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भारत
राजनीति
माकपा ने कहा, पार्टी समर्थकों और विधायक पर हमले के पीछे बीजेपी कार्यकर्ता
त्रिपुरा में राजनीतिक हिंसा पर रोक नहीं। विशालगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के भाषण के बाद, कार्यकर्ताओं पर हुआ हमला 35 घायल।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Nov 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
tripura

त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से विपक्ष के प्रति राजनीतिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रहीI इसी कड़ी में शुक्रवार को तथाकथित तौर पर बीजेपी से जुड़े कुछ लोगों ने राज्य के विधायकों के एक काफिले सहित उन लोगों पर हमला कर दिया जो पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार की एक सभा में शामिल होने आये थे।

माकपा के पॉलिट ब्यूरो ने अपने बयान में कहा है कि, “विपक्षी पार्टियों के लोगों और स्थानीय निकाय पदाधिकारियों पर इस तरह के हमले त्रिपुरा में आम हो गए हैं। इस बेहद निंदनीय स्थिति की ज़िम्मेदार राज्य की बीजेपी सरकार है।’’

विशालगढ़ के जिस पार्टी दफ़तार पर हमला हुआ वहाँ पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार एक मीटिंग में अपनी बात रख रहे थे। इस घटना का ब्यौरा देते हुए बयान में कहा गया कि, “16 नवंबर को जब माणिक सरकार विशालगढ़ के माकपा पार्टी दफ्तर में अपनी बात रख रहे थे तो बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने दफ्तर को घेर लिया। बीजेपी के लोग मीटिंग में लोगों को जाने से रोक रहे थे। जब वह [आम जनता] वापस लौट रहे थे तो उन पर हमला किया गया। 35 लोगों को चोटें आयीं। विधायक नारायण चौधरी की गाड़ी पर भी हमला हुआ।’’

 शुक्रवार को मीडिया में आई कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के काफिले पर हमला हुआ। इसके बाद देश भर में लोगों ने इस घटना पर चिंता ज़ाहिर की।इस साल मार्च से जब से बीजेपी त्रिपुरा में सत्ता में आई है, तब से लगातार ही माकपा के दफ्तरों और कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं।

त्रिपुरा में चल रही इन घटनाओं पर माकपा ने कहा कि, “ज़िला परिषद के सदस्यों पर कई हमले हुए हैं। बीजेपी के गुंडों ने दक्षिण त्रिपुरा ज़िला परिषद अध्यक्ष हिमांशु रॉय के घर पर हमला किया था। 15 नवंबर को जब रॉय बेलोनिया शहर में ज़िला परिषद की मीटिंग के लिए जा रहे थे तो उनकी गाड़ी और ज़िला परिषद के दूसरे सदस्यों पर हमला किया गया। इस हमले में कुछ पुलिस वाले भी घायल हुए थे।’’ माकपा ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह राज्य में सामान्य राजनीतिक गतिविधियों को चलने दें।

त्रिपुरा काँग्रेस के उपाध्यक्ष तपस डे ने भी इस हमले की निंदा की है और इंडियन एक्सप्रेस में कहा है कि, “यह सभी घटनाएँ दिखाती हैं कि बीजेपी विपक्षी पार्टियों को जगह नहीं देना चाहती है।’’जब से बीजेपी आईपीएफटी (इनडीजीनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा) के साथ साल की शुरुआत में सत्ता में आई है, तब से ही विपक्षी पार्टियों खासकर माकपा के दफ्तरों और कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं। यह त्रिपुरा जैसे शांतिप्रिय राज्य के लिए एक नयी बात है।

पार्टी के सूत्रों के हिसाब से अब तक 1,000 वामपंथी कार्यकर्ताओं, जिसमें 100 महिलायें शामिल हैं, पर हमला हुआ और उन्हें चोटें आयीं। माकपा के 750 दफ्तरों को या तो जाला दिया गया है या उन पर हमला हुआ है। पार्टी के 2,000 समर्थकों के घरों पर भी हमला हुआ है।

 अगस्त में माकपा ने कहा कि उसके कार्यकर्ता जब केरल में बाढ़ पीड़ितों के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे तो उन पर तीन जगहों पर हमला हुआ। हैरानी की बात यह है कि ये हमला पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हुए।

पार्टी ने कहा “पार्टी के बड़े नेता और वर्तमान या पूर्व में जनता के प्रतिनिधि रहे बादल चौधरी, सुधन दास, बसुदेब मजूमदार पर भी पुलिस के सामने हमला किया गया।’’ पार्टी ने यह भी कहा कि, “यह हमले और लोकतंत्र विरोधी घटनाएँ त्रिपुरा में बीजेपी राज में आम बात हो गयी हैI यहाँ तक की बाढ़ राहत के इंसानियत के काम पर भी हमला हो रहा है।’’

 एक महीने पहले 40 साल पुराने प्रगतिशील अखबार देशारकथा को भी कमज़ोर आधार पर बंद कर दिया गया था। इस अखबार का प्रभाव इतना था कि यह राज्य का दूसरा सबसे ज़्यादा सर्कुलेशन वाला अखबार था। इसे बंद किया जाने की एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी निंदा की थी।अखबार को दस दिनों के बाद तब शुरू किया गया जब हाई कोर्ट ने इसे बंद करने के आदेश पर रोक लगा दी।

संसद के मॉनसून सत्र में माकपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले)-लिबरेशन और दूसरी वामपंथी पार्टियों ने त्रिपुरा में वामपंथ पर हो रहे हमले के खिलाफ और लोकतंत्र को बचाने के लिए प्रदर्शन किया था।

Tripura
CPI(M)
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