NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश में अपराध पर लगाम का दावा हक़ीक़त से कोसों दूर है?
पिछले कुछ दिनों में ही उत्तर प्रदेश की राजधानी 13 गोलीकांडों से दहली है। सोनभद्र और बुलंदशहर जैसे मामलों को बीते हुए अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं लेकिन पुलिस मुखिया दावा कर रहे हैं कि अपराध में कमी आई है।
असद रिज़वी
28 Sep 2019
UP police
Image courtesy:hindustantimes.com

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले सोमवार को एपीसेन रोड पर बाइक सवार बदमाशों ने एक रेलकर्मी मोहम्मद शाहनवाज को 3 गोलियां मार दी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन 24 सितंबर को उनकी मौत हो गई। इस घटना के एक दिन पहले ही कैंट क्षेत्र में कोतवाली के निकट एक पूड़ी-सब्जी बेचने वाले दीपू की हत्या बदमाशों ने अधांधुंध गोलियां बरसाकर कर दी।

ये सिर्फ कुछ चंद उदाहरण थे। पिछले कुछ दिनों में प्रदेश की राजधानी 13 गोलीकांडों से दहली हुई है। इसके उलट प्रदेश के पुलिस मुखिया यह दावा करते हैं कि पिछले वर्षों के मुकाबले अपराधों में कमी आ रही हैं।

वैसे भी यह राजधानी का हाल है। प्रदेश के अन्य भागों में हो रहे अपराध के आंकड़ों को देखे तो मुख्यमंत्री का भी यह दावा बेबुनियाद नजर आता है कि 2022 के विधान सभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश का एक ऐसा राज्य होगा जहां अपराध पूरी तरह नियंत्रण में होगा।

हेट क्राइम सबसे अधिक  

उत्तर प्रदेश में हेट क्राइम (किसी से जाति, धर्म अथवा लिंग भेद आदि के आधार पर नफरत करना) भी बहुत अधिक हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार कमीशन की रिपोर्ट से मालूम होता है कि उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यकों और दलितों के लिए असुरक्षित स्थान नहीं है।

कमीशन ने 2016 और 2019 (जून 15 तक) के बीच 2008 हेट क्राइम के मामले दर्ज किए हैं। जिनमे से 869 केवल उत्तर प्रदेश से हैं। जिससे यह साफ अर्थ निकलता है कि भारत में होने वाले हेट क्राइम में 43 प्रतिशत सिर्फ उत्तर प्रदेश में हुए हैं। एमनेस्टी इंडिया की मार्च 2019 की रिपोर्ट के अनुसार लगातार तीन वर्षो से हेट क्राइम, उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा हो रहे हैं। 'हाल्ट द हेट' वेबसाइट पर एमनेस्टी इंडिया ने प्रकशित आंकड़ों में कहा है कि उत्तर प्रदेश में 2018 में 57, 2017 में 50 और 2016 में 60 हेट क्राइम दर्ज किये गए हैं, जिनमे हाशिये पर ज़िन्दगी गुज़ार रहे लोगों खासकर दलितों को निशाना बनाया गया है।  

पुलिस की बर्बरता और पुलिस पर हमले

राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में सितम्बर 29, 2018 को बहुराष्ट्रीय कंपनी के कर्मचारी विवेक तिवारी पुलिस की गोली के शिकार हो गए थे। पुलिस पर आरोप लगा कि तिवारी को पुलिस ने सिर्फ इसलिए गोली मार दी क्योकि उन्होंने पुलिस के इशारे पर अपनी कार नहीं रोकी थी।

इस घटना के बाद इस बात पर चर्चा शुरू हो गई थी कि पुलिस को किसी भी आम नागरिक को गोली मार देने का अधिकार किसने दिया है? इसके अलावा पुलिस पर भी उत्तर प्रदेश में हमले की खबरें भी सामने आई है।

