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भारत
राजनीति
क्या गाय के नाम पर मर जाती है हमारी इंसानियत ?
अगर लोकतंत्र के मायने ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस/गाय’ है तो भारत दुनिया के सबसे लोकतांत्रिक देशों में से एक कैसे हो गया है।
सोनाली
20 Nov 2017

देश की राजधानी से महज़ 130 किलोमीटर दूर हरियाणा के भरतपुर जिले के घाटमीका गाँव में जाकर आपको महसूस होगा कि बिना किसी जादू, बिना किसी तिलिस्म के आप गुज़रे ज़माने में आ गए हैं। गाँव के मुहाने पर ही आपको सड़क और सड़क की संकल्पना को तिलांजलि देनी होगी क्योंकि उसके आगे जो है वो बस ज़रूरत के हिसाब से चौड़ी कर दी गयी पगडण्डी भर हैं  उससे ज़्यादा कुछ नहीं। उसे देखते ही आपको मालूम हो जाएगा कि वह ‘विकास’ का भार किसी भी सूरत में नहीं उठा पाएगी इसीलिए शायद शासन और प्रशासन ने यहाँ लोकतंत्र के आने की मनाही कर दी है। तभी तो अचम्भे की बात है कि जहाँ लोकतंत्र पहुँचा ही नहीं वहाँ हम उसकी हत्या से पसरे मातम के गवाह बनने गए।

alvar 1

 

यह उमर मोहम्मद का गाँव है। वही उमर जिसे तथाकथित गौ-रक्षकों ने अलवर में पिछले दिनों मार डाला। उमर बारह सदस्यों के परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसके पास आधे बीघा जमीन थी, जिसमें परिवार का गुज़ारा नामुमकिन था इसलिये वो खेत मज़दूर की तरह काम करता था। भरतपुर जिले में इस बार बारिश कम होने की वजह से उसे ज़्यादा काम नहीं मिला। सरकार ने सिर्फ 25% जिले को ही सूखाग्रस्त घोषित किया जबकि गाँव वालों के मुताबिक़ लगभग पूरा जिला ही सूखे की चपेट में है। उमर के परिवार का कहना है कि उमर अपने बच्चों का पेट पालने के लिए किसी से कर्ज़ लेकर एक गाय खरीदने गया था। उसकी हत्या के बाद उसकी पत्नी ने एक और बच्चे को जन्म दिया।

alvar 2

उमर की पत्नी चार महीने दस दिन की इद्दत में है। अपने कुछ दिन के बच्चे के साथ वो घर के आँगन में एक तिरपाल की झोंपड़ी में बेसुध पड़ी रहती है Iक्योंकि उमर की मौत के बाद से ही घर में बाहरी मर्दों के आना-जाना लगा हुआ है। इद्दत के दौरान उसे किसी मर्द के सामने आने की मनाही है। उसके पास गाँव-परिवार की दूसरी औरतों के अलावा उसकी तीन बेटियाँ ही थीं। उमर की बेटियों की आँखों का खालीपन ऐसा था कि किसी को भी ताउम्र कचोटता रहे।

alvar 3दूसरी ओर, उमर की पत्नी की कार्रहटों में आपको उसकी आने वाली ज़िंदगी का दुख साफ सुनाई देगा। उमर के माता पिता की भी हालत कुछ ऐसी ही है। उनके शब्द उन्हें छोड़कर शायद उनके बेटे की क़ब्र में दफ़्न हो चुके हैं। 

alvar 4

पिछले तीन सालों से देशभर से इस तरह की वारदातों की ख़बरें लगातार आ रही हैं। इन सभी घटनाओं के एक से ज़्यादा बयान सामने आते हैं। चंद महीने पहले अलवर में ही पहलू खान की हत्या की हत्या कर दी गयी, वजह दी गयी कि वो गाय की तस्करी कर रहे थे। यही वजह उमर के मामले में भी दी जा रही है, और पुलिस ने इस संदर्भ में उस पर एफआईआर भी दर्ज़ कर ली है। उसकी हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सवाल यह नहीं कि उमर या ऐसी ही वारदातों में मारे गए दूसरे लोग गाय की तस्करी या अन्य कोई अपराध कर रहे थे। सवाल यह है कि भारत में न्याय करने का अधिकार किसके पास है, न्यायालय के पास या भीड़ के पास। और यह भीड़ भी ज़्यादातर एक खास विचारधारा से ही आती दिखाई पड़ रही है। अगर लोकतंत्र के मायने ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस/गाय’ है तो भारत दुनिया के सबसे लोकतांत्रिक देशों में से एक कैसे हो गया है।

gau rakshak
Alwar
Rajasthan sarkar
Communalism
umar mohammad

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