NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
खामोश ! बाबरी मस्जिद विध्वंस का विस्तार जारी है
हिंदुत्व को कोई चुनौती नहीं, देश का मुसलमान जानता है कि उनके सेकुलर रहनुमा दीनी और दुनियावी दोनों सवालों पर उनके साथ नहीं हैंI
शरद जायसवाल
03 May 2018
Babri Masjid

पिछले चार सालों में हिंदुत्व ने मनोवैज्ञानिक रूप से जो बढ़त बनाई है, उसे बीस अप्रैल को गुडगाँव के सेक्टर 53 में हुई घटना से समझा जा सकता है. मुट्ठी भर सांप्रदायिक कार्यकर्ताओं द्वारा तकरीबन 500 के आस-पास नमाजियों को नमाज़ पढ़ने से रोकने की घटनायह बताती है कि हिंदुत्व को अपने मंसूबों को अमल में लाने के लिए अब किसी किस्म की शारीरिक हिंसा की जरुरत नहीं रह गयी है. चंद हिन्दुत्ववादी लड़के केवल जय श्रीराम का नारा लगाकर मुसलमानों को उनके दीनी हक से वंचित कर सकते हैं. गुडगाँव की इस घटना पर वायरल हुए 1.30 मिनट के वीडियो को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि इन चंद लड़कों की नारेबाजी और मुसलमानों को वहां से भगाने के खिलाफ एक भी नमाज़ी मुसलमान यह सवाल पूछने का साहस नहीं कर पाता है कि आप क्यों हमें नमाज़ नहीं पढ़ने दे रहे हैं या आप कौन होते हैं, हमें नमाज़ पढ़ने से रोकने वाले? इन सांप्रदायिक कार्यकर्ताओं की इस कार्यवाही पर मुसलमानों की तरफ से काउन्टर करने की बात तो बहुत दूर की बात है.

इस वीडियो में ये लड़के मुस्कुराते हुए नारे लगा रहे हैं, जैसे कोई खेल, खेल रहे हों. उनके चेहरे पर जो मुस्कान है वह एक विजयी मुस्कान है. इन सांप्रदायिक कार्यकर्ताओं को मुसलमानों को डराने के लिए किसी हथियार की भी जरूरत नहीं है. बहुत ही सहज और आसानी के साथ वे अपने मिशन में कामयाब हो जाते हैं. उनके इस मिशन में कहीं से कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती है. उनके आत्मविश्वास को देखकर यह कतई नहीं कहा जा सकता कि वे कोई असंवैधानिक काम कर रहे हैं. इन मुट्टी भर हिन्दुत्ववादी लड़कों के अन्दर इतना दुस्साहस और 500 के आस-पास मुसलमानों के अन्दर डर के सियासी समीकरण स्पष्ट हैं.

हिन्दुत्ववादी लड़के यह अच्छी तरह से जानते हैं कि राज्य और साप्रदायिक राजनीति उनके साथ है और वो यह भी जानकारी रखते हैं कि सेकुलर सियासत ऐसी कोई भी कोशिश नहीं करेगी जिससे उनका बाल भी बांका हो. उनके अपने दुस्साहस का कारण सेकुलर सियासत की इसी कमजोरी में निहित है और इसीलिए ये चंद लड़के जिनके पास कोई हथियार भी नहीं है केवल जय श्रीराम का नारा लगाकर एक बड़ी मुस्लिम भीड़ को अपने इशारे पर नचा सकते हैं.

मुठभेड़ों के नाम पर हर रोज चार से अधिक दलित, पिछड़े और मुस्लिम को मार रही योगी की पुलिस

हिंदुत्व के लिए घटनाओं को कामयाबी के साथ अंजाम देना अब कितना सरल और सहज हो चुका है. पिछले चार सालों में विकसित हुआ हिंदुत्व का यह नवीन संस्करण है.

