NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या पीएमजेई के तहत बीमा कवर से ज्यादातर मरीज बाहर हो जाएंगे?
अस्पताल, जैसे दिल्ली में एम्स, इस पर एक अजीब कशमकश कीं स्थिति में हैं कि बाहिय रोगियों का खर्च कौन उठाएगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Sep 2018
Translated by महेश कुमार
प्रधानमन्त्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनौपचारिक रूप से लॉन्च करने के दौरान प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेई) के रूप में उसके पुनरुत्थान करने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना, आयुषमान भारत को इससे जोड़ने के बाद देश भर में 10 करोड़ गरीब परिवारों के उद्धारकर्ता के रूप में प्रचारित किया था, जिसके लिए गरीबों के लिए बीमा कवर अस्पताल में भर्ती के समय 5 लाख रुपये तक दिया गया है लेकिन इस बहुत प्रचारित बीमा योजना के खर्च के संबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली और भुवनेश्वर जैसे कई प्रमुख अस्पतालों को एक अजीब सी स्थिति में ला दिया है, जिसके परिणामस्वरूप इसमें मरीजों को शामिल नहीं किया जा सकता है, खासतौर पर उन लोगों को जो अन्य राज्यों से हैं। उदाहरण के लिए, बिहार से आने वाले मरीजों को इलाज के लिए मुश्किल हो सकती है क्योंकि भुगतान का सवाल हैं: उनके इलाज के लिए, बिहार सरकार या राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी इनमें से कौन भुगतान करेगा? संयोग से, एम्स में दिल्ली से बाहर के रोगियों की संख्या आधे से ज्यादा होती है।

एम्स (दिल्ली और भुवनेश्वर) दोनों ने दिल्ली के बाहर आने वाले मरीजों को दी गई सेवाओं के लिए खर्च पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा है। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि "सिद्धांत रूप में" वे इस योजना में शामिल होंगे लेकिन प्रावधानों को भी उनके हितों पर विचार करना चाहिए।

एम्स दिल्ली के निदेशक राकेश गुलेरिया ने कहा कि संस्थान को एमओयू की शर्तों पर बातचीत करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। "एमओयू को इन चिंताओं को शामिल करना होगा। अस्पताल आने वाले पीएमजेए लाभार्थी को अन्य मरीजों के साथ अपनी बारी का इंतजार करना होगा, वह कतार को कूद नहीं सकते इसलिए कि वे पीएमजे लाभार्थी है। अन्य चिंताए भी हैं - जैसे कि हम सामान्य प्रसव नहीं करवाते हैं, केवल जटिल मामले देखते हैं। यह बदल नहीं सकता है। हमें इंडियन एक्सप्रेस द्वारा उद्धृत किया गया था, "हमें चुनने में सक्षम होना चाहिए कि पीएमजेई के तहत कौन सी प्रक्रियाएं और कौन से पैकेज पेश किए जाएंगे।"

ओडिशा और दिल्ली ने अभी भी इस योजना को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी नेशनल हेल्थ एजेंसी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस योजना के प्रावधानों से सावधान, ओडिशा ने पूरे राज्य में 70 लाख परिवारों की रक्षा के लिए अपनी योजना, बिजू स्वास्थ्य कल्याण योजना की घोषणा की है।

 

पूर्ण योजना 2011 में आयोजित सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर लागू की जानी चाहिए जो कई कमजोर परिवारों की पहचान करने में नाकाम रही थी। यहां पर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एनएचपीएस पहले ही कमियों की शिकार है और इससे केवल हालात बदतर होंगे। साथ ही, इस तरह की एक बड़ी योजना के कार्यान्वयन के लिए एक सक्षम बुनियादी ढाल भी होनी चाहिए, और स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई निवेश नहीं होने की वजह से, व्यापक कवरेज एक दूर के सपने को ही दिखाता है।

 

प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञ, इंद्रनील चटर्जी ने कहा कि दिल्ली के मरीजों की तो पहले से ही राज्य सरकार और नगर पालिका अस्पतालों तक पहुंच है। उन्होंने कहा, "एनएचपीएस निजी बीमा कंपनियों के माध्यम से कवरेज जरूरी बनाता है। ऐसी योजनाओं का बुरा अनुभव पहले ही स्थापित हो चुका है कि वे ग्रामीण इलाकों में हाशिए वाले परिवारों के बड़े हिस्से को बीमा कवरेज प्रदान करने में बुरी तरह विफल रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "सरकार ने निवेश और विनियमन के सवाल को संबोधित नहीं किया है। मुझे लगता है कि इन सवालों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।"

स्टेलेमेट राष्ट्रीय राजधानी में राम मनोहर लोहिया और लेडी हार्डिंग जैसे अन्य अस्पतालों को भी घेरने की संभावना रखता है। 

 


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत
    12 Apr 2022
    मज़दूर संगठन ने दोषियों पर कार्रवाई और मृतकों के लिए 50 लाख मुआवज़े की रखी मांग
  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    मुझे अगले नवरात्रों से ख़ौफ़ क्यों लगता है
    12 Apr 2022
    अब नवरात्रों में चलाने वाले नौ दिवसीय अनुष्ठान का मतलब भौतिक स्थान और/या क्षेत्र को चिह्नित करने के मामले में अधिक है, जैसा कि कई जानवर करते हैं, और इसलिए अधिकांश ईश्वर-भक्त हिंदू अनुयायी अपनी इच्छा…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 796 नए मामले, 19 मरीज़ों की मौत
    12 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 25 लाख 4 हजार 329 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च
    12 Apr 2022
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड महामारी के भीषण दौर में 100 दिन काम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमितीकरण में प्राथमिकता देने की बात करते हुए सर्कुलर भी जारी किया था। पर अब केंद्र सरकार…
  • अजय कुमार
    दवाई की क़ीमतों में 5 से लेकर 5 हज़ार रुपये से ज़्यादा का इज़ाफ़ा
    12 Apr 2022
    भारत जैसे देश में दवाई की महंगाई बाजार की बनाई हुई है, लागत की नहीं। दवाई के महंगाई का हाल ऐसा है कि कई लोग महंगे दवाई के आभाव में दम तोड़ देते हैं। कई लोग दवा खरीद ही नहीं पाते और बीमारी से जूझते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License