NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
क्या मध्य प्रदेश में मुद्दों की ओर लौटेगा चुनाव?
मध्य प्रदेश में पिछले कई सालों से महिला हिंसा, कुपोषण, किसानों की आत्महत्या, शिक्षा एवं स्वास्थ्य में गिरावट जैसे मुद्दे हावी रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में ये मुद्दे गायब दिख रहे हैं।
राजु कुमार
02 May 2019
सांकेतिक तस्वीर

मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव का पहला चरण पूरा हो गया। कई गंभीर मुद्दों से जूझ रहे प्रदेश में अभी भी विकास के मुद्दे चुनाव में हावी नहीं हो पाए हैं। भाजपा जिस तरीके से राष्ट्रवाद को मुद्दा बना रही है, उसकी वजह से विकास के मुद्दे पीछे रह गए हैं, लेकिन सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों एवं जनसंगठनों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि आम मतदाताओं के सामने विकास के दावों की तथ्यात्मक रिपोर्ट रखी जाए। पिछले 15 सालों से मध्यप्रदेश में भाजपा का शासन रहा है, लेकिन महिलाओं के प्रति अपराध, कुपोषण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा में गिरावट, खेती-किसानी में घाटा जैसे मसलों में सुधार दिखाई नहीं दिया। 2014 से केन्द्र में भी भाजपा की अगुआई वाली सरकार रही है, लेकिन प्रदेश विकास की हकीकत दावों की विपरीत ही रही।

मध्य प्रदेश में चौथे से सातवें चरण तक चार चरणों में चुनाव हो रहे हैं। आने वाले दिनों में अभी 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। यही वजह है कि भाजपा द्वारा चुनाव को राष्ट्रवाद की ठेलने के बावजूद प्रदेश में सांप्रदायिकता एवं नफरत के खिलाफ विकास के मुद्दों पर वोट करने की अपील की जा रही है। भारत ज्ञान विज्ञान समिति की आशा मिश्रा का कहना है कि एक नागरिक के रूप में हम यह मानते हैं कि सरकार के काम की समीक्षा हमें करनी चाहिए और उसी के आधार पर चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों को निर्णय लेना चाहिए। पिछले 5 सालों में क्या किया, यह बताने के बजाय भाजपा मुद्दों से ध्यान हटा रही है।

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जैन का कहना है, ‘‘हमने जन सरोकार 2019 नाम से पिछले 21 अप्रैल को प्रदेश के कई संगठनों, संस्थाओं, समूहों और साथियों द्वारा मिलकर एक साझा सम्मलेन किया था। जन सरोकार की पहल राष्ट्रीय स्तर पर सरकार के कामकाज को नागरिक समीक्षा के नजरिए से शुरू की गयी है, जिसका मकसद आम चुनाव की प्रक्रिया को तथ्य, वास्तविकता एवं मूल मुद्दों पर केन्द्रित करना है। उसका नतीजा सकारात्मक रहा है। एक ओर हम संगठित आवाज उठाने में कामयाब रहे, तो दूसरी ओर सूचना का प्रसार जिलों तक करना आसान हुआ। सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न जिलों के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं को विभिन्न मुद्दों पर तथ्यात्मक जानकारी दी गई, जिसे लेकर वे जिलों में और अपने कार्य क्षेत्र में विस्तार दे रहे हैं।’’

राष्ट्रीय स्तर पर विकास के मुद्दों पर पिछले पांच सालों की स्थिति देखें, तो पता चलता है कि भारत में आम लोगों की स्थिति खराब हुई है। वैश्विक भुखमरी सूचकांक में 2014 में भारत का स्थान 55वां था, जबकि 2018 में भारत 103वें स्थान पर पहुंच गया। अप्रैल 2014 से दिसंबर 2018 के बीच भारत में 5.57 लाख करोड़ रुपये का कर्ज एनपीए में डाल दिया गया, इसका ज्यादातर कर्ज अमीरों ने लिए थे। दुनिया भर में कुपोषित बच्चों में से लगभग आधे बच्चे भारत के हैं। दुनिया के 15 करोड़ ठिगने बच्चों में से 4.7 करोड़ भारत के हैं। वैश्विक खुशहाली सूचकांक में 157 देशों के अध्ययन में भारत का स्थान 140वां है। मानव विकास सूचकांक वाले 189 देशों में भारत का स्थान 130वां है। लैंगिक अंतर के मामले में 149 देशों की सूची में भारत 108वें स्थान पर है। महिलाओं को आर्थिक अवसर मिलने और आर्थिक गतिविधियों में सहभागिता सूचकांक के मामले में 149 देशों की सूची में भारत का स्थान 142वां है। बचपन का अंत सूचकांक में 175 देशों की सूची में भारत का स्थान 113वां है। वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक सूचकांक में भी भारत की गिरावट आई है। 2014 में भारत का स्थान 27वां था, जो कि 2018 में 41वें स्थान पर पहुंच गया। नागरिक स्वतंत्रता यानी सिविल लिबर्टीज में 2014 में भारत का स्कोर 9.41 था, जो कि 2018 में गिरकर 7.35 पर पहुंच गया। 5 सालों में बेरोजगारी की दर 7.3 फीसदी हो गई है, जो पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा है। भारत में 2018 में 1.1 करोड़ लोगों ने नौकरियां गंवाई। सरकार ने बेरोजगारी के आंकड़ें तक जारी नहीं किए। मनरेगा में सरकार द्वारा कहा जा रहा है की 90 प्रतिशत मजदूरी का भुगतान समय से हो रहा है जबकि अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के अध्ययनों से पता चला कि केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 56 दिन की देरी मजदूरी के भुगतान में हो रही है। केवल 21 प्रतिशत मामलों में ही समय से भुगतान हो रहा है। 

