NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कला
भारत
राजनीति
मधुबनी स्टेशन को सजाने वाले कलाकारों को मिला गिरफ़्तारी वारंट का तोहफा!
कई कलाकारों ने अक्टूबर 2017 में श्रमदान कर मिथिला पेंटिंग द्वारा मधुबनी स्टेशन को सुंदर बनाया था। इसके बाद रेलवे इसमें कई स्पॉन्सर ले आई, लेकिन कलाकारों ने इसपर सवाल उठाए और पैसों का हिसाब मांगा। इसी दौरान प्रदर्शन किए गए और रेल रोकी गई।
मुकुंद झा
10 Apr 2019
madubni penting

देश के सबसे गंदे और बदहाल रेलवे स्टेशन में से एक मधुबनी रेलवे स्टेशन को मिथिला पेंटिग्स से सुसज्जित करने वाले 64 कलाकारों के ख़िलाफ़ रेलवे पुलिस ने  गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इसमें चार के खिलाफ नामजद वारंट है, जबकि 60 अज्ञात लोग इसमें शामिल हैं। चार कलाकार जिन पर केस हुआ उनके नाम हैं- राकेश कुमार झा, सुरेंद्र पासवान, रत्नेश झा, सोनू निशांत। 

ये मामला अभी रेलवे कोर्ट में है। वहीं गिरफ्तारी वारंट की खबर से कलाकारों में भारी गुस्सा  हैं। उनका कहना है की दिन रात एक कर इस कला को जिन्दा रखने की कोशिश कर रहे हैं और इससे ही मधुबनी और बिहार को विश्व पटल पर पहचान दिलाते हैं, लेकिन इस कला और कलाकारों को सम्मान की बजाय जेल की धमकी दी जा रही है। हम कलाकारों को सरकार और नेताओं ने आश्वासन के सिवा कभी कुछ नहीं दिया है। कई कलाकारों ने बताया कि रेलवे ने उन लोगों के साथ धोखा किया है। कलाकारों ने बिना किसी लाभ व प्रलोभन के अपना श्रम दान किया था। लेकिन  एक बार फिर इनकी कला को  शर्मसार न होना पड़ा है। कलाकारों का कहना है कि इस में  रेलवे के कुछ अधिकारी भी संलिप्त है। 

क्या है पूरा मामला?

दरअसल कई कलाकारों ने अक्टूबर 2017 में श्रमदान कर मिथिला पेंटिंग द्वारा मधुबनी स्टेशन को सुंदर बनाया था। कलाकारों के मुताबिक इसके बाद रेलवे ने इसके जरिये कमाई की सोची और कई स्पॉन्सर ले आई, लेकिन कलाकारों ने इसपर सवाल उठाए और पैसों का हिसाब मांगा। इस दौरान कलाकारों ने रेलवे के खिलाफ प्रदर्शन किया और दो बार स्वतंत्रता  सेनानी ट्रेन भी रोकी। इसी मामले में इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई और अब गिरफ़्तारी वारंट जारी हो गया।

दरभंगा के पेंटर रबिंदर दास जो कि खुद एक कलाकार हैं मधुबनी पेंटिंग के प्रशंसक हैं उन्होंने बताया,  “जब कलाकारों के श्रमदान से मिथिला पेंटिंग द्वारा मधुबनी स्टेशन को सुंदर बनाया गया, उस दौरान बात हुई थी कि ये वर्ल्ड का सबसे बड़ा फोक आर्ट होगा, जिसे गिनीज़ बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। असलियत यह है कि रिकॉर्ड, गिनीज़ बुक में दर्ज नहीं हुआ और तो और अंतिम दिनONGC, IOCL, कोल इंडिया लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों का बैनर स्पॉन्सर के रूप में टांग दिया गया। जब इसको लेकर राकेश कुमार झा जिनकी टीम ने यह पूरा प्रोजेक्ट किया था उन्होंने सवाल उठाया कि फ्री के काम में स्पॉन्सर कहां से आया और आया तो फिर वो पैसे कलाकारों में बराबर क्यों नहीं दिए गए? यह बात उठने पर आनन-फानन में सारे बोर्ड हटा दिए गए और कलाकारों पर कमीशन मांगने का आरोप लगा दिया गया। बाद में रेलवे मंत्रालय द्वारा दी गई पुरस्कार राशि का भी बंदरबांट हुआ। इससे नाराज़ होकर इन सभी कलाकारों ने रेलवे के खिलाफ कई दिनों तक प्रदर्शन किया था। इस दौरान भी इनसे मिलने के लिए कोई अधिकारी नहीं आया। इसके बाद रेलवे के अधिकारियों ने इन से बात की और कुछ लोगों को कुछ सौ रुपये भी दिये तो इन्हें लगा कि मामला खत्म हो गया लेकिन एक सप्ताह पहले अचानक जब इन कलाकारों के घर पुलिस ने दबिश दी तब इन्हें पता चला कि इनके खिलाफ वारंट जारी हुआ है।

