NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्यों टूर दे फ्रांस के दौरान किसानों ने किया रास्ता जाम?
प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की जल्दी में पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन गलती से आँसू गैस की चपेट में खुद साइकिल चालक ही आ गये।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Jul 2018
Tour de France farmers' protest
Image Courtesy : Twitter - Sporting Index

24 जुलाई को टूर दे फ्रांस 2018 के 16 वें चरण के दौरान सरकार की सहायता में कटौती का विरोध करते हुए किसानों ने रास्ता जाम कर दिया। कारकासोन  से शुरू हुई ये रेस जब 30 किलोमीटर ख़तम कर चुकी थी तभी किसानों ने भेड़ों और सूखी गाँस के ज़रिये सड़क को रोक दिया। 

प्रदर्शनकारियों के विरोध के चलते यह रेस 15 मिनट तक रोक दी गयी। प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने की जल्दी में पुलिस ने आँसू  गैस का इस्तेमाल किया , लेकिन गलती से आँसू  गैस की चपेट में खुद साइकिल चालक ही आगये। कई साइकिल चालकों के आलावा  इसकी चपेट में साइकिलिंग जगत के दो सितारे क्रिस फ्रूम और टीम स्काय के जेरेट थॉमस भी आगये। 

फ्रांसीसी अधिकारियों को इस बात का सबसे ज़्यादा गिला है कि साइकिल चालक आँसू  गैस की चपेट में आगये, उन्हें ये चिंता है कि इससे देश की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा। टूर दे फ्रांस, फ्रांस का सबसे प्रतिष्ठित खेल आयोजन है, जिसे पूरी दुनिया में देखा जाता है। इस विरोध प्रदर्शन की वजह से अब दुनिया भर की नज़रें  फ्रांस के मिडी पायरेन्स और पीईजी  इलाके में चल रहे कृषि संकट पर होंगी। फीफा वर्ल्ड कप में देश की जीत के बाद के जशन में लगी फ्रांस की सरकार को इस समस्या पर ध्यान देने  के लिए एक और वजह मिल गयी है।  

इस इलाके में जिसका केंद्र टूलूज़ शहर है , ये पहली बार नहीं है कि इस तरह किसानों ने प्रदर्शन किया हो और शायद ये आखरी बार भी नहीं होगा । जिस तरह बहुत लोगों ने समझाया है ये ज़िंदा रहने की लड़ाई है। जो किसान सड़क को रोकने के लिए 200 भेड़ें , ट्रैक्टर और सूखी घाँस लेकर आये थे वह ’For the Piege region to live’( पीईजी इलाके के जीवन के लिए ) के बैनर भी लेकर आये थे। 

इस आंदोलन के प्रवक्ता ने fginsignt.com को बताया कि ये प्रदर्शन इलाके के किसानों के प्रति सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ है। उन्होंने कहा "हम टूर दे फ्रांस को इसीलिए रोकना चाहते थे जिससे हमें कुछ जवाब मिलें। हमने कृषि मंत्री से हमारे ग्रामीण इलाके की अनदेखी करने की समस्या के बारे में जवाब माँगे थे। तबसे 6 महीने हो गये हैं और हमें फिर भी जवाब नहीं मिला है। "हम रास्ता रोकने के लिए सूखी घांस और भेड़े लेकर गए थे लेकिन पुलिस ने हम पर आँसू  गैस चलाई। " फ्रांसीसी किसानों की समस्याओं के बारे तब पता चला जब फरवरी में टूलूज़ शहर को जाने वाले हाईवे को किसानों ने रोक दिया था। 

टूलूज़ शहर और टूर दे फ्रांस में हुआ किसानों का विरोध प्रदर्शन फ्रांसीसी सरकार द्वारा उन कृषि क्षेत्रों की संख्या को कम  करने के खिलाफ था जिन्हे यूरोपियन यूनियन से सब्सिडी मिल रही है। जिन इलाकों को खेती के लिए 'कम सहायक' माना जाता है उन्हें सरकार से आर्थिक मदद पाने का अधिकार है लेकिन सरकार ने इन इलाकों की सूची से 100 इलाकों का नाम हटा दिया है । अगर इस नीति को लागू कर दिया गया तो इलाके पर विपरीत असर पड़ेगा। इससे किसानों को हर साल €7,000 की सब्सिडी नहीं मिलेगी। 

Le Pont से बात करते हुए एक किसान ने कहा "गुस्सा तब बढ़ता है जब लोगों के पास को भविष्य नहीं होता।"टूलूज़ में प्रदर्शन के दौरान FDSEA किसान संगठन  की Sophie Maniagoने thelocal.fr को कहा कि किसान तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सर्कार इस समस्या को कोई वाजिब निकालती।  Maniago ने कहा "फिलहाल हमारा मनोबल इतना  है कि हम एक भी इंच पीछे नहीं हटने वाले।ये खेती की मौत है। हमें €8,000 से  €10,000  यूरो तक का नुक्सान होगा। ये इलाके ख़तम हो रहे हैं और खाली होते जा रहे हैं , गाँव मरने वाले हैं। "

