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राजनीति
केरल चुनाव: किसान बहुल क्षेत्र तिरुवम्बाडी में एलडीएफ की उम्मीद जगा रहा 28 वर्षीय जोसेफ
कोझिकोड जिले में पश्चिमी घाट से सटे ऊंचाई वाले क्षेत्र के आबाद किसानों का इलाका तिरुवम्बाडी कभी कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का निर्विवाद गढ़ हुआ करता था। 
शिल्पा शाजी
02 Apr 2021
तिरुवम्बाडी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार करते एलडीएफ उम्मीदवार लिंटो जोसेफ। 
तिरुवम्बाडी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार करते एलडीएफ उम्मीदवार लिंटो जोसेफ। 

लिंटो जोसेफ केरल के तिरुवम्बाडी विधानसभा क्षेत्र से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के उम्मीदवार हैं। 28 वर्षीय लिंटो पहले एथलीट रहे हैं, जो 15वीं केरल विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव में इस हाई रेंज वाले इलाके में सबसे युवा प्रत्याशी हैं।

न्यूज़क्लिक ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के इस युवा तुर्क से 24 मार्च को कादवू में  उनके चुनाव प्रचार अभियान के दौरान ही मुलाकात की। कादवू कोझिकोड जिले के तिरुवम्बाडी में एक छोटा शहर है।  लिंटो उस समय बच्चों और महिलाओं की एक सभा को संबोधित कर रहे थे, जो अपने उम्मीदवार को  विधानसभा क्षेत्र में किसानों की समस्या एवं अन्य मसलों के बारे में बोलते हुए बड़े चाव से सुन रहे थे। विधानसभा क्षेत्र में बड़ी आबादी खेती पर आश्रित है और इसलिए चुनाव अभियान में खेती से जुड़ा मसला अन्य तमाम मसलों में अहम है। 

कोझिकोड जिले में पश्चिमी घाट से सटे ऊंचाई वाले क्षेत्र के आबाद किसानों का इलाका तिरुवम्बाडी कभी कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का निर्विवाद गढ़ हुआ करता था। हालांकि 2006 में सीपीएम के एक करिश्माई नेता मथाई चाको ने यूडीएफ से यह सीट छीन  ली थी। किंतु चाको के अकस्मात निधन हो जाने के बाद, 2006 में मध्यावधि चुनाव हुआ और जार्ज.एम.थॉमस के जरिये एलडीएफ ने यह सीट बरकरार रखी थी। 2011 में यूडीएफ ने यह सीट फिर से जीत ली थी और इसके बाद 2016 के लिए हुए चुनाव में एलडीएफ के जार्ज एम.थॉमस ने इस पर फिर से अपना कब्जा जमा लिया था। 

इस क्षेत्र में मुख्य कृषि उत्पादों में  नारियल,  सुपारी, काली मिर्च और रबर शामिल हैं। लेकिन सुपारी के पौधों में पीली पत्तियों वाली बीमारी की वजह से उसकी पैदावार में काफी गिरावट आई है।  काली मिर्च की खेती करने वाले किसान भी इसके पौधों में फंग्स के इन्फेक्शन  और दाम में गिरावट की वजह से इसकी खेती से मुंह मोड़ रहे हैं।  रबर उत्पादक कांग्रेस की पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2009  में आसियान के साथ समझौते करने के बाद रबर के दामों में भी गिरावट आई है।  आसियान-भारत मुक्त व्यापार समझौते के कारण रबर, कॉफी और चाय का उत्पादन क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।

लिंटो ने अपने व्यस्त चुनावी अभियान के दौरान न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, “विधानसभा क्षेत्र की प्रकृति पर विचार करते हुए यहां के किसानों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए।” उन्होंने बताया कि उनका चुनाव अभियान सुबह 9:00 बजे शुरू हो जाता है और रात के 8:00 बजे तक जारी रहता है। एक उम्मीदवार जिसे चलने के लिए छड़ी के सहारे की जरूरत होती है, वह कोशिश करता है कि उसके अपने निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न इलाकों के  अधिक से अधिक लोगों के साथ उसकी मुलाकात हो जाए।

लिंटो 2019 में बाढ़ राहत कार्यों के दौरान उस समय एक दुर्घटना का शिकार हो गए जब वह एक ट्यूमर के मरीज को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में दाखिल करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। हालांकि यह दुर्घटना भी उन्हें लोगों के मुद्दों-मसलों से स्वयं को जोड़े रखने के संकल्प से विरक्त नहीं कर सकी। उस दुर्घटना की वजह से जोसेफ के दाहिने पैर में घुटने के नीचे कोई जान नहीं बची थी। 

छात्र जीवन में अपने सक्रिय कामकाज के कारण, लिंटो जोसेफ इस इलाके  में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, वे विशेषकर युवाओं में भी लोकप्रिय हैं।  इसके पहले 2020 के पंचायत चुनावों में उन्होंने कांग्रेस का किला माने जाने वाली कोदरांजी पंचायत में अपनी पैठ बनाने में सफल रहे थे और  पंचायत अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए थे।