हमने इस मामले में राकेश कुमार झा से फोन पर बात की जो इस पूरे आंदोलन के अगुआ लोगों में से एक थे, इनके खिलाफ भी वारंट जारी हुआ है। राकेश की टीम की बदौलत ही मधुबनी रेलवे स्टेशन स्वच्छता रैंकिंग में दूसरे नंबर पर आया था।  इससे पहले  इस स्टेशन की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं थी।

इसे भी पढ़े :-मिथिला पेंटिंग : कला को चाहने वाले बहुत, कलाकारों को सराहने वाला कोई नहीं

राकेश ने बताया कि 2 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2017 के बीच उन्होंने कई अन्य कलाकार के साथ मिलकर मधुबनी स्टेशन के साथ मधुबनी शहर की सरकारी इमारतों को मिथिला पेंटिंग से सजाया था। इसके लिए उन लोगों ने भारतीय रेलवे से कोई पैसे नहीं लिए क्योंकि उन्हें बताया गया था कि उनकी परंपरागत पेंटिंग को गिनिज़ बुक में दर्ज कराया जाएगा जिससे वो और उनके साथी बहुत उत्साहित थे, परन्तु ऐसा नहीं हुआ।

बाद में जुलाई 2018 को राकेश को मालूम हुआ कि कई बड़ी कम्पनियों द्वारा रेलवे स्टेशन पर की गई पेंटिंग्स जो उन्होंने मुफ़्त में बनाई थीं,  उनको स्पॉन्सर किया गया है, मतलब जो काम रेलवे ने फ्री में इन लोगों से करवाया है, उसके लिए रेलवे ने खुद पैसे उगाही की। इससे राकेश सहित सभी कलाकारों ने खुद को ठगा हुआ और आहत महसूस किया। नाराज़   कलाकारों ने जुलाई 2018 में विरोध दर्ज कराते हुए दो दिन स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस को कुछ घंटे रोककर रखा था, जिसके बाद रेलवे ने सभी कलाकारों को 250 रुपये प्रति दिन के हिसाब से देने की बात कही।

इसके बाद रेलवे ने इन सभी के खिलाफ रेल को रोकने के लिए कार्रवाई की है। राकेश के मुताबिक  जिन कलाकरो ने  मुफ़्त  में मिथिला पेंटिंग को सम्मान दिलाने के लिए काम किया गया था, उसके लिए सम्मान की जगह उन्हें अरेस्ट वारंट मिला। और आज वो इस समन से परेशान हैं।

कलाकारों को इस संबंध में तब खबर हुई जब चार दिन पहले 5 अप्रैल 2019 को इनकी गिरफ्तारी के लिए उनके घरों में छापामारी शुरू हुई। अब ये कलाकार अपने बचाव के लिए घरों से भागे फिर रहे हैं और सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से लोगों को इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील कर रहे हैं। उनके इस अभियान को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भारी सफ़लत भी मिल रही है। राकेश ने हमसे बात करते हुए कहा  कि सोशल मीडिया पर समर्थन की बाढ़ ने विरोधी खेमे में हलचल मचा दी है। लेकिन उन्होंने कहा कि वो अब इस लड़ाई में पीछे नहीं हटने वाले हैं और इस लड़ाई को लड़ेंगे और रेलवे ने जो भ्रष्टाचार किया है उसका खुलासा करेंगे। 

