NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या रकबर की लिंचिंग मेव समुदाय के मवेशी पालने के कारोबार को खत्म कर देगी?
"हम मेव हैं; हम डरपोक नहीं हैं। हम लोकतांत्रिक और वैध साधनों का उपयोग करके सभी बाधाओं से लड़ेंगे।”
तारिक़ अनवर
03 Aug 2018
Translated by महेश कुमार
Rakbar Khan

रकबर खान की पत्नी और पिता को इस बात का अंदेशा था कि उनके परिवार के साथ कुछ बुरा होने वाला है और यही कारण है उन्होंने रकबर से गाय खरीदने के लिए नहीं जाने के लिए कहा था। हरियाणा के मेवात जिले के फिरोजपुर झिरका तहसील में कोल गाँव गांव के निवासी 29 वर्षीय राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ तहसील के लालवंडी गांव के जंगल में गौ रक्षक के एक गिरोह वाली  भीड़ ने  गाय तस्करी के आरोप मैं पीट-पीट कर हत्या कर दी।

"अम्मा (माँ) बार-बार कह रही थी कि अब्बा (पिता) गाय खरीदने के लिए राजस्थान नहीं जाओ, लेकिन रकबर ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे चिंतित न हों और उनके साथ कुछ भी नहीं होगा। बाद में, उसकी माँ ने उसे सलाह दी थी कि वह रात में मवेशियों के साथ यात्रा न करें क्योंकि यह असुरक्षित है," मृतक की सबसे छोटी बेटी 14 वर्षीय सहिला ने कहा, यह कहते हुए वह अपने आँसूओं को रोकने के लिए संघर्ष कर रही थी।

22 जुलाई को राजस्थान के अलवर जिले में भीड़ के हमले के बाद 22 जुलाई को ही पुलिस हिरासत में कथित तौर पर उनकी मृत्यु हो गई थी।

"मवेशियों को इधर से उधर ले जाने वालों के खिलाफ भीड़ हिंसा की रिपोर्टों को देखते हुए, मैंने उन्हें राजी करने की भी कोशिश की कि वे गाय के लिए अलवर नहीं जाएं, लेकिन उन्होंने नहीं सुना। उन्होंने कहा कि हालत ठीक रहेंगे," मृतक के पिता सुलेमान खान ने स्पष्ट रूप से थके हुए और टूटे हुए स्वर में कहा, जो बार-बार उस डर को याद कर रहे थे।

यह भी पढ़ें: हिंसा और खून से होती है ‘गौ-रक्षा’

परिवार में अभी भी पाँच गाय हैं। उनमें से दो ने दूध देना बंद कर दिया है और इसलिए रक़बर पड़ोसी राज्य के एक गाँव में दो और गाय खरीदने के लिए गए थे, ताकि वह स्थानीय डेयरी को दूध बेचकर परिवार का खर्च चला सके और कुछ बचत भी कर सके। उसने अपने ससुर से 50,000 रुपये उधार लिये थे।

वह 11 साल के परिवार का एकमात्र कमाऊ पूत था जिसमें उसके अपने सात बच्चे और उसके माता-पिता शामिल थे। वह मेवात क्षेत्र में अरावली पहाड़ियों में एक नाबालिग के रूप में काम करते थे, लेकिन एक दशक पहले लगाए गए खनन पर प्रतिबंध ने उनके जैसे हजारों लोगों को बेरोजगार बना दिया था। तब से, वह दिन में 500 रुपये कमाने के लिए छोटे-मोटे काम करता था। गाय का दूध बेचना आय का उसका अतिरिक्त स्रोत था।

गाय तस्करी के आरोपों को खारिज करते हुए, रकबर के चचेरे भाई हारून ने कहा कि दूध बेचने से उनका परिवार का पेशा काफी समय से रहा है। "हम परंपरागत रूप से दूध के लिए गायों को पालते रहे हैं। रकबर के पिता और दादा भी इसी व्यवसाय में थे, "उन्होंने कहा।

