NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या है अनुच्छेद 370 और 35 ए और इनका हटाया जाना
खास बात ये है कि सरकार के इस फैसले को लेकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाला भारत का राजपत्र भी प्रकाशित हो चुका है। इस आदेश का नाम संविधान (जम्मू और कश्मीर में लागू) आदेश, 2019 है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Aug 2019
jammu and kashmir

कश्मीर को लेकर पिछले दिनों से जो चर्चाएं चल रहीं थीं तकरीबन वही हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज, सोमवार को राज्य सभा में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने की सिफारिश की। शाह ने कहा कि इस आदेश से अनुच्छेद 370 का सिर्फ एक खंड बचा रहेगा, बाकी सारे खंड खत्म हो जाएंगे। खास बात ये है कि सरकार के इस फैसले को लेकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाला भारत का राजपत्र भी प्रकाशित हो चुका है। इस आदेश का नाम संविधान (जम्मू और कश्मीर में लागू) आदेश, 2019 है।

इसके साथ अमित शाह से हस्ताक्षरित एक स्टेटमेंट भी जारी हुआ। जिसके बारे में अमित शाह ने संसद में भी बोला। यह स्टेटमेंट कहता है कि लद्दाख बहुत बड़ा इलाका जहां पर कम आबादी रहती है। लदाख के लोगों की बहुत पहले से मांग कर रहे थे कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए। इसलिए लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। यहां पर विधानसभा नहीं होगी। आंतरिक सुरक्षा और सीमा पार होने वाले आतंकवाद को मद्देनजर रखते हुए जम्मू कश्मीर को भी केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। और यहां पर विधनसभा होगी। 

 यानी कश्मीर की संवैधानिक स्थिति पर दो तरह के बदलाव किये जाने का फैसला लिया गया है। पहला, अनुच्छेद 370 के एक खंड के अलावा सारे खंडों को हटा देना और दूसरा जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बाँट देना - लदाख और जम्मू-कश्मीर।  
 

क्या है अनुच्छेद 370?

इसको ध्यान में रखते हुए यह समझने कशिश करते हैं कि अनुच्छेद 370 क्या कहता है? इसमें क्या बदलाव किया गया है? बदलाव होने पर क्या स्थिति होगी? और क्या केंद्र को यह अधिकार है कि वह आनन फानन में राज्य के दो हिस्से कर सकती है? 

अनुच्छेद 370 और इसमें किए गए बदलाव 

अनुच्छेद 370 में तीन खंड है। अनुच्छेद 370 (1)(क) को पहले हटा दिया गया था। इसके अलावा बाकी हिस्सों को मिलाकर कहा जाए तो अनुच्छेद 370 (1) कहता है कि  संसद की शक्ति संघ सूची और समवर्ती सूची के उन विषयों तक सीमित होगी, जिनके सम्बन्ध में विलय पत्र (जिस पत्र के सहारे कश्मीर भारत में शामिल हुआ था) में भारत को शक्ति दी गयी है। कोई भी विलय पत्र में अंकित विषयों का हिस्सा है या नहीं, इसका फैसला जम्मू और कश्मीर की सरकार के परामर्श से भारत का राष्ट्रपति करेगा। इसके अलावा विलय पत्र में निर्दिष्ट विषयों के अलावा संसद की शक्ति उन विषयों तक सिमित होगी। जो राष्ट्रपति जम्मू और कश्मीर राज्य की सरकार की सहमति से अपने आदेश द्वारा घोषित करेगा। 

अनुच्छेद 370 (2) जम्मू और कश्मीर के संविधान सभा के गठन से पहले अनुच्छेद 370 (1) के प्रावधनों में बदलाव की बात करता है। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो इस प्रावधान के अनुसार केवल जम्मू कश्मीर की संविधान सभा इसमें बदलाव कर सकती है। जिसका अस्तित्व अब नहीं है। 

अनुच्छेद 370 (3) में यह व्यवस्था है कि अनुच्छेद 370 को संविधान सभा के जरिये हटाया जा सकता है या नहीं,  और उसकी प्रक्रिया क्या होगी?

