NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
माकपा ने कहा, पार्टी समर्थकों और विधायक पर हमले के पीछे बीजेपी कार्यकर्ता
त्रिपुरा में राजनीतिक हिंसा पर रोक नहीं। विशालगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के भाषण के बाद, कार्यकर्ताओं पर हुआ हमला 35 घायल।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Nov 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
tripura

त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से विपक्ष के प्रति राजनीतिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रहीI इसी कड़ी में शुक्रवार को तथाकथित तौर पर बीजेपी से जुड़े कुछ लोगों ने राज्य के विधायकों के एक काफिले सहित उन लोगों पर हमला कर दिया जो पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार की एक सभा में शामिल होने आये थे।

माकपा के पॉलिट ब्यूरो ने अपने बयान में कहा है कि, “विपक्षी पार्टियों के लोगों और स्थानीय निकाय पदाधिकारियों पर इस तरह के हमले त्रिपुरा में आम हो गए हैं। इस बेहद निंदनीय स्थिति की ज़िम्मेदार राज्य की बीजेपी सरकार है।’’

विशालगढ़ के जिस पार्टी दफ़तार पर हमला हुआ वहाँ पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार एक मीटिंग में अपनी बात रख रहे थे। इस घटना का ब्यौरा देते हुए बयान में कहा गया कि, “16 नवंबर को जब माणिक सरकार विशालगढ़ के माकपा पार्टी दफ्तर में अपनी बात रख रहे थे तो बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने दफ्तर को घेर लिया। बीजेपी के लोग मीटिंग में लोगों को जाने से रोक रहे थे। जब वह [आम जनता] वापस लौट रहे थे तो उन पर हमला किया गया। 35 लोगों को चोटें आयीं। विधायक नारायण चौधरी की गाड़ी पर भी हमला हुआ।’’

 शुक्रवार को मीडिया में आई कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के काफिले पर हमला हुआ। इसके बाद देश भर में लोगों ने इस घटना पर चिंता ज़ाहिर की।इस साल मार्च से जब से बीजेपी त्रिपुरा में सत्ता में आई है, तब से लगातार ही माकपा के दफ्तरों और कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं।

त्रिपुरा में चल रही इन घटनाओं पर माकपा ने कहा कि, “ज़िला परिषद के सदस्यों पर कई हमले हुए हैं। बीजेपी के गुंडों ने दक्षिण त्रिपुरा ज़िला परिषद अध्यक्ष हिमांशु रॉय के घर पर हमला किया था। 15 नवंबर को जब रॉय बेलोनिया शहर में ज़िला परिषद की मीटिंग के लिए जा रहे थे तो उनकी गाड़ी और ज़िला परिषद के दूसरे सदस्यों पर हमला किया गया। इस हमले में कुछ पुलिस वाले भी घायल हुए थे।’’ माकपा ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह राज्य में सामान्य राजनीतिक गतिविधियों को चलने दें।

त्रिपुरा काँग्रेस के उपाध्यक्ष तपस डे ने भी इस हमले की निंदा की है और इंडियन एक्सप्रेस में कहा है कि, “यह सभी घटनाएँ दिखाती हैं कि बीजेपी विपक्षी पार्टियों को जगह नहीं देना चाहती है।’’जब से बीजेपी आईपीएफटी (इनडीजीनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा) के साथ साल की शुरुआत में सत्ता में आई है, तब से ही विपक्षी पार्टियों खासकर माकपा के दफ्तरों और कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं। यह त्रिपुरा जैसे शांतिप्रिय राज्य के लिए एक नयी बात है।

पार्टी के सूत्रों के हिसाब से अब तक 1,000 वामपंथी कार्यकर्ताओं, जिसमें 100 महिलायें शामिल हैं, पर हमला हुआ और उन्हें चोटें आयीं। माकपा के 750 दफ्तरों को या तो जाला दिया गया है या उन पर हमला हुआ है। पार्टी के 2,000 समर्थकों के घरों पर भी हमला हुआ है।