हालांकि नमाज़ न पढ़ने देने का यह कोई अकेला मामला नहीं है. पिछले साल अमरोहा शहर से करीब 36 किलोमीटर दूर स्थित सैदनगली कसबे से मात्र पांच किलोमीटर दूर स्थित सकतपुर गाँव में घटी एक घटना को देखना होगा. जब इन शब्दों का लेखक रिहाई मंच के एक जांच दल के साथ सकतपुर गाँव पहुंचा, जहाँ पर सांप्रदायिक हिंसा की एक मामूली सी घटना हुई थी. इस गाँव की कुल आबादी में तकरीबन 2500 हिन्दू हैं व 500 के आस-पास मुस्लिम हैं. इस गाँव के अधिकाँश मुस्लिम अन्य पिछड़े तबके से हैं. मुसलमानों की आबादी बढ़ने के साथ ही उन्हें गाँव में एक मस्जिद की जरूरत महसूस हुई. गाँव के मुसलमानों ने पिछले पांच-छः सालों में एक घर में ही एक छोटी सी मस्जिद बना ली, जहाँ पर वे नामाज अदा किया करते थे. लेकिन 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद हिंदुत्व ने मुसलमानों को इस मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोक दिया. उनका तर्क था कि मुसलमान इस नई मस्जिद को बनाकर एक नई परम्परा की शुरुआत कर रहे हैं. विवाद के बाद मस्जिद के बाहर पुलिस बैठा दी गयी और धारा 144 लागू कर दी गयी.

इस घटना के दरम्यान गाँव में बहुत मामूली सी हिंसा भी हुई थी. यहाँ पर भी गुडगाँव की ही तरह बिना शारीरिक हिंसा के, हिंसा का मात्र डर दिखाकर मुसलमानों को उनके दीनी हक से वंचित कर दिया गया. गाँव के मुसलमानों ने रमजान के समय भी नमाज न पढ़ पाने और अपनी असुरक्षा के चलते गाँव छोड़ने का मन बना लिया था. सामूहिक रूप से नमाज न पढ़ने देने की इसी तरह की कई और घटनाएं अलग-अलग रूपों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में घटीं थीं.

बाबा साहेब के नाम से छेड़छाड़ करके भाजपा उनके विचारों को खत्म नही कर पाएगी – रिहाई मंच

हिंदुत्व को बाबरी मस्जिद को ‘विवादित’ बनाने में कई वर्षों तक अथक परिश्रम करना पड़ा. लेकिन सकतपुर की मस्जिद और संभल की मशहूर जामा मस्जिद को तो कुछ ही घंटों के अन्दर  विवादित बना दिया गया. संभल की मस्जिद के विवादित बनने की कहानी तो काफी दिलचस्प है और उसके लिए तो हिंदुत्व को रत्ती भर भी प्रयास नहीं करना पड़ा. यह इस तरह संभव हुआ कि सुदर्शन न्यूज़ ने 8 अप्रैल 2017 को 47 मिनट के एक कार्यक्रम ‘बिंदास बोल: हरि मंदिर का सच, जामा मस्जिद का झूठ’ में यह दावा किया कि बाबर के द्वारा साढ़े पांच सौ साल पहले संभल में बनाई गई जामा मस्जिद दरअसल हरिहर मंदिर है. इस ख़ास एपिसोड के बाद से ही जामा मस्जिद के विवादित होने को लेकर होने वाली सियासत तेज़ हो गई और मस्जिद के बाहर पुलिस बैठा दी गई. मुसलमानों के इबादतगाहों को विवादित बनाने का जो सिलसिला बाबरी मस्जिद से शुरू होता है वह क्रमशः जारी है, जिसे संभल, सकतपुर, गुडगाँव व अन्य स्थानों में देखा जा सकता है. इन विवादित स्थानों से सेकुलर सियासत अपने आपको पूरी तरह दूर रखती है.

बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव ने कहा था कि वहां पर फिर से बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण कराया जाएगा. लेकिन बाबरी मस्जिद विध्वंस के पच्चीस साल बीत जाने के बाद कांग्रेस की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया, जिसमें बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की बात कही गयी हो. ठीक इसी तरह समाजवादी पार्टी 2002 से पहले तक 6 दिसम्बर को काला दिवस मनाया करती थी, लेकिन 2002 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद काला दिवस की रस्म अदायगी को भी खत्म कर दिया गया.

देश की सेकुलर सियासत बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के सवाल के आस-पास दिखने के नफा-नुकसान से भली भांति परिचित है. केवल ओवेसी ही एक अकेले नेता हैं, जो बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की बात करते हैं. जब ओवेसी यह कहते हैं कि ‘वो एक मस्जिद तोड़ेंगे तो तुम लोग सौ मस्जिदें बनाओ’ तो जाहिरा तौर पर यह बात मुसलमानों को अपील करती होगी.

