NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
लेखक संगठनों की मतदाताओं से अपील : लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की बहाली सुनिश्चित करें
जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ और दलित लेखक संघ ने संयुक्त रूप से अपील जारी कर कहा है, "आइये, इस कॉर्पोरेट-परस्त साम्प्रदायिक-फ़ासीवादी सरकार को दुबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए वोट करें!"
न्यूज़क्लिक डेस्क
10 Apr 2019
सांकेतिक तस्वीर

कई लेखक संगठनों की ओर से मतदाताओं के नाम एक संयुक्त अपील जारी की गई है। इसे हम जस का तस प्रकाशित कर रहे हैं : 

एक बार फिर आम चुनाव सामने हैं।

और ठीक पांच साल पहले जिन हाथों में केंद्र की सत्ता सौंपी गयी थी, उनकी जनविरोधी कारगुज़ारियाँ भी हमारे सामने हैं।

ये पांच साल इस देश के इतिहास में एक दु:स्वप्न की तरह याद किये जायेंगे। इन सालों में आरएसएस की विचारधारा वाले शासकों ने हिटलर और मुसोलिनी के नक़्शे-क़दम पर चलते हुए मुल्क को नफ़रत की आग में झोंक दिया। तर्क-विवेक की बात करने वाले लेखकों-कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुईं, उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर जेलों में बंद किया गया, उनका लिखना-बोलना बंद कराने की कोशिशें हुईं। कभी गोकशी तो कभी धर्म-परिवर्तन के नाम पर मुसलमानों पर जानलेवा हमले हुए; अखलाक़ से लेकर पहलू खान तक, न जाने कितने बेगुनाह नागरिकों को तथाकथित गोरक्षकों ने मौत के घाट उतार दिया। गोरक्षा के बहाने दलितों और आदिवासियों को भी हिंसा का निशाना बनाया गया। इन सब मामलों में आरएसएस की विचारधारा पर चलने वाली केंद्र और राज्य की सरकारों ने कहीं अपनी चुप्पियों से और कहीं बज़रिये पुलिस-प्रशासन, कहीं नौकरियाँ देकर और कहीं सम्मानित करके, जिस तरह संघी हत्यारों का साथ दिया, वह इस देश के अमनपसंद लोग कभी भूल नहीं सकते। वे कभी नहीं भूल सकते कि सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाकर आरएसएस ने देश के नागरिकों की निजी पसंद को भी, वह भोजन से सम्बंधित हो या जीवनसाथी के चुनाव से, अपने दकियानूस ख़यालात की बेड़ियों में जकड़ने की मुहिम छेड़ दी।

इन पांच सालों में जनसंचार माध्यमों की आज़ादी का गला घोंट दिया गया, उन्हें हिन्दुत्ववादी विचारधारा का भोंपू बना दिया गया। तमाम टीवी चैनलों को साम-दाम-दंड-भेद के बल पर रात-दिन सांप्रदायिक नफ़रत, अंधविश्वास, अज्ञान बढ़ाने वाले कार्यक्रम प्रसारित करने के लिए मजबूर किया गया। जो पत्रकार अपना ईमान और अपनी आत्मा नहीं बेच पाये, उन्हें चैनलों से हटवा दिया गया ताकि सरकार के झूठे प्रचार की असलियत सामने न आ पाये।

इस मनुवादी मोदी सरकार ने शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और ग़रीबों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों, महिलाओं, बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं के बजट में कटौती की। नवउदारवादी नीतियों को पूरी बर्बरता से लागू किया गया। मज़दूरों के अधिकारों को छीनने के लिए श्रमक़ानूनों में संशोधन किये गए। देश के तमाम शिक्षण संस्थानों को बरबाद करने के एक के बाद एक क़दम उठाये गए। स्थायी नौकरियों के लाखों खाली पदों को भरा नहीं गया। हर जगह ठेकेदारी से काम कराने की प्रथा को बढ़ावा देकर अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़े वर्गों को संविधान-प्रदत्त आरक्षण की सुविधा से वंचित कर दिया गया। यों तो नोटबंदी, जीएसटी, पेट्रोलियम पदार्थों व गैस आदि के दामों में लगातार बढ़ोतरी से देश के मध्यवर्ग से लेकर तमाम आमजनों को इस सरकार ने नकारात्मक रूप में प्रभावित किया, लेकिन इसकी नीतियों का सबसे बुरा असर किसानों, मज़दूरों, दलितों और आदिवासियों की ज़िंदगी पर पड़ा। अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी। सिर्फ़ दो सौ कॉर्पोरेट घरानों और बहुराष्ट्रीय निगमों की आमदनी दिन दूनी रात चौगुनी हुई। विदेशों से काला धन लाने के वायदे तो क्या पूरे होते, उलटे बैंकों पर अरबों रुपयों का क़र्ज़ लादकर कई व्यापारी-उद्योगपति देश से भागने में कामयाब हुए। इस पांच सालों में विदेशी क़र्ज़ सत्तर साल के आज़ाद भारत के इतिहास में अधिकतम होकर 529.7 बिलियन डॉलर हो गया। साथ ही, बैंकों से लिए गए अरबों की वसूली तो दूर, उनमें भी भारी इज़ाफ़ा हुआ। इधर बेरोजगारी का आलम यह कि पिछले 45 बरसों में वह इतनी कभी नहीं बढ़ी। यह है विकास की असलियत!

