगी। यह स्थिति भाजपा के लिए बुरी तो है…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी का रण: आख़िरी चरण में भी नहीं दिखा उत्साह, मोदी का बनारस और अखिलेश का आज़मगढ़ रहे काफ़ी सुस्त
    07 Mar 2022
    इस चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 54.18 फ़ीसदी मतदान हुआ। बनारस में कुल 52.95 फ़ीसदी वोट हुआ। आज़मगढ़ में इससे भी कम मतदान हुआ। जबकि चंदौली में 60 फ़ीसदी के आसपास वोट हुआ है। अंतिम आंकड़ों का…
  • ukraine russia war
    नाज़मा ख़ान
    यूक्रेन से सरज़मीं लौटे ख़ौफ़ज़दा छात्रों की आपबीती
    07 Mar 2022
    कोई बीमारी की हालत में ख़ुद को शॉल में लपेटे था, तो कोई लगातार खांस रहा था। कोई फ़ोन पर परिवार वालों को सुरक्षित वापस लौट आने की ख़ुशख़बरी दे रहा था। तो कुछ के उड़े चेहरों पर जंग के मैदान से बच कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License