इस विधानसभा क्षेत्र के किसानों की दशा-दिशा में सुधार को लेकर अपने दृष्टिकोण के बारे में लिंटो, जो खुद भी एक किसान हैं, ने न्यूज़क्लिक से  एलडीएफ के मेनिफेस्टो के बारे में बताया जिसमें रबर का समर्थन मूल्य प्रति किलो 250 रुपये करने का वादा किया गया है। किसानों और उनके संगठन इसकी लंबे समय से मांग करते आ रहे थे।  उन्होंने कहा कि इस  समर्थन मूल्य के साथ फसलों को मूल्य-संवर्धित उत्पादों में बदलने के लिए कदम उठाया जाएगा, जिससे स्थाई रूप से किसानों को अधिक से अधिक आमदनी होती रहे। 

पश्चिमी घाट से जुड़े इस क्षेत्र के किसानों का अन्य मसला, जंगली सुअर समेत अन्य जंगली जानवरों के आक्रमण का है, जिसका उन्हें सामना करना पड़ता है। कोड़ेनचेरी पंचायत के एक किसान ने कहा, “जंगली जानवरों के हमले की वजह से हम अपनी फसलें,  खासकर खाद्यान्न की फसलें, नहीं उगा सकते।  हमारे इलाके में,  एक आदमी इसी तरह के आक्रमण में मारा जाता है।  यह बड़ा जटिल मसला है और इन जंगली सूअरों ने हमारे जीवन को कठिन बना दिया है।” 

दिलचस्प है कि तिरुवम्बेडी वायनाड  लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है जिसका प्रतिनिधित्व  कांग्रेस के नेता राहुल गांधी करते हैं।  हालांकि लिंटो ने रेखांकित किया,  यद्यपि इस निर्वाचन क्षेत्र के खेती से जुड़े मसले राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं,  पर राहुल गांधी ने इन मुद्दों को कभी संसद में नहीं उठाया। 

जोसेफ ने कांग्रेस की भूमिका और आसियान समझौते  का उल्लेख करते हुए यह बताया कि कैसे ये दोनों ही राज्य के किसानों की दयनीय हालत के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने विश्लेषित किया कि “तब सीपीआई (एम) ने आसियान समझौते के विरोध में कासरगोड से लेकर तिरुवनंतपुरम तक एक मानव श्रृंखला का आयोजन किया था। उस वक्त कांग्रेस ने हमें किसानों की खुशहाली का विरोधी बताया था।  कांग्रेस नेता ने दावा किया था कि इस समझौते से किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी।  खैर, अब तो किसान भी जानते हैं कि उनके साथ क्या हुआ है। केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार भी  तत्कालीन कांग्रेस सरकार की नीतियों को ही आगे बढ़ा रही है।” 

अपने निर्वाचन क्षेत्र के अन्य मसलों के बारे में लिंटो का कहना है, “ चूंकि यह हाई रेंज वाला इलाका है,  इसलिए यहां कनेक्टिविटी  लंबे समय से बाधित रही है।  हमारे पास अच्छी सड़कें नहीं हैं।  लेकिन  एलडीएफ सरकार की हिली हाईवे परियोजना  ने इस निर्वाचन क्षेत्र में कनेक्टिविटी की समस्या का कुछ हद तक हल करने में सफल रही है।” 

“इस क्षेत्र में पर्यटन के विकसित न होने का एक बड़ा कारण था कनेक्टिविटी का अभाव।  लेकिन कन्नूर हवाई अड्डे और इन नई सड़कों ने  हमारे क्षेत्र को  पर्यटन के मानचित्र पर अंकित होने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। जैसा कि हमारे आसपास का क्षेत्र वायनाड सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटनस्थलों में एक है, लिहाजा हम इस लाभ का  उपयोग कर सकते हैं। तुषारगिरि, कक्कड़म्पोयिल आदि क्षेत्रों को बेहतर पर्यटन स्थलों में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान होगा। नई निर्मित सड़कें और  वायनाड तक जाने वाली निर्माणाधीन सुरंग  भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को  समृद्ध करने में अपना सहयोग देगी। हालांकि हम एक जवाबदेह पर्यटन को बढ़ावा देने पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।”

यहां  के  मतदाता विश्वास करते हैं कि एलडीएफ के लिए जीत आसान नहीं होगी। 2020 के पंचायत चुनाव में एलडीएफ के पक्ष में तीव्र लहर थी, इसमें यूडीएफ ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। इसलिए यूडीएफ के उम्मीदवार सी.पी. चेरिया मोहम्मद तिरुवम्बेडी में एलडीएफ के लिए कड़ी चुनौती दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने भी अधिक से अधिक वोट पाने के लिए क्षेत्र के किसान समुदाय के बेबे अम्बट्ट को मैदान में उतारा है। 

कड़े मुकाबले के बीच, क्षेत्र की जनसांख्यिकी संघटना को देखते हुए जमात-ए-इस्लामी का रुख दोनों मोर्चों के लिए अहम साबित हो सकता है। यूडीएफ कैंप का विश्वास है कि चेरिया मोहम्मद को जमात के यूडीएफ समर्थक रुख का फायदा मिलेगा। पिछली बार, एलडीएफ की जीत का अंतर महज 3,008 वोटों का था और इसके पहले 2011 के चुनावों में यूडीएफ  मात्र 3883 वोटों से चुनाव जीता था। चूंकि जीत का अंतर बहुत ही कम मतों का रहा है, लिहाजा निर्वाचन क्षेत्र में एक-एक वोट महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि उम्मीदवार अधिक से अधिक वोट अपनी झोली में डालने की कोशिशों में मशगूल हैं। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Kerala Elections: 28-year-old Linto Joseph Presents LDF’s Hopes in Farmer Majority Thiruvambady

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