कासगंज : यह पहला मौका नहीं है जब हिन्दुत्व ने लाश पर सियासत की हो

देश का मुसलमान जानता है कि उनके सेकुलर रहनुमा दीनी और दुनियावी दोनों सवालों पर उनके साथ नहीं हैं. बाबरी मस्जिद के विध्वंस का सवाल एक ऐसा सवाल है जिसनें पिछले तीन दशकों की भारतीय राजनीति को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. यह एक ऐसा मुद्दा भी है जिसनें देश के सत्रह करोड़ लोगों के सोचने के ढंग को बदल दिया. उसी बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के सवाल पर हिंदुत्व और मुस्लिम सियासत के अलावा कोई और धारा और विचार दिखाई नहीं पड़ता है. बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद होने वाली सारी बहसों के केन्द्र में सिर्फ यही मुद्दा रहता है कि वहां पर राम का भव्य मंदिर बनेगा या नहीं बनेगा. देश की सेकुलर सियासत की इन ‘विवादित’ परिसरों पर ओढ़ी गई चुप्पी ने हिंदुत्व के लिए रास्ता आसान कर दिया है. आज के समय में हिंदुत्व के सामने किसी भी किस्म की कोई चुनौती नहीं है. हिंदुत्व के लिए बाबरी मस्जिद तो केवल एक लिटमस टेस्ट था. देश भर के हजारो गाँव से जो ‘पवित्र’ राम शिलाएं अयोध्या लायी गयीं थीं, उसमें अयोध्या को सांप्रदायिक राजनीति के एक केन्द्र के बतौर उभारा गया था. लेकिन आज के हिंदुत्व को बाबरी मस्जिद के प्रतीक के विकेंद्रीकरण की जरुरत है. इसलिए संभल, सकतपुर और गुडगाँव में इसके विस्तार को देखा जा सकता हैI

Courtesy: Hastakshep,
Original published date:
02 May 2018
babri masjid (2884
Babri Demolition
Uttar pradesh
Yogi Adityanath

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान


बाकी खबरें

  • Khusi Dubey's parents
    सौरभ शर्मा
    यूपी चुनाव: ख़ुशी दुबे और ब्राह्मण, ओबीसी मतों को भुनाने की कोशिश
    25 Jan 2022
    2020 में हुए गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर ने यूपी में योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में ब्राह्मणों की स्थिति को लेकर एक बहस छेड़ दी थी। जैसा कि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं उस खूनी घटना से छलकाव की गूंज आज…
  • russia
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस यूक्रेन में हस्तक्षेप करेगा
    25 Jan 2022
    रूस के नज़रिये से इस संकट से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका यह है कि यूक्रेन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता फिर से हासिल करे और वाशिंगटन का मुंह ताकना बंद कर अपने भाग्य का फैसला खुद करे।
  •  RPN Singh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव:  कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, बीजेपी में शामिल हुए आरपीएन सिंह
    25 Jan 2022
    यूपी कांग्रेस के स्टार प्रचारक की लिस्ट में शामिल आरपीएन सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं, आरपीएन सिंह कांग्रेस के बड़े नेता माने जाते थे।
  • Uttarakhand congress women wing
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: ‘बेटी पढ़ाओ’ और ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ के नारों को खोखला बताती उम्मीदवारों की लिस्ट
    25 Jan 2022
    कुल 70 में से 59 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है, लेकिन मात्र 5 महिलाओं को टिकट मिला है, वहीं कांग्रेस की 64 उम्मीदवारों की सूची में मात्र 6 महिलाएं हैं।
  • Pradhan mantri awas yojna
    सरोजिनी बिष्ट
    “2022 तक सबको मिलेगा पक्का घर” वायदे की पड़ताल: ठगा हुआ महसूस कर रहे गरीब परिवार
    25 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश और केंद्र, दोनों सरकारों ने अपने पांच साल के कार्यकाल के भीतर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत सभी शहरी और ग्रामीण गरीबों को पक्का घर देने का वादा किया था। सरकार दावे कुछ भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License