NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
“…मैंने इसलिए दिया मोदी जी को वोट!”
मैंने सोचा, मैं तो हिन्दू हूँ, सवर्ण भी और पुरुष भी। मुझे इन मुद्दों से क्या। दलित पिटें तो पिटें, मुसलमान मरें तो मरें। महिलाओं पर अत्याचार हो तो हो, आदिवासी बेदखल हों तो हों। किसान आत्महत्या करें तो करें। इस बार थोड़ा सा स्वार्थी हो जाते हैं। एक चुनाव की ही तो बात है, सो इस बार मोदी जी को ही वोट दे दिया।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
26 May 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : AajAbhi

जश्न का समय है। जीत का समय है। विजय गीत का समय है। और बधाई देने का समय है। भाजपा को और उसके सहयोगियों को हार्दिक बधाई। लोकसभा चुनाव के नतीजों ने दिखा दिया है कि कम से कम हाल फिलहाल मोदी और भाजपा का कोई भी विकल्प नहीं है। हम सबने मोदी जी और भाजपा को दुबारा से अपने शासक के रूप में चुन लिया है। मैंने भी इस बार मोदी जी को ही वोट दिया। मोदी जी ही जीते इसलिए मेरा वोट बेकार नहीं गया, तो मुझे भी बधाई। चुनाव आयोग और बहुत सारे सैलिब्रिटीज बार-बार अपील करते रहे कि आपको अपना वोट बेकार नहीं करना है। जीतने वाले को इसलिए दिया जिससे वोट जाया न हो। कांग्रेस या आप को वोट देता तो बहुत ही अफसोस होता कि वोट बेकार चला गया। 

पिछली बार, 2014 में चुनावों में वोट भाजपा को नहीं दिया था तो बेकार चला गया था, पर इस बार मोदी जी को देकर वोट की लाज रख ली। पिछली बार हमारे यहां से भाजपा का कोई उम्मीदवार चुनाव में खडा़ हुआ था पर इस बार हमारे यहां से स्वयं मोदी जी खड़े हुए थे। हमारे यहां से ही नहीं, सभी जगह से मोदी जी ही स्वयं खड़े हुए थे, इसलिए मोदी जी को ही वोट दिया।

tirchi najar after change new_16.png

वोट तो मैं चौदह के चुनाव में भी भाजपा को ही देना चाहता था पर कुछ मित्रों ने बरगला लिया। कहने लगे भाजपा सांप्रदायिक पार्टी है। पर अब पता चला कि भाजपा कैसी भी हो, मोदी जी अच्छे हैं, वायदा निभाते हैं। इसलिए इस बार मोदी जी को वोट दे दिया। भाजपा को देना होता तो शायद इस बार भी नहीं देते।

मोदी जी ने चौदह के चुनाव से पहले कहा था कि हर एक के खाते में पंद्रह लाख रुपये डालेंगे। चुनाव जीतने, प्रधानमंत्री बनने के बाद, मोदी जी ने मुकेश अंबानी से, नीता अंबानी से, रतन टाटा से, राहुल बजाज से और भी बहुतों से व्यक्तिगत रूप से पूछा कि आपको पंद्रह लाख रुपए अपने बैंक खाते में चाहियें। मोदी जी की मुकेश और नीता अंबानी से यह बात पूछते हुए की फोटो भी उन दिनों काफी वायरल हुई थी। पर इन सब लोगों ने मना कर दिया। मोदी जी का वायदा था कि यदि पंद्रह लाख रुपये डलवायेंगे तो सबके खाते में नहीं तो किसी के भी नहीं। अंबानी-अडानी-टाटा ने पैसे डलवाने से मना कर दिया तो किसी के खाते में नहीं डलवाये। मुझे लगा, वायदा हो तो ऐसा, नहीं तो न ही हो। इस बार मैंने मोदी जी को इसीलिए वोट दिया।

घर में चार साल से बड़ा बेटा पढ़-लिख कर बेकार बैठा है। कहीं नौकरी नहीं है, तो कहीं अप्लाई कर दिया है। जहां अप्लाई कर दिया है वहां परीक्षा टलती जा रही है। जहां परीक्षा हो गई है वहां परिणाम नहीं घोषित हो रहा है। जहां परिणाम घोषित हो गया है वहां जॉयन नहीं हो पा रहा है। यानी कोई न कोई अड़ंगा है यहां भी। मोदी जी ने पिछले चुनाव में वायदा किया था, दो करोड़ नौकरी हर साल का। मोदी जी वायदे के पक्के हैं। पूरी दो करोड़ नौकरी हर साल, न दस लाख, न पचास लाख, न एक करोड़, न डेढ़ करोड़। अब दो करोड़ नौकरी का इंतजाम नहीं हो पाया तो बिल्कुल भी नहीं दीं। घर में बेकार बैठे हुए नौजवान बेटे के बावजूद मोदी जी की यह बात मुझे काफी पसंद आयी। इसीलिए इस बार मैंने मोदी जी को वोट दिया।

