NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लोकसभा चुनाव की बिसात पर संघ ने चली चाल
संघ की नजर समाज के उपेक्षित, दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग पर है और इसके लिए उसने एक कार्ययोजना भी बना ली है।
संदीप पौराणिक
12 Jan 2018
RSS

विदिशा/भोपाल, 11 जनवरी (आईएएनएस)| आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भले ही एक वर्ष का वक्त शेष हो, मगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय जनता पार्टी की जीत के लिए चुनावी बिसात पर चालें चलना शुरू कर दी हैं। संघ की नजर समाज के उपेक्षित, दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग पर है और इसके लिए उसने एक कार्ययोजना भी बना ली है। 

गुजरात विधानसभा के चुनाव नतीजों ने संघ को सकते में ला दिया है, क्योंकि गुजरात में दलित, उपेक्षित और पिछड़ा वर्ग जिस तरह से कांग्रेस की तरफ खिसका है, उससे संघ को इस बात का अंदेशा होने लगा है कि अगर लोकसभा चुनाव में भी यही हुआ, तो सत्ता में भाजपा की वापसी आसान नहीं होगी।

मध्य प्रदेश के लगातार प्रवास कर रहे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इशारों-इशारों में विदिशा में एकात्म यात्रा के दौरान इस बात का जिक्र भी कर दिया कि 'अब समाज के उस वर्ग को करीब लाना होगा जो हमसे दूर है।' 

लोकसभा चुनाव अगले वर्ष होना तय है, इसी को ध्यान में रखकर भागवत ने यात्रा में शामिल लोगों से साफ कहा कि 'वे इस मकर संक्रांति से अगले साल की मकर संक्रांति के लिए समाज के उस वर्ग से जुड़ने का संकल्प लें, जो हमारे लिए काम करता है। लिहाजा घर में बर्तन साफ करने वाली, कटिंग करने वाला, कपड़े धोने वाला (पिछड़ा वर्ग), वहीं जूते-चप्पल सुधारने वाले (दलित) से सीधे संपर्क करें, त्योहारों के मौके पर उनके घर जाएं और अपने घर बुलाएं। इसके चलते एक साल में सात से आठ बार आपस में मिलना-जुलना होगा, जो समाज के हित में होगा।"

संघ के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा, "संघ हमेशा ही सामाजिक समरसता की बात करता रहा है, उसने आजादी से पहले ही हर गांव में एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान की बात की थी। संघ तो उपनाम का भी पक्षधर नहीं है, इस बात का परीक्षण डॉ. अम्बेडकर ने स्वयं एक शाखा में जाकर किया था, लिहाजा संघ प्रमुख द्वारा सामाजिक समरसता का पक्ष लेने का अर्थ कतई यह नहीं है कि वह किसी दल के लिए यह कह रहे हैं।"

संघ प्रमुख किसके लिए कहते हैं और उनकी बातों का असल तात्पर्य क्या होता है, यह संघ से जुड़े लोग ही सही-सही समझ पाते हैं। जब चुनाव को ध्यान में रखते हुए दलितों, पिछड़ों को जोड़ने की बात कही जा रही है तो जाहिर है, डॉ. भीमराव अम्बेडकर का नाम बार-बार लिया जाएगा और लेकिन यह कतई नहीं बताया जाएगा कि डॉ. अम्बेडकर ने हिंदू धर्म क्यों छोड़ा।

जनता दल-युनाइटेड (शरद गुट) के महासचिव गोविंद यादव ने भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "गुजरात में एक बात साबित हो गई है कि भाजपा का दलित, पिछड़ा वर्ग में जनाधार कमजोर हो रहा है। अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवाणी और हार्दिक पटेल के प्रति देश के इनसे जुड़े वर्गो का आकर्षण बढ़ा है। इस स्थिति में संघ के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचा है कि वह इन वर्गो में भरोसा पैदा करे। अगर संघ वाकई में इनका हिमायती है तो किसी दलित या पिछड़ा को सर संघचालक बनाए।"

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का कहना है, "जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और जब से केंद्र में भी इसी पार्टी की सरकार आई है, तभी से दलित, आदिवासी और पिछड़ों पर अत्याचार शुरू हुए हैं। इन वर्गो के लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भाजपा के साथ संघ को भी यह लगने लगा है कि इस वर्ग के बीच से उसकी जमीन खिसक चली है। लिहाजा, वह लोगों को अपने पुराने तौर तरीकों से लुभाने की कोशिश करने की तैयारी में है, मगर अब ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। कोई इनके झांसे में आने वाला नहीं है।"

संघ प्रमुख के आह्वान पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि वे मकर संक्रांति के मौके पर गांव में घर-घर जाकर तिल और गुड़ का वितरण करेंगे। 

सूत्रों का कहना है कि संघ ने हर मोहल्ले में लोगों का समूह बनाने की रणनीति बनाई है और इसके लिए स्वयंसेवकों को लक्ष्य भी सौंप दिए हैं। संघ की यह कोशिश कितनी कारगर होगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

--आईएएनए

lok sabha election
RSS
BJP-RSS

Related Stories

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कांग्रेस का संकट लोगों से जुड़ाव का नुक़सान भर नहीं, संगठनात्मक भी है

कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...

पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद


बाकी खबरें

  • आज का कार्टून
    आम आदमी जाए तो कहाँ जाए!
    05 May 2022
    महंगाई की मार भी गज़ब होती है। अगर महंगाई को नियंत्रित न किया जाए तो मार आम आदमी पर पड़ती है और अगर महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश की जाए तब भी मार आम आदमी पर पड़ती है।
  • एस एन साहू 
    श्रम मुद्दों पर भारतीय इतिहास और संविधान सभा के परिप्रेक्ष्य
    05 May 2022
    प्रगतिशील तरीके से श्रम मुद्दों को उठाने का भारत का रिकॉर्ड मई दिवस 1 मई,1891 को अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरूआत से पहले का है।
  • विजय विनीत
    मिड-डे मील में व्यवस्था के बाद कैंसर से जंग लड़ने वाले पूर्वांचल के जांबाज़ पत्रकार पवन जायसवाल के साथ 'उम्मीदों की मौत'
    05 May 2022
    जांबाज़ पत्रकार पवन जायसवाल की प्राण रक्षा के लिए न मोदी-योगी सरकार आगे आई और न ही नौकरशाही। नतीजा, पत्रकार पवन जायसवाल के मौत की चीख़ बनारस के एक निजी अस्पताल में गूंजी और आंसू बहकर सामने आई।
  • सुकुमार मुरलीधरन
    भारतीय मीडिया : बेड़ियों में जकड़ा और जासूसी का शिकार
    05 May 2022
    विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय मीडिया पर लागू किए जा रहे नागवार नये नियमों और ख़ासकर डिजिटल डोमेन में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और अवसरों की एक जांच-पड़ताल।
  • ज़ाहिद ख़ान
    नौशाद : जिनके संगीत में मिट्टी की सुगंध और ज़िंदगी की शक्ल थी
    05 May 2022
    नौशाद, हिंदी सिनेमा के ऐसे जगमगाते सितारे हैं, जो अपने संगीत से आज भी दिलों को मुनव्वर करते हैं। नौशाद की पुण्यतिथि पर पेश है उनके जीवन और काम से जुड़ी बातें।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License