NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लखनऊ : कश्मीर पर प्रदर्शन से रोकने के लिए संदीप पाण्डेय और शोएब दिन भर रहे नज़रबंद
सारे देश की तरह उत्तर प्रदेश में भी कश्मीर के विभाजन और अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के विरोध में प्रदर्शन किये जा रहे हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार अब शायद उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ और प्रदर्शन नहीं होने देना चाहती है।
असद रिज़वी
12 Aug 2019
kashmir issue
फोटो साभार : नवभारत

उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र आवाज़ों को दबाने की कोशिश हो रही है। केंद्र सरकार और दक्षिणपंथी विचारधारा के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों को बल पूर्वक रोका जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए और देश में बढ़ रही लंचिंग, के ख़िलाफ़ नागरिक संगठनों के विरोध के स्वर दबाने के कई मामले सामने आये हैं।

 राजधानी लखनऊ में रविवार को कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के विरोध में शामिल होने वाले कुछ वरिष्ठ समाज सेवकों को पुलिस ने नज़रबंद कर दिया। इस से पहले झारखंड में तबरेज़ अंसारी की मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ प्रदर्शन को भी राजधानी प्रशासन ने 29 जून 2019 को बल पूर्वक रुकवा दिया था। इसके अलवा प्रदेश के कई हिस्सों मेरठ और डुमरियागंज में भी मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों को स्थानीय प्रशासन ने रुकवा दिया था।

स्टैंड फॉर कश्मीर द्वारा प्रदर्शन होना था

 सारे देश की तरह उत्तर प्रदेश में भी कश्मीर के विभाजन और अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के विरोध में प्रदर्शन किये जा रहे हैं। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार अब शायद उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ और प्रदर्शन नहीं होने देना चाहती है। रविवार को विधानसभा के निकट गांधी प्रतिमा पर केंद्र सरकार की कश्मीर नीति और कश्मीरी महिलाओं के विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी के नेताओ और दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों द्वारा की जा रही अभद्र टिप्पणियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होना था। स्टैंड फॉर कश्मीर ने रविवार की शाम होने वाले इस विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की थी।

मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित संदीप पाण्डेय के घर पुलिस पहुँची

 इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से सामाजिक कार्यकर्ता और मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित संदीप पाण्डेय को शामिल होना था। पाण्डेय ने मीडिया को बताया कि रविवार की सुबह लखनऊ पुलिस की चार गाड़ियाँ उनके घर पहुंच गईं और जानकारी दी कि वह धरना नहीं दे सकते हैं। उल्लेखनीय है कि पाण्डेय को 2002 में इमर्जेंट लीडरशिप कैटागरी में रैमन मेग्सेसे अवार्ड दिया गया था

पाण्डेय के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा की राजधानी में निषेधाज्ञा लागू है। जो स्वतंत्रता दिवस के बाद हटाई जाएगी। पाण्डेय के कहना है कि पुलिस से बात करने के बाद उन्होंने धरना-प्रदर्शन को 16 अगस्त को करने का फ़ैसला लिया। 

 फिर भी घर घेरे रही पुलिस

पाण्डेय ने बताया की धरना स्थगित होने के बाद भी, रविवार को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक पुलिस की जीपे थाना गाजीपुर क्षेत्र में स्थित उनके घर के बाहर खड़ी रही थी। घर के बाहर तैनात पुलिस ने किसी को घर से बाहर जाने नहीं दिया और न किसी को घर के अंदर आने दिया। नज़रबंद होने वालों में पाण्डेय की पत्नी अरुंधति धुरु भी शामिल थी। अरुंधति नेशनल एलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट (एनएपीएम) की राष्ट्रीय संयोजक हैं। 

 अधिवक्ता मोहम्मद शोएब के घर भी पहुंची पुलिस

 लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद शोएब को भी रविवार के प्रदर्शन में शामिल होना था। शोएब के अनुसार धरने में शामिल होने से उन्हें रोकने के लिए, उनके घर भी पुलिस पहुँची थी। शोएब ने बताया की कैंसरबाग़ और अमीनाबाद पुलिस ने उनके घर जाकर उनको धरने में जाने से रोका था। उन्होंने बताया की पुलिस ने कहा की शहर में धारा 144 लगी है, इसलिये कोई धरना प्रदर्शन नहीं हो सकता है। प्रशासन ने शोएब को धरने में जाने से रोक लिया। उनके घर के चारों तरफ़ पुलिस तैनात कर दी थी। 

 अनुच्छेद 370 और 35 ए पर पाण्डेय और शोएब कि राय

पाण्डेय मानते है कि अनुच्छेद  370 और 35 ए ख़त्म करना और कश्मीर का विभाजन करना नरेंद्र मोदी सरकार का अप्रजातंत्रवादी फ़ैसला है। क्योंकि किसी भी कल्याणकारी काम के लिए सेना लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। अधिवक्ता शोएब कहते हैं कि केंद्र सरकार का फ़ैसला इस लिए ग़लत है, क्योंकि इसमें जम्मू-कश्मीर की जनता (वहाँ की विधायिका) कि सहमति शामिल नहीं है।

