NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लोकसभा चुनाव 2019: महाराष्ट्र में विपक्ष हुआ एकजुट
क़रीब 28 संगठन और राजनीतिक पार्टियाँ बीजेपी-शिव सेना को हराने के लिए कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ एकजुट हुई हैं। लेकिन असली चुनौती है ज़मीनी स्तर पर एक भरोसेमंद विकल्प को स्थापित करना।
अमय तिरोदकर
25 Mar 2019
लोकसभा चुनाव 2019: महाराष्ट्र में विपक्ष हुआ एकजुट

क़रीब 10 महीने के विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस और शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) आख़िरकार महाराष्ट्र में 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए एकजुट हो गया है। इसके अलावा कुछ अहम छोटे दलों जैसे स्वाभिमानी शेतकारी संगठन, बहुजन विकास अघड़ी, पीज़ेण्ट एंड वर्कर्स पार्टी और रिपब्लिकन समूहों के नेता जैसा जोगेन्द्र कवाड़े और आरजी गवई और रवि राणा जैसे स्वतंत्र नेताओं ने भी इस गठबंधन के साथ हाथ मिलाया है। मुंबई में 23 मार्च को हुई एक प्रैस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने कहा, “हमारा गठबंधन बनाने का लक्ष्य ये है कि सांप्रदायिक ताक़तों को फिर सत्ता में आने से रोका जाए।

लोकसभा की सीटों की बात की जाए तो महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं और महाराष्ट्र में 48 सीटें हैं। इसलिए बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए ही ये ज़रूरी है कि राज्य में अधिक से अधिक सीटें जीती जाएँ। सीट-विभाजन की बात करें तो कांग्रेस 26 सीटों पर जबकि एनसीपी 22 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। छोटी पार्टियों को उनके इनके हिस्से से सीटें दी गई हैं।

राजू शेट्टी की स्वाभिमानी शेतकारी संगठन को कांग्रेस और एनसीपी दोनों के कोटे से 2-2 सीटें मिलेंगी। आपको बता दें कि स्वाभिमानी शेतकारी संगठन महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के लिए बढ़-चढ़ कर काम करता है। हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास अघड़ी को कांग्रेस के कोटे से एक सीट मिलेगी। अगर ये गठबंधन सरकार बना पाती है तो पीज़ेण्ट एंड वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी, जो कि मार्क्सवादी विचारधारा की पार्टी है) और रिपब्लिकन समूहों को विधानसभा चुनाव में सीट मिलने का आश्वासन दिया गया है। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव इसी साल के अक्तूबर महीने में होने हैं।

कुल मिला कर कांग्रेस को 24 सीटें, एनसीपी को 20,राजू शेट्टी के स्वाभिमानी शेतकारी संगठन (एसएसएस)को 2, बहुजन विकास अघड़ी (बीवीए) को एक और रवि राणा को एक सीट मिलेगी। मज़ेदार बात ये है कि मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी(सीपीएम) ने बीविए के साथ एक पालघर की एक सीट के लिए गठबंधन किया है। लेकिन सीपीएम एक और लोकसभा सीट, डिंडोरी पर चुनाव लड़ेगी जो कि एनसीपी के कोटे में आती है।

काग़ज़ पर ये गठबंधन मज़बूत लगता है। क्योंकि एसएसएस, बीवीए और पीडब्ल्यूपी जैसी अहम छोटी पार्टियों को गठबंधन में जोड़ना कांग्रेस और एनसीपी को 14 सीटों पर फ़ायदा पहुँचाएगा। साथ ही विपक्षी पार्टियों के लिए ज़मीनी स्तर पर समर्थन अच्छा है क्योंकि कृषि संकट और बेरोज़गारी दो अहम मुद्दे हैं।

चुनौतियाँ

लेकिन चुनौतियाँ आसान नहीं हैं। कांग्रेस और एनसीपी दोनों को ही हर चुनाव क्षेत्र में अपने वोट एक दूसरे को और साथ ही छोटी पार्टियों को सौंपने होंगे। ये सबके लिए सबसे ज़रूरी काम है। एक और चुनौती शहरी और अर्ध-शहरी मतदाताओं को अपनी तरफ़ लाना है। महाराष्ट्र का 45प्रतिशत इलाक़ा शहरी है। मुंबई की 6, ठाणे की 2, पुणे की 1 नागपुर की 1 सीट पूरी तरह से शहरी है। इसके अलावा, क़रीब 16 सीटें अर्ध-शहरी हैं। इसलिए इन 26सीटों के शहरी मतदाताओं को अपनी तरफ़ लाना कांग्रेस और एनसीपी के लिए एक मुश्किल काम साबित होगा।