बहुत से किसानों ने कहा है कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी और हिंसक भी हो सकती है। Maniago ने उस समय कहा था "ये विरोध प्रदर्शन से ज़्यादा  एक ग्रह युद्ध है। "  Thelocal.fr में छपी रिपोर्ट में फ्रांस के सबसे बड़े FNSEA के विचार भी रखे गए थे। FNSEA ने कहा कि सरकार के 'कम सहायक' कृषि इलाकों की योजना में बदलाव अन्यायपूर्ण है उन्होंने कहा कि यूरोपियन  यूनियन से आ रही राशि इन पिछड़े हुए इलाकों के कृषि उत्पादन के लिए बहुत ज़रूरी है। फ्रांस में इस मुद्दे पर सभी यूनियनें एक साथ हैं। उन्हें सरकार से एक 'निर्विवादित और निष्पक्ष ' लिस्ट चाहिए जिसमें सरकार इन पिछड़े हुए इलाकों की सच्चाई को ध्यान में रखे। यह मुद्दा पिछले एक साल से उभरकर  आ रहा है। इत्तेफाक से यह मुद्दा फिर से इसीलिए उभरकर आया जब टोर दे फ्रांस में किसानों ने विरोध के तौर पर रास्ता जाम करने का निर्णय लिया। 

tour de france
farmers' protest
France

Related Stories

विभाजनकारी चंडीगढ़ मुद्दे का सच और केंद्र की विनाशकारी मंशा

साम्राज्यवाद पर किसानों की जीत

मुंबई महापंचायत: किसानों का लड़ाई जारी रखने का संकल्प  

मालवा के किसान और खेतिहर मज़दूर कई संघर्षों से जूझ रहे हैं

विशेष : पांडिचेरी के आज़ादी आंदोलन में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका

भारत बंद: ‘उड़ीसा में न्यूनतम समर्थन मूल्य ही अब अधिकतम मूल्य है, जो हमें मंज़ूर नहीं’

मुज़फ़्फ़रनगर में 'ऐतिहासिक' महापंचायत के लिए प्रचार, 2 लाख से अधिक किसान लेंगे भाग

कटाक्ष: ये जासूसी-जासूसी क्या है?

ग्राउंड ज़ीरो : किसानों का विरोध महज़ एमएसपी को लेकर नहीं, ग्रामीण भारत के कॉर्पोरेट अधिग्रहण को लेकर भी है

किसान आंदोलन: रोज़ जुड़ रहे कई और काफ़िले


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर
    30 Apr 2022
    मुज़फ़्फ़रपुर में सरकारी केंद्रों पर गेहूं ख़रीद शुरू हुए दस दिन होने को हैं लेकिन अब तक सिर्फ़ चार किसानों से ही उपज की ख़रीद हुई है। ऐसे में बिचौलिये किसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठा रहे है।
  • श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 
    30 Apr 2022
    प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 22 अप्रैल 2022 को विधानसभा में घोषणा की कि ग्रामसभाओं की बैठक गणतंत्र दिवस, श्रम दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के अलावा, विश्व जल दिवस और स्थानीय शासन…
  • समीना खान
    लखनऊ: महंगाई और बेरोज़गारी से ईद का रंग फीका, बाज़ार में भीड़ लेकिन ख़रीदारी कम
    30 Apr 2022
    बेरोज़गारी से लोगों की आर्थिक स्थिति काफी कमज़ोर हुई है। ऐसे में ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि ईद के मौक़े से कम से कम वे अपने बच्चों को कम कीमत का ही सही नया कपड़ा दिला सकें और खाने पीने की चीज़ ख़रीद…
  • अजय कुमार
    पाम ऑयल पर प्रतिबंध की वजह से महंगाई का बवंडर आने वाला है
    30 Apr 2022
    पाम ऑयल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। मार्च 2021 में ब्रांडेड पाम ऑयल की क़ीमत 14 हजार इंडोनेशियन रुपये प्रति लीटर पाम ऑयल से क़ीमतें बढ़कर मार्च 2022 में 22 हजार रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं।
  • रौनक छाबड़ा
    LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम
    30 Apr 2022
    कर्मचारियों के संगठन ने एलआईसी के मूल्य को कम करने पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनके मुताबिक़ यह एलआईसी के पॉलिसी धारकों और देश के नागरिकों के भरोसे का गंभीर उल्लंघन है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License