हालांकि रकबर शिक्षित नहीं थे, लेकिन वह अपने बच्चों को पढ़ाई में अव्वल देखना चाहते थे और काफी सफल हो गए। वह अक्सर बच्चों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते थे। अपने पिता के शब्दों को याद करते हुए, स्पष्ट रूप से स्तब्ध दिख रही थी लेकिन मजबूत साहिला ने कहा, "मैं अपनी पढ़ाई जारी रखूंगी मैं पढ़ाई नहीं छोड़ूंगी। पिछले साल, मेरे पिता ने मुझे सरकारी स्कूल में भर्ती कराया था। अब, मेरा चाचा (चाचा) ऐसा करेगा। मैंकाम में अपनी मां की मदद करने के अलावा पढ़ाई भी करना चाहती हूं। "

याद करते हुए, उसने कहा कि वह अपने पिता के बहुत करीब थी, और जब भी वह बाहर जाते, तो वह उसे मवेशियों की देखभाल करने के लिए काम सौंपते थे। वह मुझ्से कहते कि में अपने छोटे भाइयों और बहनों के प्रति कठोर न रहूँ। भावनात्मक साहिला ने कहा, "अब मैं अकेला महसूस करती हूं।"

अपनी भतीजी को सांत्वना देते हुए, हारून ने अपराधियों के लिए मृत्युदंड से कम की कोई मांग नहीं की, बात  करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं मारा है, लेकिन एक खुश ओर भरे-पुरे परिवार को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे परिवार की आजीविका को छीन लिया है। "रकबर की चार बेटों और तीन बेटियों को खिलाने की ज़िम्मेदारी थी। अब वह नहीं है, अब उनके सात बच्चों, उनकी पत्नी और उनके बुजुर्ग माता-पिता को कमाकर कौन खिलाएगा? "उन्होंने पूछा।

मेवाती क्यों अपने जीवन को जोखिम में डालकर गायों पोषण करते हैं

जीवित रहने के पारंपरिक तरीके, मवेशी पालन ने न सिर्फ हरियाणा के मेवात क्षेत्र के एक चारागाह समुदाय मेव को न सिर्फ रोज़ी –रोटी दी है, बल्कि यह उनके लिए एक भावनात्मक मुद्दा भी है। गाय सतर्कता (गौ रक्षा) के कारण, अब यह सब खतरे में पड़ गया है।

हरियाणा के पलवल जिले के हैथिन तहसील के पचंका गांव के निवासी इलियास खान ने कहा, "गायों समेत मवेशी पालन करना हमारी परंपरा है। हम पीढ़ियों से यह कर रहे हैं। हालांकि हम इस पर निर्भर नहीं हैं, यह हमारी आय में वृद्धि करता है। लोग दो कारणों से भैंसों के बजाय गाय पसंद करते हैं: (ए) गायों के दाम सस्ते है जबकि भैंस महँगी। एक गाय जो 15 लीटर दूध देती है उसकी कीमत 40,000-45,000 रुपये के आसपास होती है; जबकि, उसी मात्रा दूध देने वाली एक भैंस की 70,000 रुपये से 1 लाख रुपये कीमत होती है। (बी) भैंस के दूध के बजाय गाय के दूध की मांग बहुत अधिक है क्योंकि इसका औषधीय गुण भी है। यह बच्चों के लिए बेहद स्वस्थ है। "

उन्होंने कहा कि मवेशियों मैं व्यापार में पहले कभी कोई समस्या नहीं थी। "हम उन्हें बिना किसी डर के यहां और वहां खरीदते थे और परिवहन करते थे। लेकिन कुछ समय से, यह एक जोखिम भरा व्यवसाय बन गया है। और इसलिए, लोगों ने गायों का पालन करना बंद कर दिया है। इससे पहले, पूरे मेवात क्षेत्र में हर घर में चार-पांच गायों का इस्तेमाल होता था। लेकिन अब, आप उन्हें केवल कुछ घरों में पाएंगे "।

जब गौ रक्षकों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ऐसे समूह पिछले कुछ सालों में पैदा हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "वे गायों के नाम पर पैसा वसूलने वाले गुंडों के अलावा कुछ नहीं हैं।"

ऐसे आरोप हैं कि पालने के नाम पर मेवाती गायों का कत्तल करते हैं। खान ने कहा, "गाय हमें दूध देती है। हम उन्हें मार नहीं सकते। हम राजपूत हैं और हम अपनी मां को महत्व देते हैं। "