 अगस्त में माकपा ने कहा कि उसके कार्यकर्ता जब केरल में बाढ़ पीड़ितों के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे तो उन पर तीन जगहों पर हमला हुआ। हैरानी की बात यह है कि ये हमला पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हुए।

पार्टी ने कहा “पार्टी के बड़े नेता और वर्तमान या पूर्व में जनता के प्रतिनिधि रहे बादल चौधरी, सुधन दास, बसुदेब मजूमदार पर भी पुलिस के सामने हमला किया गया।’’ पार्टी ने यह भी कहा कि, “यह हमले और लोकतंत्र विरोधी घटनाएँ त्रिपुरा में बीजेपी राज में आम बात हो गयी हैI यहाँ तक की बाढ़ राहत के इंसानियत के काम पर भी हमला हो रहा है।’’

 एक महीने पहले 40 साल पुराने प्रगतिशील अखबार देशारकथा को भी कमज़ोर आधार पर बंद कर दिया गया था। इस अखबार का प्रभाव इतना था कि यह राज्य का दूसरा सबसे ज़्यादा सर्कुलेशन वाला अखबार था। इसे बंद किया जाने की एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी निंदा की थी।अखबार को दस दिनों के बाद तब शुरू किया गया जब हाई कोर्ट ने इसे बंद करने के आदेश पर रोक लगा दी।

संसद के मॉनसून सत्र में माकपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले)-लिबरेशन और दूसरी वामपंथी पार्टियों ने त्रिपुरा में वामपंथ पर हो रहे हमले के खिलाफ और लोकतंत्र को बचाने के लिए प्रदर्शन किया था।

Tripura
CPI(M)
BJP Govt
RSS

Related Stories

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

पूर्वोत्तर के 40% से अधिक छात्रों को महामारी के दौरान पढ़ाई के लिए गैजेट उपलब्ध नहीं रहा

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    अब साहित्य का दक्षिण टोला बनाने की एक कोशिश हो रही है: जयप्रकाश कर्दम
    13 Feb 2022
    इतवार विशेष: दलित साहित्य और दलित लेखकों के साथ भेदभाव हो रहा है जैसे गांव में होता है न, दलित बस्ती दक्षिण टोला। दलित साहित्य को भी यह मान लीजिए कि यह एक दक्षिण टोला है। इस तरह वे लोग दलित साहित्य…
  • Saharanpur
    शंभूनाथ शुक्ल
    यूपी चुनाव 2022: शांति का प्रहरी बनता रहा है सहारनपुर
    13 Feb 2022
    बीजेपी की असली परीक्षा दूसरे चरण में हैं, जहां सोमवार, 14 फरवरी को वोट पड़ेंगे। दूसरे चरण में वोटिंग सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूँ, शाहजहांपुर ज़िलों की विधानसभा…
  • Uttarakhand
    कृष्ण सिंह
    चुनाव 2022: उत्तराखंड में दलितों के मुद्दे हाशिये पर क्यों रहते हैं?
    13 Feb 2022
    अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी दलित समाज के अस्तित्व से जुड़े सवाल कभी भी मुख्यधारा के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रश्न नहीं रहे हैं। पहाड़ी जिलों में तो दलितों की स्थिति और भी…
  • Modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: अगर आरएसएस न होता...अगर बीजेपी नहीं होती
    13 Feb 2022
    "...ये तो अंग्रेजों की चापलूसी में लगे थे। कह रहे थे, अभी न जाओ छोड़ कर, कि दिल अभी भरा नहीं"
  • election
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: चुनाव आयोग की साख पर इतना गंभीर सवाल!
    13 Feb 2022
    हर हफ़्ते की कुछ खबरें और उनकी बारिकियाँ बड़ी खबरों के पीछे छूट जाती हैं। वरिष्ठ पत्रकार जैन हफ़्ते की इन्हीं कुछ खबरों के बारे में बता रहे हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License