NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या गाय के नाम पर मर जाती है हमारी इंसानियत ?
अगर लोकतंत्र के मायने ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस/गाय’ है तो भारत दुनिया के सबसे लोकतांत्रिक देशों में से एक कैसे हो गया है।
सोनाली
20 Nov 2017

देश की राजधानी से महज़ 130 किलोमीटर दूर हरियाणा के भरतपुर जिले के घाटमीका गाँव में जाकर आपको महसूस होगा कि बिना किसी जादू, बिना किसी तिलिस्म के आप गुज़रे ज़माने में आ गए हैं। गाँव के मुहाने पर ही आपको सड़क और सड़क की संकल्पना को तिलांजलि देनी होगी क्योंकि उसके आगे जो है वो बस ज़रूरत के हिसाब से चौड़ी कर दी गयी पगडण्डी भर हैं  उससे ज़्यादा कुछ नहीं। उसे देखते ही आपको मालूम हो जाएगा कि वह ‘विकास’ का भार किसी भी सूरत में नहीं उठा पाएगी इसीलिए शायद शासन और प्रशासन ने यहाँ लोकतंत्र के आने की मनाही कर दी है। तभी तो अचम्भे की बात है कि जहाँ लोकतंत्र पहुँचा ही नहीं वहाँ हम उसकी हत्या से पसरे मातम के गवाह बनने गए।

alvar 1

 

यह उमर मोहम्मद का गाँव है। वही उमर जिसे तथाकथित गौ-रक्षकों ने अलवर में पिछले दिनों मार डाला। उमर बारह सदस्यों के परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसके पास आधे बीघा जमीन थी, जिसमें परिवार का गुज़ारा नामुमकिन था इसलिये वो खेत मज़दूर की तरह काम करता था। भरतपुर जिले में इस बार बारिश कम होने की वजह से उसे ज़्यादा काम नहीं मिला। सरकार ने सिर्फ 25% जिले को ही सूखाग्रस्त घोषित किया जबकि गाँव वालों के मुताबिक़ लगभग पूरा जिला ही सूखे की चपेट में है। उमर के परिवार का कहना है कि उमर अपने बच्चों का पेट पालने के लिए किसी से कर्ज़ लेकर एक गाय खरीदने गया था। उसकी हत्या के बाद उसकी पत्नी ने एक और बच्चे को जन्म दिया।

alvar 2

उमर की पत्नी चार महीने दस दिन की इद्दत में है। अपने कुछ दिन के बच्चे के साथ वो घर के आँगन में एक तिरपाल की झोंपड़ी में बेसुध पड़ी रहती है Iक्योंकि उमर की मौत के बाद से ही घर में बाहरी मर्दों के आना-जाना लगा हुआ है। इद्दत के दौरान उसे किसी मर्द के सामने आने की मनाही है। उसके पास गाँव-परिवार की दूसरी औरतों के अलावा उसकी तीन बेटियाँ ही थीं। उमर की बेटियों की आँखों का खालीपन ऐसा था कि किसी को भी ताउम्र कचोटता रहे।

alvar 3दूसरी ओर, उमर की पत्नी की कार्रहटों में आपको उसकी आने वाली ज़िंदगी का दुख साफ सुनाई देगा। उमर के माता पिता की भी हालत कुछ ऐसी ही है। उनके शब्द उन्हें छोड़कर शायद उनके बेटे की क़ब्र में दफ़्न हो चुके हैं। 

alvar 4

पिछले तीन सालों से देशभर से इस तरह की वारदातों की ख़बरें लगातार आ रही हैं। इन सभी घटनाओं के एक से ज़्यादा बयान सामने आते हैं। चंद महीने पहले अलवर में ही पहलू खान की हत्या की हत्या कर दी गयी, वजह दी गयी कि वो गाय की तस्करी कर रहे थे। यही वजह उमर के मामले में भी दी जा रही है, और पुलिस ने इस संदर्भ में उस पर एफआईआर भी दर्ज़ कर ली है। उसकी हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सवाल यह नहीं कि उमर या ऐसी ही वारदातों में मारे गए दूसरे लोग गाय की तस्करी या अन्य कोई अपराध कर रहे थे। सवाल यह है कि भारत में न्याय करने का अधिकार किसके पास है, न्यायालय के पास या भीड़ के पास। और यह भीड़ भी ज़्यादातर एक खास विचारधारा से ही आती दिखाई पड़ रही है। अगर लोकतंत्र के मायने ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस/गाय’ है तो भारत दुनिया के सबसे लोकतांत्रिक देशों में से एक कैसे हो गया है।

gau rakshak
Alwar
Rajasthan sarkar
Communalism
umar mohammad

Related Stories

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

पूजा स्थल कानून होने के बावजूद भी ज्ञानवापी विवाद कैसे?

'उपासना स्थल क़ानून 1991' के प्रावधान

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में करीब दो महीने बाद एक दिन में कोरोना के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज
    07 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,805 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 20 हज़ार से भी ज़्यादा यानी 20 हज़ार 303 हो गयी है।
  • मुकुंद झा
    जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!
    07 May 2022
    कर्मचारियों को वेतन से वंचित करने के अलावा, जेएनयू प्रशासन 2020 से परिसर में कर्मचारियों की संख्या लगातार कम कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप मौजूदा कर्मचारियों पर काम का भारी दबाव है। कर्मचारियों की…
  • असद रिज़वी
    केंद्र का विदेशी कोयला खरीद अभियान यानी जनता पर पड़ेगा महंगी बिजली का भार
    07 May 2022
    कोल इंडिया का कोयल लगभग रुपया 3000 प्रति टन है.अगर विदेशी कोयला जो सबसे कम दर रुपया 17000 प्रति टन को भी आधार मान लिया जाए, तो एक साल में केवल 10 प्रतिशत  विदेशी कोयला खरीदने से 11000 करोड़ से ज्यादा…
  • बी. सिवरामन
    प्रेस स्वतंत्रता पर अंकुश को लेकर पश्चिम में भारत की छवि बिगड़ी
    07 May 2022
    प्रधानमंत्री के लिए यह सरासर दुर्भाग्य की बात थी कि यद्यपि पश्चिमी मीडिया में उनके दौरे के सकारात्मक कवरेज को सुनिश्चित करने के लिए उनके बैकरूम प्रचारक ओवरटाइम काम कर रहे थे, विश्व प्रेस स्वतंत्रता…
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    सिख इतिहास की जटिलताओं को नज़रअंदाज़ करता प्रधानमंत्री का भाषण 
    07 May 2022
    प्रधानमंत्री द्वारा 400वें प्रकाश पर्व समारोह के मौके पर दिए भाषण में कुछ अंश ऐसे हैं जिनका दूरगामी महत्व है और बतौर शासक  देश के संचालन हेतु उनकी भावी कार्यप्रणाली एवं चिंतन प्रक्रिया के संकेत भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License