 पाण्डेय और शोएब को नज़रबंद करने की निंदा

कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता जताने के लिए आयोजित कार्यक्रम से ठीक पहले इसके दो प्रमुख आयोजकों पर कार्य्रकम रद्द करने के लिए पुलिस द्वारा दबाव बनाये जाने की रिहाई मंच ने कड़ी निंदा की है। मंच के सदस्य राजीव यादव ने एक बयान में कहा कि यह लोकतांत्रिक आवाजों पर बढ़ रहे हमलों की एक ताजा कड़ी है।

 पुलिस कर रही है अपना बचाव

प्रदर्शन रोकने को लेकर निंदा का सामना कर रही पुलिस अब अपना बचाव कर रही है। अब लखनऊ पुलिस का कहना है की जिस स्थान पर प्रदर्शन होना था वहाँ पर अदालत ने प्रदर्शन करने से रोक लगा दी है। इसलिए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। लखनऊ पुलिस के मीडिया इंचार्ज आशीष दिवेदी ने फ़ोन पर न्यूज़क्लिक से कहा कि पाण्डेय और शोएब को नज़र बंद नहीं किया गया था। जबकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि पुलिस ने दोनों से प्रदर्शन न करने को कहा था। 

इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में आवाज़ों को दबाया गया है

 राजधानी लखनऊ में ही 29 जून 2019 की शाम को, देश में बढ़ती लिंचिंग की घटनाओं के विरोध में, नागरिकों द्वारा गोमती नगर स्थित अम्बेडकर पार्क से एक कैंडल मार्च (विरोध जुलूस) निकाला जाना था। लेकिन बड़ी संख्या में पुलिस कार्यक्रम स्थल पर पहुँच गई और आयोजकों को कार्यक्रम करने से रोक दिया था।

लोगों में प्रदर्शन पर रोक लगने से भारी नाराज़गी थी। प्रदर्शन के आयोजको में से एक रूबीना मुर्तुज़ा का कहना था कि प्रशासन को विरोध प्रदर्शन की सूचना दी गई थी फिर भी पुलिस-प्रशासन से ने अचानक आकर प्रदर्शन को अलोकतांत्रिक ढंग से दबाव बनाकर रुकवा दिया।

शनिवार, 29 जून को ही राजधानी के पुराने इलाक़े हुसैनाबाद इलाक़े में तबरेज़ अंसारी की झारखण्ड की में हुई लिंचिंग के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को प्रशासन ने रुकवा दिया।पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के बैनर-पोस्टर भी ज़ब्त कर लिए थे।

 इसके अलावा डुमरियागंज में भी तबरेज़ की लिंचिंग के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन को प्रशासन ने रोक दिया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में 30 जून को तबरेज़ हत्याकांड के विरोध निकल रहे जुलूस पर स्थानीय पुलिस ने लाठीचार्ज दिया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे। इसके अलावा क़रीब एक हज़ार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहेत  मुकदमा भी लिखा गया था।

Lucknow
Protest Ban in UP
Sandeep Pandey
Shoaib
Jammu and Kashmir
Article 370
Article 35(A)
UP police

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद


बाकी खबरें

  • PM Ujjwala Yojana in J&K
    राजा मुज़फ़्फ़र भट
    जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में गड़बड़ियों की जांच क्यों नहीं कर रही सरकार ?
    21 Sep 2021
    नौकरशाह आम लोगों के मसलों का हल प्राथमिकता के साथ इसलिए नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने के बाद भी जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार और लूट जारी है।
  • French President Emmanuel Macron (L) and US President Joe Biden
    एम. के. भद्रकुमार
    AUKUS पर हंगामा कोई शिक्षाप्रद नज़ारा नहीं है
    21 Sep 2021
    ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका [AUKUS] के बीच हुए नए सुरक्षा समझौते को लेकर राजनयिक टकराव अभी शुरू होने वाला है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 26,115 नए मामले, 252 मरीज़ों की मौत
    21 Sep 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 35 लाख 4 हज़ार 534 हो गयी है।
  • UP
    सबरंग इंडिया
    डेंगू, बारिश से हुई मौतों से बेहाल यूपी, सरकार पर तंज कसने तक सीमित विपक्ष?
    21 Sep 2021
    स्थानीय समाचारों में बताया गया है कि 100 से अधिक लोगों को डेंगू, वायरल बुखार ने काल का ग्रास बना लिया। बारिश से संबंधित घटनाओं में 24 लोगों की मौत का अनुमान है
  •  Collapses in Uttarakhand
    रश्मि सहगल
    उत्तराखंड में पुलों के ढहने के पीछे रेत माफ़िया ज़िम्मेदार
    21 Sep 2021
    जो अधिकारी ग़ैरक़ानूनी खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हैं, उनके ख़िलाफ़ ताकतवर राजनेता मोर्चा खोल देते हैं। लेकिन स्थानीय लोग धड़ल्ले से चल रहे खनन में छुपे निजी हितों और नियमों के उल्लंघन को खुलकर सामने ला…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License