NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या वसुंधरा राजे ने किया है छात्रों के साथ विश्वासघात ?
2013 में प्रकाशित अपने घोषणा पत्र में पार्टी बीजेपी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बड़े बड़े वादे किये थे।लेकिन पाँच सालों के बाद ऐसा लगता है कि इनमें से किसी को भी पूरा नहीं किया गया।
ऋतांश आज़ाद
18 Aug 2018
rajasthan

राजस्थान सरकार के पाँच साल पूरे होने वाले हैं और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने कामों का बखान करने के लिए प्रदेश यात्रा पर निकलीं हैं। 2013 में प्रकाशित अपने घोषणा पत्र में  पार्टी बीजेपी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बड़े बड़े वादे किये थे।लेकिन पाँच सालों के बाद ऐसा लगता है कि इनमें से किसी को भी पूरा नहीं किया गया।
 
घोषणा पत्र में पहला वादा किया गया था कि शिक्षा के पाठ्यक्रमों में परिवर्तन किये जाएंगे। सरकार ने यह वादा तो पूरा किया लेकिन खतरनाक तरीकों से। राजस्थान की पाठ्यपुस्तकों की ओर सिर्फ एक नज़र डालने से साम्प्रदायिकता की बू आने लगती है। 
 
पिछले साल जून में राजस्थान सरकार द्वारा छापी गयी 10 कक्षा की इतिहास की किताबों में हिंदुत्व के मुख्य विचारक वी डी सावरकर को नायक  की तरह पेश किया गया था। किताबों में लिखा गया कि वे "महान क्रांतिकारी"  थे , उन्होंने अपनी ज़िदगी देश के नाम कर दी थी और उनकी तारीफ शब्दों  में नहीं की जा सकती। जबकि ज़्यादातर इतिहासकारों का कहना  है कि सावरकर ने धर्म के आधार पर देश के  विभाजन  की बात सबसे पहले की थी, उन्होंने मुसलमानों को दोयम दरज़े का नागरिक बनाने की बात की थी और उनके द्वारा लिखी किताब में उन्होंने युद्ध की स्थिति में मुस्लिम महिलाओं  के साथ बलात्कार तक को सही ठहराया था। इसके अलावा  सावरकार की तथाकथित  "वीरता" इस बात से भी ज़ाहिर होती है कि कालापानी की सज़ा के दौरान जेल से छूटने के लिए  उन्होंने कई बार अंग्रेज़ी सरकार को चिट्ठी लिखकर माफ़ी माँगी थीI  
 
पिछले साल ही राजस्थान विश्वविद्यालय में इतिहास और कॉमर्स के पाठ्यक्रमों में भी बदलाव किये गए। जहाँ कॉमर्स  के पाठ्यक्रम में भगवत गीता को शामिल किया गयाI वहीं इतिहास के पाठ्यक्रमों  में एक किताब जोड़ी गयी जिसमें बताया गया कि मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप अकबर से हल्दीघाटी में युद्ध जीते थे।यह बात ऐतिहासिक तथ्यों से बिलकुल उलट हैI दरअसल महाराणा  प्रताप को संघ और बीजेपी मुस्लिम शासकों से देश को बचाने वाले हिंदुत्व के महानायक की तरह पेश करते हैं। इतिहास को इस तरह दर्शाने की कोशिश आम लोगों को धर्म के नाम पर बाँटने  के लिए की जाती है और इससे संघ  और बीजेपी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने  के लिए इस्तेमाल करता रहा है। 
 
इसी कड़ी में पिछले साल नवम्बर में हिंदुत्व संगठनों ने जयपुर में "हिन्दू आध्यात्मिक मेला" आयोजित किया जिसमें स्कूली बच्चों का जाना अनिवार्य था।  इस मेले संघ से जुड़े संगठन में विश्व हिन्दू परिषद् के द्वारा एक पुस्तिका बाँटी गयी जिसमें मुसलमानों को 'आतंकी', 'देश द्रोही' और 'पाकिस्तान परस्त' बताया गया।  इसके अलावा पुस्तिका में कहा गया कि मुस्लिम लड़के हिन्दू लड़कियों  को मुस्लिम बनाने के लिए उनसे शादी करते हैं - जिसे ‘लव जिहाद’ की संज्ञा दी गयी I
 
राजस्थान सरकार ने शिक्षा के ज़रिये साम्प्रदायिकता फ़ैलाने और अवैज्ञानिकता फ़ैलाने के सारे हथकंडे अपनाये हैं। इसी तरह 2018 में प्रदेश सरकार द्वारा एक पंचांग जारी किया गया जिसमें कहा गया था कि महीने के हर तीसरे शविवार को आध्यात्मिक गुरु स्कूलों में प्रवचन देंगे। लेकिन भारी विरोध के चलते उन्हें इस फैसले से पीछे हटना पड़ा। 
 