राष्ट्रपति को यह घोषणा करने की शक्ति है कि अनुच्छेद 370 लागू रहेगा या नहीं रहेगा या उन अपवादों और सुधारों के साथ लागू रहेगा या नहीं जिसे राष्ट्रपति उल्लेख करे। लेकिन राष्ट्रपति ऐसा तभी कर सकते हैं जब जम्मू और कश्मीर राज्य की संविधान सभा ने इस आशय की सिफारिश की हो। 

अनुच्छेद 370 पर विभिन्न कानूनविदों की राय 

-वर्तमान में जम्मू कश्मीर की संविधान सभा का अस्तित्व समाप्त हो चुका है और उसकी सिफारिश के बिना अनुच्छेद 370 को हटाया जाना संभव नहीं है। लेकिन इसका उल्टा भी है कि चूँकि अब जम्मू कश्मीर की संविधान सभा का अस्तित्व ही नहीं है तो उसकी सिफारिश की जरूरत ही नहीं है। इसलिए राष्ट्रपति पर सिफारिश की बाध्यता लागू नहीं होती। राष्ट्रपति अधिसूचना जारी करके अनुच्छेद 370 को प्रभावहीन कर सकते हैं।

-अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के संशोधन की प्रक्रिया अपनाकर अनुच्छेद 370 का हटाया जा सकता है।  

इस तरह से आज की कार्यवाही से यह यह साफ़ है कि सरकार द्वारा किसी संविधान संशोधन की प्रक्रिया नहीं अपनायी गयी है। अनुच्छेद 370 को हटाने वाली अधिसूचना जारी कर दी गई है। अमित शाह कह रहे है कि अनुच्छेद 370 का खंड 1 छोड़कर बाकी खंडों को हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि बिना जम्मू कश्मीर की सरकार और संविधान सभा की अनुमति से राष्ट्रपति की अधिसूचना द्वारा अनुच्छेद 370 पूरी तरह से हट गयी स्थिति में पहुंच गया है। जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटा जाएगा,इससे यह बात स्पष्ट भी होती है कि जम्मू कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को पूरी तरह से हटा दिया गया है। 

चूँकि अनुच्छेद 370 से संविधान का अनुच्छेद 35 (A ) कश्मीर के लिए स्पेशल प्रावधनों के साथ काम कर पाता है इसलिए अनुच्छेद35 (A) सरकार जब चाहें तब हटा सकती है। या अनुच्छेद 35 (A ) बना रहे लेकिन अनुच्छेद 370 के न होने से सरकार वह सब कर पाए जिसपर अनुच्छेद 35 (A ) प्रतिबन्ध लगाता है। जब राज्य ही केंद्रशासित प्रदेश बन गया तो जमीन के अधिकार के लिए क्या नियम होंगे इसका निर्धारण भी केंद्र करेगी न कि राज्य।   

यहां पर यह भी सवाल उठता है कि बिना संविधान के अनुच्छेद 3 की प्रक्रिया अपनाये हुए किसी राज्य की सीमा में बदलाव नहीं किया जा सकता है। अनुच्छेद 3 कहता है कि इसके लिए सम्बंधित राज्य के विधानसभा की सहमति भी लेनी चाहिए। राष्ट्रपति ऐसे बदलाव को सम्बंधित राज्य के विधनमंडल को भेजेगा। अगर सहमति नहीं मिलती है तो राष्ट्रपति बाध्य नहीं है कि वह राज्य की सीमाओं में फेरबदल करने का अपना प्रस्ताव वापस ले ले। अमित शाह ने आंतरिक सुरक्षा का नाम देकर इस प्रक्रिया को पूरी तरह से नजरअंदाज़ कर दिया।  

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद आगे की स्थिति क्या होगी, इसका कयास लगाना बहुत मुश्किल भी नहीं है। कहा जाता है कि अनुच्छेद370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर भारत का एक सामान्य राज्य बन पाया लेकिन अब अनुच्छेद 370 हटाने के बाद उसे और अधिक जलाने वाले माहौल में धकेल दिया गया है।

कश्मीर के लिए एक साधारण सिद्धांत  है कि एक अलग थलग पड़ चुका समाज कठोर नियम-कानूनों से नहीं चलता, न ही सैनिकों की रखवाली से चलता है, उसके लिए लोगों के आपसी भरोसे को मजबूत करना होता है।  

Jammu and Kashmir
Article 370
Article 35(A)
Indian army
Indian constitution
BJP
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License