NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या गोलियों से दबेगा आक्रोष
अगर किसान सत्ताधीशों की गरदन पकड़ने तक पहुंच गया, तो तय. मानिए, देश के हालात बदल जाएंगे, जिसके आसार नजर आ रहे हैं।...
भारत शर्मा
12 Jan 2018
kisan andolan

१२ जनवरी १९९८, आज से ठीक २० साल पहले, मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार किसानों पर कहर बनकर टूटी। लगातार ४ साल के सूखे से बेहाल राहत की मांग कर रहे इन किसानों पर पुलिस ने गोलियां बरसाईं, जिसमें २४ किसान शहीद हो गए। इस किसान आंदोलन के नेता डा. सुनीलम का भी एनकाउंटर करने की पूरी तैयारी सरकार ने कर ली थी, बाद में उन पर कई केस लादे गए, जिनमें उन्हें ५४ साल की जेल भी हुई।

उस वक्त भाजपा विपक्ष में थी, उसके लिए राजनीति करने का यह बेहतर मौका था, जिसे उसने भुनाया। प्रदेश में सत्ता में आने के पहले भाजपा के लिए मुलताई गोली चालन जलियांवाला बाग था, जिसे सत्ता में आने के बाद वह भूल गई और साल २०१७ में उसी तरह सही दाम मांग रहे मंदसौर के किसानों को उसने भी उसी तरह घेरकर मारा, जैसा पिछली सरकार ने किया था।

पिछले २० साल में काफी कुछ बदल गया है। मनमोहन सिंह के वित्तमंत्री बनने के बाद जब १९९१ में नई आर्थिक नीतियों को लागू किया गया, तब देश के कुछ हिस्से को लाभ भी मिलना शुरु हुआ। किसान भी कैश क्राप की तरफ गया, जिससे उसे आर्थिक लाभ भी मिला। मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री रहते हुए जो समझौते उस समय किए थे, उसका असर उस समय तक देखने को नहीं मिला था, फिर भी किसानों को दी जाने वाली राहत में कटौती शुरु हो गई थी। किसानों में आत्महत्या का दौर उस समय उतना आम नहीं था। अब परिस्थितियां बिल्कुल बदल गई हैं। सरकारों ने किसानों को उनके हालातों पर छोड़ दिया है। खाद, बीज, बिजली पर जो राहत दी जाती थी, लगभग खत्म कर दी गई है। किसान लागत पूरी करने के लिए नगद फसल की तरफ जा रहा है और कर्ज के दलदल में फंस रहा है। नतीजन आत्महत्या का दौर चल पड़ा है, गांव में भयानक पलायन है, जो अन्नदाता पूरे देश का पेट भरने का दम रखता था, वह भूखे मरने के कगार पर आ गया है।

भारतीय जनता पार्टी उत्सवधर्मी पार्टी है। भाजपा सरकारें हर वक्त उत्सव मनाती रहती हैं, उन्हें लगता है, इससे लोगों के गम दूर हो जाएंगे। मध्य प्रदेश की ही बात करें, तो इस प्रदेश की सरकार लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार ले रही थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह यह दावा करते थे, कि किसान की आय दो गुनी कर चुके हैं। यहां तक कि साल २०१७ में नीति आयोग में वे प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई मुख्यमंत्रियों की एक बैठक में यह बता चुके थे, कि किसानों की आय दोगुनी कैसे की जाती है। मंदसौर ने उनकी पोल खोल दी। हालात उसके बाद भी नहीं सुधरे हैं, शिवराज सरकार द्वारा भावांतर योजना ने किसानों की स्थिति को और बिगाड़ दिया है। गेहूं और धान छोड़कर सरकार कोई भी सामान समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदती, अब भावांतर योजना में सरकार यह भी तय करेगी, कि किस खेत में कितना उत्पादन होगा। अगर मौसम ने साथ दिया और फसल बम्पर हो गई, तो उसका लाभ किसान को नहीं मिलेगा, क्योंकि यह माना जाएगा, कि यह उत्पादन उसके खेत में नहीं हुआ है, मतलब किसान सरकार के साथ धोखा कर रहा है।

