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मोदी सरकार को वाम दलों की चुनौती, आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ देशभर में प्रदर्शन
देश में गहराते आर्थिक संकट, भयानक मंदी और अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में गिरावट के ख़िलाफ़ वाम दलों के राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह के तहत आज पूरे राज्य में प्रतिरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सोनिया यादव
16 Oct 2019
देश भर के वाम दलों ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का किया विरोध

देश में बढ़ती बेरोज़गारी और मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ देश भर में आज 16 अक्टूबर को सभी वाम दलों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर वाम दलों ने आर्थिक मंदी, महंगाई, सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण, बेरोज़गारी, किसानों की बदहाली और श्रम क़ानूनों मे मालिक पक्षीय बदलाव सहित कई मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना की।

इस प्रदर्शन में शामिल सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, "आज देश की अर्थव्यवस्था की हालत इतनी ख़स्ता है जो पिछले 50 सालों में सबसे अधिक है। जो कार बना रहे थे, वो बेकार हो गए। ऑटो मोबाइल सेक्टर में 20 लाख नौकरियां चली गईं, टेक्सटाइल उद्योग में 30 लाख लोग बेरोज़गार हो गए। लेकिन सरकार को मज़दूरों और कामगारों की नहीं चिंता है। सरकार तो बड़े कॉर्पोरेटों की जेब भरने में लगी है।"

निजीकरण और बैंकों की ख़स्ता हालत पर हल्ला बोलते हुए येचुरी ने कहा, "जय हिंद की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया नारा जियो हिंद बन गया है। सरकार निजीकरण करके बड़े कॉर्पोरेट्स को मालामाल कर रही है। बीएसएनएल-एमटीएनएल बंद करके सरकार केवल अंबानी के जियो को बढ़ावा दे रही है। हवाई अड्डों को अडानी के हवाले किया जा रहा है। देश में अमीरों को और अमीर बनाया जा रहा है।"

Capture CPI.PNG

भाजपा के ख़िलाफ़ हमला बोलते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने कहा, "ये देश की विडंबना है कि सत्तारूढ़ पार्टी वीर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित करना चाहती है। यह भाजपा का एजेंडा है, वह दिन दूर नहीं जब भाजपा गाँधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को भारत रत्न देने की मांग करेगी।"

डी राजा ने अपने संबोधन में कहा कि बाजेपी की सरकार आर्थिक मोर्चे पर विफल हो गई है। सरकार पब्लिक सेक्टर की कंपनियों को प्राइवेट हाथों में बेचकर मुनाफ़ा कमाना चाहती है। आरबीआई से एक लाख 75 हज़ार करोड़ रुपये लेकर बड़े कॉर्पोरेट को छूट दे रही है। इधर ग़रीब लोग बेरोज़गार हो रहे हैं उधर सरकार ध्यान बंटाने के लिए कश्मीर का मुद्दा उठा रही है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे सरकार के क़दमों से देश में भारी आर्थिक संकट पैदा हो गया है, लेकिन सरकार इसे लगातार नकार कर हिंदु-मुस्लिम करने में व्यस्त है।"

प्रदर्शन में शामिल सीपीआई (माले) की पोलिट ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन ने कहा, "सरकार फ़िल्मों के हिट होने से देश की आर्थिक स्थिति को हिट बता रही है। सरकार चाहती है कि आप अपनी आंखों पर पट्टी बंध लें कि मंदी है ही नहीं। सरकार ने चुनावों से पहले बेरोज़गारी के आंकड़ों को दबा दिया और जब आंकड़े सामने आए तो सरकार इसे मानना नहीं चाहती।"

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कविता ने कहा, "पहले की सरकारों की तुलना में ये सरकार ज़्यादा बेशर्म है। इसे लोगों से झूठ बेलने में कोई शर्म नहीं आती। एक समय था जब दुनिया मंदी की चपेट में थी तब भारत इससे बचा हुआ था, लेकिन आज जब दुनिया में कोई मंदी नहीं है तो भारत मंदी की चपेट में है। ये मंदी मोदी सरकार की दी हुई मंदी है। सरकार के विरोध में जो आवाज़ें उठ रही है, ये लोग उसे देशद्रोही क़रार दे देते हैं। जो गाँधी का अपमान करते हैं वो संसद पहुंच जाते हैं। लेकिन जो लड़की अपने शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती है, उसे जेल में बंद कर दिया जाता है। देश को नोटबंदी ने बर्बाद कर दिया, रही सही क़सर जीएसटी ने पूरी कर दी। लेकिन सरकार कश्मीर से 370 हटाकर ख़ुशियाँ मना रही है। वहां लोगों को क़ैद कर के ख़ुश हो रही है।"

प्रदर्शनकारी कम्युनिस्ट गदर पार्टी की सुचारिता ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, "मोदी जी के राज में अच्छे दिन तो आए हैं, लेकिन सिर्फ़ पूंजीपतियों के, अंबानी-अडानी के, आम जनता बेरोज़गारी और मंदी से त्रस्त है और मोदी जी कहते हैं मेरे देश में सब अच्छा है।"

सीपीआई (एमएल) की सुचेता डे ने न्यूज़क्लिक से कहा, "ये सरकार जनता की सरकार नहीं है, ये पूंजीपतियों की सरकार है। हमारा प्रदर्शन देश में बढ़ती बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ है, पूंजीपतियों को दी जा रही छूट के ख़िलाफ़ है। सरकार ग़रीबों को राहत देने के बजाय, अमीरों को मालामाल कर रही है। सरकार को कल्याणकारी योजनाओं में निवेश करना होगा। मज़दूरों-किसानों की आवाज़ सुननी होगी। जब तक सरकार ठोस क़दम नहीं उठाती, हम संघर्ष करते रहेंगे।"

ग़ौरतलब है कि देश में गहराते आर्थिक संकट, भयानक मंदी और अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में गिरावट के ख़िलाफ़ वाम दलों के राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह के तहत आज पूरे राज्य में प्रतिरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजधानी पटना में जीपीओ गोलबंर से बुद्धा स्मृति पार्क तक मार्च निकला और फिर वहां पर एक सभा भी आयोजित की गई। देशव्यापी विरोध सप्ताह का आयोजन देश के पांच प्रमुख वाम दलों माकपा, भाकपा, भाकपा-माले, आरएसपी व फॉरवर्ड ब्लाॅक ने संयुक्त रूप से किया।

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बुद्धा स्मृति पार्क में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वाम नेताओं ने कहा, "आज अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में गिरावट है। यहां तक कि चाय बिस्कुट पसंद करने वाले देश में बिस्कुट तक की बिक्री में गिरावट दर्ज की जा रही है। लेकिन मोदी सरकार रोज़गार बढ़ाने के बजाए उलटे कॉर्पोरेट घरानों को बेल आउट पैकेज देने का काम कर रही है। रिज़र्व बैंक के आरक्षित कोष से लिए गए 1.76 लाख करोड़ रुपये का इस्तेमाल सार्वजनिक निवेश के कार्यक्रमों में नहीं किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल नोटबंदी व जीएसटी के कारण 1.70 लाख करोड़ रुपये के हुए नुक़सान की भरपाई में किया जा रहा है।"

CPI(M)
CPI(ML)
d Raja
Sitaram yechury
Kavita Krishnan
Sucheta De
communist parties Protest

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