क्या इन कंपनियों की सहूलियत और कथित कृषि सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए ये तीनों कानून लाये गये? क्या गुरुवार को होने वाली अगली बैठक में कोई हल निकलेगा? ऐसे तमाम सवालों का जवाब तलाशता वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण:
इतने भारी विरोध के बावजूद कृषि सम्बन्धी तीन क़ानूनों को लेकर केंद्र सरकार इस तरह क्यों जिद ठाने हैं? क्या ये महज MSP और मंडियों का मामला है या इससे भी कुछ ज्यादा? भारतीय कारपोरेट के अलावा दुनिया की कई बडी कंपनियों की नजर भारत के खाद्यान्न मार्केट पर टिकी है. क्या इन कंपनियों की सहूलियत और कथित कृषि सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए ये तीनों कानून लाये गये? क्या गुरुवार को होने वाली अगली बैठक में कोई हल निकलेगा? ऐसे तमाम सवालों का जवाब तलाशता वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण:
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