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भारत
राजनीति
लिंग आधारित भेद भाव से हर साल 2 लाख से ज़्यादा 5 साल से कम उम्र की लड़कियों की मौत होती है
इस आँकड़े में लिंग आधारित गर्भपात शामिल नहीं है I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 May 2018
gender discrimination

Lancet Global Health में छपे अनुसंधान के हिसाब से हर साल समाज में लड़कों को दी जाने वाली तरजीह की वजह से हज़ारों लड़कियों की मौत हो जाती है I

International Institute for Applied Systems Analysis की रिपोर्ट के अनुसार हर हाल पाँच साल से निचे की 2,39,000 लड़कियों की मौत होती है, जिसका अर्थ है 10 साल में ये आँकड़ा 24,00,000 हो जाता है I इस आँकड़े में लिंग आधारित गर्भपात सम्मिलित नहीं हैI

पत्रिका ने कहा “5 साल से कम उम्र की बच्चिओं की मृत्यु दर 2000-05 में हर 1,000 पैदा होने वाले बच्चों पर 18.5 थी (95% CI 13·1–22·6) ,1 करोड़ 30 लाख में से 1,78,100 (2%) लड़कियों की मौत इस जाँच के दौरान लैंगिक भेदभाव की वजह से हुई I इसका अर्थ है कि भारत में लैंगिक भेदभाव की वजह से 22% छोटी बच्चियों पर मौत मंडराती रहती है I इस बढ़ी हुई मृत्युदर का अर्थ है कि हर साल औसतन 0 से 4 साल की 2,39,000 अतिरिक्त बच्चियों की मौत होती है, यानी हर 10 साल में 2 करोड़ 40 लाख मौतेंI”

 इस अध्ययन के अनुसार देश के 35 राज्य में से 29 राज्य अतिरिक्त मृत्यु दर से ग्रसित हैंI बच्चियों की सबसे ज़्यादा अतिरिक्त मृत्युदर उत्तर भारत में है I इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में दो तिहाई मौतें हुई I लेकिन दक्षिण के राज्यों में लगभग कोई अतिरिक्त मृत्यु नहीं हुईI

प्राकृतिक कारणों की वजह से बच्चियों की मृत्यु दर लड़कों से कम होती है और जिन देशों में इस तरह का लैंगिक भेद भाव नहीं होता ये बात बहुत ज़ाहिर है I लेकिन भारत जैसे देशों में हालात बहुत अलग हैं I

भारत में रिपोर्ट हुई मौतें जानबूझकर स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करने की वजह से और रोज़मर्रा में खानपान में किए गये भेदभाव की वजह से हुई हैंI लैंगिक भेदभाव बहुत जाटिल तरीके से और परत-दर-परत होता है I संसाधनों के गैरबराबरी से बाँटे जाने और लड़कों और लड़कियों के बीच खाने-पीने और स्वास्थ्य की सुविधाओं के आबंटन में अंतर आदि भी बच्चियों की मृत्यु दर ज़्यादा होने का मूल कारण है I

इस अध्ययन के लेखक यानी Paris Descartes University क्रिस्टोफर गुइलमोटो के अनुसार “लिंग आधारित भेदभाव की वजह से न सिर्फ लड़कियों को पैदा नहीं होने दिया जाता बल्कि जो पैदा होती हैं उन्हें भी मौत तक पहुँचा दिया जाता हैI”

उन्होंने आगे कहा “लैंगिक समानता सिर्फ पढ़ने के, रोज़गार के और राजनीति में बराबर अधिकार देना नहीं है बल्कि स्वास्थ्य, खान-पान और जीने में बराबरी देना भी हैI”

 अध्ययन के अनुसार मुस्लिमानों और आदिवासीयों में 5 साल से नीचे की मृत्यु दर बहुत कम हो गयी है I वहीं दूसरी तरफ अध्यन के अनुसार हिन्दुओं में लड़के की चाहत ज़्यादा होती है I

 बिजली और खेती के अतिरिक्त जीविकापार्जन के अवसर तक पहुँच और घरेलू काम से भी पैदा होने के बाद अतिरिक्त मृत्यु दर कम हो जाती है I ज़्यादा बच्चे पैदा करने की दर बच्चियों के साथ पैदा होने से पहले किये गए भेदभाव को बढ़ा देती है, इसका अर्थ ये है कि बहुत बार लडकियाँ अनचाही औलाद होने की वजह से मारी जाती हैं और इससे बच्चिओं के साथ भेदभाव भी होता है I अध्ययन ये भी बताता है कि अगर महिलाओं की शिक्षा और काम तक पहुँच हो तो 5 साल से नीचे की बच्चियों की मृत्यु दर बहुत कम हो जाती है I


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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License