NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बंगाल चुनाव: नंदीग्राम की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत बिरुलिया में वामपंथ की पुनर्वापसी के आसार
पिछले एक दशक से किनारे कर दिए गए और राजनीतिक हिंसा का सामना करने के बाद वामपंथ को एक बार फिर से पूर्वी और पश्चिमी मेदनीपुर में समर्थन मिलना शुरू हो गया है।
संदीप चक्रवर्ती
23 Mar 2021
bengal
मीनाक्षी मुखर्जी, नंदीग्राम से वाम मोर्चे की उम्मीदवार 

पश्चिम बंगाल के हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र के बिरुलिया गाँव के ग्रामीण हर रोज एक बरगद के पेड़ के नीचे मिलते हैं और अगले दिन के कार्यक्रम के बारे में फैसला लेते हैं।

 2013 में नंदीग्राम की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत बिरुलिया के सभी आठ पंचायत सदस्य वामपंथी हुआ करते थे, लेकिन उन्हें अपना काम करने की इजाजत नहीं थी। वास्तव में 2018 के बाद पंचायत के एकमात्र गैर-तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सदस्य, नान्तु गुचैत जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के सदस्य थे। उन्होंने  पेड़ के निशान के साथ जीत दर्ज की थी। हालात ही कुछ ऐसे थे कि यदि गुचैत सीपीआई(एम) के चुनाव निशान हंसिया, हथौड़ा और तारे के निशान से लड़ते तो उन्हें अपनी जिंदगी से हाथ धोने का खतरा बना हुआ था। 

आगामी विधानसभा चुनावों के प्रचार की सरगर्मी के दौरान जब 10 मार्च को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बिरुलई बाज़ार में घायल हो गई थीं, तो उन्होंने एक ऐसे इलाके में अपने खिलाफ साजिश रचे जाने की बात कही थी, जिसे विपक्षी दल से सहानुभूति रखने वालों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है।

नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में बनर्जी का मुकाबला टीएमसी नेता सुवेंदु अधिकारी से है, जिन्होंने दलबदल कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा है। इसने नंदीग्राम को टीएमसी और भाजपा के बीच में राजनीतिक अखाड़े के मुख्य केंद्र के तौर पर बना डाला है। इस सबके बीच ऐसा लगता है कि लेफ्ट अपने पुराने गढ़ में अपनी खोई जमीन में एक बार फिर से समर्थन हासिल करता दिख रहा है।

नंदीग्राम के लिए संग्राम  

एक वयोवृद्ध मछली जाल बुनकर, अशोक जाना ने न्यूज़क्लिक को अपने कम्युनिस्ट अतीत के बारे में बताया जब वे सीपीआई(एम) की केंद्रीय कमेटी के सदस्य राबिन देब को गुप्त रूप से सूचना भेजते थे।

गुचैत पारा से बिलुरिया के एकमात्र पंचायत सदस्य नान्तु गुचैत, नंदीग्राम में भारी मुश्किलों के बावजूद आज भी सीपीआई(एम) के प्रति अपनी वचनबद्धता को दुहराते हैं।
अपने चुनाव अभियान के दौरान डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डीवाईएफआई) की प्रदेश अध्यक्ष और नंदीग्राम से वाम उम्मीदवार, मीनाक्षी मुखर्जी ने बिरुलिया बाज़ार, पंचायत क्षेत्र और अंदरूनी इलाकों के लोगों तक अपनी पहुँच बनाई है। 

2011 के बाद यह पहली बार था जब बिरुलिया ने सीपीआई(एम) के कार्यकर्ताओं को लाल झंडों और केंद्र और राज्य सरकार की विफलताओं को उजागर करने वाले विभिन्न नारों की श्रृंखला के साथ मार्च करते देखा। 

ऐसा इसलिए है क्योंकि वाम समर्थकों और कार्यकर्ताओं को टीएमसी समर्थकों द्वारा उनके गाँवों में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।


लेकिन इस बार स्थितियां भिन्न हैं। अभियान के दौरान गुचैत पारा के बिस्वजीत गुचैत ने अपनी सात माह की बेटी को मुखर्जी से मिलवाया, जिन्हें वे जांबाज योद्धा के तौर पर देखते हैं। मुखर्जी के अभियान प्रबंधकों का कहना है कि उन्होंने मुखर्जी से कहा कि वे उनकी बेटी को गोद में लेकर आशीर्वाद दें, ताकि उनकी बेटी पढ़-लिखकर मुखर्जी की तरह ही एक कम्युनिस्ट बन सके। 