कलकारों की कुछ मांगें हैं जिनका जवाब रेलवे को देना चाहिए, उनके सवाल कुछ इस तरह है-

- सभी कलाकारों को सम्मान मिले जो नहीं मिला रहा है। 

- जब हमसे काम श्रमदान के तहत लिया गया तो बड़े बड़े स्पॉन्सर कहां से आए? इनसे लिए गए पैसे का हिसाब सार्वजनिक किया जाए। 

- सम्मान राशि जो भी थी उसे सभी कलकारों को क्यों नहीं दिया गया?

- रेलवे में भ्रष्टाचार की जाँच हो 

राकेश ने बताया कि मिथिला पेंटिंग्स की इस पूरी कार्य परियोजना की अगुआई भले ही पुरुषों द्वारा की गई लेकिन इसमें 90% महिलाओं का योगदान रहा था, जिन्हें सही मेहनताना और सम्मान देने की जगह भारतीय रेलवे ने गिरफ़्तारी वारंट  जारी किया है। 

उधर, रेलवे के अधिकारियों का कहना है की  रेल रोकना कानूनन अपराध है ऐसे में कार्रवाई होनी ही  थी। क़ानूनी रूप से ये सही भी है लेकिन कलाकारों का कहना है कि रेल रोको आंदोलन कोई पहली बार नहीं हुआ है। बिहार समेत देशभर में कहीं भी किसी भी आंदोलन में सबसे पहले ट्रेन ही रोकी जाती है, ताकि सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जा सके। लेकिन सबके खिलाफ इस तरह गिरफ़्तारी की कार्रवाई नहीं की जाती।

 

 

Madhubani Art
Bihar
mithila painting
indian railways
Mithila Art
United nations
Nitish Kumar
BJP Govt

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'

बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    'समाजवादी पार्टी का सामाजिक गठबंधन भाजपा से ज़्यादा मज़बूत'
    17 Feb 2022
    जिस सामाजिक गठबंधन के साथ भाजपा ने उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से जीत दर्ज़ की थी, वह अब कमज़ोर नज़र आ रहा है। एक बार फिर चुनावी माहौल गर्म है और दोनों भाजपा और सपा अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में…
  • pottery business
    सतीश भारतीय
    बद से बदतर होता जा रहा है चीनी मिट्टी के बर्तनों का कारोबार
    17 Feb 2022
    कोरोना संकट में 82 फ़ीसदी लघु कारोबारों का कामकाज धाराशाही हो गया है और 80 फ़ीसदी छोटी इकाइयां पूंजी की भयानक कमीं का शिकार है।
  • unemployment
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    उत्तर प्रदेश: हिजाब मामले के बीच, महिलाओं की बेरोज़गारी का रिपोर्ट कार्ड क्या कहता है?
    17 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में तकरीबन 98% महिलाएं कामकाज की दुनिया से बाहर हैं।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    लोगों के बीच भाजपा के लिए इतना गुस्सा कि भाजपा के 25 नेताओं को मिली केंद्रीय सुरक्षा
    17 Feb 2022
    जिन्हें जनप्रतिनिधि बनना है, वह जनता से इतने डर रहे हैं कि उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा ले ली है।
  • unemployment
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: डबल इंजन सरकार ने‘ हिजाब’ की जगह ‘जॉब’ को क्यों नहीं बनाया चुनावी मुद्दा?
    17 Feb 2022
    ''यूपी चुनाव में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है, लेकिन दुर्भाग्य देखिए पूर्वांचल के युवा ''जॉब” की डिमांड कर रहे हैं तो भाजपा नेता ''हिजाब” में उलझा रहे हैं। नौकरी के मुद्दे पर मोदी-योगी की चुप्पी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License