अपने घोषणा पत्र में बीजेपी ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्विद्यालयों में सुविधाओं को बढ़ाने का वादा किया था। लेकिन सूत्र बताते हैं कि सरकार ने सुविधाएं बढ़ाने के बजाय उन्हें ख़तम करने का कार्य किया है। सूत्रों की मानें तो राजस्थान में कम से कम 30 से ज़्यादा ऐसे महाविद्यालय हैं जिनकी खुद की ईमारत हो और कोई भी ऐसा कॉलेज नहीं है जहाँ सभी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हों। स्कूलों में शिक्षकों के करीब 50,000 पद खाली पड़े हैं और कॉलेजों में 5,000 शिक्षकों को के पद खाली पड़े हैं। जबकि इन्हे भरने की बात घोषण पत्र में की गयी थी। 
 
घोषणा पत्र यह वादा करता है कि शिक्षा मित्रों की समस्याओं को सुलझाया जायेगा, लेकिन सरकार ने सत्ता में आते ही उन्हें पदों से हटा दिया। दरअसल शिक्षा मित्र कांग्रेस के समय से यह माँग कर रहे थे कि उन्हें स्थायी किया जाए, उस समय बीजेपी ने उन्हें स्थायी करने की बात कही थी। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी नौकरी छीन ली गयी और करीब 22,000 शिक्षा मित्र बेरोज़गार हो गए। 
 
महिला विश्विद्यालय, पर्यटन विश्वविद्यालय और शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय बनाने की घोषणा  की गयी थी। लेकिन दोनों ही वादे अब तक ज़मीन पर नहीं उतर पाए हैं। गैर सरकारी शिक्षा संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए एक संस्था बनाने का वादा किया गया था। लेकिन इस तरह का कोई संस्थान उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए नहीं बनाया गया। निजी स्कूलों के लिए एक कमेटी बनायी गयी लेकिन वह भी ठीक ढंग से काम नहीं कर रही है। इस कमेटी  का काम निजी स्कूलों की फीस तय करना था। 
 
घोषणा पत्र में स्कूलों को स्मार्ट बनाने और उनकी संख्या बढ़ाने की बात की गयी थी। लेकिन वसुंधरा सरकार अपने कार्यकाल में 30,000 सरकारी स्कूलों को एकीकरण के नाम पर बंद कर दिया। हालांकि बाद में जनता के विरोध के चलते इसमें से कुछ स्कूलों को वापस शुरू किया गया लेकिन अब भी आधे से ज़्यादा स्कूल बंद है। रिपोर्टों के मुताबिक इस कार्यवाही से 90,000 से ज़्यादा शिक्षकों और कर्मचारियों के खाली पड़े पद ही ख़तम हो गए हैं। 
 
इसके साथ ही वसुंधरा सरकार ने पिछले साल सितम्बर में  300 स्कूलों को पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप के अन्तर्गत निजी कंपनियों को सौंपने का फैसला लिया था I इस प्रस्ताव के अंतर्गत सरकार हर स्कूल को सिर्फ 75 लाख की राशि में निजी हाथों को सौंपने वाली थी, साथ ही हर साल उन्हें सरकार 16 लाख रुपये देने वाली थी I यानी हर स्कूल पर सरकार निजी कंपनियों को 1.20 करोड़ रुपये देने वाली थी Iलेकिन राज्यभर में लगातार हो रहे ज़ोरदार प्रदर्शनों के चलते राजस्थान सरकार ने इसे ठन्डे बस्ते में डालने का निर्णय लेना पड़ा। 
 
घोषणा पत्र में राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की बात की गयी थी और साथ ही कैंपस में wifi देने की बात की थी।  लेकिन बाकी वादों की तरह इन्हे भी पूरा नहीं किया गया। इसके साथ ही Self Financing course को राज्य में बढ़ाया जा रहा है। इसमें होता यह है कि जहाँ दूसरे कोर्सों में सरकार अनुदान देती है इनमें अनुदान नहीं दिया जाता। इससे होता यह है कि कोर्सों की फीस बहुत बढ़ जाती है। SFI के राज्य सचिव मंडल सदस्य पवन बेनीवाल के अनुसार इस वजह से वुमेंस स्टडीज़ में PG करने के लिए अब 21,000 रुपये की ज़रुरत पड़ती है। 
 
इन सब मुद्दों के अलावा Rajasthan Eligibility Exam for Teachers एक परीक्षा हुआ करती थी, जिसमें योग्यता साबित करने के बाद छात्रों को शिक्षक की नौकरियाँ  मिल जाती थीं। लेकिन पिछले 4 सालों से REET के तहत भर्तियां नहीं की जा रही हैं, क्योंकि परिणामों में गफलत के चलते मामला हाई कोर्ट में चला गया। लेकिन चुनाव पास आने की वजह अब सरकार ने इस परीक्षा के तहत 35,000 वेकेंसियां निकाली हैं। 

इन हालातों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि वसुंधरा  सरकार ने विधार्थियों से धोखा किया है। उनकी सरकार के अनेक निर्णयों के द्वारा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ककिया जा रहा है। अगर यह उनका 'गौरव पूर्ण' काम है तो छात्र चाहेंगे कि वसुंधरा जी उनके लिए काम करना ही बंद कर दें। 
 

students
universities
Rajasthan
Vasundhara Raje
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License