एक स्थानीय निवासी जगदानंद दास ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए आरोप लगाया कि उनके वाम समर्थक होने के कारण, कुछ लोगों ने उन्हें 22 मार्च, 2016 को खोदाम्बरी इलाके के एक ईंट भट्टे पर जबरन ले जाकर आग में झोंक देने की धमकी दी थी। लेकिन वे आज भी लाल झंडे से ही जुड़े हुए हैं। 

मुखर्जी की अभियान टीम ने बताया कि हर तरफ से समर्थन हासिल हो रहा है। उनका दावा था कि पूर्वी मेदिनीपुर जिले में 2007 के बाद से 65 वाम सदस्यों और समर्थकों के मारे जाने के बावजूद ऐसा देखने को मिल है, जिसमें नवीनतम घटना 2020 में देबकुमार भुनिया की हत्या के साथ देखने में आई थी। 

बिरुलिया बाज़ार के इलाके में मुखर्जी के चुनाव प्रचार के दौरान एक सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, अमल जाना ने दावा किया कि नंदीग्राम में, खासकर बिरुलिया के लोग सीएम की टिप्पणियों से सकते में हैं, जिसमें अपनी टिप्पणी में उन्होंने इसे “जानबूझकर” उन्हें चोट पहुंचाने की साजिश करार दिया था। एक आम सभा में जाना ने कहा “यह बिरुलिया के लोगों के लिए एक चोट के समान है, जो इस झूठे आरोप के कारण बुरी तरह से आहत महसूस कर रहे हैं।” 

नंदीग्राम में 1 अप्रैल को मतदान होना है जबकि पास के खेजुरी में 27 मार्च को मतदान होना तय है।

नंदीग्राम का तनाव खेजुरी में छलक रहा है 

सीपीआई(एम) ने हिमंग्शु दास को खेजुरी से चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि टीएमसी ने पार्थ प्रतीम दास और भाजपा ने शांतनु प्रमाणिक को टिकट दिया है। न्यूज़क्लिक से बातचीत के दौरान हिमंग्शु दास ने बताया कि हाल के वर्षों में उनके जेल से रिहा होने के बाद से सीपीआई(एम) की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। इस बारे में उनका कहना था “जब सुवेंदु अधिकारी (पूर्व टीएमसी और वर्तमान में भाजपा नेता) का दबदबा यहाँ पर अपने चरम पर था, तो यहाँ के अधिकांश सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे आरोप मढ़कर उन्हें जेल में डाल दिया गया था। इस दशक के शुरूआती वर्षों की तुलना में आज खेजुरी में हमारे पास 550 पार्टी सदस्यों सहित कई सहायक समूहों के मेजबाज और विभिन्न जन संगठनों के सदस्य हैं।  

खेजुरी में कालागछिया गाँव के निवासी स्वदेशरंजन पारिया ने अपने जीर्ण-शीर्ण घर की हालत का उदहारण देते हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रकाश डाला, जिसके लिए अतीत में एक योजना को मंजूरी दी गई थी। हालांकि इंदिरा आवास योजना के तहत जो 1 लाख रूपये की रकम निर्धारित की गई थी, लेकिन उनका आरोप था कि उन्हें इसमें से मात्र 35,000 रूपये ही मिले थे, जबकि बाकी की रकम डकार ली गई थी। और यह सब मामले नंदीग्राम-खेजुरी के इलाके में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के प्रशासन के तहत बखूबी जारी था।

पारिया याद करते हुए बताते हैं “किसी भी चीज के खिलाफ विद्रोह का अर्थ न सिर्फ उस व्यक्ति के लिए बल्कि उसके समूचे परिवार के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।” उनका कहना था कि बनर्जी और अधिकारी के बीच की आपसी कलह और अधिकारी के भाजपा में शामिल हो जाने के बाद से हर तरफ से असंतोष के स्वर उभरने शुरू हो चुके हैं। लेकिन जैसा कि कहावत है कि ‘एक बार का दूध का जला, छांछ भी फूंक-फूंककर पीता है’ उसी प्रकार नंदीग्राम और खेजुरी के निवासी बेहद सावधानी से कदम उठा रहे हैं। भारी राजनीतिक तनाव के बीच यह तो केवल समय ही बतायेगा कि क्या झूठी दिलासा वाली शांति नंदीग्राम और खेजुरी में वापस आयेगी भी या नहीं।

