NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लिंग आधारित भेद भाव से हर साल 2 लाख से ज़्यादा 5 साल से कम उम्र की लड़कियों की मौत होती है
इस आँकड़े में लिंग आधारित गर्भपात शामिल नहीं है I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 May 2018
gender discrimination

Lancet Global Health में छपे अनुसंधान के हिसाब से हर साल समाज में लड़कों को दी जाने वाली तरजीह की वजह से हज़ारों लड़कियों की मौत हो जाती है I

International Institute for Applied Systems Analysis की रिपोर्ट के अनुसार हर हाल पाँच साल से निचे की 2,39,000 लड़कियों की मौत होती है, जिसका अर्थ है 10 साल में ये आँकड़ा 24,00,000 हो जाता है I इस आँकड़े में लिंग आधारित गर्भपात सम्मिलित नहीं हैI

पत्रिका ने कहा “5 साल से कम उम्र की बच्चिओं की मृत्यु दर 2000-05 में हर 1,000 पैदा होने वाले बच्चों पर 18.5 थी (95% CI 13·1–22·6) ,1 करोड़ 30 लाख में से 1,78,100 (2%) लड़कियों की मौत इस जाँच के दौरान लैंगिक भेदभाव की वजह से हुई I इसका अर्थ है कि भारत में लैंगिक भेदभाव की वजह से 22% छोटी बच्चियों पर मौत मंडराती रहती है I इस बढ़ी हुई मृत्युदर का अर्थ है कि हर साल औसतन 0 से 4 साल की 2,39,000 अतिरिक्त बच्चियों की मौत होती है, यानी हर 10 साल में 2 करोड़ 40 लाख मौतेंI”

 इस अध्ययन के अनुसार देश के 35 राज्य में से 29 राज्य अतिरिक्त मृत्यु दर से ग्रसित हैंI बच्चियों की सबसे ज़्यादा अतिरिक्त मृत्युदर उत्तर भारत में है I इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में दो तिहाई मौतें हुई I लेकिन दक्षिण के राज्यों में लगभग कोई अतिरिक्त मृत्यु नहीं हुईI

प्राकृतिक कारणों की वजह से बच्चियों की मृत्यु दर लड़कों से कम होती है और जिन देशों में इस तरह का लैंगिक भेद भाव नहीं होता ये बात बहुत ज़ाहिर है I लेकिन भारत जैसे देशों में हालात बहुत अलग हैं I

भारत में रिपोर्ट हुई मौतें जानबूझकर स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करने की वजह से और रोज़मर्रा में खानपान में किए गये भेदभाव की वजह से हुई हैंI लैंगिक भेदभाव बहुत जाटिल तरीके से और परत-दर-परत होता है I संसाधनों के गैरबराबरी से बाँटे जाने और लड़कों और लड़कियों के बीच खाने-पीने और स्वास्थ्य की सुविधाओं के आबंटन में अंतर आदि भी बच्चियों की मृत्यु दर ज़्यादा होने का मूल कारण है I

इस अध्ययन के लेखक यानी Paris Descartes University क्रिस्टोफर गुइलमोटो के अनुसार “लिंग आधारित भेदभाव की वजह से न सिर्फ लड़कियों को पैदा नहीं होने दिया जाता बल्कि जो पैदा होती हैं उन्हें भी मौत तक पहुँचा दिया जाता हैI”

उन्होंने आगे कहा “लैंगिक समानता सिर्फ पढ़ने के, रोज़गार के और राजनीति में बराबर अधिकार देना नहीं है बल्कि स्वास्थ्य, खान-पान और जीने में बराबरी देना भी हैI”

 अध्ययन के अनुसार मुस्लिमानों और आदिवासीयों में 5 साल से नीचे की मृत्यु दर बहुत कम हो गयी है I वहीं दूसरी तरफ अध्यन के अनुसार हिन्दुओं में लड़के की चाहत ज़्यादा होती है I

 बिजली और खेती के अतिरिक्त जीविकापार्जन के अवसर तक पहुँच और घरेलू काम से भी पैदा होने के बाद अतिरिक्त मृत्यु दर कम हो जाती है I ज़्यादा बच्चे पैदा करने की दर बच्चियों के साथ पैदा होने से पहले किये गए भेदभाव को बढ़ा देती है, इसका अर्थ ये है कि बहुत बार लडकियाँ अनचाही औलाद होने की वजह से मारी जाती हैं और इससे बच्चिओं के साथ भेदभाव भी होता है I अध्ययन ये भी बताता है कि अगर महिलाओं की शिक्षा और काम तक पहुँच हो तो 5 साल से नीचे की बच्चियों की मृत्यु दर बहुत कम हो जाती है I


बाकी खबरें

  • तो इतना आसान था धर्म संसद को रोकना? : रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट
    सत्यम् तिवारी
    तो इतना आसान था धर्म संसद को रोकना? : रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट
    27 Apr 2022
    डाडा जलालपुर में महापंचायत/धर्म संसद नहीं हुई, एक तरफ़ वह हिन्दू हैं जो प्रशासन पर हिन्दू विरोधी होने का इल्ज़ाम लगा रहे हैं, दूसरी तरफ़ वह मुसलमान हैं जो सोचते हैं कि यह तेज़ी प्रशासन ने 10 दिन पहले…
  • Taliban
    स्टीफन नेस्टलर
    तालिबान: महिला खिलाड़ियों के लिए जेल जैसे हालात, एथलीटों को मिल रहीं धमकियाँ
    27 Apr 2022
    तालिबान को अफ़गानिस्तान पर नियंत्रण किए हुए आठ महीने बीत चुके हैं और इतने समय में ही ये देश समाचारों से बाहर हो गया है। ओलिंपिक में भाग लेने वाली पहली अफ़गान महिला फ्रिबा रेज़ाई बड़े दुख के साथ कहती हैं…
  • modi
    न्यूज़क्लिक टीम
    100 राजनयिकों की अपील: "खामोशी से बात नहीं बनेगी मोदी जी!"
    27 Apr 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार डिप्लोमैट्स द्वारा प्रधानमंत्री को लिखी गयी चिट्ठी पर बात कर रहे हैं।
  • Stan swamy
    अनिल अंशुमन
    ‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण
    27 Apr 2022
    ‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’ पुस्तक इस लिहाज से बेहद प्रासंगिक है क्योंकि इसमें फ़ादर स्टैन स्वामी द्वारा सरकारों की जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ लिखे गए चर्चित निबंधों का महत्वपूर्ण संग्रह किया गया है…
  • SHOOTING RANGE
    रवि शंकर दुबे
    लखनऊ: अतंर्राष्ट्रीय शूटिंग रेंज बना आवारा कुत्तों की नसबंदी का अड्डा
    27 Apr 2022
    राजधानी लखनऊ में बने अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग रेंज को इन दिनों आवारा कुत्तों की नसबंदी का केंद्र बना दिया गया है, जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License