नज़रिये के खेल की भी अहमियत होती है। राज्य ने पिछले एक साल में कांग्रेस और एनसीपी से भारी मात्रा में लोगों का निकलना देखा है। विपक्ष के नेता के बेटे सुजय विखे,पूर्व उप-मुख्यमंत्री विजयसिंह मोहिते पाटिल के बेटे रंजीतसिंह और कई अन्य नेता बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसकी वजह से एक नज़रिया बन गया है कि बीजेपी ने सब कुछ संभाल लिया है और बीजेपी दोबारा सत्ता में आने वाली है। चुनाव में ऐसे नज़रिये का बिल्कुल असर पड़ता है क्योंकि क्षेत्रीय वोटर और उम्र-आयू समूह के लोग इस नज़रिये से प्रभावित होते हैं। ये एक बड़ी चुनौती है जिससे महाराष्ट्र में गठबंधन को पार पाने की ज़रूरत है।

इसी दौरान, रत्नागिरि सिंधुदुर्गा की लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार ने अपना खेल खेलकर एक अड़चन पैदा कर दी है। नवीनचंद्र(रत्नागिरी से उम्मीदवार) को एक विवादित दक्षिणपंथी संगठन, हिन्दू जनजागृति समिति के एक कार्यकर्ता का समर्थन करते हुए देखा गया था। महाराष्ट्र के कई प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष एक्टिविस्ट ने इस वजह से कांग्रेस की निंदा की है। लेकिन राज्य कांग्रेस अभी भी अपने उम्मीदवार को आगे बढ़ा रही है। अगर ये चलता रहा तो कांग्रेस को सारे महाराष्ट्र में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

BJP
lok sabha election
elections 2019
Congress-NCP
Raju Shetti
Swabhimani Shetkari Sangathana
Maharashtra Seat Sharing
Navinchandra Bandivadekar

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • SFI PROTEST
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई
    09 Feb 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय को फिर से खोलने के लिए SFI ने प्रदर्शन किया, इस दौरान छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाओं का विरोध किया। साथ ही सड़क पर कक्षा लगाकर प्रशासन को चुनौत दी।
  • PTI
    समीना खान
    चुनावी घोषणापत्र: न जनता गंभीरता से लेती है, न राजनीतिक पार्टियां
    09 Feb 2022
    घोषणापत्र सत्ताधारी पार्टी का प्रश्नपत्र होता है और सत्ताकाल उसका परीक्षाकाल। इस दस्तावेज़ के ज़रिए पार्टी अपनी ओर से जनता को दी जाने वाली सुविधाओं का जिक्र करती है और जनता उनके आधार पर चुनाव करती है।…
  • हर्षवर्धन
    जन्मदिन विशेष : क्रांतिकारी शिव वर्मा की कहानी
    09 Feb 2022
    शिव वर्मा के माध्यम से ही आज हम भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु, भगवती चरण वोहरा, जतिन दास और महाबीर सिंह आदि की कमानियों से परिचित हुए हैं। यह लेख उस लेखक की एक छोटी सी कहानी है जिसके बारे…
  • budget
    संतोष वर्मा, अनिशा अनुस्तूपा
    ग्रामीण विकास का बजट क्या उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
    09 Feb 2022
    कोविड-19 महामारी से पैदा हुए ग्रामीण संकट को कम करने के लिए ख़र्च में वृद्धि होनी चाहिए थी, लेकिन महामारी के बाद के बजट में प्रचलित प्रवृत्ति इस अपेक्षा के मामले में खरा नहीं उतरती है
  • Election
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः प्रचार और भाषणों में स्थानीय मुद्दों को नहीं मिल रही जगह, भाजपा वोटर भी नाराज़
    09 Feb 2022
    ऐसे बहुत से स्थानीय मुद्दे हैं जिनको लेकर लोग नाराज हैं इनमें चाहे रोजगार की कमी का मामला हो, उद्योग की अनदेखी करने का या सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा, शिक्षा का मामला हो। इन मुद्दों पर चर्चा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License