भावांतर का सीधा लाभ व्यापारियों को मिला, ठीक उसी तरह जैसे नोटबंदी का मिला था।शिवराज सरकार के भावांतर योजना के बाद व्यापारियों ने फसल के दाम और गिरा दिए, क्योंकि किसानों को भाव का अंतर सरकार से मिलने वाला था। उत्तर भारत के कई इलाकों में सूखे के बाद भी किसानों को अगर फसल का दाम नहीं मिल पा रहा है या फिर नोटबंदी के बाद जिस तरह अचानक दाम गिरे, उसका एक बड़ा कारण यह भी है, कि मोदी सरकार ने तमाम कृषि उत्पादों को विदेशों से आयात करने की छूट दे रखी है।

मध्य प्रदेश एक बार फिर उदाहरण के तौर पर सामने आता है, जबकि आंदोलन कर रहे किसानों से सरकार ने सरकारी खजाने के प्याज खरीदी और उसे सड़ा कर फैंक दी। आज आम उपभोक्ता ऊंची कीमत पर प्याज खरीद रहा है। जो करदाता जेएनयू जैसे शिक्षण संस्थानों को लेकर यह कहता नजर आता है, कि वहां उसके टैक्स के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, वह शिवराज सरकार से सवाल नहीं करता।

मुलताई के बाद मंदसौर में हुई गोलीचालान ने किसान आंदोलन को नई दिशा दी है। किसानों को यह बात समझ में आ गई है, कि सरकारें बदल जाने से चरित्र नहीं बदलता, उसके सामने संघर्ष ही रास्ता है। महाराष्ट्र फिर मध्य प्रदेश और उसके बाद राजस्थान, आसाम, एक के बाद एक राज्य में किसानों ने आंदोलन किए और सरकार को झुकने पर मजबूर किया। इस किसान आंदोलन ने तमाम किसान संगठनों को भी एक मंच पर लाने को मजबूर किया। हालांकि इसकी पहली शुरुआत भूमि अधिकार आंदोलन के रुप में हुई थी, जब मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण कानून को बदलने की फिराक में थी। इस नए आंदोलन के बाद पहली बार देश के तमाम बड़े १८६ किसान संगठन एक साथ आए और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का गठन किया गया। कई राज्यों में किसान मुक्ति यात्रा निकाली गई और संसद पर दो बार किसान संसद का आयोजन भी किया गया। इस पूरे आंदोलन में दो मांग हैं, पहला फसल का लाभकारी मूल्य, स्वामीनाथन रिपोर्ट के आधार पर, दूसरा किसानों की कर्ज माफी। इसके लिए किसान संसद ने दो बिल भी पास किए हैं, जिसे देशभर के किसानों के पास लेकर जाया जा रहा है।

kisan andolan
farmers crises
farmers suicide
farmers protest
BJP
Congress
Neo liberal policies

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • KISAN
    भाषा
    नोएडा में सांसद के आवास का घेराव करने के आरोप में करीब 600 किसानों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज
    03 Nov 2021
    अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ धरना दे रहे 81 गांव के किसानों ने मंगलवार शाम को सांसद डॉ. महेश शर्मा के आवास का घेराव करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने आवास से कुछ दूर पर…
  • By-election results: Himachal gave a big lesson to BJP, a setback in Bengal too
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    उपचुनाव परिणाम: हिमाचल ने दिया भाजपा को बड़ा सबक़, बंगाल में भी झटका
    03 Nov 2021
    राजस्थान और कर्नाटक ने भी भाजपा को चेताया है, जबकि हरियाणा में इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला की जीत किसान आंदोलन की जीत मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने किसानों के मुद्दे पर ही इस्तीफ़ा दिया था।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में क़रीब 12 हज़ार नए मामले सामने आए, 311 मरीज़ों की मौत
    03 Nov 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 11,903 नए मामले दर्ज किए गए है | देश में अब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 43 लाख 8 हज़ार 140 हो गयी है।
  • नीतीश सरकार ने एससी-एसटी छात्रवृत्ति फंड का दुरूपयोग कियाः अरूण मिश्रा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नीतीश सरकार ने एससी-एसटी छात्रवृत्ति फंड का दुरूपयोग कियाः अरूण मिश्रा
    03 Nov 2021
    समाज के हाशिए पर मौजूद एससी
  • US
    एम.के. भद्रकुमार
    दो क्वाडों की कथा
    03 Nov 2021
    क्वाड-1 और क्वाड-2 दोनों का लक्ष्य चीन है। दोनों की कल्पना 'इच्छुकों के गठबंधन' के रूप में की जाती है। दोनों प्रारूपों में समुद्री शक्ति एक प्रमुख प्रतिमान के रूप में मौजूद है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License