जैन का कहना है, ‘‘पिछले पांच में सरकार ने जो फैसले लिए, जो नीतियां बनाई और जो योजनाएं लागू कीं, वे सब फेल हो गईं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में विकास की बात की जा रही थी, लेकिन धरातल पर बेहाल जनता ने 15 साल पुरानी भाजपा सरकार को बदल दिया। वह जनादेश केन्द्र के फैसलों के खिलाफ भी था। यही वजह है कि अब भाजपा उम्मीदवार न तो केन्द्र सरकार की किसी योजना या पहल पर कोई बात करते हैं और न ही विकास के मुद्दे पर किसी उपलब्धि को बता पाने की स्थिति में हैं।’’

मध्य प्रदेश की स्थिति को देखा जाए, तो प्रदेश में 45 लाख बच्चे ठिगनेपन के शिकार हैं। 2010 में मध्यप्रदेश सरकार ने तय किया था कि राज्य में कुपोषण से निपटने के लिए समुदाय आधारित प्रबंधन नीति लागू की जाएगी, लेकिन उसे अभी तक नीति नहीं बनाई गई। साल 2004 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 3652 मामले दर्ज किए गए थे, जो बढ़कर अब 13746 हो गया है। बच्चों के साथ बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश में दर्ज हुए हैं। महिलाओं के साथ हिंसा के मामले भी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य में लगातार गिरवाट आ रही है। ग्रामीण इलाकों के हजारों सरकारी शालाओं को बंद कर दिया गया या फिर संविलियन कर दिया गया। प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट भी ज्यादा है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पिछले कई सालों से लगातार बनी हुई है और दूसरी ओर निजी स्वास्थ्य संस्थानों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मध्य प्रदेश में देश के सबसे ज्यादा आदिवासी जनसंख्या है, जो वनों पर आश्रित है। प्रदेश में वन अधिकार कानून के तहत किए गए दावों में सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में ही खारिज किए गए। मध्य प्रदेश में खेती-किसानी एक अहम मुद्दा है। शिवराज सिंह चौहान ने जब मुख्यमंत्री का पद संभाला था, तब से वे खेती को लाभ का धंधा बनाने का दावा करते रहे हैं, लेकिन कर्ज में डूबे हुए और फसलों की सही कीमत न मिलने से बेहाल किसानों की समस्या का दीर्घकालिक समाधान क्या हो, इस पर बात नहीं हो रही है।

जनसंगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार किए जा रहे संवाद और जागरूकता अभियानों से उम्मीद की जा रही है कि मध्य प्रदेश में मतदाताओं का एक बड़ा तबका जाति, धर्म, सांप्रदायिकता और राष्ट्रवाद के झांसे में नहीं आएगा और बुनियादी सवालों एवं विकास के आधार पर ही वोट करेगा।

2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
Madhya Pradesh
Rahul Gandhi
kamalnath
Narendra modi
Shivraj Singh Chauhan
janta ke mudde
Real issues
Fake issues
Hindutva
Hindu Nationalism

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी

बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..


बाकी खबरें

  • दलित बच्ची बलात्कार मामला : न्याय की मांग को लेकर जंतर मंतर पर कैंडल मार्च
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दलित बच्ची बलात्कार मामला : न्याय की मांग को लेकर जंतर मंतर पर कैंडल मार्च
    17 Aug 2021
    सोमवार को जंतर मंतर पर दिल्ली कैंट की नौ वर्षीय बेटी को न्याय दिलाने के लिए कैंडल मार्च निकला गया, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए। वहीं पीड़िता का परिवार दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण में गया है…
  • शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के लिए असंवेदनशील नीतियों को लेकर यूके के गृह विभाग की आलोचना
    पीपल्स डिस्पैच
    शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के लिए असंवेदनशील नीतियों को लेकर यूके के गृह विभाग की आलोचना
    17 Aug 2021
    यूके की गृह सचिव प्रीति पटेल और उनके कार्यालय की अन्य मुद्दों के अलावा अफ़ग़ानिस्तान से शरण चाहने वालों के प्रति असंवेदनशील नीतियों के लिए व्यापक आलोचना हो रही है।
  • जेनिन शरणार्थी शिविर में हिंसक छापे के दौरान इज़रायली सैनिकों ने चार फ़िलिस्तीनी युवाओं की हत्या की
    पीपल्स डिस्पैच
    जेनिन शरणार्थी शिविर में हिंसक छापे के दौरान इज़रायली सैनिकों ने चार फ़िलिस्तीनी युवाओं की हत्या की
    17 Aug 2021
    इज़रायली सेना ने बाद में मारे गए चार फ़िलिस्तीनियों में से दो के शवों को भी ले लिया। ऐसा कृत्य इज़रायल कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय क़ानून का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए फ़िलिस्तीनियों के प्रति सामूहिक सज़ा…
  • येचुरी
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मोदी के न्यू इंडिया का मकसद भारत को भूत के अंधेरे में ले जाना है : येचुरी
    17 Aug 2021
    शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान में सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संवैधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करने की आरएसएस और भाजपा की साज़िशों से देश को किस तरह बचाया…
  • अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम पर कुछ विचार
    एम. के. भद्रकुमार
    अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम पर कुछ विचार
    17 Aug 2021
    जब नेतृत्व जनता का आदर खो देता है, तो वह युद्ध भी हार जाता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License