देश की बरबादी की मुख्य वजह है, हर स्तर पर लोकतंत्र की हत्या। इस फ़ासीवादी सरकार ने सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमर तोड़ दी और उन्हें अपना पिछलग्गू बना लिया। इससे न न्यायपालिका बची है, न कार्यपालिका, यहाँ तक कि सेना का भी राजनीतीकरण करने की बेशर्म कोशिशें जारी हैं। और इसका कारण है कि सारी सत्ता एक व्यक्ति के हाथ में केन्द्रित हो गयी है। इस व्यक्ति के मुंह से निकलने वाले सारे दावे झूठे होते हैं और जो भी उस झूठ का भंडाफोड़ करता है, वह या तो मारा जाता है, या उसे बेरोज़गार-बेसहारा बनाने की कोशिश में पूरा तंत्र लग जाता है।

अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर 2019 के आम चुनाव में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की बहाली को सुनिश्चित करें। हमारी अपील है कि बाबा साहब आंबेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान—जो इस देश में समानता, जनतंत्र और धर्म-निरपेक्षता के साथ विचारों की स्वतन्त्र अभिव्यक्ति के सिद्धांतों को सुरक्षा प्रदान करता है—उसके प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ायें। आज यह संविधान ही ख़तरे में है। आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों ने कभी भी उसे स्वीकार नहीं किया। उनका मक़सद तो समाज पर एक बार फिर मनुस्मृति को ही थोपना है और पिछले पांच वर्षों की उनकी कारगुज़ारियाँ इसी दिशा में अग्रसर रही हैं। आपका मताधिकार और आपके प्रयास इन ताक़तों को रोकने के काम आने चाहिए।

आइये, इस कॉर्पोरेट-परस्त साम्प्रदायिक-फ़ासीवादी सरकार को दुबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए वोट करें!

बहुत हो गया ज़ुल्म और अत्याचार

नहीं चाहिए ज़ालिम मोदी सरकार

निवेदक

जनवादी लेखक संघ | जन संस्कृति मंच | प्रगतिशील लेखक संघ | दलित लेखक संघ

इसे भी पढ़ें : वैज्ञानिकों की अपील: आइये तर्क और आपसी विचार की रौशनी फैलाने के लिए वोट करें

100 से ज़्यादा फिल्मकारों की भाजपा को वोट न देने की अपील

फिल्मकारों के बाद लेखकों की अपील : नफ़रत की राजनीति के ख़िलाफ़ वोट करें

2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha Polls
progressive writer
जनवादी लेखक संघ
जन संस्कृति मंच
प्रगतिशील लेखक संघ
दलित लेखक संघ
जलेस
जसम
प्रलेस
दलेस

बाकी खबरें

  • Himachal Pradesh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल प्रदेश: फैक्ट्री में ब्लास्ट से 6 महिला मज़दूरों की मौत, दोषियों पर हत्या का मुक़दमा दर्ज करने की मांग
    24 Feb 2022
    हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में एक फैक्ट्री में विस्फोट होने से छह लोगों की मौत हो गयी और 12 अन्य झुलस गए हैं। फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। जानकारी के मुताबिक मारे गए ज्यादातर लोग और…
  • putin
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस द्वारा डोनबास के दो गणराज्यों को मान्यता देने के मसले पर भारत की दुविधा
    24 Feb 2022
    डोनबास के संदर्भ में, भारत की वास्तविक दुविधा स्वयं के दूर-दराज के प्रदेशों की जमीनी हकीकत को देखते हुए उनके आत्मनिर्णय को लेकर है। 
  • putin
    एपी
    पुतिन की पूर्वी यूक्रेन में सैन्य अभियान की घोषणा
    24 Feb 2022
    पुतिन ने दावा किया है कि हमले पूर्वी यूक्रेन में लोगों की रक्षा करने के मकसद से किए जा रहे हैं। पुतिन ने अन्य देशों को आगाह भी किया है कि रूसी कार्रवाई में किसी प्रकार के हस्तक्षेप के प्रयास ‘‘के ऐसे…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 14,148 नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    24 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.35 फ़ीसदी यानी 1 लाख 48 हज़ार 359 हो गयी है।
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में हिन्दुत्व बेअसर, हिजाब-विवाद, 'सायकिल' पर निशाना और मलिक अरेस्ट
    24 Feb 2022
    यूपी विधानसभा चुनाव में चौथे चरण के मतदान के बाद सत्ता की लड़ाई और दिलचस्प हो गयी है. सत्ताधारी भाजपा के पांव डगमगाते नज़र आ रहे हैं. पार्टी का हिन्दुत्व एजेंडा भी काम नहीं आ रहा है.
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License