NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या राज्यपाल साधारण भाजपा प्रवक्ता के रूप में योगी सरकार का वचाव कर रहे है ?
यूपी के माननीय राज्यपाल लोकतान्त्रिक सुचिता ,संवैधानिक मर्यादा और संवैधानिक नैतिकता सरकार में कौन सी पार्टी है उस हिसाब से तय करते है |
मुकुंद झा
14 Apr 2018
UP
image courtesy : catchnews.com

यूपी के माननीय राज्यपाल लोकतान्त्रिक सुचिता ,संवैधानिक मर्यादा और संवैधानिक नैतिकता सरकार में कौन सी पार्टी है उस हिसाब से तय करते है | उत्तर प्रदेश में वो भरोसा एक बार फिर से तार तार हो रहा है, इस बार इसके लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार सीधे तौर पर ज़िम्मेदार है, इस बार बलात्कार के साथ साथ एक मजबूर पिता की हत्या का मामला भी है | तो क्या माना जाए, दो सरकारों का एक-सा ही वर्ताव है | गंभीर मामलों में ढिलाई बरतने के तौर-तरीके में कोई बदलाव नहीं आया है I प्रचंड बहुमत की सरकार हो तो अपने दुलारों को बचाने का खेल अश्लीलता के साथ सामने आया है, परन्तु राज्यपाल के व्यवहार में पूर्ण रूप से बदलाव है  |

सपा के विधयक पर आरोप लगे तो उससे लोकतंत्र खतरे में परन्तु अगर भाजपा के विधायक पर कोई भी आरोप हो तो उससे लोकतान्त्रिक सुचिता ,संवैधानिक मर्यादा और संवैधानिक नैतिकता जैसी कोई भी चीज़ नहीं होती है | राज्यपाल बलत्कार के आरोपी विधायक के मामले में सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं |

भारतीय राजनीती में कई मुद्दों पर पार्टीयों के रुख में अपने सुविधा और समय अनुसार परिवर्तन सामान्य घटना है | दल हमेशा ही अपने दल या दल के कार्यकर्ताओं पर लगे आरोपों पर मौन रहते हैं और विपक्षी पर हमलावर रहती है | जोकि हमें यूपी के तत्कालिक उन्नाओ रेप केस में मिल रहा है | जहाँ भाजपा पूरी तरह मौन वही समाजवादी दल सहित अन्य विपक्षी दल पूरी तरह से हमलावर हैं | ज़बकी हमें ये याद है कि फरवरी 2017 में इसी तरह का मामला गायत्री प्रजापति का मामला समने आया था, वहां सपा पूरी तरह से आज की भजपा की मुद्रा में थी और कोर्ट के फटकर के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई थी | ये दलों के लिए सामन्य घटना है पर जब ये प्रवर्ती संवैधानिक पदों और प्रशासन के उच्च पदों पर बैठे लोगो में दिखने लगे तो ये एक बड़ी चिंता का कारण जो जाता है |

आज यूपी के राज्यपाल उन्नाओ के मामले में पूरी तरह से सरकार के पक्ष में और बचाव में खड़े हैं,जो की ठीक इसी तरह के गायत्री प्रजापति के मामले उन्होंने तात्कालिक सपा सरकार को पत्र लिखा और कई बार सार्वजनिक मंचो से भी सरकार की आलोचना की थी | उन्होंने अपने पत्र में तात्कालिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कड़े शब्दों में करवाई करने के लिए कहा था | उनके पत्र को ध्यान देना जरूरी है | उस में उन्होंने कहा था की ऐसे मामलो में करवाई न करने से लोकतान्त्रिक सुचिता ,संवैधानिक मर्यादा और संवैधानिक नैतिकता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं I

परन्तु दिलचस्प है कि जब भाजपा के विधायक पर भी रेप और जान से मरने की धमकी  देने जैसा गंभीर आरोप हैं इस के बाबजूद भी  ‘माननीय राज्यपाल राम नाइक’ की चुप्पी गंभीर सवाल उठाती है | साथ ही उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा सरकार का पक्ष लिया और सरकार का वचाव किया | जो कि उनके दोहरे  चरित्र को दर्शाता है | जब वो सपा सरकार में राज्यपाल थे तो उन्हें सुचिता ,मर्यादा और नैतिकता का ख्याल था , परन्तु भाजपा शासन आते ही लगता है जैसे वो ये साड़ी मर्यादाए भूल गये | क्योंकि जब वो भाजपा के विधायक पर भी उतने ही या उससे भी ज़्यादा गंभीर आरोपो पर चुप रहते है तो वो उनके और राज्यपाल के निष्पक्ष व्यवहार पर सवाल उठाता है |

