NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
…क्योंकि शोक का समय है!
पुलवामा में हमला हुआ और घंटों बाद तक भी प्रधानमंत्री महोदय जिम कॉर्बेट पार्क में पिकनिक मनाते रहे, डिस्कवरी चैनल की शूटिंग करते रहे, चुनावी अंदाज की सभा करते रहे, विरोधियों को लपेटते रहे। …व्यंग्य है तो, पर लिख नहीं पा रहा हूँ, शोक का समय है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
24 Feb 2019
सऊदी के प्रिंस क्राउन सलमान बिन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
सांकेतिक तस्वीर। साभार : Scroll.in

व्यंग्य बन नहीं रहा है, शोक का समय है। हाल ही में पुलवामा में केंद्रीय सशस्त्र सेना बल के करीब चालीस जवान आत्मघाती आतंकवादी हमले में मारे गए। इससे पहले उरी में हमला हुआ था और उसके पहले पठानकोट में। कुछ मित्र लोग, जो भक्त भी हैं, वाट्सएप करते हैं कि मोदी जी को वोट देना क्योंकि उनके काल में एक भी हमला नहीं हुआ। मैं सच्चाई देखूं या भक्त लोगों की मानूं। व्यंग्य बन नहीं रहा है, अफसोस का समय है।

खबरें हैं कि इस हमले के बारे में गुप्तचर विभागों ने पहले ही सूचना दे दी थी। अमरीकी गुप्तचर विभाग के अलावा हमारे देश के गुप्तचर विभाग ने भी इस बारे में सूचना दी थी। कहा जाता है कि इतनी तक सूचना दी गई थी कि सेना के सड़क के रास्ते जा रहे काफिले पर हमला होगा। सूचना है कि आठ फरवरी को सूचना दे दी गई थी और हमला चौदह फरवरी को हुआ। पर लगता है कि चौदह आठ से पहले आ गया। क्या मोदी जी की, सरकार की, उलटी गिनती शुरू हो गई है। उलटी गिनती में ही चौदह आठ से पहले आता है। पर व्यंग्य बन नहीं रहा है, अफसोस का समय है।

tirchi najar after change new_0.png

चालीस के लगभग सैनिक मारे गए। एक बहुत बडे़ काफिले में सैनिक जा रहे थे। किसी सिरफिरे ने आत्मघाती हमला किया। बिना लडे़ ही चालीस वीर शहीद हो गये। लड़ कर, दुश्मनों के छक्के छुड़ा कर शहीद होते तो बात समझ में आती। पर सरकार की नाकामी से ऐसे ही शहीद हो गये। इस तरह से शहीद होने पर उनके परिवार वाले भी उनकी शहादत पर गर्व  नहीं महसूस करते होंगे। पर व्यंग्य का नहीं, शोक का समय है।

मुझे ध्यान है, 2015 में नेपाल में भयंकर भूकंप आया था। बताया जाता है कि उस समय मोदी जी इतना सजग थे कि नेपाल के प्रधानमंत्री को भी मोदी जी ने ही बताया था कि आपके यहाँ भूकंप आया है। हर तरह के मीडिया में इसी तरह की चर्चा थी। पर इस बार न जाने क्या हुआ। पुलवामा में हमला हुआ और घंटों बाद तक भी प्रधानमंत्री महोदय जिम कॉर्बेट पार्क में पिकनिक मनाते रहे, डिस्कवरी चैनल की शूटिंग करते रहे, चुनावी अंदाज की सभा करते रहे, विरोधियों को लपेटते रहे। जैसे प्रधानमंत्री जी को पुलवामा की घटना का पता ही न चला हो। अगर पता चल गया था तो यह पिकनिक एक बड़ा अपराध है, और अगर पता नहीं चला था तो संचार क्रांति के इस युग में पता तक न चलना और भी बड़ा अपराध है। हो तो यह भी सकता है कि किसी की हिम्मत ही नहीं हुई हो कि साहेब के आराम में खलल डाले। उधर अमित शाह भी एक अन्य रैली को संबोधित करते रहे और कांग्रेस की ऐसी की तैसी करते रहे। पर मैं व्यंग्य नहीं कर सकता क्योंकि शोक का समय है।