छोटा भाई है। साथ ही रहता है। पहले छोटा मोटा व्यापार करता था। पांच छह मुलाजिम भी रखे हुए थे। अच्छी कमाई कर लेता था। पर नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी ने उसकी और उस जैसे अन्य व्यापारियो की कमर ही तोड़ दी। अब घर पर बैठा है। जो उसके यहां काम करते थे, वे भी अपने घर बैठे हैं या गांव लौट गये हैं। जिस पंसारी के यहां से घर का सौदा आता था, उसकी दुकान भी बंद पडी़ है। पर हमारा क्या है, हम बिग बाजार से, रिलायंस फ्रैश से घर का सामान ले आते हैं। छोटी दुकानें बंद हो रही हैं तो क्या, बड़े बड़े स्टोर तो जगह जगह खुल रहे हैं। बड़े लोगों के लिए तो देश आगे बढ़ रहा है। इसीलिए मैंने मोदी को वोट दिया।

बातें और वायदे तो और भी थे। और मुद्दे भी थे। दलितों के थे, आदिवासियों के थे। नौजवानों के थे, विद्यार्थियों के थे। महिलाओं के भी थे और अल्पसंख्यकों के भी। और किसानों के तो हर जगह थे। हर जगह किसान आत्महत्या कर रहे हैं। पर मैंने सोचा, मैं तो हिन्दू हूँ, सवर्ण भी और पुरुष भी। मुझे इन मुद्दों से क्या। दलित पिटें तो पिटें, मुसलमान मरें तो मरें। महिलाओं पर अत्याचार हो तो हो, आदिवासी बेदखल हों तो हों। किसान आत्महत्या करें तो करें। इस बार थोड़ा सा स्वार्थी हो जाते हैं। एक चुनाव की ही तो बात है, सो इस बार मोदी जी को ही वोट दे दिया।

पर प्रमुख मुद्दा तो राष्ट्र का था। भारत ही नहीं रहेगा तो हम कहाँ रहेंगे। मुझे समझा दिया गया कि भारत के टुकड़े करने में मुस्लिम लीग और अतिवादी हिन्दू संगठनों का हाथ नहीं था बल्कि कांग्रेस और गांधी ने पाकिस्तान बनवाया। वो तो मोदी जी नहीं होते तो ये कांग्रेसी सरकारें भारत के और भी टुकड़े कर चुकी होती। आप कहेंगे कि मोदी जी तो पांच साल से ही प्रधानमंत्री बने हैं, उससे पहले तो अधिकतर कांग्रेस का ही शासन था पर देश कहां टूटा। पर मोदी जी 1950 में पैदा हो चुके थे। और महान पुरूष बाल काल से ही लीलायें दिखाना शुरू कर देते हैं। भगवान कृष्ण के बारे में याद नहीं है क्या। इसीलिए कांग्रेस चाह कर भी 1950 के बाद देश के टुकड़े नहीं कर पाई। अब मोदी जी आये हैं, उन्होंने राष्ट्र का मतलब समझाया है। शास्त्री, इंदिरा, वाजपेयी सबने अपने ढंग से पाकिस्तान को सबक सिखाया पर वे सब बेकार थे। सिर्फ मोदी ही जानते हैं, देश की सुरक्षा कैसे की जाये। राष्ट्र को बचाना है। सो इस बार मोदी जी को वोट दिया।

अंतिम कारणः न दल बड़ा न भईया, सबसे बड़ा रुपईया। और देखा, जाना और समझा कि मोदी जी ने सबसे अधिक पैसा खर्च किया है। खर्च किया पैसा बेकार न जाये, सो इस बार मोदी जी को वोट दिया।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
2019 Lok Sabha elections
result 2019

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • ram_navmi
    अफ़ज़ल इमाम
    बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?
    13 Apr 2022
    हिंसा की इन घटनाओं ने संविधान, लोकतंत्र और बहुलतावाद में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय भारतवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अपने जान-माल और बच्चों के भविष्य को लेकर सहम गए हैं।
  • varvara rao
    भाषा
    अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की
    13 Apr 2022
    बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में कवि-कार्यकर्ता वरवर राव की वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी जिसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,088 नए मामले, 26 मरीज़ों की मौत
    13 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 5 लाख 21 हज़ार 736 लोग अपनी जान गँवा चुके है।
  • CITU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन
    13 Apr 2022
    ये सभी पिछले माह 39 दिन लंबे चली हड़ताल के दौरान की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या आंगनवाड़ी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने से नाराज़ थे। इसी के खिलाफ WCD के हेडक्वार्टस आई.एस.बी.टी कश्मीरी गेट पर प्रदर्शन…
  • jallianwala bagh
    अनिल सिन्हा
    जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान
    13 Apr 2022
    जलियांवाला बाग के नवीकरण के आलोचकों ने सबसे महत्वपूर्ण बात को नज़रअंदाज कर दिया है कि नरसंहार की कहानी को संघ परिवार ने किस सफाई से हिंदुत्व का जामा पहनाया है। साथ ही, उन्होंने संबंधित इतिहास को अपनी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License