पश्चिमी मेदिनीपुर में लेफ्ट की नए सिरे से संघर्ष की तैयारी 

कुछ महीने पहले तक जिन्हें सत्तारूढ़ टीएमसी के “योद्धा” के तौर पर माना जाता था, और पर्याप्त मात्रा में धन-दौलत इकट्ठा कर ली थी, में से कईयों ने राजनीतिक हवा में बदलाव के रुख को भांपते हुए अपनी राजनीतिक निष्ठा में बदलाव करते हुए भाजपा को अंगीकार कर लिया था। न्यूज़क्लिक के साथ अपनी बातचीत में चंद्राकोना से पूर्व में तीन बार विधायक रह चुके गुरुपाद दत्ता ने बताया “असल में यह टीएमसी बनाम पूर्व-तृणमूल है जो जंगलमहल के पश्चिमी मेदनीपुर के विशाल क्षेत्र में गुंडागर्दी के मामले में एक दूसरे के खिलाफ मुकाबले में हैं।”  

जुलाई 2018 में वयोवृद्ध दत्ता, जो कि पूर्व हाई स्कूल शिक्षक थे, को सभी विपरीत हालातों के बीच सीपीआई(एम) से नाता नहीं तोड़ने की वजह से पीटा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें प्रताड़ित करने वालों में से कुछ अब भाजपा में हैं, जबकि बाकी के बचे लोग सत्तारूढ़ टीएमसी के साथ हैं। इस सबके बावजूद एक वामपंथी नेता के तौर पर दत्ता ने पश्चिमी मेदनीपुर के चन्द्रकोना में, जिसकी सीमाएं जंगलमहल से लगती हैं, इस दौरान अपनी पार्टी के खिलाफ हमलों पर लगातार संघर्ष करना जारी रखा।

इस साल चन्द्रकोना रोड विधानसभा क्षेत्र में संजुक्त मोर्चा (कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ वाम मोर्चे के गठबंधन) के सहयोगी आईएसएफ, जिसके उम्मीदवार गौरांग दास हैं, को टीएमसी के अरूप धरा और भाजपा के सिबनाथ दास के खिलाफ मुकाबले में खड़ा किया गया है। 

गौरांग दास का मुख्य आधार सीपीआई(एम) से मिल रहे खुले समर्थन में है। 19 मार्च को उनके रोड शो में करीब 40 युवा वाम कार्यकर्ताओं के एक समूह ने हाथों में लाल झंडे लेकर उम्मीदवार के साथ प्रचार कार्य किया था। 1 अप्रैल को पश्चिमी मेदनीपुर में घाटल विधानसभा क्षेत्र में होने वाले चुनाव के लिए संजुक्त मोर्चा के उम्मीदवार कमल दोलुई का मुकाबला टीएमसी के निवर्तमान विधायक शंकर दोलुई के बीच में है। भाजपा के शीतल कोपट भी यहाँ से मुकाबले में खड़े हैं।

यह लेख मूलतः अंग्रेजी में हैं। इसे आप इस लिंक की मदद से पढ़ सकते हैं. 

https://www.newsclick.in/Bengal-Elections-In-Birulia-Nandigram%E2%80%99s-Largest-Village-Panchayat-Left-is-Regaining-Support

Nandigram
ISF
purulia
west bangal election
left
TMC
BJP
mamta banerjee

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • एनबीए को आईटी नियमों से राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरें
    न्यूज़क्लिक टीम
    एनबीए को आईटी नियमों से राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरें
    09 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी केरल हाई कोर्ट ने नए आईटी नियमों से एनबीए को दी राहत, वेदांता ज़िंक प्लांट और अन्य ख़बरों पर।
  • उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    09 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश के कई जिलों से प्रस्तावकों के अपहरण और प्रत्याशियों के बीच गोलियां चलने की खबर है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।
  • वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    अयस्कांत दास
    वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    09 Jul 2021
    विशिष्ट मार्गदर्शिका का अभाव और केंद्रीय निगरानी की मशीनरी न होने के कारण राज्य दर राज्य वन भूमि पर अधिकारों के दावों के मामले अलग-अलग हैं।
  • डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    भाषा
    डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    09 Jul 2021
    वॉट्सऐप ने मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष यह भी साफ किया कि इस बीच वह नई निजता नीति को नहीं अपनाने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोग के दायरे को सीमित नहीं करेगा।
  • झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    09 Jul 2021
    सीपीआईएम ने मांग की है कि जब तक प्राधिकरण या सरकार द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई जाती है तब तक इन झुग्गी बस्ती में रह रहे गरीब लोगों को वहीं पर रहने दिया जाए। और यदि किसी कारणवश उन्हें जनहित…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License