दोनों मामलों में ही प्रदेश की व्यवस्था को तारतार किया है | परन्तु ये और भी गंभीर है कि जब संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल भी सुविधा अनुसार घटनाओं को देखें और उन पर टिप्पणी करें ,क्योंकि उन्हें दलगत राजनीती से परे मान जाता है | लेकिन इस घटना में राज्यपाल की भूमिका किसी भी रूप में निष्पक्ष नहीं बल्कि राज्यपाल एक साधारण भाजपा प्रवक्ता के रूप में सरकार के पक्ष में वयान दे रहे हैं | जो की स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिऐ ठीक नही है क्योंकि सरकारों के कार्यप्रणाली को देखने के लिए ही राज्यपाल की नियुक्ति होती है और राजनीतक मौसम के हिसाब से व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जाती हैं |

राम नईक के पुरे जीवनकल को देखे तो वो बचपन से ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ता रहे हैं | उसके बाद उन्होंने अपने राजनितिक जीवन की शुरुआत भारतीय जन संघ से की और बाद में वो भाजपा के भी सक्रिय कार्यकर्ता और नेता रहे | वो भाजपा की और जन संघ के कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे हैं | वो कई बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे और भाजपा के टिकट पर 3 बार लोकसभा पहुँचे | वो अटल सरकार में मंत्री भी रहे परन्तु वह 2009 के चुनाव में अभिनेता और कांग्रेस के उम्मीदवार गोविंदा से चुनाव हार गये |

इसके बाद 2014 में भाजपा शासित मोदी सरकार ने उन्हें यूपी का राज्यपाल नियुक्त किया ,लोगो ने इसके पीछे उनकी कट्टर हिंदुत्व वाली छवि को मुख्य विशेषता बतया था उसके बाद से उन्होंने कई बार विवादित वयानों के कारण से चर्चा में रहे हैं | उन्होंने राम मन्दिर को लेकर भी कहा था कि राम मन्दिर का निर्माण जल्दी से होना चाहिए क्योंकि इससे हिन्दुओ की भावना जुड़ी हुई है | जबकी ये मुद्दा अभी कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे मामलों में संवैधनिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की टिपण्णी की अपेक्षा नहीं की जाती है |

 उनके व्यवहार से लगता है कि वो भाजपा के कार्यकर्ता और एक संवैधनिक पद के बीच का अंतर नही कर पाए हैं |

क्या ऐसे ही योगी सरकार ‘उत्तर प्रदेश’ को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाएगी?

उत्तर प्रदेश
राज्यपाल
उत्तर प्रदेश राज्यपाल
रामनाईक
Unnao Rape Case
BJP-RSS
Yogi Adityanath

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण

योगी 2.0 का पहला बड़ा फैसला: लाभार्थियों को नहीं मिला 3 महीने से मुफ़्त राशन 

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र


बाकी खबरें

  • लव पुरी
    क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?
    04 Apr 2022
    कश्मीर के संदर्भ से जुडी हुई कई बारीकियों को समझना पिछले तीस वर्षों की उथल-पुथल को समझने का सही तरीका है।
  • लाल बहादुर सिंह
    मुद्दा: क्या विपक्ष सत्तारूढ़ दल का वैचारिक-राजनीतिक पर्दाफ़ाश करते हुए काउंटर नैरेटिव खड़ा कर पाएगा
    04 Apr 2022
    आज यक्ष-प्रश्न यही है कि विधानसभा चुनाव में उभरी अपनी कमजोरियों से उबरते हुए क्या विपक्ष जनता की बेहतरी और बदलाव की आकांक्षा को स्वर दे पाएगा और अगले राउंड में बाजी पलट पायेगा?
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध
    04 Apr 2022
    भाकपा माले विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराये जाने तथा राज्य में गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में 3 अप्रैल को माले ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाया
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक हज़ार से भी कम नए मामले, 13 मरीज़ों की मौत
    04 Apr 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 597 हो गयी है।
  • भाषा
    श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
    04 Apr 2022
    राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘‘गलत तरीके से निपटे जाने’’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License