बुलंदशहर ज़िले में एक पुलिस इंस्पेक्टर की भीड़ ने हत्या कर दी थी। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या उस वक़्त हुई जब उन पर करीब 400 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। वह अपने क्षेत्र में दिसम्बर 03, 2018 गौवंश मिलने की खबर के बाद फैले तनाव को नियंत्रित करने गए थे। उल्लेखनीय हैं कि प्रदेश के विभिन ज़िलों से पुलिस पर हमले की खबरें आती रहती हैं और पुलिस पर भी अनेक फ़र्ज़ी एनकाउंटर के आरोप भी लगे हैं।

महिलाओं के साथ अपराध

महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को लेकर सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाज़ा उन्नाव रेप कांड और चिन्मयानंद प्रकरण से लगाया जा सकता है। "बेटी बचाओ और बेटी बढ़ाओ" का नारा लगा कर सत्ता हासिल करने वाली बीजेपी सरकार पर रेप के अभियुक्तों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगा है। सत्तारूढ़ दल के विधायक कुलदीप सेंगर और पूर्व केंद्रीय मंत्री पर रेप के आरोप होने के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस उसको  गिरफ्ता रकरने की हिम्मत तक नहीं कर सकी थी। सत्तारूढ़ दल से सम्बन्ध रखने वाले दोनों नेताओ की गिरफ्तारी केवल अदालत के सख्त होने के बाद हो सकी है।

सोनभद्र नरसंहार

सोनभद्र के उम्भा गांव में 17 जुलाई को जमीनी विवाद में 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी। जबकि बाद में वाराणसी के ट्रामा सेंटर में एक महिला की मौत हो गई। अब तक इस नरसंहार में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना में करीब 29 लोग घायल हो गए थे। उल्लेखनीय है की 17 जुलाई 2019 को जमीनी विवाद में हुए खूनी संघर्ष में जमकर असलहे, लाठी डंडे और गोलियां चली थीं। इस हमले में गोंड समुदाय की तीन महिलाओं समेत दस लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना से उत्तर प्रदेश में दशहत का माहौल पैदा हो गया था और कानून—व्यवस्था की धज्जियां उड़ गई थी।  

मीडिया में आये कुछ आंकड़े

मीडिया में पुलिस सूत्रों से आये आकड़ों के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश में इस बर्ष सितम्बर के प्रथम सप्ताह तक  डकैती 73, लूट 1,473, हत्या 2,355, दंगा 3637, घरेलू विवाद 5308, फिरौती/अपहरण-23, दहेज मृत्यु 1,536 और रेप 1,833 के मामले मिलाकर कुल 2,18,096 आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। महिला उत्पीड़न 29,563, एससी/एसटी के खिलाफ अपराध कुल अपराध 7342 और विभिन्न कृत्यों में अपराध 30,93,966 दर्ज किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस में काम कर चुके पुलिस के आला अधिकारी भी मानते हैं कि योगी सरकार अपराधों को रोकने में नाकाम रही है। एसआर दारापुरी (आईपीएस सेवानिवृत)कहते हैं कि योगी  सरकार एनकाउंटर के ज़रिए अपराध रोकना चाहती है, जो कि सम्भव नहीं है।

दारापुरी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार एनकाउंटर के नाम पर अल्पसंख्यकों और दलित समुदाय को निशाना बना रही है। आईजी के पद से सेवानिवृत होने वाले दारापुरी कहते हैं कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी समस्या यह है कि आम नागरिकों के विरुद्ध हो रहे अपराधों की एफ़आईआर नहीं लिखी जा रही है।

वरिष्ठ पत्रकार भी मानते हैं कि पिछले ढाई साल में प्रदेश में कोई बदलाव नहीं आया है। वरिष्ठ पत्रकार अतुल चंद्रा कहते हैं कि प्रदेश में अपराधों की एफ़आईआर नहीं लिखी जा रही है, इसके  अलावा अपराधों की जांच भी वक़्त पर पूरी नहीं हो रही हैं।