उन वीर जवानों की, जिन्हें सरकार की अकर्मण्यता के कारण वीरता दिखाने का अवसर ही नहीं मिला, शवयात्रा भाजपाइयों ने कुछ इस तरह निकाली जैसे भाजपा की चुनावी रैली निकाली जा रही हो। शव वाहन पर मंत्री, सांसद और नेता इसी तरह से सवार थे। सैल्फी ले रहे थे, फोटो खिंचवा रहे थे, मुस्कुरा रहे थे, हँस रहे थे। विरोधी दलों के नेताओं का व्यवहार भी बहुत अलग नहीं था। पर व्यंग्य बन नहीं रहा है, शोक का समय है।

पुलवामा के हमले के बाद सबका खून खौल रहा है। कश्मीर हमारा है। जहाँ जिसको मौका मिल रहा है कश्मीरी छात्रों को पीट रहा है, कश्मीरी व्यापारियों का सामान लूट रहा है। क्योंकि कश्मीर हमारा है पर कश्मीरी हमारे नहीं हैं। लगता है, हम जमींदार बन गये हैं। हमें जमीन से प्यार है पर उस जमीन पर रहने वाले लोगों से नहीं। कुछ जमींदार कॉलेज वालों ने तो ऐलान भी कर दिया है कि वे कश्मीरी छात्रों को अपने कॉलेज में प्रवेश नहीं देंगे। व्यंग्य है तो पर लिख नहीं पा रहा हूँ, शोक का समय है।

पुलवामा की घटना के बाद पाकिस्तान से युद्ध का माहौल बनाया जा रहा है। मंत्री से लेकर मीडिया तक सभी पाकिस्तान से लड़ाई के पैरोकार बन रहे हैं। न्यूज चैनलों के एंकर पाकिस्तान पर हमले की ऐसी पैरवी करने में लगे हैं जैसे वे ही सबसे बडे़ सैन्य विशेषज्ञ हैं। सोशल मीडिया पर भी युद्धोन्माद फैलाया जा रहा है। राजनेता इस माहौल से बहुत खुश हैं। भले ही दोनों तरफ के हजारों सैनिक शहीद हों जायें, हजारों महिलाएं विधवा हो जायें और हजारों बच्चे पिता-विहीन हो जायें पर देश को युद्ध में धकेल दिया जाये। क्योंकि वोट तो इसी युद्धोन्माद से मिलेंगे। शांति की बात करनेवाले देश द्रोही बन गये हैं। व्यंग्य है तो सही पर लिख नहीं पा रहा हूँ क्योंकि शोक का समय है।

न्यूज़क्लिक से : आप पिछले कुछ समय से प्रत्येक रविवार को मेरा व्यंग्य छापते हो। पर मुझे खेद है कि व्यंग्य तो बहुत है लेकिन इस रविवार मैं लिख नहीं पा रहा हूँ क्योंकि शोक का समय है।

Satire
Political satire
Narendra modi
modi sarkar
BJP
pulwama attack
CRPF Jawan Killed
Jingoism
no war

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • election
    मुकुल सरल
    जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा
    11 Mar 2022
    यूपी को लेकर अभी बहुत समीक्षा होगी कि जाट कहां गया, मुसलमान कहां गया, दलित कहां गया। महिलाओं का वोट किसे मिला आदि...आदि। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या ग्राउंड ज़ीरो से आ रहीं रिपोर्ट्स, लोगों की…
  • uttarakhand
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल
    11 Mar 2022
    "बेरोजगारी यहां बड़ा मुद्दा था। पर्वतीय क्षेत्रों का विकास भी बड़ा मुद्दा था। भू-कानून, पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली बड़ा मुद्दा था। पलायन बड़ा मुद्दा था। लेकिन नतीजे तो यही कहते हैं कि सभी…
  • पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    जगन्नाथ कुमार यादव
    पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    11 Mar 2022
    इस महासम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा बिहार तकनीकी सेवा आयोग समेत 20 से ज़्यादा विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।
  • ukraine
    एपी/भाषा
    यूक्रेन-रूस अपडेट: चीन ने की यूक्रेन को मदद की पेशकश, रूस पर प्रतिबंधों को भी बताया गलत
    11 Mar 2022
    चीन के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अनुकूल सभी प्रयासों का समर्थन करता है और इसमें वह सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
  • विजय प्रसाद
    एक महान मार्क्सवादी विचारक का जीवन: एजाज़ अहमद (1941-2022)
    11 Mar 2022
    एजाज़ अहमद (1941-2022) की जब 9 मार्च को मौत हुई तो वे अपनी किताबों, अपने बच्चों और दोस्तों की गर्मजोशी से घिरे हुए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License