भारी वाहनों के चालक आलम खान ने कहा कि यह सिर्फ गाय नहीं है, यहां तक कि बैल या भैंस भी लाना लेना जाना सुरक्षित नहीं है। "जब गाय दूध देना बंद करती हैं, तो हमें उन्हें गर्भ धारण करवाने के लिए बैलों के बीच ले जाना पड़ता है ताकि बच्चा होने के बाद फिर से दूध पैदा कर सकें। इसके लिए, जो विभिन्न स्थानों पर पाए जाते हैं। जब हम उन्हें बैल के पास में ले जाते हैं, तो गाय सतर्कता (गौ रक्षक) हमें रोक लेते है और हमला करते हैं कि हम मवेशियों को वध के लिए तस्करी कर रहे हैं। वे कागजात भी नही देखते हैं। गायों या किसी अन्य मवेशी को ले जाने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें वध के लिए लिया जा रहा है। उन्हें उपचार या बाजार से व्यवसाय के लिए ले जाया जा सकता है, "उन्होंने कहा।

गाय सतर्कता गिरोह - उन्होंने आरोप लगाया – बिना किसी डर मौज लें रहे हैं। उन्हें पुलिस का समर्थन भी प्राप्त है, उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक लाभ के लिए समाज को विभाजित करने के लिए गायों के नाम पर लोगों को पीटा या मार डाला जा रहा है।

gau rakshak
Cow Vigilante
Mewat
Alwar lynching
Rakbar Khan
mob lynching
mob violence

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

बंगाल हिंसा मामला : न्याय की मांग करते हुए वाम मोर्चा ने निकाली रैली

बिहार: बीफ खाने के नाम पर खलील की हत्या, परिवार का आरोप; उच्च-स्तरीय जांच की मांग

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

झारखंड : मॉब लिंचिंग क़ानून के बारे में क्या सोचते हैं पीड़ितों के परिवार?

झारखंड : नागरिक समाज ने उठाई  ‘मॉबलिंचिंग विरोधी क़ानून’ की नियमावली जल्द बनाने की मांग

पलवल : मुस्लिम लड़के की पीट-पीट कर हत्या, परिवार ने लगाया हेट क्राइम का आरोप

शामली: मॉब लिंचिंग का शिकार बना 17 साल का समीर!, 8 युवकों पर मुकदमा, एक गिरफ़्तार


बाकी खबरें

  • यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    पीपल्स डिस्पैच
    यमन पर सऊदी अत्याचार के सात साल
    30 Mar 2022
    यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला युद्ध अब आधिकारिक तौर पर आठवें साल में पहुंच चुका है। सऊदी नेतृत्व वाले हमले को विफल करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए हज़ारों यमन लोगों ने 26 मार्
  • imran khan
    भाषा
    पाकिस्तान में संकटग्रस्त प्रधानमंत्री इमरान ने कैबिनेट का विशेष सत्र बुलाया
    30 Mar 2022
    यह सत्र इस तरह की रिपोर्ट मिलने के बीच बुलाया गया कि सत्ताधारी गठबंधन के सदस्य दल एमक्यूएम-पी के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। 
  • national tribunal
    राज वाल्मीकि
    न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा
    30 Mar 2022
    “नेशनल ट्रिब्यूनल ऑन कास्ट एंड जेंडर बेस्ड वायोंलेंस अगेंस्ट दलित वीमेन एंड माइनर गर्ल्स” जनसुनवाई के दौरान यौन हिंसा व बर्बर हिंसा के शिकार 6 राज्यों के 17 परिवारों ने साझा किया अपना दर्द व संघर्ष।
  • fracked gas
    स्टुअर्ट ब्राउन
    अमेरिकी फ्रैक्ड ‘फ्रीडम गैस’ की वास्तविक लागत
    30 Mar 2022
    यूरोप के अधिकांश हिस्सों में हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग का कार्य प्रतिबंधित है, लेकिन जैसा कि अब यूरोपीय संघ ने वैकल्पिक गैस की आपूर्ति के लिए अमेरिका की ओर रुख कर लिया है, ऐसे में पिछले दरवाजे से कितनी…
  • lakhimpur kheri
    भाषा
    लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब
    30 Mar 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘ एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को जांच की निगरानी कर रहे न्यायाधीश के दो पत्र भेजे हैं, जिन्होंने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के वास्ते राज्य…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License