अतुल चंद्रा कहते हैं कि न हीं हत्याओं में कमी हुई है और न ही महिलाओं के विरुद्ध अपराध काम हुए हैं, बल्कि चैन स्नैंचिंग जैसे अपराध बढ़ गए हैं। केवल सर्वे आ रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में पुलिसिंग में सुधार आया है, लेकिन ज़मीन की हक़ीक़त कुछ और है। उन्होंने कहा कि पुलिस स्वयं शिकायतकर्ताओं को इतना परेशान करती है कि वह मुक़दमा दर्ज कराए बिना लौट जाते हैं।

पत्रकारों पर निशाना

इस सबके बावजूद मौजूदा वक़्त में उत्तर प्रदेश में खबर लिखने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। मिर्ज़ापुर का ताज़ा उदहारण है। जहां "मिड डे मील" में नमक के साथ रोटी की खबर दिखने वाले पत्रकार पर ही मुक़दमा लिख दिया गया है।

अपराध में कमी संबंधी पुलिस के दावों पर अधिक जानकारी के लिए पुलिस महानिदेशक के जन संपर्क अधिकारी से कई बार मोबाइल पर संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने बात नहीं की।

(लेख के इस्तेमाल आकड़ों को विभिन सूत्रों और मीडिया से हासिल किया गया है।) 

UP police
CRIMES IN UP
Sonbhadra Violence
bulandshahr violence
yogi sarkar
BJP
national human rights commission
Police brutality
Attack on Police
violence against women
attack on media
attack on journalists

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!


बाकी खबरें

  • sbi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    DCW का SBI को नोटिस, गर्भवती महिलाओं से संबंधित रोजगार दिशा-निर्देश वापस लेने की मांग
    29 Jan 2022
    एसबीआई ने नयी भर्तियों या पदोन्नत लोगों के लिए अपने नवीनतम मेडिकल फिटनेस दिशानिर्देशों में कहा कि तीन महीने से अधिक अवधि की गर्भवती महिला उम्मीदवारों को ‘‘अस्थायी रूप से अयोग्य’’ माना जाएगा।
  • Yogi
    रश्मि सहगल
    यूपी चुनाव: पिछले 5 साल के वे मुद्दे, जो योगी सरकार को पलट सकते हैं! 
    29 Jan 2022
    यूपी की जनता में इस सरकार का एक अजीब ही डर का माहौल है, लोग डर के मारे खुलकर अपना मत ज़ाहिर नहीं कर रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर एक अलग ही लहर जन्म ले रही है, जो दिखाई नहीं देती। 
  • Pegasus
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    पेगासस मामले में नया खुलासा, सीधे प्रधानमंत्री कठघरे में, कांग्रेस हुई हमलावर
    29 Jan 2022
    अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर के अनुसार, 2017 में भारत और इजराइल के बीच हुए लगभग दो अरब डॉलर के अत्याधुनिक हथियारों एवं खुफिया उपकरणों के सौदे में पेगासस स्पाईवेयर तथा एक मिसाइल…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: कैसे करेंगे चुनाव प्रचार? जब बागों में ही नहीं है कोई बहार! 
    29 Jan 2022
    बिहार चुनाव होते हैं तो नीतीश बाबू अपने 15 साल के शासन को भुलाकर लालू-राबड़ी की सरकार को कोसते रहते हैं, लेकिन यूपी में किसको कोसेंगे? यहाँ तो उनके ही भाई-बंधुओं की सरकार है।
  • potato farming UP
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: आलू की कीमतों में भारी गिरावट ने उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ाईं मुश्किलें
    29 Jan 2022
    ख़राब मौसम और फसल की बीमारियों के बावजूद, यूपी की आलू बेल्ट में किसानों ने ऊंचे दामों की चाह में आलू की अच्छी पैदावार की है। हालांकि, मौजूदा खुदाई के मौसम में गिरती कीमतों ने उनकी उम्मीदों पर पानी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License